गजेन्द्र ठाकुर · गजल-संग्रह / संगीतमय रूप · 1200 PDF पृष्ठ
पोथी आ ओकर विषय
खण्ड २ आब खण्ड १क कातमे पूर्ण दोसर खण्ड रूपमे अछि: आरम्भमे गजल ५९२–११८१ लेल वर्णक्रमानुसार देवनागरी अनुक्रमणिका अछि, तकर बाद गजलक संरचना, छन्द-विधान आ पद्यकेँ गजल कहल जाएबाक न्यूनतम योग्यता पर तीन औपचारिक लेख। मुख्य भाग ५९० क्रमांकित गजलसँ दीवानकेँ आगाँ बढ़बैत अछि।
एकर विशेषता प्रत्येक गजलक संग देल संगीतमय रूप अछि। तेँ पृष्ठ प्रत्येक गजलकेँ दुहरी इकाइ मानि पढ़ैत अछि: साहित्यिक पाठ आ प्रस्तुति-दिशि खुलल संगीत-नोट। खण्ड २ केवल खण्ड १क संख्यात्मक विस्तार नहि; ई अनुक्रमणिका, छन्द-जाँच आ संगीतिक प्रस्तुति संग बेसी खोजयोग्य आ प्रस्तुतियोग्य खण्ड अछि।
अलग-अलग पाठ
594 इकाइ चर्चा
एहि चर्चामे स्रोत-इकाइक समापन, जतय लागू अछि, शामिल अछि। प्रत्येक प्रविष्टिमे कथात्मक वा गीतात्मक सार आ सम्पादकीय व्याख्या अलग अनुच्छेदमे अछि, आ देल Word संस्करणक स्थानक सन्दर्भ अछि। अंग्रेजी शीर्षक परिचयात्मक अनुवाद अछि।
ई आरम्भिक इकाइ गजल ५९२–११८१क वर्णक्रमानुसार देवनागरी अनुक्रमणिका दर्ज करैत अछि। एहि कारण खण्ड २ केवल क्रमागत गजल-संग्रह नहि रहैत, बल्कि खोजयोग्य दीवान बनैत अछि: शीर्षक, संख्या आ वर्णक्रम पाठ-यन्त्रक हिस्सा बनैत अछि।
एहि सारक स्वर गीतात्मक नहि, ग्रन्थसूचीपरक अछि। पाठक क्रमसँ वा देवनागरी शीर्षक-क्रमसँ पोथीमे प्रवेश कऽ सकैत छथि; उद्धरण, अध्यापन आ कोनो गजलपर पुनः लौटबाक लेल ई महत्त्वपूर्ण सुविधा अछि।
गजल ५९२, “साँचक मान,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ५९३, “ओकर नाम नोर छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ५९४, “मोन बीच रात रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ५९५, “मीत मोन प्राण छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ५९६, “नेहक अन्तिम छोर,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ५९७, “अहाँ बिनु रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ५९८, “जे मोनसँ नै गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ५९९, “अहाँ मोनमे रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६००, “जे नोर मोनमे जागल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६०१, “जे हमर संग रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६०२, “ओ नोर हमरा मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६०३, “ओ भोर हमरा मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६०४, “प्रीत हमरा भीतर अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६०५, “दाग मोनसँ नहि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६०६, “मीत फेर नहि भेटल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६०७, “नोर मोनमे बसल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६०८, “नोर अहाँ बिनु रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६०९, “मीत मोनमे रहि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६१०, “भूल मोनसँ नहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६११, “नेह एखनो बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६१२, “ओ ठोर फेरो मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६१३, “जे नोर हमरा छोड़ि नहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६१४, “नेहक गान बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६१५, “ओ नाम एखनो मोनमे अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६१६, “आस भीतर रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६१७, “आस संग चलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६१८, “आस अहाँक पाछाँ रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६१९, “जे नोर आबो मोनमे अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६२०, “नेह राति भरि जागैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६२१, “आस आबो संग रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६२२, “जे नोर अहाँक पाछाँ रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ६२३, “ओ भोर मोनमे रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६२४, “ओ गान हमरा संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६२५, “ओ नोर हमरा मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६२६, “ओ नेह मोनमे बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६२७, “ओ नाम आबो संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६२८, “ओ नेह राति भरि जागैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६२९, “ओ नेह हमरा भीतर रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६३०, “मीत फेर नहि भेटल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६३१, “ओ नोर मोनसँ नहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६३२, “ओ नोर मोनमे बसल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६३३, “नोर हमरा संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६३४, “नाम मोनमे रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६३५, “मीत आबो संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६३६, “नेह मोनमे बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६३७, “दाग हमरा भीतर रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६३८, “नोर मोनसँ नहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६३९, “नाम हमरा मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६४०, “प्रीत हमरा संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६४१, “नेह मोनमे रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६४२, “नोर मोनमे बसल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६४३, “नोर फेरो आयल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६४४, “नाम मोनमे राखू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६४५, “प्रीत फेरो जागल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६४६, “ध्यान मोनमे राखू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६४७, “मीत मोनमे खोजू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६४८, “गाम मोनमे देखू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६४९, “नोर मोनमे राखू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६५०, “ज्ञान फेरो जागल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६५१, “प्रीत मोनमे राखू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६५२, “नोर मोनमे खोजू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६५३, “नोर मोन संग छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६५४, “नाम मोन बीच छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६५५, “मीत फेर दूर गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६५६, “नाम मोन संग छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६५७, “प्रीत मोन बीच छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६५८, “गाम फेर दूर गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६५९, “नोर फेर मोन आय,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६६०, “मान मोन बीच छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६६१, “नाम फेर लग छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६६२, “मीत साँझ संग आय,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६६३, “ओ नाम मोन संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६६४, “ओ डोर मोन पास अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६६५, “ओ नेह मोन बीच अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६६६, “अहाँक नाम, निन्न दूर अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६६७, “ई सोर नोर संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६६८, “नोर मौन, नेह गाढ़ अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६६९, “नेह एखनो मोन संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६७०, “पुरन सोर घर बीच अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६७१, “अहाँक नाम आबो पास अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६७२, “पुरन दुआरि फेर मोन पड़ल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६७३, “बुझल दीपक उजियार,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६७४, “मौनक सोर भीतर जागल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६७५, “दूर गेलहुँ तऽ नेह बुझलहुँ,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६७६, “मौनक तान भीतर बजैत रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६७७, “अन्हारक भोर ककरो नहि देखायल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६७८, “मेटल नाम हमरा घर आयल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६७९, “अन्हार हमरा मोन बुझायल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६८०, “जे गेल से भीतर रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६८१, “पानि अपन पिआस कहैत रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६८२, “सून्न दुआरि एतबे कहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६८३, “नेहक बाति रहि जाइत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६८४, “अन्हार हमरासँ गप करैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६८५, “नोर हमरा संग जागैत रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६८६, “साँझक बादो घर नहि सुतल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६८७, “नाम मेटल, सोर नहि मेटल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६८८, “चान डूबल, नेह नहि डूबल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६८९, “पार भेटल, मझधार बाँचल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६९०, “सून्न गामक एकटा साँझ,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६९१, “ठोर गुम्म, भीतर गीत,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६९२, “भोर आयल, राति नहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६९३, “जे भोर मोन पड़ैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६९४, “जीवनक सार कहू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६९५, “मोनक भीतर राह रहू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६९६, “केवल ई मान नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६९७, “जीवन आस जकाँ,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६९८, “जीवनमे गाम बिनु,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ६९९, “ई केवल काल छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७००, “मोनक भीतर पीर कतए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७०१, “एतेक फेर किएक,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७०२, “जीवनमे फूल रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७०३, “एखनो चाह मोनमे अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७०४, “ओकर सोर रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७०५, “मौन एक गीत लगैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७०६, “नाम मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७०७, “हमर मोन रुवैए किएक?,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७०८, “चाह आबो बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७०९, “मोन राति नाम फेर कहैत रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७१०, “मीत आब दूर गेल; मोनमे भार शेष अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७११, “मोनमे साँचक सार एखनो अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७१२, “भोर मोनमे अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७१३, “नेहक नाम आब अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७१४, “नम्र मोन मान संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७१५, “मोनमे सार बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७१६, “भोर रहि जाइत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७१७, “मान बचैए एखनो,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७१८, “आन बाट दिसैए फेर,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७१९, “मोन फेर बाट बदलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७२०, “साँच लेल कोन माप अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७२१, “दिस आन साँच देख,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७२२, “साँच एक बेर भेल नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७२३, “नेहक सार होइत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७२४, “साँचक नव ढंग रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७२५, “नेह मूल सार अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७२६, “मोन बीच एक नाव अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ७२७, “जग मान जागैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७२८, “एक राह सार नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७२९, “मुक्त राह सार अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७३०, “झट ज्ञान नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७३१, “आन पीर नोर मात्र नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७३२, “भाव मूल थाह अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७३३, “प्रश्न बीच गीत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७३४, “साँचक सोर अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७३५, “भीतर आस रहै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७३६, “प्रश्न उठि गेलै, द्वार खुलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७३७, “अपन मत जाँचै छी, सार दिसै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७३८, “छूटल स्वर उठै छै, हाल बदलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७३९, “अंक सभ बोलै छै, सार खोजै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७४०, “नदी रूप बदलै छै, सार बचै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७४१, “ज्ञान फेर बदलै छै, आधार जाँचै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७४२, “मान जखन बढ़ै छै, विश्वास रहै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७४३, “घाव जखन देखै छी, दाग बुझै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७४४, “गौरव जखन बढ़ै छै, प्रमाण माँगै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७४५, “दोषो देखलै मोन, सार रहि जाइ छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७४६, “रूप जखन मिललै, मेल तखन विचार भेलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७४७, “काल्हिक आधार पूछै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७४८, “भाग्येँ साँच भेलै, कोन आधार मिलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७४९, “साँच फेर मिलै छै, सार खुलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७५०, “प्रश्न जखन उठै छै, सार बुझै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७५१, “भाग्य फेर जाँचै छी, आधार खोजै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७५२, “रूप फेर जाँचै छी, आकार खुलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७५३, “साँच जखन कहै छी, डोर रहै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७५४, “रूप फेर बदलै छै, सार बचै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७५५, “छूटल स्वर उठै छै, मान बदलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७५६, “प्रश्न फेर उठै छै, राह दिसै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७५७, “अंक मात्र कहै छै, विचार जगै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७५८, “नोर-सोर बुझै छी, हाल खुलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७५९, “काल पार सोचै छी, भोर देखै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७६०, “सत्ता फेर जाँचै छी, ध्यान रखै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७६१, “ज्ञान जखन बदलै छै, उपाय मिलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७६२, “दाबी फेर जाँचै छी, विश्वास बचै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७६३, “मत जखन सुनै छी, प्रभाव बुझै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७६४, “काल जखन मुड़ै छै, ढंग परखै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७६५, “माप जखन लगै, ज्ञान मोनमे उतरैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७६६, “मान जखन बचै, आस रूप धरैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७६७, “घाव जखन दुखै, उपचार द्वार खोलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७६८, “साँच फेर खुलै, नोर सँ जुड़ैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७६९, “मोन फेर जागै, प्रीत संग चलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७७०, “न्याय फेर बढ़ै, माप बनि रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७७१, “पीरक मूल खुलै, निदान दिशा दैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७७२, “याद फेर उठै, नोर मोन फेरबैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७७३, “प्रश्न जखन उठै, विचार केँ खोजैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७७४, “पीर जखन घटै छै, आस जागि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७७५, “घर पाछाँ छुटै छै, सार मोनमे बसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७७६, “कूल दूर सरै छै, तरंग संगे बहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७७७, “बीज माटि फोड़ै छै, प्रीत माटिमे अँकुरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७७८, “प्रश्न माथ उठै छै, ज्ञान ऊपर चढ़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७७९, “पीर नोर कहै छै, नेह नोरमे भीजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७८०, “राति पाछाँ सरै छै, आस भोरमे फूटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७८१, “शब्द पवन चढ़ै छै, संवाद पवनमे उड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७८२, “घाव बात कहै छै, भाव नोरमे चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७८३, “रोष देह चढ़ै छै, क्रोध भीतर धधकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७८४, “सोर दूर रहै छै, राग मौनमे गमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७८५, “पएर रोक घेरै छै, आकाश पार निकलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७८६, “पुरना बीज बचै छै, मूल जड़ि धरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७८७, “पीर देह कहै छै, ताप देहमे सिहरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७८८, “पन्ना फेर खुलै छै, नाम कालमे डोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७८९, “दाबी जोर करै छै, बात साँचमे टिकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७९०, “दीप राति जरै छै, नेह मोनमे उजरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७९१, “राख छाँह धरै छै, गीत राखसँ फूलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७९२, “रेखा नाम बनै छै, पहचान सीमा गलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ७९३, “रूप नाम बदलै छै, स्वरूप नामसँ छूटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७९४, “नदी याद बहै छै, धार स्मृतिमे घुरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७९५, “लोक सोर जुड़ै छै, रंग लोकमे बजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७९६, “पएर माटि छुबै छै, देश माटिसँ जनमैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७९७, “दूर घर रहै छै, प्रीत दूरि घटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७९८, “डगमग मोन रहै छै, विश्वास डोर सम्हरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ७९९, “पएर मोड़ पड़ै छै, उपाय दिशा मुड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८००, “गीत काल लाँघै छै, गीत अन्त लाँघैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८०१, “दाम रोज बदलै छै, सार बाजार जँचैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८०२, “मेह राति बढ़ै छै, धार कूल बनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ८०३, “रस्सी हाथ उतरै छै, प्यास कुआँ बोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८०४, “सीटी दूर बजै छै, राह रेल चलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८०५, “दीप कोन जरै छै, ज्ञान पन्ना खुलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८०६, “डाक पएर चलै छै, सार चिट्ठी पहुँचैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८०७, “जड़ि माटि पकड़ै छै, मूल छाँह रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८०८, “माटि हाथ नमै छै, रूप चाक घुमैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८०९, “पर्दा धीरे उठै छै, रंग मंच धड़कैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८१०, “आँखि गोल चमकै छै, नोर बालक पूछैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८११, “केश धीर बदलै छै, श्वास उमिर ढलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८१२, “नाव नीर उतरै छै, धार सीमा काटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८१३, “काठ रेखा जागै छै, छाप हाथ गढ़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८१४, “मेह राति पड़ै छै, नेह छप्पर बजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८१५, “रोटी हाथ बाँटै छै, स्वाद थारी जुड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८१६, “गवाही स्वर उठै छै, प्रमाण न्याय तौलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८१७, “स्वप्न रूप बदलै छै, रूप भोर जगबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८१८, “बत्ती राति जरै छै, सोर नगर जागैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८१९, “आखर पात सजै छै, बोल लिपि बचैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८२०, “चिता शान्त पड़ै छै, फूल राख बोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८२१, “दू हाथ मिलै छै, नेह बंधन जँचैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८२२, “ट्रेन गाम छोड़ै छै, द्वार पएर घुरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८२३, “घंटी भोर बजै छै, ज्ञान कक्षा जागैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८२४, “पीर धीरे कहै छै, भेद देह सुनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८२५, “पएर माथ रुकै छै, पार आकाश खुलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८२६, “घड़ी भोर बजै छै, काल फेर सरकै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८२७, “धान बीज सुकै छै, अगिला ऋतु टिकै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८२८, “दर्पण भोर चमकै छै, चेहरा रेखा उभरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८२९, “तान सूता तनै छै, बाना रंग जुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८३०, “ढोल दूर बजै छै, रंग झण्डा लहरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८३१, “पएर ढलान चढ़ै छै, कुहरा दूर सरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८३२, “मधुमाछि भोर उड़ै छै, फूल गन्ध खोजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८३३, “चन्द्र राति चमकै छै, छाँह धीरे चढ़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८३४, “पुल नदी लाँघै छै, दू कूल जुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८३५, “सीसा टाइप सजै छै, स्याही रोल चढ़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८३६, “रेडियो भोर बजै छै, दूर स्वर अबै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८३७, “पुरना फोटो खुलै छै, चेहरा मुस्की रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८३८, “ताला द्वार लटकै छै, हाथ धातु घुमै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८३९, “सूखल पात सरसरै छै, चिनगी छोट उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८४०, “नहर खेत मुड़ै छै, नीर रेखा चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८४१, “पत्थर रेखा रहै छै, आखर धीरे घिसै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८४२, “बाँस हवा डोलै छै, जड़ि माटि थामै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८४३, “पतंग छत उठै छै, डोर हाथ तनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८४४, “चूल्हा भोर जरै छै, दालि गन्ध फैलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८४५, “राति आकाश खुलै छै, तारा झिलमिल करै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८४६, “पाखी झुण्ड उड़ै छै, आकाश रेखा बनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८४७, “पैडल पएर घुमै छै, चक्का राह धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८४८, “नमक दाना पड़ै छै, दालि स्वाद बदलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८४९, “भोर अजान उठै छै, घण्टा दूर बजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८५०, “लहर भोर उठै छै, क्षितिज रंग बदलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८५१, “भोर कूप जागै छै, नीर तल चमकै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८५२, “पोथी पन्ना खुलै छै, छोट टिप्पणी जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८५३, “सीटी दूर बजै छै, लोहा ताल धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८५४, “माटि हाथ नमै छै, रूप बीच उगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८५५, “मेह काँच पड़ै छै, बूँद रेखा बनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८५६, “कलम डारि जुड़ै छै, नव फूल खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८५७, “न्याय कक्ष खुलै छै, प्रश्न क्रम धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८५८, “राति नदी बहै छै, मचान दीप जरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८५९, “भोर विद्यालय खुलै छै, आँगन हँसी भरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८६०, “बाढ़ नीर उतरै छै, खेत माटि दिसै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८६१, “झोरा काँध चढ़ै छै, माय नोर धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८६२, “पुरना बक्सा खुलै छै, कागज गन्ध उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८६३, “भोर बाड़ी खुलै छै, पात ओस चमकै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८६४, “दुपहर सूरज चढ़ै छै, गाछ छाह सिमटै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८६५, “मेह छत पड़ै छै, नाली नीर बहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८६६, “बोर्ड बीच सजै छै, पहिल चाल खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८६७, “बाजार भोर खुलै छै, दाना पलड़ा धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८६८, “नाव घाट लगै छै, नीर तेज बहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८६९, “साँझ आँगन सजै छै, पहिल लौ उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८७०, “कागज सफेद रहै छै, स्याही रेखा उतरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८७१, “देहरी भोर चमकै छै, घर बाहर मिलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८७२, “ढोल थाप पड़ै छै, बीच मौन रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८७३, “छत गमला रहै छै, बीज माटि धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८७४, “पुरना टीला रहै छै, गाछ छाह पड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८७५, “राति झंझा बहै छै, दूर रेखा उगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८७६, “पुरान रेखा खुलै, राह नक्शा बतबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८७७, “लोहारक श्वास उठै, आग भट्ठी धधकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८७८, “नीर बहै, भोर जाल पसारैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८७९, “कचहरी सोझाँ छाह पसारैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८८०, “दीप मन्द जरै, राति सम्हारैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८८१, “धान डोलै, बिजुका तकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८८२, “छोट कोन रहै, टिकट पहुँचबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८८३, “धूलि बीच अंक रहै, पत्थर गनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८८४, “ताल नीर झलकै, कुमुद खिलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८८५, “गन्ध उठै, मसाला पिसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८८६, “काँच हँसै, लहठी खनकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८८७, “पएर उठै, सीढ़ी चढ़बैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८८८, “आँगन थाप धरै, ढेंकी कुटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८८९, “ओस काँपै, पाला जमैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ८९०, “समुद्र बीच सूइ बतबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८९१, “जंगल साँस ले, पगडंडी मुड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८९२, “तिनका जुड़ै, घोंसला बसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८९३, “कपड़ा भीजै, रंगरेज रँगैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८९४, “गाम गोल बैसै, सभा सुनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८९५, “धूलि हटै, अलमारी खुलबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८९६, “लहर चढ़ै, पदचिह्न मिटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८९७, “धूलि उठै, घोड़ा दौड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८९८, “रेखा बोलै, चित्र उभरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ८९९, “श्वास