Full chapter text
समस्या
आधुनिक सत्ता केवल कानून, दण्ड आ निषेधद्वारा काम नहि करैत; ओ समय-सारिणी, स्थान-विभाजन, प्रशिक्षण, निरीक्षण, अभिलेख, परीक्षा, क्रमांकन आ सामान्यीकरणद्वारा शरीर आ व्यवहारकेँ सूक्ष्म रूपेँ आकार दे सकैत अछि। फूको एहि रूपकेँ अनुशासनात्मक सत्ता (अनुशासनात्मक सत्ता (disciplinary power)) कहैत छथि। अनुशासनात्मक सत्ता केर प्रश्न ई नहि जे ‘राजा आदेश दैत छथि की नहि’; प्रश्न ई अछि—व्यक्ति दिनभर कहाँ रहत, कोना बैठत, कतेक समयमे काज करत, कोन मानकसँ मापल जाएत, ककर दृष्टिमे रहत, आ विचलन पर कोन सुधारात्मक प्रतिक्रिया देल जाएत? विद्यालय, सेना, कारखाना, अस्पताल, कारागार आ आधुनिक कार्यालय फूकोक विश्लेषणमे एहन संस्था छथि जतऽ समय, शरीर, कौशल, स्थान आ व्यवहारक सूक्ष्म व्यवस्थापन एकसंग देखल जा सकैत अछि। निगरानी (surveillance) एहि सत्ता केर प्रमुख तकनीक अछि। यदि व्यक्ति लगातार देखल जा रहल अछि वा देखल जा सकबाक सम्भावना मानैत अछि, तऽ बाहरी दण्ड बिना सेहो आत्म-नियमन विकसित भऽ सकैत अछि। सामान्यीकरण (normalization) कानूनसँ अलग प्रकारक मानक बनबैत अछि। कानून पूछैत अछि—अनुमति अछि की निषेध? सामान्यीकरण पूछैत अछि—औसतसँ कतेक दूर? अपेक्षित प्रदर्शनसँ कतेक कम? ‘सामान्य’क रूपरेखा कतेक पूरा? एहि अध्यायक समस्या ई अछि—अनुशासन कखन प्रशिक्षण/समन्वय अछि, कखन दमन? निगरानी कखन सुरक्षा अछि, कखन गोपनीयता-भंग? सामान्यीकरण कखन आवश्यक मानकीकरण, कखन व्यक्ति केर गरिमा नष्ट करयवला पदानुक्रम?
मूल प्रतिपादन
एहि अध्यायक मूल प्रतिपादन ई अछि जे अनुशासनात्मक सत्ता व्यक्ति केर शरीर, समय, गति, आदत, कौशल आ आत्म-निरीक्षणकेँ आकार देबयवला सूक्ष्म सत्ता-रूप अछि। फूको अनुशासनक तीन प्रमुख तकनीक पर बल दैत छथि—पदानुक्रमित निरीक्षण (hierarchical observation), सामान्यीकरणकारी निर्णय (normalizing judgment) आ परीक्षा (examination)। पैनऑप्टिक सिद्धान्त (panopticism) एहि सत्ता केर आदर्श रूपक अछि: निरन्तर वास्तविक निगरानी जरूरी नहि; देखल जा सकबाक सम्भावना व्यक्ति केँ स्वयं अपन व्यवहार नियंत्रित करबाक दिशा दे सकैत अछि। समानान्तर दर्शन अनुशासनक विश्लेषण स्वीकारैत अछि, मुदा स्पष्ट भेद जोड़ैत अछि—समन्वय/प्रशिक्षण आवश्यक हो सकैत अछि; वैधता लेल गरिमा, आनुपातिकता, पारदर्शिता, आवश्यकता, त्रुटि-सुधार आ अपील अनिवार्य।
प्रमुख तर्क
