प्रीति कारण सेतु बान्हल · सम्पादकीय रूपरेखा
Ashish Anchinhaar · pp. 10–26
अनचिन्हार एहि खण्डक तीन विभाग, पुरान आ नव लिखाओल सामग्रीक मिश्रण, आ लोकगीत-आधारित संरचनाक व्याख्या करैत छथि। संयुक्त सम्पादनसँ जुड़ल काजमे, जतेक ठाम लेखसभमे नाम छुटल अछि, ओ नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झाक योगदान पहिचानबाक आग्रह करैत छथि। ओ एहन विषय सेहो गनबैत छथि जिनकर मूल्यांकन एखन बाँकी अछि आ सुधारक स्वागत करैत छथि। सम्पादकीय दृष्टि, नाम-लेखनक भिन्नता आ जोड़ल सन्दर्भक चर्चा ई स्पष्ट करैत अछि जे ई खास संग्रह कोना बनाओल गेल।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 10–26 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · सम्पादकीय रूपरेखा
Ashish Anchinhaar · pp. 27–37
ई क्रमांकित प्रस्तुति प्रीति ठाकुरक चित्रकथा आ गजेन्द्र ठाकुरक डिजिटल, अभिलेखीय, भाषिक आ प्रकाशकीय काजपर सम्पादकक विवरण एकठाम करैत अछि। ई लिप्यन्तरण-तकनीककेँ प्रत्येक लिपिक विशेषज्ञतासँ अलग करैत अछि आ विकिपीडियाकेँ सहयोगी परियोजनाक रूपमे वर्णित करैत अछि। अनचिन्हारक वेब-पत्रकारिताक इतिहाससँ लेल एहि सूचीमे अनेक प्राथमिकता-दावा अछि, मुदा संगहि दस्तावेजी सुधारक निमन्त्रण सेहो अछि। तेँ एकरा स्वतंत्र रूपसँ सत्यापित कालक्रम नहि, सम्पादकीय सन्दर्भ-ढाँचा मानि पढ़बाक चाही।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 27–37 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Siyaram Jha ‘Saras’ · pp. 39–79
सियाराम झा ‘सरस’ कृपानन्द ठाकुरकेँ गामक संस्थागत जीवनक माध्यमसँ स्मरण करैत छथि—पढ़ेनाइ, रामबहादुर सार्वजनिक पुस्तकालय, रंगमंच, फुटबॉल आ अभियान्त्रिकी सेवा। व्यक्तिगत संस्मरण देखबैत अछि जे सामूहिक प्रयास शिक्षा आ संस्कृतिक अवसर बढ़ा सकैत अछि, मुदा गुटबाजी ओकरा फेर बिगाड़ि सेहो सकैत अछि। अन्तिम पेशेवर ईमानदारीक प्रसंग एहि स्मृत उदाहरणकेँ गजेन्द्र आ प्रीतिक काजसँ जोड़ैत अछि। ई सहभागी संस्मरण अछि, स्वतंत्र रूपसँ सत्यापित संस्थागत इतिहास नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 39–79 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Dr. Shefalika Verma · pp. 81–82
डा. शेफालिका वर्मा प्रीति ठाकुरक चित्रकथाक प्रशंसाकेँ साहित्यिक समालोचनामे स्त्रीक उपेक्षाक व्यापक प्रश्नसँ जोड़ैत छथि। ओ स्मृत लोककथाकेँ संक्षिप्त, सुगम दृश्य-रूपमे आनबाक गुणकेँ महत्वपूर्ण मानैत आ कोसीक किंवदन्तीसँ एहि काजकेँ आगाँ बढ़ेबाक सुझाव दैत छथि। लेख मूलतः सराहनापरक प्रतिक्रिया आ भविष्यक कथाकथन लेल प्रस्ताव अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 81–82 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Prof. Veena Thakur · pp. 83–89
प्रो. वीणा ठाकुर शब्द, रेखा आ रंगक परस्पर काजकेँ मिथिलाक लोक-संस्कृति संचारित करबाक माध्यम मानैत छथि। संग्रहक नायक आ परम्परासभक चर्चा करैत ओ तर्क दैत छथि जे चित्र-आख्यान मिथिला-चित्रकलाकेँ परिचित संस्कार-केंद्रित विषयसँ आगाँ लऽ जाइत अछि। हुनक विवेचन कलात्मक परिवर्तनकेँ सांस्कृतिक निरन्तरतासँ जोड़ैत आ लोककलाक संरक्षण तथा नवीकरणमे स्त्रीक भूमिकापर बल दैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 83–89 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Dr. Raman Jha · pp. 90–93
डा. रमण झा दुनू संग्रहकेँ मौखिक कथाकथन आ बच्चासँ मैथिली बजबाक घटैत चलनक संग रखि देखैत छथि। ओ शब्द आ चित्रक साझा कथात्मक काजपर बल दैत छथि, जाहिसँ परिचित लोक-पात्र किशोर पाठकक समक्ष दृश्य रूपमे उपस्थित होइत अछि। हुनक प्रशंसा सहज भाषा आ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सांस्कृतिक संचरणपर टिकल अछि; सम्पादकीय टिप्पणी लेखक बादमे ‘पारिजात मञ्जरी’मे एहि लेखक समावेशक सूचना दैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 90–93 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Shiv Kumar Jha ‘Tillu’ · pp. 93–98
शिव कुमार झा ‘टिल्लू’ अलग-अलग कथाक बाल-आकर्षण आ मिथिलाक जातीय तथा क्षेत्रीय विविधताक प्रस्तुति देखैत छथि। ओ किंवदन्तीक कल्पनात्मक बलकेँ ऐतिहासिक सत्यापनसँ अलग करैत, सरल भाषा आ दृश्य प्रस्तुति सराहैत, आ सिंहक एक चित्रमे स्पष्ट कमजोरी सेहो चिन्हित करैत छथि। एहि तरहें समीक्षा सांस्कृतिक प्रशंसा आ चित्रक व्यवहारिक अवलोकन दुनूकेँ संग रखैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 93–98 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Dharendra Kumar · pp. 99–102
धरेन्द्र कुमार दुनू चित्रकथा-संग्रहकेँ सामुदायिक स्मृतिमे जीवित कथासभक संरक्षणक माध्यम मानैत छथि। ओ दृश्य कथाकथनक तुलना रंगमंचमे रंग, ध्वनि आ प्रकाशक सहायक भूमिकासँ करैत आ एहि बातपर बल दैत छथि जे बच्चा अक्षर चिन्हबासँ पहिनहूँ चित्रसँ अर्थ ग्रहण कऽ सकैत अछि। हुनक मुख्य चिन्ता मैथिली प्रकाशनक कम विकसित चित्रकथा क्षेत्रकेँ समृद्ध करब अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 99–102 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Durganand Mandal · pp. 103–107