उठै, शंख गुँजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९००, “नीर पार खुलै, क्षितिज पसारैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९०१, “पोखर नीर चमकै, आस मखान खिलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९०२, “ओस पात चमकै, नेह पात महकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९०३, “सूत जुड़ै, चाव सुजनी सजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९०४, “रेशा तनै, मान सिक्की जुड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९०५, “पाखी खेल उठै, गीत सामा गबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९०६, “व्रत कथा खुलै, स्वर कथा गुँजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९०७, “आँगन रेखा खुलै, चाव अरिपन खिलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९०८, “भोर गन्ध उठै, आस मंजर महकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९०९, “पीयर खेत डोलै, प्रीत सरसों हँसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९१०, “गरमी घटै, श्वास पंखा डोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९११, “माटि पकै, ताल घड़ा झनकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९१२, “कपड़ा फाटै, नेह सुई सिअैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९१३, “डारि हिलै, चाव झूला डोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९१४, “पुरान नीर चमकै, भोर कुण्ड चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९१५, “माथ सजै, मान पाग दमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९१६, “भोर थारी सजै, प्रीत भोज सजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९१७, “कागज देह जरै, आस लालटेन जरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९१८, “अन्हार घनै, आस जुगनू चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९१९, “फूल झरै, नोर मौलश्री झरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९२०, “पाथर बाट बजै, ताल खड़ाऊँ बजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९२१, “ओस पड़ै, भोर जाल चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९२२, “धान रोपै, गीत रोपनी गबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९२३, “घाट पएर चलै, नोर गगरी छलकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९२४, “मेघ हटै, रंग इन्द्रधनुष उभरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९२५, “गाछ डोलै, पार पछिया बहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९२६, “सूत तनै, सार चर्खा घूमैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९२७, “धान जुटै, मान बखार भरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९२८, “माटि कटै, ज्ञान फाल चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९२९, “नीर हटै, भोर चर उभरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९३०, “पोखर गहिरै, आस कमलबीज पकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९३१, “पाथर टकरै, नोर चकमक झिलमिलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९३२, “रेशा जुड़ै, प्रीत पाटी बुनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९३३, “तार काँपै, गीत सारंगी रुवैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९३४, “पात लहरै, भोर तिलकोर लहरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९३५, “लोक जुटै, मान सभा जुटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९३६, “पात खुलै, ज्ञान पंजी बोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९३७, “रस्सी तनै, चाव डोल उतरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९३८, “आग धधकै, आस ईंट पकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९३९, “फूल खुलै, प्रीत चंपा महकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९४०, “दाना जुटै, मान कोठी भरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९४१, “नील फूल डोलै, चाव अलसी हँसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९४२, “श्वास मिलै, गीत बाँसुरी सुसकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९४३, “पाथर भीजै, भोर झरना गबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९४४, “भोर खुलै, आस कुहासा हटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९४५, “राति ढलै, नोर चाँद झुकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९४६, “लहर हटै, आस सीपी खुलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९४७, “धूलि उठै, भोर गोधूलि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९४८, “खेत बँटै, मान मेड़ बोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९४९, “छत गरमै, चाव धूप उतरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९५०, “दूर रेखा खुलै, पार क्षितिज फैलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९५१, “राख अँगार खुलै, अँगार बचैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९५२, “बीज अँकुर खुलै, मान फेर उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९५३, “ओखरि मूसर खुलै, ताल धुनि बजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९५४, “कनेर फूल खुलै, आस फुलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९५५, “छप्पर बरखा खुलै, नोर टपकि खसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९५६, “भूसी पवन खुलै, राह दूर उड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९५७, “कछार कटान खुलै, मूल कटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९५८, “बिचड़ा खेत खुलै, रंग फेर हरियैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९५९, “काई पोखर खुलै, नाम जल तिरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९६०, “बाती दीप खुलै, पीर जरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९६१, “सूत तकली खुलै, बात सूत तनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९६२, “माटिक सोंध खुलै, रूप महकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९६३, “बबूल काँट खुलै, मेल भीतर चुभैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९६४, “ओसार साँझ खुलै, अँगार फेर जगैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९६५, “बान्ह जल खुलै, मान टिकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९६६, “कुट्टी खलिहान खुलै, ताल धूरि उड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९६७, “काँच चूड़ी खुलै, आस मृदु खनकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९६८, “बेल लता खुलै, नोर लहरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९६९, “नाल जल खुलै, राह नीचाँ बहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९७०, “चन्द्र ज्योति खुलै, मूल दूर पसरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९७१, “पीतल लोटा खुलै, रंग चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९७२, “पोथीक पन्ना खुलै, नाम धीरे सरकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९७३, “रुई सूत खुलै, पीर ऊपर उड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९७४, “धूरिक बाट खुलै, बात उड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९७५, “साँकल द्वार खुलै, रूप राति खनकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९७६, “सिलौट लोढ़ा बजै, सोर धीमे थिरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९७७, “बाँस दउरा जुड़ै, मान