← साहित्य अटलस

गजेन्द्र ठाकुर / आठ स्रोत-संस्करण

दीवान-ए-विदेह खण्ड २

गजेन्द्र ठाकुर · गजल-संग्रह / संगीतमय रूप · 827 PDF पृष्ठ

पोथी आ ओकर विषय

दीवान-ए-विदेहक दोसर खण्ड पहिल खण्डक संग रखल गजल-क्रमक निरन्तरता अछि। आरम्भमे गजल-संरचना, छन्द-जाँच आ न्यूनतम औपचारिक योग्यतापर तीन लेख अछि; तकर बाद सत्यापित बहर/मात्रा-सूचना सहित गजलसभ आ प्रत्येक गजलक संग संगीतमय रूप देल अछि।

नीचाँ प्रत्येक गजल-इकाइकेँ पाठ आ संगीतक संयुक्त प्रविष्टि रूपेँ पढ़ल गेल अछि: शीर्षक, काफिया-रदीफ, छन्द-जाँच आ संगीतमय संकेत एक संग देखल गेल अछि। सार एहि दोहरा संरचनाकेँ सुरक्षित रखैत अछि, कविता पुनर्मुद्रित नहि करैत आ छन्दकेँ साहित्यिक पाठक विकल्प नहि बनबैत।

अलग-अलग पाठ

412 इकाइ चर्चा

एहि चर्चामे स्रोत-इकाइक समापन, जतय लागू अछि, शामिल अछि। प्रत्येक प्रविष्टिमे कथात्मक वा गीतात्मक सार आ सम्पादकीय व्याख्या अलग अनुच्छेदमे अछि, आ देल Word संस्करणक स्थानक सन्दर्भ अछि। अंग्रेजी शीर्षक परिचयात्मक अनुवाद अछि।

सन्दर्भमे दस्तावेजक क्रमसँ गैर-खाली Word अनुच्छेद गानल गेल अछि, तालिकाक पाठ सहित; ई मुद्रित पृष्ठ-संख्या नहि। ई AI-सहायतासँ तैयार सम्पादकीय चर्चा अछि; नामित मानवीय समीक्षाक अभिलेख नहि अछि।

लेख १ — गजलमे बहर, वजन आ समान मिसरा

लेख १ — गजलमे बहर, वजन आ समान मिसरा ओ औपचारिक चौखट बनबैत अछि जाहिसँ खण्ड 2 पढ़बाक आग्रह करैत अछि। विषय मात्र नहि, संरचना, बहर, छन्द-जाँच, काफिया आ रदीफ गजल-अनुशासनक आधार बनैत अछि।

एहि लेखक महत्त्व एहि मे अछि जे बादक कविता केवल गीतात्मक पाठ रूपेँ नहि अबैत; घोषित औपचारिक जाँच आ संगीतमय उपचार संग अबैत अछि। ई टिप्पणी लेखकेँ पोथीक काव्यशास्त्र आ सम्पादकीय विधि मानैत अछि, अलग प्रस्तावना नहि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15–36. संस्करणक विवरण.

लेख २ — छन्द-विधान

लेख २ — छन्द-विधान ओ औपचारिक चौखट बनबैत अछि जाहिसँ खण्ड 2 पढ़बाक आग्रह करैत अछि। विषय मात्र नहि, संरचना, बहर, छन्द-जाँच, काफिया आ रदीफ गजल-अनुशासनक आधार बनैत अछि।

एहि लेखक महत्त्व एहि मे अछि जे बादक कविता केवल गीतात्मक पाठ रूपेँ नहि अबैत; घोषित औपचारिक जाँच आ संगीतमय उपचार संग अबैत अछि। ई टिप्पणी लेखकेँ पोथीक काव्यशास्त्र आ सम्पादकीय विधि मानैत अछि, अलग प्रस्तावना नहि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 37–67. संस्करणक विवरण.

लेख ३ — पद्य केँ गजल कहल जाएबाक न्यूनतम औपचारिक योग्यता

लेख ३ — पद्य केँ गजल कहल जाएबाक न्यूनतम औपचारिक योग्यता ओ औपचारिक चौखट बनबैत अछि जाहिसँ खण्ड 2 पढ़बाक आग्रह करैत अछि। विषय मात्र नहि, संरचना, बहर, छन्द-जाँच, काफिया आ रदीफ गजल-अनुशासनक आधार बनैत अछि।

एहि लेखक महत्त्व एहि मे अछि जे बादक कविता केवल गीतात्मक पाठ रूपेँ नहि अबैत; घोषित औपचारिक जाँच आ संगीतमय उपचार संग अबैत अछि। ई टिप्पणी लेखकेँ पोथीक काव्यशास्त्र आ सम्पादकीय विधि मानैत अछि, अलग प्रस्तावना नहि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 68–98. संस्करणक विवरण.