दुर्गानन्द मण्डल अँगनाक कथाकथनक स्मृतिसँ आरम्भ कऽ संग्रहसभमे प्रेम-कथा, लोकनायक आ सामुदायिक परम्पराक पाछाँ चलैत छथि। ओ विशेष रूपसँ विभिन्न जाति-समुदायक प्रतिनिधित्व आ आन भाषाक पत्रिका पढ़ैत बच्चासभ लेल लोककथा फेर उपलब्ध कराएब सराहैत छथि। हुनक तर्क एहि पोथीकेँ मनोरंजक सांस्कृतिक संरक्षण मानैत अछि; इतिहास आ प्राथमिकतासँ जुड़ल दावासभ योगदानकर्ताक अपन दावा बनल रहैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 103–107 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Shiv Kumar Jha ‘Tillu’ · pp. 108–111
शिव कुमार झा ‘टिल्लू’ प्रश्न करैत छथि जे जँ बच्चा मैथिली बजेनाइ छोड़ि देत तँ संवैधानिक मान्यताक व्यवहारिक अर्थ की रहत। ओ संग्रहक सभसँ पैघ योगदान विभिन्न समुदाय आ क्षेत्र—बेगूसराय आ मुसहर परम्परा सहित—क कथा समेटब मानैत छथि। ओ परम्परागत कथाक पुनर्कथनकेँ नव कथानक गढ़बासँ अलग करैत, सम्पादन, चित्रण आ भाषासँ अनुराग बढ़ेबाक क्षमताक प्रशंसा करैत छथि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 108–111 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Shiv Kumar Jha ‘Tillu’ · pp. 112–116
शिव कुमार झा ‘टिल्लू’ एहि पोथीकेँ बच्चाक आवश्यकता, प्रवास, पर्व-त्योहार आ लोक-स्मृतिक संचरणक दृष्टिसँ परखैत छथि। हुनका अनुसार पुरान कथानक नव चित्र आ बच्चाकेँ रंग भरबाक सहभागितापूर्ण पन्नासँ नवीकृत मूल्य पाबि सकैत अछि। दृश्य-उपचारक प्रशंसाक संग ओ किछु कथात्मक संक्रमण अत्यधिक संक्षिप्त मानैत आ विशेषतः जतय एक कथा अचानक दोसरमे सरकैत अछि, ओतय अधिक विस्तृत कथनक माँग करैत छथि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 112–116 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Ashish Anchinhaar · pp. 117–125
आशीष अनचिन्हार एहन कालक्रम बनबैत छथि जे अनूदित चित्र-पोथी, मौलिक संग्रह आ पत्रिका-प्रकाशनकेँ अलग-अलग देखैत अछि। ओ प्रीति ठाकुरक आरम्भिक अनुवाद आ बादक मौलिक काजकेँ आन रचनाकार आ वेब-प्रकाशनक प्रसारक संग रखैत छथि। हुनक विवेचन एक प्रचलित प्राथमिकता-दावाकेँ चुनौती दैत अछि, मुदा पहिलुक उदाहरणक प्रमाण भेटला पर सुधारक स्पष्ट निमन्त्रण सेहो दैत अछि; प्रकाशन-इतिहासक दावासभ हुनक शोध-स्थिति बनल रहैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 117–125 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
प्रीति ठाकुर; interviewed by Ashish Anchinhaar · pp. 126–129
प्रीति ठाकुर अपन बाल्यकालक पढ़ाइ आ चित्र बनएबाक स्मृति, मैथिली चित्र-पोथी बनएबाक रुचि, आ बच्चाकेँ रुचिकर भाषा-चित्रक महत्व बतबैत छथि। ओ मुद्रित आ डिजिटल पठन, सार्वजनिक मंचसँ दूरी राखबाक अपन पसिन्न, आ घरक भीतर काजक व्यवहारिक बाँट पर चर्चा करैत छथि—पति कखनो विचार दैत आ अक्षरांकनमे सहायता करैत छथि, जखनकि चित्र ओ स्वयं बनबैत छथि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 126–129 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Kalpana Jha · pp. 131–144
कल्पना झा डिजिटल पुस्तकालयकेँ पाठकक व्यवहारिक कठिनाइ—पोथी पाबनाइ, रखबाक जगह, मूल्य चुकौनाइ आ रुचिक सामग्री खोजब—क दृष्टिसँ देखैत छथि। दुर्लभ साहित्य, शोध आ परीक्षा-संसाधनक निःशुल्क पहुँचकेँ ओ महत्वपूर्ण मानैत छथि। हुनक प्रशंसामे ठोस सुधार-सुझाव सेहो अछि: टूटल लिंक, अव्यवस्थित पृष्ठ आ शीर्षक-लेखकक वर्णानुक्रमिक व्यवस्था। एतय पहुँचक अर्थ केवल संग्रह नहि, वास्तवमे खोजि आ पढ़ि सकबाक सुविधा अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 131–144 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Kirtinath Jha · pp. 145–150
कीर्तिनाथ झा धन, वितरण आ सम्पादकीय स्वीकृतिक कठिनाइकेँ मैथिली प्रकाशनक बाधा मानैत छथि। ओ विदेहक नियमित डिजिटल प्रकाशन आ निःशुल्क अभिलेखागारकेँ एहन उत्तरक रूपमे प्रस्तुत करैत छथि जे नव लेखक आ दूर-दूरक पाठककेँ अधिक पहुँच दैत अछि। संगहि प्रारम्भिक सामग्रीक सीमा आ विविधताक अपूर्णताकेँ सेहो स्वीकार करैत छथि। विशेषांक आ परीक्षा-संसाधन मंचक विस्तारक उदाहरण अछि; निष्कर्ष प्रशंसापरक अछि, मुदा विकासकेँ पूर्ण मानि नहि लैत।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 145–150 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Lal Dev Kamat · pp. 151–154
लाल देव कामत गजेन्द्र ठाकुरक काजकेँ मुद्रणसँ इलेक्ट्रॉनिक संचारक संक्रमणक भीतर रखैत छथि। हुनक मुख्य चिन्ता सहयोगी भाषा-परियोजनामे श्रेय कोना दर्ज होए—ओ विकिपीडियाक तैयारी-काजकेँ बादक अनुमोदनसँ अलग करैत आ दस्तावेजी पत्राचारक दिस पाठककेँ पठबैत छथि। लेख आरम्भिक वेबसाइट आ बहुलिपि प्रकाशनसँ एहि तर्ककेँ जोड़ैत अछि। प्राथमिकता आ विवादित श्रेयक दावासभ योगदानकर्ताक दावा अछि, स्वतंत्र निष्कर्ष नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 151–154 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Binayanand Jha · pp. 155–171