पहिल तर्क—अनुशासन शरीरकेँ ‘सूक्ष्म राजनीति’क स्तरपर पकड़ैत अछि। आदेश केवल ‘काम करू’ नहि; शरीर कहाँ, कखन, कोन गति, कोन क्रम, कोन मुद्रामे काज करत—ई विवरण महत्वपूर्ण बनैत अछि। दोसर तर्क—अनुशासन उपयोगिता आ आज्ञाकारिता एकसंग बढ़ा सकैत अछि। सैनिक अधिक प्रशिक्षित, विद्यार्थी अधिक मापयोग्य, श्रमिक अधिक समयबद्ध—मुदा एहि दक्षताक संग नियन्त्रण सेहो बढ़ि सकैत अछि। तेसर तर्क—पदानुक्रमित निरीक्षण (hierarchical observation) संस्थागत दृष्टिक व्यवस्था अछि। निरीक्षक एक नहि; शिक्षक, पर्यवेक्षक, प्रबन्धक, अधिकारी आ अभिलेख-प्रणालीक अनेक स्तर मिलि निगरानी-जाल बनबैत अछि। चारिम तर्क—पैनऑप्टिकता (panopticism)क केन्द्रीय प्रभाव वास्तविक निरन्तर दृष्टिसँ अधिक ‘दृश्य होयबाक सम्भावना’ अछि। व्यक्ति कखन देखल जा रहल अछि नहि जानि, स्वयं अपन व्यवहार नियंत्रित करैत अछि। पाँचम तर्क—पैनऑप्टिक सिद्धान्त वास्तु-रूपक होइतहुँ आधुनिक डिजिटल निगरानीपर सीधे समानता नहि। कैमरा, मोबाइल स्थान-आँकड़ा, डिजिटल लॉग आ एल्गोरिदमिक विश्लेषण अलग तकनीकी संरचना छथि; तुलना कार्यगत स्तरपर हो। छठम तर्क—सामान्यीकरणकारी निर्णय (normalizing judgment) केवल अपराध/अनुमति नहि, प्रदर्शनक सूक्ष्म क्रम (rank) बनबैत अछि। ‘औसत’, ‘श्रेष्ठ’, ‘कम’, ‘जोखिमग्रस्त’, ‘सुधारयोग्य’ जकाँ श्रेणी व्यक्ति केर भविष्य प्रभावित करि सकैत अछि। सातम तर्क—परीक्षा (examination) निरीक्षण आ सामान्यीकरणकेँ जोड़ैत अछि। परीक्षा ज्ञान उत्पन्न करैत अछि—अंक, निदान (diagnosis), दक्षता (proficiency), जोखिम (risk)—आ एकहि समय व्यवहार बदलैत अछि। आठम तर्क—दस्तावेजीकरण अनुशासनक स्मृति अछि। परीक्षा/निरीक्षणक परिणाम फाइलमे टिकैत अछि; व्यक्ति ‘मामला (case)’ बनैत अछि। एहि कारण पूर्व प्रदर्शन (past performance) भविष्यक निर्णयपर दीर्घ प्रभाव डालि सकैत अछि। नवम तर्क—अनुशासन बाहरी दण्डकेँ आत्म-नियमनमे बदलि सकैत अछि। ई प्रभाव उत्पादक सेहो हो सकैत अछि—स्वास्थ्य-अभ्यास, अध्ययन-अनुशासन—मुदा अपराधबोध, भय, आत्म-निगरानी आ अनुरूपता (conformity) सेहो बढ़ा सकैत अछि। दसम तर्क—‘सामान्य’ सांख्यिकीय वर्णन हो सकैत अछि, नैतिक आदर्श नहि। औसत शरीर, औसत अंक, औसत व्यवहार = श्रेष्ठ मानव नहि। एगारहम तर्क—अनुशासनात्मक सत्ता केवल राज्यक नहि। विद्यालय, कम्पनी, अस्पताल, खेल-प्रशिक्षण, धार्मिक संस्था, परिवार, डिजिटल मंच—सभ में अलग रूप देखल जा सकैत अछि। बारहम तर्क—अनुशासनक आलोचना मानक-विरोध नहि। विमान-सुरक्षा, शल्य-प्रक्रिया, प्रयोगशाला, दवा-निर्माण आ आपदा-प्रबन्धनमे कठोर मानक जीवनरक्षक हो सकैत अछि। तेरहम तर्क—वैध अनुशासन लेल उद्देश्य-सापेक्षता आवश्यक। जे मापन उद्देश्यसँ असम्बद्ध, जे निगरानी आवश्यकता सँ अधिक, जे डेटा अनिश्चित काल धरि राखल—ओ सत्ता-अति बनि सकैत अछि। चौदहम तर्क—गरिमा-आधारित नैतिकता कहैत अछि: व्यक्ति प्रदर्शन-स्कोरसँ अधिक अछि। खराब परीक्षा, रोग-श्रेणी, अनुशासनिक रिकॉर्ड अथवा जोखिम-अंक व्यक्ति केर नैतिक मूल्य तय नहि करैत।
पूर्वपक्ष