गजल ५९२ — साँचक मान

गजल ५९२ “साँचक मान” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँचक, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 99–124. संस्करणक विवरण.

गजल ५९३ — ओकर नाम नोर छल

गजल ५९३ “ओकर नाम नोर छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 125–150. संस्करणक विवरण.

गजल ५९४ — मोन बीच रात रहल

गजल ५९४ “मोन बीच रात रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 151–176. संस्करणक विवरण.

गजल ५९५ — मीत मोन प्राण छल

गजल ५९५ “मीत मोन प्राण छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्राण, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 177–202. संस्करणक विवरण.

गजल ५९६ — नेहक अन्तिम छोर

गजल ५९६ “नेहक अन्तिम छोर” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नेहक, अन्तिम, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 203–234. संस्करणक विवरण.

गजल ५९७ — अहाँ बिनु रहल

गजल ५९७ “अहाँ बिनु रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँ, बिनु, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 235–266. संस्करणक विवरण.

गजल ५९८ — जे मोनसँ नै गेल

गजल ५९८ “जे मोनसँ नै गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनसँ, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 267–298. संस्करणक विवरण.

गजल ५९९ — अहाँ मोनमे रहि गेल

गजल ५९९ “अहाँ मोनमे रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँ, मोनमे, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 299–324. संस्करणक विवरण.

गजल ६०० — जे नोर मोनमे जागल अछि

गजल ६०० “जे नोर मोनमे जागल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, जागल, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 325–350. संस्करणक विवरण.

गजल ६०१ — जे हमर संग रहैत अछि

गजल ६०१ “जे हमर संग रहैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रहैत, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 351–376. संस्करणक विवरण.

गजल ६०२ — ओ नोर हमरा मोन पड़ैए

गजल ६०२ “ओ नोर हमरा मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, पड़ैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 377–405. संस्करणक विवरण.

गजल ६०३ — ओ भोर हमरा मोन पड़ैए

गजल ६०३ “ओ भोर हमरा मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, पड़ैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 406–431. संस्करणक विवरण.

गजल ६०४ — प्रीत हमरा भीतर अछि

गजल ६०४ “प्रीत हमरा भीतर अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, हमरा, भीतर, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 432–457. संस्करणक विवरण.

गजल ६०५ — दाग मोनसँ नहि जाइए

गजल ६०५ “दाग मोनसँ नहि जाइए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनसँ, जाइए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 458–483. संस्करणक विवरण.

गजल ६०६ — मीत फेर नहि भेटल

गजल ६०६ “मीत फेर नहि भेटल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भेटल, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 484–509. संस्करणक विवरण.

गजल ६०७ — नोर मोनमे बसल अछि

गजल ६०७ “नोर मोनमे बसल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 510–535. संस्करणक विवरण.

गजल ६०८ — नोर अहाँ बिनु रहि गेल

गजल ६०८ “नोर अहाँ बिनु रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँ, बिनु, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 536–561. संस्करणक विवरण.

गजल ६०९ — मीत मोनमे रहि जाइए

गजल ६०९ “मीत मोनमे रहि जाइए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, जाइए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 562–587. संस्करणक विवरण.

गजल ६१० — भूल मोनसँ नहि गेल

गजल ६१० “भूल मोनसँ नहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनसँ, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 588–613. संस्करणक विवरण.

गजल ६११ — नेह एखनो बचल अछि

गजल ६११ “नेह एखनो बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: एखनो, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 614–639. संस्करणक विवरण.

गजल ६१२ — ओ ठोर फेरो मोन पड़ैए

गजल ६१२ “ओ ठोर फेरो मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: फेरो, पड़ैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 640–665. संस्करणक विवरण.

गजल ६१३ — जे नोर हमरा छोड़ि नहि गेल

गजल ६१३ “जे नोर हमरा छोड़ि नहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, छोड़ि, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 666–691. संस्करणक विवरण.