सँचि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९७८, “तराजू पल्ला झुकै, विचार तोलि देखैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९७९, “हँसुआ धार चमकै, सार फेर दमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९८०, “जाँता दाना पिसै, गान मृदु बजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९८१, “कोदो बालि डोलै, उमंग साँझ धरि डोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९८२, “छत्ता मधु भरै, आस मधु सँ भरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९८३, “तितली रंग उड़ै, रंग पाँख पसारैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९८४, “घोंघा पथ सरकै, पहिचान पाछाँ रहि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९८५, “कछुआ नीर काटै, राह नीरमे बहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९८६, “सनई फूल डोलै, रंग पवनमे लहरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९८७, “कनकौआ ऊपर उठै, डोर अकास चढ़ि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९८८, “सूप दाना छाँटै, धान सूपमे छँटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९८९, “झाँपी भीतर सजै, नाम भीतर बचि रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९९०, “ताड़पात आखर खुलै, ज्ञान पातमे बोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
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गजल ९९१, “पीपर छाँह पसरै, राह छाँहमे टिकि रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९९२, “खजूर रस टपकै, आस रस टपकैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९९३, “बकुल फूल झरै, सुवास भोरमे महकि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९९४, “ओल माटि फोड़ै, मूल माटि फोड़ि निकलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९९५, “अरुई पात डोलै, बात पवनमे झूमैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९९६, “मड़ुआ बालि झुकै, बाल नमि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९९७, “कुरथी दालि पकै, दाल भानसमे महकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९९८, “तिल घानी घुमै, हाथ घानी संग चलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ९९९, “मकई भुट्टा खुलै, धान दाना झरि पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०००, “हजारम गजल खुलै, गीत आगाँ गुँजैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १००१, “दीप बाती जरै, विश्वास मन्दे मन्दे जरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १००२, “चरखा सूत कातै, मान सूतमे गाँठि जुड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १००३, “मखान पोखर जागै, थाह नीर तलसँ उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १००४, “पान पात भीजै, रंग ओस संग चमकि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १००५, “सुपारी कटरनी चलै, विचार फाँक बनि खुलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १००६ — सिकी डलिया बुनै, प्रीत बुनाइमे रूप धरैए
गजल १००६, “सिकी डलिया बुनै, प्रीत बुनाइमे रूप धरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १००७ — कुम्हारक चाक घुमै, आधार माटिसँ देह गढ़ैए
गजल १००७, “कुम्हारक चाक घुमै, आधार माटिसँ देह गढ़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १००८, “घैला नीर भरै, श्वास शीतल नेह भरैत जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १००९, “लाठी बाट चलै, साथ पएर संग टिकैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०१० — रोपनी धान झुकै, मान पाँतिमे हरियैत जाइए
गजल १०१०, “रोपनी धान झुकै, मान पाँतिमे हरियैत जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०११, “कदली पात बजै, पात बरखा संग थिरकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०१२, “आम मंजर फुलै, आस गाछ भरि गमकि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०१३ — लीची गुच्छा पाकै, रंग डारि संग झूलैत रहैए
गजल १०१३, “लीची गुच्छा पाकै, रंग डारि संग झूलैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०१४ — सिन्नुर डिबिया खुलै, मान माँगमे रँग भरैए
गजल १०१४, “सिन्नुर डिबिया खुलै, मान माँगमे रँग भरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०१५, “कमल पोखर जागै, आस भोर संग खुलि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०१६, “चापाकल चलै, धार धरतीसँ नीर उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०१७, “ढेकी धान कुटै, ताल धपधप सोर उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०१८ — बेलना लोइ फैलै, आधार गोलाइमे फैलैत जाइए
गजल १०१८, “बेलना लोइ फैलै, आधार गोलाइमे फैलैत जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०१९, “खपड़ा छान्ह टिकै, राह बरखा रोकैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०२०, “भूसा दउनी चलै, सोर पवन संग उड़ि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०२१, “बेंत पीढ़ी बुनै, मान बैसबाक आसन बनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०२२, “माटिक चूल्हि जरै, रात आँच भीतर जगैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०२३, “दूब आँगन भीजै, राह पएर तले हरियैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०२४, “झूला आमगाछ हिलै, उमंग पवन संग डोलैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०२५, “कोसी धार बहै, इतिहास नकसा फेर लिखैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०२६, “पगडंडी धूर — आस एतबे साँच नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०२७, “नाव पतवार — मान तखन अर्थ खुलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०२८, “सनक रस्सी — राह मोन फेर पूछैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०२९, “सरकंडा चटाई — रंग नाम कतहु हराइत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०३०, “तसर कोया — सार रेशमक छुअन बचल रहत,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०३१, “दही मथानी — गीत अपन बाट बनबैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०३२, “धानक कोठी — हाथ फेर घर दिस अबैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०३३, “खोंइछा अन्न — बात कथा एतय थमैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०३४, “पोखर घाट — सोर पएर आगाँ बढ़ैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०३५, “अरिपन रेखा — ताल रेखा घर सँ जुड़ैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०३६, “बाँसुरी स्वर — आस भीतर साँस लैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०३७, “गोरस मथनी — मान रस हाथे बदलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०३८, “मिथिला चित्रक कूची — सोर रंग मौनहुँ बोलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०३९, “माछक जाल — सार नीर जाल परखैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०४०, “पोथीक जिल्द — गीत आखर देह धरैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०४१, “नीम पात — राह ओहि घड़ी भेद खुलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०४२, “कांस फूल — रंग चिन्ह पवनोमे बचैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०४३, “बरगद जटा — हाथ काल फेर घुरि अबैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०४४, “पुआल गादी — मान घाम पुआलमे बचैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०४५, “तिलकोर पात — बात लता आँगन जोड़ैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०४६ — सिंघाड़ा पोखर — गीत नीर तले फल पाकैत अछि