पूर्वपक्षक पहिल रूप कहैत अछि जे फूको अनुशासनक लाभ कम आँकैत छथि। विद्यालय, अस्पताल, सेना आ कारखाना अनुशासन बिना कार्यक्षम नहि रहि सकैत। दोसर पूर्वपक्ष उदारवादी अछि—यदि निगरानी सहमति, कानून आ सुरक्षा हेतु हो, तखन ‘पैनऑप्टिकता (panopticism)’ कहि ओकर आलोचना अतिशयोक्ति हो सकैत अछि। तेसर पूर्वपक्ष वैज्ञानिक अछि—सामान्यीकरण (normalization) बिना चिकित्सा, शिक्षा, गुणवत्ता-नियन्त्रण आ सांख्यिकी असम्भव। विचलन मापन स्वतः दमन नहि। चारिम पूर्वपक्ष सक्रियता (agency) सँ अछि—व्यक्ति केवल अनुशासन (discipline) केर निष्क्रिय उत्पाद नहि; लोग नियम समझैत, अपनबैत, तोड़ैत, मोल-भाव/समायोजन (negotiate) करैत आ प्रतिरोध (resistance) विकसित करैत छथि। पाँचम पूर्वपक्ष भारतीय तुलना सँ अछि—गुरुकुल अनुशासन, आश्रम-नियम, योग-अभ्यास, सैनिक प्रशिक्षण अथवा मठीय नियमकेँ फूकोवादी अनुशासन (Foucauldian discipline) कहब ऐतिहासिक समानता थोपब होयत।
उत्तरपक्ष
पहिल पूर्वपक्षक उत्तर—अनुशासनक उपयोगिता स्वीकारल जाए। आलोचना उद्देश्य नहि हटबैत; सत्ता-विषमता (power asymmetry), अति-निगरानी (excess surveillance), अनुचित सामान्यीकरणकारी निर्णय (unfair normalizing judgment) आ अपरिवर्तनीय लेबलिंग (irreversible labeling) जाँचैत अछि। दोसर पूर्वपक्षक उत्तर—सहमति पर्याप्त नहि, विशेषतः असममित संस्था (asymmetric institution) मे। वास्तविक विकल्प, जानकारी, गोपनीयता, सीमित उद्देश्य आ स्वतंत्र स्वतंत्र पर्यवेक्षण (oversight) आवश्यक। तेसर पूर्वपक्षक उत्तर—सामान्यीकरण तकनीकी आवश्यकता हो सकैत अछि; समस्या तखन जे सांख्यिकीय मानक (सांख्यिकीय मानक (statistical norm)) केँ नैतिक मानक (moral norm), निदान (diagnosis) केँ पहिचान (identity), अंक (score) केँ सम्पूर्ण व्यक्ति (whole person) बनाओल जाए। चारिम पूर्वपक्षक उत्तर—agency स्वीकारल जाए। फूकोक सत्ता-सम्बन्ध (power relation) प्रतिरोध (resistance) सम्भव मानैत अछि; समानान्तर दर्शन व्यक्तिक सक्रियता, सामूहिक कार्रवाई (collective action) आ संस्थागत सुधार (institutional reform) केँ स्पष्ट रूपेँ जोड़ैत अछि। पाँचम पूर्वपक्षक उत्तर—भारतीय अभ्यास अपन इतिहास/उद्देश्य सँ पढ़ल जाए। तुलना ‘शरीर-प्रशिक्षण’, ‘समय-विन्यास’, ‘प्राधिकार’, ‘आत्म-अनुशासन’ जकाँ समस्या-स्तरपर सीमित रहय।
भारतीय संवाद
भारतीय दार्शनिक परम्परामे आत्म-अनुशासनक अनेक मॉडल छथि—योग, बौद्ध विनय, जैन व्रत, आश्रमीय नियम, शैक्षिक अनुशासन। एहि सभक लक्ष्य फूकोक आधुनिक अनुशासनात्मक संस्था (disciplinary institution) सँ भिन्न अछि; ऐतिहासिक समानता नहि। योगसूत्रक यम–नियम आत्म-प्रशिक्षणक नैतिक–आध्यात्मिक अनुशासन अछि; ओकरा पैनऑप्टिकता (panopticism) कहब श्रेणी-दोष। तथापि शरीर/आदत/समयक पद्धतिगत