गजल ६१४ — नेहक गान बचल अछि

गजल ६१४ “नेहक गान बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नेहक, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 692–717. संस्करणक विवरण.

गजल ६१५ — ओ नाम एखनो मोनमे अछि

गजल ६१५ “ओ नाम एखनो मोनमे अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: एखनो, मोनमे, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 718–743. संस्करणक विवरण.

गजल ६१६ — आस भीतर रहैए

गजल ६१६ “आस भीतर रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भीतर, रहैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 744–769. संस्करणक विवरण.

गजल ६१७ — आस संग चलैत अछि

गजल ६१७ “आस संग चलैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चलैत, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 770–795. संस्करणक विवरण.

गजल ६१८ — आस अहाँक पाछाँ रहैए

गजल ६१८ “आस अहाँक पाछाँ रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँक, पाछाँ, रहैए, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 796–821. संस्करणक विवरण.

गजल ६१९ — जे नोर आबो मोनमे अछि

गजल ६१९ “जे नोर आबो मोनमे अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 822–847. संस्करणक विवरण.

गजल ६२० — नेह राति भरि जागैत अछि

गजल ६२० “नेह राति भरि जागैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, जागैत, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 848–873. संस्करणक विवरण.

गजल ६२१ — आस आबो संग रहैत अछि

गजल ६२१ “आस आबो संग रहैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रहैत, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 874–899. संस्करणक विवरण.

गजल ६२२ — जे नोर अहाँक पाछाँ रहि गेल

गजल ६२२ “जे नोर अहाँक पाछाँ रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँक, पाछाँ, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 900–925. संस्करणक विवरण.

गजल ६२३ — ओ भोर मोनमे रहि गेल

गजल ६२३ “ओ भोर मोनमे रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 926–951. संस्करणक विवरण.

गजल ६२४ — ओ गान हमरा संग अछि

गजल ६२४ “ओ गान हमरा संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 952–977. संस्करणक विवरण.

गजल ६२५ — ओ नोर हमरा मोन पड़ैए

गजल ६२५ “ओ नोर हमरा मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, पड़ैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 978–1003. संस्करणक विवरण.

गजल ६२६ — ओ नेह मोनमे बचल अछि

गजल ६२६ “ओ नेह मोनमे बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1004–1029. संस्करणक विवरण.

गजल ६२७ — ओ नाम आबो संग अछि

गजल ६२७ “ओ नाम आबो संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1030–1055. संस्करणक विवरण.

गजल ६२८ — ओ नेह राति भरि जागैत अछि

गजल ६२८ “ओ नेह राति भरि जागैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, जागैत, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1056–1081. संस्करणक विवरण.

गजल ६२९ — ओ नेह हमरा भीतर रहैए

गजल ६२९ “ओ नेह हमरा भीतर रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, भीतर, रहैए, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1082–1107. संस्करणक विवरण.

गजल ६३० — मीत फेर नहि भेटल

गजल ६३० “मीत फेर नहि भेटल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भेटल, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1108–1133. संस्करणक विवरण.

गजल ६३१ — ओ नोर मोनसँ नहि गेल

गजल ६३१ “ओ नोर मोनसँ नहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनसँ, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1134–1159. संस्करणक विवरण.

गजल ६३२ — ओ नोर मोनमे बसल अछि

गजल ६३२ “ओ नोर मोनमे बसल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1160–1185. संस्करणक विवरण.

गजल ६३३ — नोर हमरा संग अछि

गजल ६३३ “नोर हमरा संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1186–1211. संस्करणक विवरण.

गजल ६३४ — नाम मोनमे रहि गेल

गजल ६३४ “नाम मोनमे रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1212–1237. संस्करणक विवरण.

गजल ६३५ — मीत आबो संग अछि

गजल ६३५ “मीत आबो संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1238–1263. संस्करणक विवरण.

गजल ६३६ — नेह मोनमे बचल अछि

गजल ६३६ “नेह मोनमे बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1264–1289. संस्करणक विवरण.

गजल ६३७ — दाग हमरा भीतर रहैए

गजल ६३७ “दाग हमरा भीतर रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, भीतर, रहैए, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1290–1315. संस्करणक विवरण.

गजल ६३८ — नोर मोनसँ नहि गेल

गजल ६३८ “नोर मोनसँ नहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनसँ, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1316–1341. संस्करणक विवरण.

