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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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राम शंकर झा"मैथिल
स्मृति शेष : भाग-०३


ओ पोथी कें अपन
हृदय सँ झंपने
डेग पअर डेग झटकैत
उचकैत लचकैत
ओ आगू आगू आ
हअम पाछू पाछू
ओ पोथी कें अपन
हृदय सँ झंपने..!
जामुनबन्नी पाअर
भेल आ
पुरनी पोखरिक महार
हअमरा सँ नहिं
रहल गेल
पुईछ बैसलिएन
कियाक रुष्ट छि?
एतेक तमसाअल
जूनि खिझाउ न
हुनकर डोका सन
लाल लाल आंखि देखि
बुझना गेल जें
स्वयं चंडी माअय
अबतरि भेलीह
कंठ सुखअ लागल
पाईन.. पाईन.....!
बाउ बाउ कि भेल
बड़का काअ जोर सँ
हिलवैत डोलवैत
चौकी तअर सँ
फूलही लौटा लय
एतह पाईन अछि
मुदा ई प्यास छल.!
कि स्मृति शेष..
ओ पोथी कें अपन...!
बड़का का माथा फुकैत
हनुमान चलिसा कें पाठ
आ हम फेर
ओंघाईत स्मृति आलिंगन
गेरूआ कें छाती लगा
ओ पोथी कें छाती लगौने
बजलिह आन्हां तअ
आन्हां तअ आन्हां...
ओ दांत पअर दांत बैसोने
आन्हां पुरुख छि
पुरुख कें ई समाज
आइ धरि कन्याक जीवन
किछु बुझलकै
हअम कन्या छी
किछु दिनक बाअद
लोक हमर नाआम
सँ नहिं पहिचान
कहता इ ई
नारी छी मौगी छी
सब किछु हअमरे
हअम साहस कए
पुछलिअन भेल कि
आन्हां तअ ऐना
पूछि रहल छि जेना
जेना कि आन्हां खुरपी
पिजबैत होय आ गामक
गामक लोक वेद
हअर पालो लाए अहुछिया
ओ पोथी कें अपन...!
ओ बजलिह हअमर
पोथी मे मयूर छल ओकर
कि ओकर..
ओ चान सन मुहं कें निचां करैत
पैरक अंगूठा सँ जमीन
खोधियाबैत बजलिह
मयूरक बिचला डंटी पअर
अन्हाँक हाथक लिखल
कि लिखल....?
ओ बजलिह हअमर नाअम
इस्कूल मे सब सङ्गी पूछअ
लगलिह कतेक जतन सँ
ई लिखल गेल अछि नाअम
मुदा ई मयूर हअमरा
पोथी मे छल
अहाँक पोथी मे केना
ओ बजलिह ठक-ठकहरबा
सँ पैइर पाबि सकैत छी मुदा
मुदा आन्हां सँ....
ओ पोथी कें अपन...!
हम बड़-बड़ाएत
बड़का का हिलवैत
बाउ बाउ कोन पोथी
कोन पोथी..
अन्हाँक पोथी तअ
धेनहारी मे राखल अछि
आंखि फुजल पोथी
धेनहारी सँ टुकुर टुकुर
आ हम विस्मित भेल
पोथी कें टुकुर टुकुर
हअमरा सङ्ग हअमर
स्मृति शेष... स्मृति शेष....!
-राम शंकर झा"मैथिल", उघरा, दरभंगा, Mo -7970778787

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