गजल १०४६, “सिंघाड़ा पोखर — गीत नीर तले फल पाकैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०४७, “कमला धार — सार नीर सभ गप कहैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०४८, “चिरई घोंसला — सोर मौनहुँ उत्तर दैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०४९ — धानक लावा — ताल रूप बदलियो मूल रहैत अछि
गजल १०४९, “धानक लावा — ताल रूप बदलियो मूल रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०५०, “आखरक यात्रा — आस अन्त एतय होइत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०५१, “लोहारक धौंकनी — आस कथन एतेक पर थिर नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०५२, “करघाक ताना — मान सूत भीतर चिन्ह बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०५३ — अलसी फूल — राह धुनि पवनक संग मुड़ैत रहै
गजल १०५३, “अलसी फूल — राह धुनि पवनक संग मुड़ैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०५४, “सरिसो खेत — रंग नेह बिना रंग पूरा नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०५५, “पगहा गाँठि — सार बंधन अपन राह चुनैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०५६ — जूटक बोरा — गीत बीज चुप्पे उत्तर धरैत अछि
गजल १०५६, “जूटक बोरा — गीत बीज चुप्पे उत्तर धरैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०५७, “कुशक आसन — हाथ छाह बदललहुँ मूल नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०५८, “सोनारक हथौड़ी — बात थाप देहक भेद गनैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०५९, “जुगनू राति — सोर राति भीतर भोर पलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०६०, “ओसक बूँद — ताल घाम बिना चमक खुलैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०६१, “कमलनाल — आस नोरक अर्थ एक्के नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०६२ — माटिक पुतरी — मान साँस संग लय बदलैत अछि
गजल १०६२, “माटिक पुतरी — मान साँस संग लय बदलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०६३, “बढ़ईक रन्दा — सोर हाथक छाप मेटैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०६४, “पानक बारी — सार नीर नीचे जीवन जगैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०६५ — पोखरक पाँक — गीत मौनक सीमा एतय टूटैत अछि
गजल १०६५, “पोखरक पाँक — गीत मौनक सीमा एतय टूटैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०६६, “आम्रपल्लव तोरण — राह समय अपन गाँठि खोलैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०६७, “कुटजक छाल — रंग पवन संग देह झुकैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०६८, “मसूरक फूल — हाथ दूरिक राह मोन नापैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०६९, “चनाक फली — मान दाना भीतर ऋतु बसैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०७०, “मूँजक चटाई — बात आँगन सभ कथा सुनैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०७१, “ताँतक गाँठि — गीत प्रश्नक डोर टूटैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०७२ — पलाशक फूल — सार धूपक रंग साँझ धरि रहैत अछि
गजल १०७२, “पलाशक फूल — सार धूपक रंग साँझ धरि रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०७३, “बकाइन छाह — सोर गंध पुरान घर चिन्हैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०७४, “चकरी पवन — ताल धारक मोड़ स्थिर रहैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०७५, “सुईक टाँका — आस आखर पाछाँ अर्थ चलैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०७६, “बाँसक सूप — आस दाना छनितहुँ भेद मेटैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०७७ — काँसक डलिया — मान बुनावट भीतर हाथक मान अछि
गजल १०७७, “काँसक डलिया — मान बुनावट भीतर हाथक मान अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०७८ — घोंघाक खोल — राह खोल बदलि जीवन थमैत नहि
गजल १०७८, “घोंघाक खोल — राह खोल बदलि जीवन थमैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०७९, “सखुआ पात — रंग पात झरलहुँ गंध बचल रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०८०, “कदंबक फूल — सार फूलक छाह समय धरि रहत,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०८१ — बेंतक मोढ़ा — गीत बेंत नमितहुँ मूल टूटैत नहि
गजल १०८१, “बेंतक मोढ़ा — गीत बेंत नमितहुँ मूल टूटैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०८२, “मृदंगक चमड़ा — हाथ थाप पाछाँ मौन सेहो बजैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०८३ — मटरक फूल — बात पछिया संग पीयर रंग बहैत रहै
गजल १०८३, “मटरक फूल — बात पछिया संग पीयर रंग बहैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०८४ — तिलक फली — सोर दाना छोटो हो, कथा पैघ अछि
गजल १०८४, “तिलक फली — सोर दाना छोटो हो, कथा पैघ अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०८५, “भदई धान — ताल धानक गंध घर चिन्हैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०८६, “हंसुलीक चमक — आस चमक देहक मान बनैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०८७, “कनैल फूल — मान रंग विषक छाह ढाकैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०८८, “खपरैल छानि — सोर वर्षा बीतलहुँ छानि बोलैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०८९, “ताड़क पंखा — सार हवा हाथक संगति मानैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०९०, “घैलाक मुँह — गीत मुँह छोट, नीरक राह पैघ अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०९१, “सिलौटक धार — राह घिसाइ पाछाँ धार उघड़ैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०९२, “लहठीक खनक — रंग खनक स्मृति केर डोर कसैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०९३, “चूल्हिक राख — हाथ राख भीतर आँच मरैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०९४ — कचनार पात — मान पात मोड़लहुँ हरियर नस चलैत अछि
गजल १०९४, “कचनार पात — मान पात मोड़लहुँ हरियर नस चलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०९५, “कपासक रूई — बात रूई हलुक, श्रमक भार हलुक नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०९६ — बेलनक घुमाव — गीत घुमाव बीच केन्द्र छुटैत नहि
गजल १०९६, “बेलनक घुमाव — गीत घुमाव बीच केन्द्र छुटैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०९७, “धानक भूसी — सार भूसी उडलहुँ दाना थिर रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०९८, “मधुक छत्ता — सोर मधु सँ पैघ श्रमक सार अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १०९९ — रुद्राक्षक दाना — ताल दाना गनितहुँ जप पूरा नहि
गजल १०९९, “रुद्राक्षक दाना — ताल दाना गनितहुँ जप पूरा नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११०० — घंटीक अनुनाद — आस अनुनाद दूर धरि बाट खोलैत रहै