विनयानन्द झा संयुक्त रूपसँ सम्पादित पञ्जी-खण्डक स्वागत करैत छथि, मुदा ओकर वंशावली-पाठकेँ आन अभिलेखसँ मिलाकऽ जाँचैत छथि। मन्दार वंशक तुलनामे नामान्तर, छुटल पीढ़ी आ अनिश्चित पहिचान सामने अबैत अछि; प्रस्तावित मेल अभी अस्थायी रहैत अछि। ओ मूलगाम आ शाखाक बेहतर अनुक्रमणिका तथा राजवंशावलीपर आगाँ शोधक आग्रह करैत छथि। लेख देखबैत अछि जे पाण्डुलिपि उपलब्ध करब आ विश्वसनीय वंश-श्रृंखला स्थापित करब दू अलग शोध-काज अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 155–171 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Jagdish Chandra Thakur ‘Anil’ · pp. 172–180
जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ पञ्जीक पारिभाषिक शब्द, अभिलेखक प्रकार, पञ्जीकार आ विवाह-दस्तावेज तथा सामाजिक श्रेणीकरणक सम्बन्धक परिचय दैत छथि। पुरान लिपि पढ़बाक कठिनाइ आ पाठक लेल लिप्यन्तरणक उपयोगितापर ओ जोर दैत छथि। महत्वपूर्ण रूपसँ ओ स्वीकार करैत छथि जे बहुत पन्ना एखन पढ़ल नहि गेल अछि; तेँ ई अपूर्ण पठनक बीचक परिचयात्मक प्रतिक्रिया अछि, सम्पूर्ण मूल्यांकन नहि। ऐतिहासिक नियमक वर्णनकेँ वर्तमान अनुमोदनसँ अलग बुझबाक चाही।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 172–180 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Dr. Kailash Kumar Mishra · pp. 181–232
डा. कैलाश कुमार मिश्र पञ्जीकेँ सामाजिक व्यवस्थाक एहन अभिलेखक रूपमे पढ़ैत छथि जाहिमे बहिष्कारक जाँच आवश्यक अछि। निर्धारित सीमा बाहर विवाहक विवरण सहित दूषण-अभिलेख ‘शुद्धता’क आदर्शीकृत आख्यानकेँ जटिल बनबैत अछि। ओ पाण्डुलिपि-लिप्यन्तरण तुलनाक, तिरहुता-पाठक प्रशिक्षण, स्त्री आ आन समुदायक दिस ध्यान बढ़ेबाक प्रस्ताव दैत छथि। ई दीर्घ विवेचन पुस्तक-प्रतिक्रियाक संग समाजशास्त्रीय शोध-कार्यसूची सेहो अछि; लेखक अतिरंजित वैज्ञानिक दावासँ सावधान करैत आ अपन मूल्यांकनक सीमा मानैत छथि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 181–232 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Bhavanath Jha · pp. 233–242
भवनाथ झा वंशावली-अभिलेखकेँ विवाहक नियामक नियमसँ अलग करैत आ नाजुक सामग्री—बीचमे भेटल आन दस्तावेज सहित—व्यापक रूपसँ बचाएब महत्वपूर्ण मानैत छथि। तइयो उपलब्ध संग्रहकेँ ओ आंशिक मानैत छथि। शीर्षकक अभाव, असंगत दृश्य-क्रम, उलट-पलट पात आ अत्यधिक पैघ फाइल शोधमे बाधा बनैत अछि; ओ स्पष्ट संगठन आ बेहतर स्कैनक सुझाव दैत छथि। लेखक आग्रह अछि जे संरक्षणक बाद दस्तावेजकेँ बुझबा आ खोजबा योग्य बनेबाक सम्पादकीय काज सेहो जरूरी अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 233–242 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Bhimnath Jha · pp. 243–249
भीमनाथ झाक व्यक्तिगत श्रद्धांजलि पोथीक प्रसार आ सजग सहयोगपर केन्द्रित अछि। ओ ‘सहस्रबाधनी’क ब्रेल संस्करण दृष्टिबाधित विद्यार्थीक विद्यालय लऽ जाएब, संस्थासभकेँ पोथी देब, आ दूरभाषपर वंशावलीक चर्चा करबाक स्मृति सुनबैत छथि। परिवार-अभिलेखमे बेटीसभक नाम जोड़बाक उदाहरण मान्यताकेँ ठोस बनबैत अछि। व्यवस्थित साहित्यिक निर्णयसँ बेसी आतिथ्य आ पहुँचक व्यवहारिक कर्म एहि संस्मरणक मूल बल अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 243–249 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Dr. Shiv Kumar Mishra · pp. 250–259
डा. शिव कुमार मिश्र पाण्डुलिपि-अंकीकरणकेँ संरक्षणक व्यवहारिक कठिनाइ—स्वामिसभक अनिच्छा, सीमित सहयोग आ पुरान लिपि पढ़बाक घटैत क्षमता—क संग रखैत छथि। संरक्षण-प्रयासक हुनक विवरण अभिरक्षकक भरोसा अर्जित करबाक आवश्यकता देखबैत अछि। ओ गजेन्द्र ठाकुरक संरक्षण-काज सराहैत, लिपि-प्रशिक्षण आ दीर्घकालीन विद्वत् ध्यानक आग्रह करैत छथि। केवल डिजिटल छवि बचि गेलासँ पाण्डुलिपिक अर्थ भविष्यक पाठक लेल स्वतः उपलब्ध नहि होइत।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 250–259 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Uday Narayan Singh ‘Nachiketa’ · pp. 260–274
उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’ शब्दकोशसभकेँ कोश-विज्ञान आ बदलैत मैथिली भाषिक आवश्यकताक सन्दर्भमे रखैत छथि। पाठक-समूह, प्रविष्टि-चयन, उच्चारण, क्षेत्रीय शब्दावली आ तकनीकी पद केवल शब्दक संख्या बढ़ेबासँ अधिक महत्वपूर्ण प्रश्न बनैत अछि। हुनक चर्चा उपयोगी सन्दर्भ-डिजाइनकेँ बहुभाषिक जीवन आ आधुनिक ज्ञानसँ जोड़ैत अछि। एहि दृष्टिमे शब्दकोश स्पष्ट सम्पादकीय चुनाव आ निरन्तर विकास चाहनिहार औजार अछि, जतय संयुक्त योगदानकर्ताक श्रमक पहचान जरूरी अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 260–274 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Pranav Kumar Jha · pp. 274–282
प्रणव कुमार झा महाविद्यालयक कम्प्यूटर प्रयोगशालामे मैथिली सामग्री भेटबाक आ बादमे अपन लेखन लेल प्रोत्साहन पएबाक अनुभव स्मरण करैत छथि। निःशुल्क पोथी, परीक्षा-सामग्री आ सहज सम्पादकीय सम्पर्क हुनका औपचारिक मैथिली-अध्ययनक पैघ पृष्ठभूमि बिना सेहो सहभागी बनबैत अछि। बच्चाक लेल मैथिलीकेँ सीधे अंग्रेजीसँ जोड़ैत संसाधनकेँ सेहो ओ उपयोगी मानैत छथि। ई पाठक-लेखकक अनुभवपर आधारित विवरण अछि; व्यक्तिगत घनिष्ठता वा मापल परीक्षा-परिणामक दावा नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 274–282 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Lakshman Jha ‘Sagar’ · pp. 283–292