गजल ६३९ — नाम हमरा मोन पड़ैए

गजल ६३९ “नाम हमरा मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, पड़ैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1342–1367. संस्करणक विवरण.

गजल ६४० — प्रीत हमरा संग अछि

गजल ६४० “प्रीत हमरा संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, हमरा, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1368–1393. संस्करणक विवरण.

गजल ६४१ — नेह मोनमे रहि गेल

गजल ६४१ “नेह मोनमे रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1394–1419. संस्करणक विवरण.

गजल ६४२ — नोर मोनमे बसल अछि

गजल ६४२ “नोर मोनमे बसल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1420–1445. संस्करणक विवरण.

गजल ६४३ — नोर फेरो आयल

गजल ६४३ “नोर फेरो आयल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: फेरो, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1446–1471. संस्करणक विवरण.

गजल ६४४ — नाम मोनमे राखू

गजल ६४४ “नाम मोनमे राखू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, राखू, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1472–1497. संस्करणक विवरण.

गजल ६४५ — प्रीत फेरो जागल

गजल ६४५ “प्रीत फेरो जागल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, फेरो, जागल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1498–1523. संस्करणक विवरण.

गजल ६४६ — ध्यान मोनमे राखू

गजल ६४६ “ध्यान मोनमे राखू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ध्यान, मोनमे, राखू, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1524–1549. संस्करणक विवरण.

गजल ६४७ — मीत मोनमे खोजू

गजल ६४७ “मीत मोनमे खोजू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, खोजू, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1550–1575. संस्करणक विवरण.

गजल ६४८ — गाम मोनमे देखू

गजल ६४८ “गाम मोनमे देखू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, देखू, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1576–1601. संस्करणक विवरण.

गजल ६४९ — नोर मोनमे राखू

गजल ६४९ “नोर मोनमे राखू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, राखू, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1602–1627. संस्करणक विवरण.

गजल ६५० — ज्ञान फेरो जागल

गजल ६५० “ज्ञान फेरो जागल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, फेरो, जागल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1628–1653. संस्करणक विवरण.

गजल ६५१ — प्रीत मोनमे राखू

गजल ६५१ “प्रीत मोनमे राखू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, मोनमे, राखू, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1654–1679. संस्करणक विवरण.

गजल ६५२ — नोर मोनमे खोजू

गजल ६५२ “नोर मोनमे खोजू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, खोजू, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1680–1705. संस्करणक विवरण.

गजल ६५३ — नोर मोन संग छल

गजल ६५३ “नोर मोन संग छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1706–1731. संस्करणक विवरण.

गजल ६५४ — नाम मोन बीच छल

गजल ६५४ “नाम मोन बीच छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1732–1757. संस्करणक विवरण.

गजल ६५५ — मीत फेर दूर गेल

गजल ६५५ “मीत फेर दूर गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1758–1783. संस्करणक विवरण.

गजल ६५६ — नाम मोन संग छल

गजल ६५६ “नाम मोन संग छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1784–1809. संस्करणक विवरण.

गजल ६५७ — प्रीत मोन बीच छल

गजल ६५७ “प्रीत मोन बीच छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1810–1835. संस्करणक विवरण.

गजल ६५८ — गाम फेर दूर गेल

गजल ६५८ “गाम फेर दूर गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1836–1861. संस्करणक विवरण.

गजल ६५९ — नोर फेर मोन आय

गजल ६५९ “नोर फेर मोन आय” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1862–1887. संस्करणक विवरण.

गजल ६६० — मान मोन बीच छल

गजल ६६० “मान मोन बीच छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1888–1913. संस्करणक विवरण.

गजल ६६१ — नाम फेर लग छल

गजल ६६१ “नाम फेर लग छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1914–1939. संस्करणक विवरण.

गजल ६६२ — मीत साँझ संग आय

गजल ६६२ “मीत साँझ संग आय” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँझ, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1940–1965. संस्करणक विवरण.

गजल ६६३ — ओ नाम मोन संग अछि

गजल ६६३ “ओ नाम मोन संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1966–1991. संस्करणक विवरण.

गजल ६६४ — ओ डोर मोन पास अछि

गजल ६६४ “ओ डोर मोन पास अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1992–2017. संस्करणक विवरण.