प्रशिक्षण पर तुलना सम्भव। बौद्ध विनय सामुदायिक नियम, आचार, अपराध-वर्गीकरण आ प्रायश्चित्तक विस्तृत व्यवस्था दैत अछि। आधुनिक अनुशासनात्मक सत्ता (disciplinary power) संग समस्या-साम्य हो सकैत अछि; बौद्ध मुक्ति-सन्दर्भ अलग। जैन व्रत/संयम शरीर आ इच्छाक अनुशासनक धार्मिक रूप अछि। स्वैच्छिक तपस्या आ संस्थागत निगरानीक भेद स्पष्ट राखबाक चाही। अर्थशास्त्र राजकीय निरीक्षण, दण्ड, गुप्तचर आ प्रशासनिक निगरानीक ऐतिहासिक स्रोत अछि; आधुनिक पैनऑप्टिक समाज (panoptic society) केर पूर्वरूप नहि। न्याय/मीमांसा ज्ञानक वैधता जाँचैत अछि; फूको अनुशासनात्मक संस्थामे ज्ञान उत्पादनक सत्ता-शर्त खोलैत छथि। दुनू प्रश्न जोड़ल जा सकैत अछि—अंक/निदान (diagnosis) सत्य कतेक? आ संस्था ओकरा केना प्रयोग करैत? भारतीय संवादक निष्कर्ष—आत्म-अनुशासन, संस्थागत अनुशासन आ दमनात्मक नियन्त्रण एकहि श्रेणी नहि। उद्देश्य, स्वैच्छिकता, प्राधिकार, प्रमाण, परिणाम आ अपील अलग जाँचू।
मिथिलाक समानान्तर दृष्टि
मिथिलाक पारम्परिक पाठशाला, पाण्डित्य-प्रशिक्षण, शास्त्रार्थ, अनुष्ठानिक अनुशासन, औपनिवेशिक विद्यालय आ आधुनिक परीक्षा-प्रणाली अलग इतिहास रखैत छथि। एकहि ‘अनुशासनात्मक परम्परा (disciplinary tradition)’ मे समेटब गलत। आधुनिक विद्यालयी परीक्षा मैथिलीभाषी विद्यार्थी केर भाषा/मानक/सामाजिक पृष्ठभूमि अनुसार असमान प्रभाव (unequal effect) दे सकैत अछि। अंकक वैधता (validity) आ परीक्षा-भाषा (test language) जाँचबाक चाही। भाषा-मानकीकरण शिक्षण लेल उपयोगी अनुशासन दैत अछि; मुदा क्षेत्र-विशिष्ट रूप (region-specific form) केँ ‘गलत’ कहि कलंकित (stigmatize) करब सामान्यीकरणक दमनकारी रूप बनि सकैत अछि। पंजी, प्रमाणपत्र, परीक्षा-परिणाम, नियुक्ति-अभिलेख, अकादमिक पदवी सामाजिक प्रतिष्ठाक दस्तावेजी अनुशासन (documentary discipline) बनि सकैत अछि। दस्तावेज जरूरी, मुदा व्यक्ति केर सम्पूर्ण मूल्य नहि। विदेह जकाँ डिजिटल प्रकाशन अनुशासनक सकारात्मक उदाहरण बनि सकैत अछि—सम्पादकीय मानक, अधितथ्य (metadata), अभिगम्यता (accessibility), उद्धरण (citation), अभिलेख-संगति (archive consistency)—शर्त ई कि पारदर्शी नियम आ संशोधन सम्भव हो। डिजिटल मंचपर पृष्ठ-दर्शन (page view), डाउनलोड-संख्या (download count), खोज-क्रम (search rank), उद्धरण-संख्या (citation count) जकाँ संख्या दृश्यता (visibility) प्रभावित करैत अछि; लोकप्रियता = गुणवत्ता नहि। समानान्तर दर्शन मैथिली बौद्धिक जीवन लेल सूत्र दैत अछि—मानक बनाउ, मुदा मानकक कारण लिखू; मूल्यांकन करू, मुदा अपील दिअ; अभिलेख राखू, मुदा व्यक्ति केँ फाइलमे कैद नहि करू। आत्मसमीक्षा—एहि पुस्तकक अध्याय-संरचना, शब्दावली, पृष्ठ-मानक स्वयं अनुशासन अछि; उपयोगी तखन जे विचार स्पष्ट करय, बाधक तखन जे नूतन तर्ककेँ केवल प्रारूप खातिर दबा दे।