लक्ष्मण झा ‘सागर’ दू प्रकाशन-परिसरक तुलना करैत छथि—मिथिला मिहिरक मुद्रित पाठक-वर्ग आ साहित्यिक संस्कार, तथा विदेहक डिजिटल प्रसार, नियमितता आ अधिक व्यापक लेखक-प्रवेश। ओ जीवित लेखकक विशेषांक, वर्तनीक लचीलापन आ दूरी पार पहुँचपर बल दैत छथि। व्यक्तिगत सम्पर्क आ पोथी-उपहार गजेन्द्र-प्रीतिक प्रति हुनक प्रशंसाकेँ आधार दैत अछि। ई सहभागी ऐतिहासिक दृष्टि अछि; स्रोतमे भेटल असंगत काल-अवधि कथनसँ स्वतंत्र कालक्रम स्थापित नहि कएल गेल अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 283–292 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Shivshankar Srinivas · pp. 293–303
शिवशंकर श्रीनिवास लेखक-केंद्रित पत्रिका-विशेषांकक सर्वेक्षण करैत आ तर्क दैत छथि जे जीवित लेखकक समयमे मूल्यांकन आगाँक लेखनकेँ प्रेरित कऽ सकैत अछि। ओ एहन विशेषांकक आलोचनात्मक स्वतंत्रताकेँ अभिनन्दन-ग्रन्थसँ अलग मानैत आ अपन सर्वेक्षणकेँ स्पष्ट रूपसँ अपन जानकारी धरि सीमित रखैत छथि। जोड़ल सम्पादकीय विवरण विदेहक चयन-पद्धति आ ‘नित नवल’ शृंखलाक चर्चा करैत, सीमित संसाधनक कारण योग्य लेखक छुटि सकबाक बात स्वीकार करैत अछि। सर्वेक्षण आ सम्पादकीय संस्थागत उत्तर अलग-अलग स्वर अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 293–303 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Rabindra Narayan Mishra · pp. 304–309
रवीन्द्र नारायण मिश्र बतबैत छथि जे सम्पादकीय सहायता व्यवहारिक लेखन-कौशल कोना बनल—हस्तलिखित रचना भेजलापर भेटल सॉफ्टवेयर आ उमेश मण्डलक सहयोगसँ ओ डिजिटल रूपमे लिखब-सुधारब सीखलाह। ओ अपन रचनाक धारावाहिक प्रकाशनक उल्लेख करैत आ अभिलेखागारकेँ पाठक-विद्यार्थीक लेल उपयोगी मानैत छथि। मिथिला मिहिरक बन्द भऽ जाएबाक अनुभवसँ तुलना करैत हुनक मूल्यांकन निरन्तरता, प्रकाशनक सहजता आ नव लेखकक उत्साहवर्धनपर केन्द्रित अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 304–309 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Dhanakar Thakur · pp. 310–314
धनाकर ठाकुर नियमित प्रकाशन आ उपयोगी अभिलेखागारक प्रशंसा करैत छथि, मुदा पत्रिकाकेँ एक व्यक्तिसँ पूर्णतः एकरूप मानबाक विरोध करैत छथि। ओ कथानकक अत्यधिक खुलासा, समानान्तर पुरस्कार, चित्र-परिचयक अपर्याप्त कालानुक्रमिक व्यवस्था आ संस्थान-केंद्रित सामग्रीक अनुपातपर प्रश्न उठबैत छथि। संगहि स्वीकार करैत छथि जे विदेहकेँ पूरा विस्तारसँ नहि पढ़ने छथि। ई स्पष्ट असहमतिक संग योग्य समर्थन अछि; अन्तक सम्पादकीय टिप्पणी समालोचनापर विदेहक उत्तरक दिस पाठककेँ पठबैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 310–314 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Dr. Yoganand Jha · pp. 315–326
डा. योगानन्द झा साहित्यिक सृजनकेँ संकटग्रस्त शब्दावली, मौखिक आख्यान आ उपेक्षित लेखनक पुनरुद्धारसँ जोड़ैत छथि। हुनक मुख्य उदाहरण भक्त कवि रामजी चौधरीपर गजेन्द्र ठाकुरक काज अछि: प्रकाशन आ व्याख्याद्वारा उपेक्षित रचना-समूह फेर प्रसारमे अबैत अछि। शीत-बसन्त आ पुरान शब्दक चर्चा एहि तर्ककेँ विस्तार दैत अछि। ओ शोध, पुनर्प्रकाशन आ डिजिटल अभिलेखकेँ संरक्षणक परस्पर सम्बद्ध रूप मानैत छथि जे आगाँक शोधार्थीकेँ बाट देखबैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 315–326 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Uday Narayan Singh ‘Nachiketa’ · pp. 327–331
उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’ सात-खंडीय संग्रहकेँ एकहि लेखकक शोध, कथा, कविता, नाटक आ बाल-साहित्य एकत्र आनबाक प्रयोगक रूपमे पढ़ैत छथि। ओ सांस्कृतिक विस्तार, राजनीतिक टिप्पणी आ कोशकारक तकनीकी व्यक्तित्वसँ अलग सर्जनात्मक स्वर चिन्हित करैत छथि। पोथीकेँ मेटा-पाठ वा आधुनिक महाकाव्यक तरहें पढ़बाक सम्भावना बतबैत, प्रशंसाकेँ पूर्ण निरपेक्ष नहि रखैत छथि—बहुल सामग्रीक भीतर गुणवत्ताक असमानता सेहो देखैत छथि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 327–331 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Ashok · pp. 332–336
अशोक ‘सहस्रबाधनी’ आ ‘सहस्रशीर्ष’ दू उपन्यासक तुलना करैत छथि। पहिल रचना पीढ़ी-दर-पीढ़ी सरकारी सेवाक भीतर ईमानदारी आ भ्रष्टाचारक प्रश्न जाँचैत अछि; दोसर गामक इतिहास, गीत, जातीय आख्यान आ स्थानीय ज्ञानकेँ व्यापक सामाजिक भूगोलमे समेटैत अछि। हुनका दोसरमे मौखिक इतिहासक लेखाजोखा आ पहिलमे संस्थागत कामकाजक निरीक्षण मूल्यवान लगैत अछि। आरम्भिक डिजिटल गतिविधिक चर्चा कथा-विवेचनक सन्दर्भ बनैत अछि, ओकर स्थान नहि लैत।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 332–336 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Arvind Thakur · pp. 336–359