गजल ६६५ — ओ नेह मोन बीच अछि

गजल ६६५ “ओ नेह मोन बीच अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2018–2043. संस्करणक विवरण.

गजल ६६६ — अहाँक नाम, निन्न दूर अछि

गजल ६६६ “अहाँक नाम, निन्न दूर अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँक, निन्न, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2044–2069. संस्करणक विवरण.

गजल ६६७ — ई सोर नोर संग अछि

गजल ६६७ “ई सोर नोर संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2070–2095. संस्करणक विवरण.

गजल ६६८ — नोर मौन, नेह गाढ़ अछि

गजल ६६८ “नोर मौन, नेह गाढ़ अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गाढ़, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2096–2121. संस्करणक विवरण.

गजल ६६९ — नेह एखनो मोन संग अछि

गजल ६६९ “नेह एखनो मोन संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: एखनो, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2122–2147. संस्करणक विवरण.

गजल ६७० — पुरन सोर घर बीच अछि

गजल ६७० “पुरन सोर घर बीच अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरन, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2148–2173. संस्करणक विवरण.

गजल ६७१ — अहाँक नाम आबो पास अछि

गजल ६७१ “अहाँक नाम आबो पास अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँक, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2174–2199. संस्करणक विवरण.

गजल ६७२ — पुरन दुआरि फेर मोन पड़ल

गजल ६७२ “पुरन दुआरि फेर मोन पड़ल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरन, दुआरि, पड़ल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2200–2225. संस्करणक विवरण.

गजल ६७३ — बुझल दीपक उजियार

गजल ६७३ “बुझल दीपक उजियार” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बुझल, दीपक, उजियार, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2226–2251. संस्करणक विवरण.

गजल ६७४ — मौनक सोर भीतर जागल

गजल ६७४ “मौनक सोर भीतर जागल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मौनक, भीतर, जागल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2252–2277. संस्करणक विवरण.

गजल ६७५ — दूर गेलहुँ तऽ नेह बुझलहुँ

गजल ६७५ “दूर गेलहुँ तऽ नेह बुझलहुँ” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गेलहुँ, बुझलहुँ, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2278–2303. संस्करणक विवरण.

गजल ६७६ — मौनक तान भीतर बजैत रहल

गजल ६७६ “मौनक तान भीतर बजैत रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मौनक, भीतर, बजैत, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2304–2329. संस्करणक विवरण.

गजल ६७७ — अन्हारक भोर ककरो नहि देखायल

गजल ६७७ “अन्हारक भोर ककरो नहि देखायल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अन्हारक, ककरो, देखायल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2330–2355. संस्करणक विवरण.

गजल ६७८ — मेटल नाम हमरा घर आयल

गजल ६७८ “मेटल नाम हमरा घर आयल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मेटल, हमरा, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2356–2381. संस्करणक विवरण.

गजल ६७९ — अन्हार हमरा मोन बुझायल

गजल ६७९ “अन्हार हमरा मोन बुझायल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अन्हार, हमरा, बुझायल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2382–2407. संस्करणक विवरण.

गजल ६८० — जे गेल से भीतर रहि गेल

गजल ६८० “जे गेल से भीतर रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भीतर, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2408–2433. संस्करणक विवरण.

गजल ६८१ — पानि अपन पिआस कहैत रहल

गजल ६८१ “पानि अपन पिआस कहैत रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पानि, पिआस, कहैत, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2434–2459. संस्करणक विवरण.

गजल ६८२ — सून्न दुआरि एतबे कहि गेल

गजल ६८२ “सून्न दुआरि एतबे कहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सून्न, दुआरि, एतबे, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2460–2485. संस्करणक विवरण.

गजल ६८३ — नेहक बाति रहि जाइत अछि

गजल ६८३ “नेहक बाति रहि जाइत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नेहक, बाति, जाइत, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2486–2511. संस्करणक विवरण.

गजल ६८४ — अन्हार हमरासँ गप करैत अछि

गजल ६८४ “अन्हार हमरासँ गप करैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अन्हार, हमरासँ, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2512–2537. संस्करणक विवरण.

गजल ६८५ — नोर हमरा संग जागैत रहल

गजल ६८५ “नोर हमरा संग जागैत रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, जागैत, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2538–2563. संस्करणक विवरण.

गजल ६८६ — साँझक बादो घर नहि सुतल

गजल ६८६ “साँझक बादो घर नहि सुतल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँझक, बादो, सुतल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2564–2589. संस्करणक विवरण.