गजल ११००, “घंटीक अनुनाद — आस अनुनाद दूर धरि बाट खोलैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११०१, “हँसियाक धार — मान पर राह खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११०२, “इनारक डोल — सोर संग नेह रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११०३, “घूरक आँच — राह पर गप खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११०४, “ईखक गाँठि — गीत बीच राह चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११०५, “गुड़क भेली — ताल कात धुन उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११०६, “झाड़ूक सींक — आस बीच रूप खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११०७, “कोंहड़ाक बेल — सार पर भोर खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११०८, “जामुनक गाछ — मान पर डोर तनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११०९, “बेलक फल — सोर संग ताल बजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १११०, “कौड़ीक चाल — राह बीच रंग झरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११११, “खाटक पाट — गीत कात भोर खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १११२, “ढिबरीक काँच — ताल संग काज चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १११३, “घुँघरूक नाद — आस पर थाह मिलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १११४, “झाँझक थाप — सार संग मान रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १११५, “खुरपीक धार — मान पर साँच खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १११६, “बथानक खूँटा — राह संग गीत उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १११७, “दूधक फेन — गीत बीच नेह रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १११८, “लाहक चूड़ी — ताल संग धूप ढलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल १११९, “बटखराक तोल — आस बीच छाह सरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११२०, “पालकीक डाँड़ — सार संग बीज उगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११२१, “माछक शल्क — मान मे आँच जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११२२, “माटिक सुराही — सोर पर मोन नमै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११२३, “कुल्हड़क गंध — राह कात सोर उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११२४, “तुरहीक नाद — गीत संग राह बनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११२५, “डमरूक ताल — ताल मे नेह जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११२६, “गोइठाक राख — सार पर अर्थ बचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११२७, “लौकीक बेल — मान संग मोन घुरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११२८, “कदम्बक फूल — राह बीच गप जुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११२९, “करघाक सूत — रंग कात साँच रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११३०, “फूसक छानि — गीत मे नेह चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११३१, “बेरक काँट — बात पर छाप बचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११३२, “बाँसक फाँक — सोर संग भेद खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११३३, “पोखरिक घाट — ताल बीच सोर पहुँचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११३४, “गाछक खोह — आस कात मान जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११३५, “पीपलक जड़ि — सार मे राह चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११३६, “चकईक पाँख — मान पर स्वर फूटै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११३७, “कागक ठोर — राह संग प्रश्न उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११३८, “मेघक बूँद — रंग बीच रूप बसै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११३९, “बिजुरीक रेख — गीत कात रंग मुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११४०, “पूसक धुंध — बात मे धुन बदलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११४१, “जेठक धूल — सोर पर साँस बढ़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११४२, “सावनक टपक — ताल संग काल बचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११४३, “भादोक पाँक — आस बीच बीज चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११४४, “अगहनक बाली — सार कात पात पहुँचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११४५, “फागुनक अबीर — मान मे भोर जुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११४६, “चैतिक पछिया — राह पर थाह रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११४७, “कार्तिकक दीप — रंग संग छाह ठहरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११४८, “माघक धूप — गीत बीच नाद उड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११४९, “नदीक बालू — बात कात गंध पलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११५०, “शंखक सोर — सोर मे फूल उघड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११५१, “बेलपत्रक डारि — सार पर नेह जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११५२, “खेसारीक दाना — मान संग राह खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११५३, “कुर्थीक दालि — राह बीच मान चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११५४, “जाँतक पाट — रंग कात रूप रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११५५, “सिलौटक लीक — गीत मे गप बनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११५६, “चूल्हिक धूर — बात पर बीज उगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११५७, “कूपक घेरा — सोर संग काल बहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११५८, “नाँदक जल — ताल बीच छाप बचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११५९, “भीतक लेप — आस कात डोर तनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११६०, “खपराक छत — सार मे थाह खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११६१, “काठक छील — मान पर स्वर बजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११६२, “ताड़क रस — राह संग साँच जनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११६३, “पनसक बीआ — रंग बीच नेह बचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११६४, “मखानक खोल — गीत कात राह मुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११६५, “सनक रेसा — बात मे रूप बदलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११६६, “चूनक ढेरी — सोर पर गंध पलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११६७, “घीक वास — ताल संग सोर फूटै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११६८, “मधुक मकरंद — आस बीच मान ठहरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११६९, “कोठीक अन्न — सार कात डोर जुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११७०, “ढोलकक थाप — मान मे छाह सरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११७१, “काँसक थाल — राह पर भोर उगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११७२, “जोतक लीक — रंग संग तर्क जँचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११७३, “शालक छाल — गीत बीच अर्थ खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११७४, “कुम्हारक भट्ठी — बात कात नाद बजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११७५, “धानक खील — सोर मे साँच मिलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११७६, “चानक डाकघर — पर पत्र जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११७७, “समयक खाली जेब — संग घड़ी चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११७८, “बादलक पोथीघर — बीच अक्षर तिरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११७९, “सपनक रेल — कात सीटी बजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११८०, “छाहक सोपान — पर पाँति चढ़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।
गजल ११८१, “शून्यक पतंग — संग डोर हँसै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।
एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।