अरविन्द ठाकुर चारि पीढ़ी, दस्तावेजी विस्तार, स्मृति आ उपन्यासक क्षेत्रीय सीमासँ बाहर जाएबाक आकांक्षाक विवेचन करैत छथि। ओ एकर एकरूपता आ पठनीयता सराहैत, मुदा मानैत छथि जे भ्रष्टाचारक व्यापक सार्वजनिक परिणाम व्यक्तिगत हानिक तुलना मे कम विकसित अछि। मैथिली आ अंग्रेजी दुनू संस्करण पढ़लाक बाद ओ अंग्रेजी पाठकेँ अधिक पसिन्न करैत छथि। धूमकेतुक प्रतीकपर हुनक अन्तिम अनिश्चितता प्रशंसासँ प्रश्न बंद नहि करैत, बल्कि वास्तविक व्याख्यात्मक प्रश्न खुला छोड़ैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 336–359 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Rajdeo Mandal · pp. 360–382
राजदेव मण्डल पेशेवर समालोचकक अधिकार दावा कए बिना सजग पाठकक रूपमे संग्रहक विभिन्न विधामे घूमैत छथि। ओ लोककथाक पुनरुद्धार, नाटकक संक्षिप्त संवाद, असमानतापर कथा, उपन्यासक दैनिक भाषा आ बाल-कविताक जिज्ञासा सराहैत छथि। खास उदाहरण हुनक प्रतिक्रियाकेँ सामान्य अभिनन्दनसँ अलग बनबैत अछि। महाकाव्य-सदृश शीर्षक बुझबामे कठिनाइ स्वीकार करैत ओ एहि बातकेँ मूल्यवान मानैत छथि जे भिन्न पाठक एकहि संग्रहमे भिन्न लेखन-रूप पाबि सकैत छथि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 360–382 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Shiv Kumar Jha ‘Tillu’ · pp. 382–412
शिव कुमार झा ‘टिल्लू’क विस्तृत समीक्षा संग्रहक सामाजिक विस्तार आ विशेषतः बाल-विभागक स्वागत करैत अछि, मुदा असमानता सेहो स्पष्ट करैत अछि। ओ किछु अंग्रेजी-उधार शब्द, अनेक कथाक कलात्मकता वा भाव-बल, आ ‘संकर्षण’क मंचीय उपयुक्ततापर प्रश्न करैत छथि। वेबसाइटक तकनीकी सामग्री हुनक समझसँ बाहर रहल आ क्षेत्रीय सर्वेक्षणमे किछु स्थान छुटल से सेहो ओ कहैत छथि। बादक विस्तारित कथाक उल्लेख लेखक तिथिक प्रश्न उठबैत अछि; प्रशंसाक संग ई ठोस आपत्तिसभ सुरक्षित रहबाक चाही।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 382–412 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Professor Premshankar Singh · pp. 412–418
प्रो. प्रेमशंकर सिंह बाल-कविताकेँ जिज्ञासा, पारिवारिक स्नेह, विद्यालय, छुट्टी, खेल आ बचपनक असमान परिस्थितिक माध्यमसँ देखैत छथि। हुनक उदाहरण आनन्दक संग भूख आ बाल-श्रमकेँ सेहो रखैत अछि। ओ एहन लचीला शब्दावलीकेँ पसिन्न करैत छथि जे रोजमर्रा अन्तरराष्ट्रीय शब्द स्वीकार करैत हुए ग्रामीण मैथिली अभिव्यक्तिकेँ नहि हरबैत। बाल-मनोविज्ञानक हुनक कथन चुनल कवितापर साहित्यिक व्याख्या अछि, बच्चासभपर कएल अनुभवजन्य अध्ययन नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 412–418 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Abha Jha · pp. 418–430
आभा झा ‘पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल’केँ सम्पत्ति, विधवापन, जाति, प्रवास, दिव्यांगता आ संस्थागत अन्यायक दृष्टिसँ पढ़ैत छथि। प्रेमचन्दसँ तुलना आ अलग कथाक चर्चा सामाजिक सम्बन्ध उजागर करबाक भिन्न रूप चिन्हित करैत अछि। बौद्धिक विस्तारक प्रशंसाक संग हुनक आपत्ति सेहो अछि: घन तर्क आ शास्त्रीय सन्दर्भ कखनो कथात्मक रुचि आ प्रवाह बाधित करैत अछि। लेखकक अंग्रेजी स्व-अनुवादकेँ ओ मैथिली पाठकसँ बाहर पहुँचेबाक प्रयास मानैत छथि, मुदा एहि पहुँचकेँ रचनाक एकमात्र कसौटी नहि बनबैत।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 418–430 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Acharya Ramanand Mandal · pp. 431–435
आचार्य रामानन्द मण्डल गजेन्द्र ठाकुरक समालोचना, जीवनपरक लेखन आ प्रकाशन-काजकेँ प्रभुत्वशाली साहित्यिक संस्थासँ उपेक्षित लेखकक समर्थनक रूपमे प्रस्तुत करैत छथि। ओ व्यापक समानान्तर रचना-समूहक नाम लैत आ मान्यताकेँ शिक्षा तथा अभिलेखक पहुँचसँ जोड़ैत छथि। जोड़ल सम्पादकीय टिप्पणी विचारधाराकेँ जातीय पहिचानसँ समान मानबाक बातसँ स्पष्ट असहमति जनबैत आ विदेहक जाति तथा मानसिकताक भेद समझबैत अछि। ई असहमति रचनाक ग्रहणक आवश्यक अंश अछि, मेटा देबाक बात नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 431–435 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Ajit Kumar Jha · pp. 436–444
पत्रिका-वितरणक अनुभवसँ अजित कुमार झा तर्क दैत छथि जे पाठकक उपयुक्त पोथी पएबाक कठिनाइ केवल लेखकक प्रशंसासँ हल नहि होइत। ओ निःशुल्क डिजिटल पहुँचक स्वागत करैत, लेखकक रॉयल्टी-हित स्वीकार करैत, आ सशुल्क इलेक्ट्रॉनिक वितरणक प्रस्ताव सेहो दैत छथि। सम्पादकीय उत्तर पहिलुक Kindle प्रयोग आ भाषा-लेबल सम्बन्धी कठिनाइ बतबैत अछि। एहि प्रकार चर्चा पाठक-वर्ग, संरक्षण आ टिकाऊ वितरणक प्रश्न एकठाम अनैत अछि, योगदानकर्ताक प्रस्तावकेँ सम्पादकीय विवरणसँ अलग रखैत।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 436–444 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Mukesh Dutt · pp. 445–448