गजल ६८७ — नाम मेटल, सोर नहि मेटल

गजल ६८७ “नाम मेटल, सोर नहि मेटल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मेटल, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2590–2615. संस्करणक विवरण.

गजल ६८८ — चान डूबल, नेह नहि डूबल

गजल ६८८ “चान डूबल, नेह नहि डूबल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डूबल, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2616–2641. संस्करणक विवरण.

गजल ६८९ — पार भेटल, मझधार बाँचल

गजल ६८९ “पार भेटल, मझधार बाँचल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भेटल, मझधार, बाँचल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2642–2667. संस्करणक विवरण.

गजल ६९० — सून्न गामक एकटा साँझ

गजल ६९० “सून्न गामक एकटा साँझ” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सून्न, गामक, साँझ, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2668–2693. संस्करणक विवरण.

गजल ६९१ — ठोर गुम्म, भीतर गीत

गजल ६९१ “ठोर गुम्म, भीतर गीत” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गुम्म, भीतर, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2694–2719. संस्करणक विवरण.

गजल ६९२ — भोर आयल, राति नहि गेल

गजल ६९२ “भोर आयल, राति नहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2720–2745. संस्करणक विवरण.

गजल ६९३ — जे भोर मोन पड़ैत अछि

गजल ६९३ “जे भोर मोन पड़ैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पड़ैत, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2746–2771. संस्करणक विवरण.

गजल ६९४ — जीवनक सार कहू

गजल ६९४ “जीवनक सार कहू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जीवनक, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2772–2797. संस्करणक विवरण.

गजल ६९५ — मोनक भीतर राह रहू

गजल ६९५ “मोनक भीतर राह रहू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनक, भीतर, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2798–2823. संस्करणक विवरण.

गजल ६९६ — केवल ई मान नहि

गजल ६९६ “केवल ई मान नहि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: केवल, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2824–2849. संस्करणक विवरण.

गजल ६९७ — जीवन आस जकाँ

गजल ६९७ “जीवन आस जकाँ” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जीवन, जकाँ, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2850–2875. संस्करणक विवरण.

गजल ६९८ — जीवनमे गाम बिनु

गजल ६९८ “जीवनमे गाम बिनु” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जीवनमे, बिनु, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2876–2901. संस्करणक विवरण.

गजल ६९९ — ई केवल काल छल

गजल ६९९ “ई केवल काल छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: केवल, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2902–2927. संस्करणक विवरण.

गजल ७०० — मोनक भीतर पीर कतए

गजल ७०० “मोनक भीतर पीर कतए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनक, भीतर, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2928–2953. संस्करणक विवरण.

गजल ७०१ — एतेक फेर किएक

गजल ७०१ “एतेक फेर किएक” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: एतेक, किएक, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2954–2979. संस्करणक विवरण.

गजल ७०२ — जीवनमे फूल रहैत अछि

गजल ७०२ “जीवनमे फूल रहैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जीवनमे, रहैत, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2980–3005. संस्करणक विवरण.

गजल ७०३ — एखनो चाह मोनमे अछि

गजल ७०३ “एखनो चाह मोनमे अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: एखनो, मोनमे, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3006–3032. संस्करणक विवरण.

गजल ७०४ — ओकर सोर रहि गेल

गजल ७०४ “ओकर सोर रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3033–3059. संस्करणक विवरण.

गजल ७०५ — मौन एक गीत लगैत अछि

गजल ७०५ “मौन एक गीत लगैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लगैत, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3060–3086. संस्करणक विवरण.

गजल ७०६ — नाम मोन पड़ैए

गजल ७०६ “नाम मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पड़ैए, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3087–3113. संस्करणक विवरण.

गजल ७०७ — हमर मोन रुवैए किएक?

गजल ७०७ “हमर मोन रुवैए किएक?” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रुवैए, किएक, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3114–3140. संस्करणक विवरण.

गजल ७०८ — चाह आबो बचल अछि

गजल ७०८ “चाह आबो बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3141–3167. संस्करणक विवरण.

गजल ७०९ — मोन राति नाम फेर कहैत रहल

गजल ७०९ “मोन राति नाम फेर कहैत रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, कहैत, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3168–3194. संस्करणक विवरण.