समकालीन प्रयोग
कार्यस्थल निगरानीमे कुंजी-दबाव अभिलेख (keystroke), स्क्रीन-कैप्चर (screen capture), स्थान-अभिलेख (location log), उत्पादकता-अंक (productivity score) जकाँ उपकरण अनुशासनात्मक दृश्यता (visibility) बढ़बैत अछि। आवश्यकता, आनुपातिकता (proportionality), कर्मचारी-सूचना (employee notice), आँकड़ा-संग्रह-अवधि (data retention) आ अपील (appeal) स्पष्ट रहय। विद्यालयमे परीक्षा-निगरानी सॉफ़्टवेयर (proctoring software) चेहरा, नजर, आवाज वा स्क्रीन-गतिविधि (screen activity) जाँचि सकैत अछि। नकल (cheating) रोकबाक उद्देश्य वैध हो सकैत अछि, मुदा मिथ्या-सकारात्मक (false positive), दिव्यांगता (disability), गोपनीयता (privacy) आ असमान संपर्क-सुविधा (unequal connectivity) जोखिम जाँचल जाए। कृत्रिम बुद्धि (AI) प्रदर्शन-अंकन (performance scoring) प्रणाली व्यक्ति केँ समेकित अंक (composite score) मे घटा सकैत अछि। मॉडल-त्रुटि (model error), प्रशिक्षण-पूर्वाग्रह (training bias), अपारदर्शिता (opacity) आ स्वचालित दण्ड/कार्रवाई (automated sanction) के कारण मानवीय पुनरावलोकन (human review) आवश्यक। चिकित्सामे निरन्तर निगरानी (continuous monitoring) जीवनरक्षक हो सकैत अछि; पहनने योग्य उपकरणक आँकड़ा (wearable data) केँ रोजगार/बीमा अनुशासन (employment/insurance discipline) लेल द्वितीयक उपयोग (secondary use) करब अलग नैतिक प्रश्न (ethical question)। सामाजिक माध्यम अनुशंसा-प्रणाली (recommendation system) ध्यान-अनुशासन (attention discipline) उत्पन्न करि सकैत अछि—सूचना-संकेत (notification), लगातार उपयोग-श्रृंखला (streak), क्रमांकन (ranking) आ संलग्नता-माप (engagement metric) व्यक्ति केर आत्म-निगरानी (self-monitoring) बदलैत अछि। जनसुरक्षा कैमरा-जाल (camera network) अपराध-जाँचमे सहायक हो सकैत अछि; चेहरा-पहिचान (facial recognition) जोडला पर गलत-पहिचान (misidentification), जनसांख्यिक त्रुटि (demographic error), भयजनित मौन-प्रभाव (chilling effect) आ व्यापक निगरानी (mass surveillance) जोखिम बढ़ैत अछि। फिटनेस/स्वास्थ्य ऐप (app) दैनिक कदम, वजन, निद्रा-अंक (sleep score) द्वारा आत्म-अनुशासन (self-discipline) प्रोत्साहित करैत अछि; उपयोगी तखन जे लचीला लक्ष्य (flexible goal) हो, हानिकारक तखन जे सांख्यिकीय मानक (statistical norm) आत्म-मूल्य बनि जाए। सार्वजनिक संस्थामे समानान्तर लेखापरीक्षण (audit) पूछत—उद्देश्य की? कम हस्तक्षेपकारी विकल्प अछि? डेटा कतेक? कतेक काल? त्रुटि-हार की? ककरा अपील? मानव निर्णय कहाँ?