मुकेश दत्त अपन पिताक पत्रिका-वितरण सम्पर्कसँ भेटल पोथीक स्मृतिसँ आरम्भ कऽ डिजिटल आ अभिलेखीय काजक सर्वेक्षण करैत छथि। पञ्जी संस्करण, लिपि-समर्थन, शब्दकोश आ इंटरनेट-प्रकाशन मुख्य रूपरेखा बनैत अछि। लेख प्रशंसापरक परिचय अछि जे पाठककेँ आशीष अनचिन्हारक वेब-पत्रकारिताक इतिहासक दिस लऽ जाइत अछि; व्यापक प्राथमिकता-दावासभ एहि विवरणक अंश अछि, स्वतंत्र रूपसँ स्थापित मीलक पत्थर नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 445–448 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Ashish Anchinhaar · pp. 449–464
आशीष अनचिन्हार श्रुति प्रकाशनक एहन मॉडल बतबैत छथि जतय लेखक प्रकाशन लेल धन नहि दैत आ कॉपीराइट अपन रखैत छथि। ओ गजेन्द्र ठाकुरक सर्जनात्मक-सम्पादकीय भूमिका आ नागेन्द्र कुमार झाक संसाधन-तकनीकी सहयोगकेँ अलग पहिचानैत, पञ्जी प्रकाशन आ नव लेखकक अवसरपर चर्चा करैत छथि। एक सय शीर्षकक क्रमांकित सूची लेखकेँ प्रकाशकीय अभिलेख सेहो बनबैत अछि। आर्थिक आँकड़ा सम्पादकक रिपोर्ट कएल आँकड़ा बनल रहैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 449–464 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Munnaji, interviewer; Gajendra Thakur, respondent · pp. 465–489
मुन्नाजी साहित्यिक आरम्भ, विधा, सम्पादकीय समावेशन, प्रकाशन-संसाधन आ मान्यता सम्बन्धी प्रश्न पूछैत छथि। गजेन्द्र ठाकुर शोध, शब्दकोश, लिपि-काज आ सर्जनात्मक लेखनकेँ परस्पर सहयोगी क्रिया बतबैत आ संकलित पोथीकेँ परिवारक विविध पाठक लेल सोचल कहैत छथि। ओ सहयोगीसभक श्रेय आ व्यवहारिक सहायताक उल्लेख करैत, बन्द साहित्यिक घेरासँ बाहर प्रकाशनक पक्ष रखैत छथि। ई उत्तरदाता द्वारा अपन कार्य-पद्धतिक व्याख्या अछि; आन लेखकपर विवादास्पद निर्णय स्वतंत्र निष्कर्ष नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 465–489 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · हस्ताक्षरित योगदान
Ashish Anchinhaar, interviewer; Gajendra Thakur, respondent · pp. 490–499
आशीष अनचिन्हारक ई ईमेल-साक्षात्कार पहिल बातचीतकेँ नव पञ्जी आ इंटरनेट-समीक्षाक आलोकमे फेर उठबैत अछि। प्रश्न संस्था, लेखनक परिमाण, समालोचना, सम्पादकीय सहभागिता आ समानान्तर साहित्यिक धारापर केन्द्रित अछि। ठाकुर आयु वा संख्यासँ गुणवत्ता नापबाक विरोध करैत आ काज आ जीवनमे संगतिकेँ महत्वपूर्ण मानैत छथि। अन्तिम आदान-प्रदान एक साहित्यिक आयोजनक वर्गीकरणपर विवाद करैत अछि; ई उत्तरदाताक विवादित विवरण अछि, स्वतंत्र रूपसँ निर्णयित इतिहास नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 490–499 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · सहायक सामग्री
Editorial compilation; no separate byline · pp. 502–523
ई परिशिष्ट जीवनीपरक सन्दर्भ आ मौलिक लेखन, अनुवाद, लिपि-संस्करण, श्रव्य-संसाधन तथा संयुक्त सम्पादनक आधारपर वर्गीकृत ग्रन्थसूची दैत अछि। ई बुझबैत अछि जे समग्र खण्डक भीतरक अलग रचनाकेँ अलग सूची-संख्या किएक भेटि सकैत अछि आ पञ्जी सामग्रीक स्कैनिंग-सूचीकरणमे प्रीतिक योगदानक श्रेय दैत अछि। पारिवारिक आभार आ फोटो-शीर्षक सूचीसभक संग अछि। सार एहि भागक ग्रन्थसूचीगत काज बचबैत अछि, मुदा ऐतिहासिक सूचीकेँ वर्तमान पूर्ण सूची मानि नहि लैत।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 502–523 →प्रीति कारण सेतु बान्हल · सहायक सामग्री
Ashish Anchinhaar (editorial material) · pp. 524–527
समापनक लोकगीत-रूपक दम्पतिक काजकेँ आगाँक पीढ़ी धरि चलबाक कल्पना करैत अछि। तकर बाद जोड़ल योगदानकर्ता-नाम, मुद्रित पाठक लेल लिंकक सीमा, आ भविष्यमे लिंक टूटि सकबाक सम्भावना बुझाओल गेल अछि। सम्पादकक छोट परिचय खण्डक श्रेय-पृष्ठ पूरा करैत अछि। ई पन्ना सम्पादकीय समापन आ श्रेय-पहिचानक मार्गदर्शिका अछि, नव समालोचनात्मक लेख नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 524–527 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · सम्पादकीय रूपरेखा
Ashish Anchinhaar · pp. 11–38
आशीष अनचिन्हार सामवेदीय स्तुतिक माध्यमसँ ‘सेतुशम’क सेतु-रूपक समझबैत आ ओकरा साहित्यिक जीवनक नैतिक बाधासँ जोड़ैत छथि। ओ दोसर खण्डकेँ पहिल खण्डक पूरक बतबैत छथि, जाहिमे अधिकतर अलग योगदानकर्तासँ नव लेख लिखाओल गेल। सात वन्दना प्रस्तुति-संरचना बनबैत अछि। भूमिका एखनहुँ अनछुअल विषय स्वीकार करैत आ सुधारक स्वागत करैत अछि; वैदिक व्याख्या आ साहित्यिक क्षेत्रक विवरण सम्पादकक अपन फ्रेम अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 11–38 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · सम्पादकीय रूपरेखा
Ashish Anchinhaar · pp. 39–54
सम्पादक प्रीति आ गजेन्द्रक काजक सन्दर्भ-सूची दोहरबैत आ विस्तार दैत छथि, जाहिसँ दोसर खण्डकेँ पहिल खण्ड बारम्बार खोले बिना पढ़ल जा सकय। चित्र-पोथी, पञ्जीक पहुँच, बहुलिपि प्रकाशन, शब्दकोश आ सहयोगी भाषा-परियोजना एहि ढाँचाक मुख्य आधार अछि। सूची अनचिन्हारक वेब-पत्रकारिताक इतिहासपर टिकल आ स्पष्ट रूपसँ सुधार लेल खुलल अछि; ‘पहिल’ होएबाक दावासभकेँ एतय स्वतंत्र सत्य मानि नहि लेल गेल अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 39–54 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Munni Kamat · pp. 56–63
