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GT_PT CRITICISM · G07

तत्त्वचिन्तामणि (गंगेश) [मूल संस्कृत सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर]

आरम्भ भूलसँ किएक?

विस्तृत समालोचनात्मक विवरण

आरम्भक शुक्ति-रजत उदाहरण अमूर्त प्रश्नकेँ ठोस बनबैत अछि: गलत पहिचान बुझबाक लेल प्रत्यक्ष, स्मृति आ निर्णयक सम्बन्ध समझबाक पड़ैत अछि। प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान आ शब्द-ज्ञानक विन्यास एहि जटिलतामे प्रवेशक बाट दैत अछि। एतय भ्रम आकस्मिक विफलता नहि; साधारण अनुभवमे एक संग चलैत क्रियासभकेँ अलग करबाक साधन अछि।

शिक्षण-संकट ई अछि जे पैघ ग्रन्थमे एहि भेदसभकेँ लगातार उपलब्ध राखल जाए। आरम्भिक उदाहरणमे सहज बुझाएल पद आगाँ अधिक संकीर्ण पारिभाषिक अर्थ लऽ सकैत अछि। पाठक एकहि भेदकेँ उदाहरण आ औपचारिक चर्चामे खोजथि; English व्याख्याकेँ सहायता मानथि, तर्कक स्थानापन्न नहि। ई चुनल संगठन आ व्याख्याक मूल्यांकन अछि, संस्कृत आलोचनात्मक संस्करणसँ पूर्ण सत्यापन नहि।

शोध-प्रश्न

जँ देखल वस्तु आ स्मरणमे आएल वस्तु दुनू परिचित हो, तँ सिद्धान्तकेँ कोन-कोन क्रिया अलग करबाक पड़त?

स्रोत-पोथी आ प्रमाण

GT_PT_Criticism.pdf ↗

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