अध्याय-निष्कर्ष
फूकोक अनुशासनात्मक सत्ता शरीर, समय, स्थान, व्यवहार आ आत्म-निरीक्षणक सूक्ष्म व्यवस्थापन द्वारा काम करैत अछि। पदानुक्रमित निरीक्षण, सामान्यीकरणकारी निर्णय आ परीक्षा आधुनिक अनुशासनक तीन केन्द्रीय तकनीक छथि; पैनऑप्टिकता दृश्यताक सम्भावना द्वारा आत्म-नियमनक रूपक दैत अछि। अनुशासन स्वतः दमन नहि। प्रशिक्षण, सुरक्षा, चिकित्सा, शिक्षा आ गुणवत्ता लेल मानक आवश्यक हो सकैत अछि; समस्या अति-निगरानी, अनुचित सामान्यीकरण, अपीलहीन वर्गीकरण आ व्यक्ति केँ स्कोर/फाइलमे घटाबयब अछि। सांख्यिकीय सामान्यता नैतिक श्रेष्ठता नहि; विचलन नैतिक हीनता नहि। गरिमा-आधारित नैतिकता एहि भेदकेँ मूलभूत मानैत अछि। समानान्तर दर्शन वैध अनुशासन लेल छह कसौटी दैत अछि—आवश्यकता, आनुपातिकता, पारदर्शिता, प्रमाणिकता, अपील, गरिमा। अध्यायक अन्तिम सूत्र—‘अनुशासन उपयोगी हो सकैत अछि; निगरानी सीमित हो; सामान्यीकरण वर्णन धरि रहय; व्यक्ति केर गरिमा कोनो स्कोर, रिकॉर्ड वा औसतसँ कम नहि।’
अध्याय-ग्रन्थसूची
• मिशेल फूको — ‘अनुशासन आ दण्ड: कारागारक जन्म’ (Discipline and Punish: The Birth of the Prison)। • मिशेल फूको — ‘सत्ता/ज्ञान’ (Power/Knowledge), चयनित साक्षात्कार आ लेख। • मिशेल फूको — ‘कामुकताक इतिहास, खण्ड 1: ज्ञानक इच्छा’ (The History of Sexuality, Volume 1: The Will to Knowledge)। • जेरेमी बेन्थम — ‘पैनऑप्टिकन’ (Panopticon), फूकोक स्थापत्य-सन्दर्भ लेल। • गैरी गटिंग — ‘मिशेल फूको: अति संक्षिप्त परिचय’ (Foucault: A Very Short Introduction)। • ह्यूबर्ट ड्रेफस आ पॉल राबिनो — ‘मिशेल फूको: संरचनावाद आ व्याख्याशास्त्रक पार’ (Michel Foucault: Beyond Structuralism and Hermeneutics)। • सैन्ड्रा ली बार्टकी — ‘स्त्रीत्व आ आधिपत्य’ (Femininity and Domination), लिंगगत अनुशासनक विस्तार लेल। • गौतम — न्यायसूत्र। • गङ्गेश उपाध्याय — तत्त्वचिन्तामणि। • पतञ्जलि — योगसूत्र, आत्म-अनुशासनक भारतीय दार्शनिक संदर्भ लेल। • बौद्ध विनयपिटक, सामुदायिक अनुशासनक ऐतिहासिक संदर्भ लेल। • कौटिल्य — अर्थशास्त्र, प्रशासन/निरीक्षणक ऐतिहासिक भारतीय संदर्भ लेल।