मुन्नी कामत तर्क दैत छथि जे बाल-साहित्य लेल भावक सरलता आ बच्चाक दृष्टिमे कल्पनात्मक रूपसँ फेर प्रवेश आवश्यक अछि। चारि पोथीक चर्चा करैत ओ चित्रण आ सांस्कृतिक संचरणक महत्व चिन्हित करैत छथि। ‘पुरुष परीक्षा’क गतिविधि-पोथी हुनक सभसँ ठोस उदाहरण अछि, जतय बच्चा कथा पहिचानैत, शीर्षक-सम्वाद जोड़ैत आ चित्र रंगैत छथि—अर्थात साहित्यिक परम्परा सक्रिय सहभागितासँ जुड़ैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 56–63 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Ira Mallick · pp. 64–70
इरा मल्लिक चित्र-आख्यानकेँ मौखिक कथाकथन, दृश्य-कला आ भाषासँ बच्चाक पहिल भेंटक बीच रखैत छथि। ओ अनुवाद आ मौलिक संग्रह दुनूक सर्वेक्षण करैत, रेखा, रंग आ मिथिला-चित्रकला पद्धतिक उपयोग सराहैत, आ अक्षरज्ञानसँ पहिनेक पहुँचपर बल दैत छथि। लेख एहि पोथीसभकेँ नव पीढ़ी आ क्षेत्रीय संस्कृतिक बीच सेतु मानैत अछि; व्यापक दावासभ मल्लिकक व्याख्या बनल रहैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 64–70 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Kailash Kumar Thakur · pp. 72–118
कैलाश कुमार ठाकुर डिजिटल प्रकाशन, विकिपीडिया, शब्दकोश, पाण्डुलिपि-पहुँच आ बहुलिपि काजक सर्वेक्षण करैत, फेर कहैत छथि जे केवल लिखित डिजिटल संसाधन मैथिलीक भविष्य सुरक्षित नहि कऽ सकैत। ओ podcast, मौखिक इतिहास, video essay आ उपशीर्षक-सहित विद्वत् वार्ताक प्रस्ताव दैत छथि। जोड़ल सम्पादकीय उत्तर एहि चुनौतीक स्वागत करैत, पहिनेसँ चलि रहल श्रव्य-दृश्य काज, अवैतनिक सीमित संसाधन आ स्वतंत्र टोलीसभक साझा जिम्मेवारीक उल्लेख करैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 72–118 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Vikas Vatsnabh · pp. 119–138
विकास वत्सनाभ ऑनलाइन भाषा-जीवनकेँ उपयोगी लिपि, Unicode, तकनीकी शब्दावली आ पर्याप्त खोजयोग्य सामग्रीसँ जोड़ैत छथि। ओ विदेहकेँ पत्रिका, पुस्तकालय आ संसाधन-संकलक तीनू रूपमे देखैत आ शब्दकोश तथा पञ्जी प्रकाशनकेँ सहयोगी काज मानैत छथि। अन्तिम तर्क AI युगक दिस देखैत अछि: मात्र प्रतीकात्मक मान्यतासँ बेसी, दीर्घकालीन डिजिटल उपलब्धताकेँ मैथिलीक आवश्यक आधारभूत संरचना मानल गेल अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 119–138 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Bhairav Lal Das · pp. 139–159
भैरव लाल दास पञ्जीक ऐतिहासिक स्रोत-मूल्यकेँ ओकर सामाजिक प्रशासनसँ जुड़ल श्रेणीकरण आ दुरुपयोगसँ अलग करैत छथि। ओ प्रकाशित अभिलेखक संयुक्त सम्पादकसभकेँ श्रेय दैत आ अविश्वास, घटैत आजीविका आ बिगड़ैत पाण्डुलिपिक कारण कठिन भेल व्यवहारिक संरक्षण-प्रयासक वर्णन करैत छथि। ओ आगाँ संरक्षण-प्रकाशनक आग्रह करैत, संगहि प्रवास आ बदलैत विवाह-प्रथा पञ्जीक पुरान सामाजिक भूमिकाकेँ कोना बदलैत अछि से विचार करैत छथि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 139–159 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Poonam Jha ‘Sudha’ · pp. 160–171
पूनम झा ‘सुधा’ अपन तर्ककेँ भाषिक, लेखकगत आ विषयगत विविधताक आधारपर व्यवस्थित करैत छथि। हुनका अनुसार क्षेत्रीय भाषा-रूप, नव पीढ़ीक स्वर आ विविध विषयक स्वीकार संकीर्ण मानक तथा केंद्रीकृत साहित्यिक अधिकारकेँ चुनौती दैत अछि। डिजिटल पहुँच ग्रामीण-शहरी पाठक, पीढ़ी आ प्रवासी समाजक बीच सेतु बनैत अछि; एहि खुलापनक विरोध सेहो हुनक विवेचनमे बहसक अंश बनि उपस्थित अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 160–171 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Dr. Shiv Kumar Prasad · pp. 172–218
डा. शिव कुमार प्रसाद लेखक, प्रकाशन आ उद्धृत उदाहरणक विस्तृत सर्वेक्षणसँ विविधताक अपन तर्ककेँ आधार दैत छथि। जगदीश प्रसाद मण्डल, उमेश पासवान, राजदेव मण्डल, बेचन ठाकुर, मुन्नी कामत आ आन लेखकक चर्चासँ ग्रामीण जीवन-अनुभव कविता, कथा, नाटक आ समालोचनासँ जुड़ैत अछि। ओ समानान्तर साहित्यिक धाराकेँ एहि परिवर्तनक रूपमे देखैत छथि जे के बाजि सकैत अछि आ कोन अनुभव दीर्घ ध्यान पबैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 172–218 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Kalpana Jha · pp. 219–246
कल्पना झा सम्पादनकेँ केवल चयन नहि, मार्गदर्शन मानैत छथि। अपन आरम्भ आ आन लेखकक अनुभवसँ ओ उत्साहवर्धन, सुझाओल पठन, समालोचना तथा विधा-शिल्प सम्बन्धी सहायताक चर्चा करैत छथि। हुनक मुख्य आग्रह ई अछि जे मार्गदर्शन लेखकक अलग स्वरकेँ मजबूत करय, मेटाबय नहि; संगहि नव योगदानकर्ताक पीढ़ी बनाबय आ ओकर क्षमता पाठकक अपेक्षासँ जोड़य।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 219–246 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Munnaji · pp. 247–251
मुन्नाजी एहि दावाक विरोध करैत छथि जे मैथिलीमे सामाजिक रूपसँ उपेक्षित समुदायसँ लेखक कम छथि। हुनक तर्क अछि जे प्रकाशनक अवसर आ निरन्तर प्रोत्साहन पहिनेसँ अदृश्य प्रतिभाकेँ दृश्य बनबैत अछि; जगदीश प्रसाद मण्डल आ बादक योगदानकर्ता उदाहरण बनैत छथि। लेख विदेहक महत्व एक टिकाऊ वैकल्पिक साहित्यिक धारा बनेबामे देखैत अछि; साहित्यिक द्वारपालनक विवरण योगदानकर्ताक विवादात्मक व्याख्या अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 247–251 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Dr. Dhanakar Thakur · pp. 252–261
डा. धनाकर ठाकुर विदेहकेँ पाँच क्षेत्रमे परखैत छथि—भाषा, लेखक, विषय-विधा, पुरस्कार आ विशेषांक। ओ एक विचारधारामे सीमित नहि रहबाक खुलापन सराहैत, असमान वर्तनी स्वीकार करैत, आ समानान्तर पुरस्कारक नामकरणसँ असहमति जनबैत छथि। परिणाम एक योग्य, मुदा शर्तसहित समर्थन अछि: सहभागिता बढ़ेनाइ जरूरी अछि, तइयो पत्रिकाक सार्वजनिक दायित्व निरन्तर चलैत आ समालोचना लेल खुलल रहैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 252–261 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Hitnath Jha · pp. 262–277
हितनाथ झा ‘मैथिली समीक्षाशास्त्र’केँ व्यक्तिक प्रशंसा नहि, विधागत मूल्यांकनक मार्गदर्शिका रूपमे पढ़ैत छथि। ओ लघु आख्यान-रूपक भेद, गजल छन्दक माँग, आन काव्य-विधा, अनुवाद आ बाल-साहित्यपर चर्चा करैत छथि। समीक्षा शिल्प आ अर्थक मूल्यांकनकेँ समालोचकक विचारधारा थोपने बिना करबाक आग्रह करैत आ पोथीकेँ लेखक, शिक्षक, विद्यार्थी आ शोधार्थी लेल उपयोगी मानैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 262–277 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Praveen Kumar Jha · pp. 278–287
प्रवीण कुमार झा सर्जनात्मक लेखन, पञ्जी-सम्पादन, कोश-निर्माण, लिपि-काज आ डिजिटल प्रकाशनकेँ जोड़ैत जीवनीपरक-ग्रन्थसूचीगत परिचय दैत छथि। हुनका ई गतिविधिसभ परम्परागत विद्वत्ता आ आधुनिक पहुँचक बीच सम्बन्ध बनबैत देखाइत अछि। जोड़ल सम्पादकीय टिप्पणी संस्थागत सदस्यता आ वेबसाइट-काज स्पष्ट करैत अछि; सार योगदानकर्ताक प्रोफाइल आ सम्पादकीय जोड़केँ अलग रखैत अछि आ जीवनीपरक अनुमानकेँ स्थापित तथ्य नहि बनबैत।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 278–287 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Kundan Karn · pp. 288–290
कुन्दन कर्ण lockdown समयक एक लघु रचनापर मुन्नाजीक ध्यान पड़लाक बाद विदेह खोजबाक अनुभव सुनबैत छथि। हुनक विवरणक केन्द्र उत्साहवर्धन, सहज पत्राचार आ धीरे-धीरे गजेन्द्र ठाकुरक व्यापक काजसँ परिचय अछि। ओ स्वयं सर्जनात्मक रचना-समूहक सीमित जानकारी आ व्यक्तिगत भेंट नहि भेल से स्पष्ट मानैत छथि; तेँ ई उदित लेखकक अनुभवक साक्ष्य अछि, व्यापक साहित्यिक मूल्यांकन नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 288–290 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Jagadanand Jha ‘Manu’ · pp. 291–297
जगदानन्द झा ‘मनु’ शोध, शब्दकोश, लिपि, अनुवाद, साहित्यिक विधा आ डिजिटल अभिलेखक प्रशंसापरक सर्वेक्षण करैत छथि। ओ विशेष रूपसँ नव प्रतिभा चिन्हबाक आ बिखरल पाठककेँ पोथी-पत्रिकासँ जोड़बाक सम्पादकीय क्षमतापर बल दैत छथि। लेखमे देल बहुत पैघ उत्पादन-संख्या आ प्राथमिकता-दावासभ श्रद्धांजलि-प्रधान विवरणक अंश अछि; एहि सारमे ओकरा मेल खुआएल पूर्ण ग्रन्थसूची वा स्वतंत्र तथ्य मानि नहि लेल गेल अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 291–297 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Ujjwal Kumar Jha · pp. 298–313
उज्ज्वल कुमार झा सेतु-निर्माणक रूपकद्वारा ठाकुरक लेखन, ऐतिहासिक शोध, लिपि-संरक्षण, शब्दकोश, अनुवाद आ सम्पादकीय काजकेँ जोड़ैत छथि। ओ साहित्यिक सृजनकेँ युवा पाठक आ भविष्यक शोधार्थी धरि फैलल सांस्कृतिक दायित्व मानैत छथि। लेखक मुख्य विचार परम्परा आ तकनीकक बीच निरन्तरता अछि, जाहिकेँ मैथिली, अंग्रेजी आ आन भारतीय भाषाक बीच आदान-प्रदानक रूपमे अनुवादक चर्चा मजबूत करैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 298–313 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · हस्ताक्षरित योगदान
Mukesh Anand · pp. 314–325
मुकेश आनन्द सार्वजनिक मंचक मान्यता आ समारोहसँ दूर रहि निरन्तर काज करबाक बीच भेद देखैत छथि, दिल्लीक साहित्यिक वातावरणक अपन अनुभवक आधारपर। ओ विदेहक सीमित संस्थागत दृश्यताक सम्भावित कारण रखैत आ पाठककेँ निमन्त्रण वा पुरस्कारक बदला अध्ययनसँ योगदान नापबाक आग्रह करैत छथि। सहयोगीसभक भूमिका सेहो ओ रेखांकित करैत आ तर्क दैत छथि जे मंचसँ दूरी कखनो ठोस काज लेल समय बचा सकैत अछि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 314–325 →सेतुशम: जीवन्त मैथिली · सहायक सामग्री
Editorial compilation; no separate byline · pp. 326–333
अन्तिम पन्नासभ सोरह योगदानकर्ताक पहिचान करैत आ हुनक साहित्यिक वा शोध-काजक छोट परिचय दैत अछि; तकर बाद सम्पादक आशीष अनचिन्हारक परिचय अछि। पाठककेँ सम्बोधित समापन-वन्दना खण्ड पूरा करैत अछि। ई श्रेय आ रूपरेखा-सम्बन्धी सामग्री अछि, अतिरिक्त हस्ताक्षरित समालोचनात्मक लेख नहि; परिचय उपलब्ध संस्करणक समयक विवरण प्रतिबिम्बित करैत अछि, स्वतंत्र रूपसँ अद्यतन जीवनी नहि।
सन्दर्भ आ प्रसंग →Read full essay reference · PDF pp. 326–333 →