गजल ७१० — मीत आब दूर गेल; मोनमे भार शेष अछि

गजल ७१० “मीत आब दूर गेल; मोनमे भार शेष अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3195–3221. संस्करणक विवरण.

गजल ७११ — मोनमे साँचक सार एखनो अछि

गजल ७११ “मोनमे साँचक सार एखनो अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, साँचक, एखनो, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3222–3251. संस्करणक विवरण.

गजल ७१२ — भोर मोनमे अछि

गजल ७१२ “भोर मोनमे अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3252–3281. संस्करणक विवरण.

गजल ७१३ — नेहक नाम आब अछि

गजल ७१३ “नेहक नाम आब अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नेहक, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3282–3310. संस्करणक विवरण.

गजल ७१४ — नम्र मोन मान संग अछि

गजल ७१४ “नम्र मोन मान संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नम्र, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3311–3339. संस्करणक विवरण.

गजल ७१५ — मोनमे सार बचल अछि

गजल ७१५ “मोनमे सार बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3340–3368. संस्करणक विवरण.

गजल ७१६ — भोर रहि जाइत अछि

गजल ७१६ “भोर रहि जाइत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जाइत, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3369–3397. संस्करणक विवरण.

गजल ७१७ — मान बचैए एखनो

गजल ७१७ “मान बचैए एखनो” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बचैए, एखनो, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3398–3426. संस्करणक विवरण.

गजल ७१८ — आन बाट दिसैए फेर

गजल ७१८ “आन बाट दिसैए फेर” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दिसैए, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3427–3455. संस्करणक विवरण.

गजल ७१९ — मोन फेर बाट बदलैए

गजल ७१९ “मोन फेर बाट बदलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलैए, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3456–3484. संस्करणक विवरण.

गजल ७२० — साँच लेल कोन माप अछि

गजल ७२० “साँच लेल कोन माप अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3485–3513. संस्करणक विवरण.

गजल ७२१ — दिस आन साँच देख

गजल ७२१ “दिस आन साँच देख” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3514–3542. संस्करणक विवरण.

गजल ७२२ — साँच एक बेर भेल नहि

गजल ७२२ “साँच एक बेर भेल नहि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3543–3571. संस्करणक विवरण.

गजल ७२३ — नेहक सार होइत अछि

गजल ७२३ “नेहक सार होइत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नेहक, होइत, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3572–3600. संस्करणक विवरण.

गजल ७२४ — साँचक नव ढंग रहैए

गजल ७२४ “साँचक नव ढंग रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँचक, रहैए, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3601–3629. संस्करणक विवरण.

गजल ७२५ — नेह मूल सार अछि

गजल ७२५ “नेह मूल सार अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3630–3658. संस्करणक विवरण.

गजल ७२६ — मोन बीच एक नाव अछि

गजल ७२६ “मोन बीच एक नाव अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3659–3687. संस्करणक विवरण.

गजल ७२७ — जग मान जागैए

गजल ७२७ “जग मान जागैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जागैए, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3688–3716. संस्करणक विवरण.

गजल ७२८ — एक राह सार नहि

गजल ७२८ “एक राह सार नहि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3717–3745. संस्करणक विवरण.

गजल ७२९ — मुक्त राह सार अछि

गजल ७२९ “मुक्त राह सार अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मुक्त, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3746–3774. संस्करणक विवरण.

गजल ७३० — झट ज्ञान नहि

गजल ७३० “झट ज्ञान नहि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, उच्चारणाधारित, दीर्घ, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3775–3803. संस्करणक विवरण.

गजल ७३१ — आन पीर नोर मात्र नहि

गजल ७३१ “आन पीर नोर मात्र नहि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्र, उच्चारणाधारित, दीर्घ, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3804–3832. संस्करणक विवरण.

गजल ७३२ — भाव मूल थाह अछि

गजल ७३२ “भाव मूल थाह अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, दीर्घ, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3833–3861. संस्करणक विवरण.

गजल ७३३ — प्रश्न बीच गीत अछि

गजल ७३३ “प्रश्न बीच गीत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, उच्चारणाधारित, दीर्घ, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3862–3890. संस्करणक विवरण.

गजल ७३४ — साँचक सोर अछि

गजल ७३४ “साँचक सोर अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँचक, उच्चारणाधारित, दीर्घ, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3891–3919. संस्करणक विवरण.

गजल ७३५ — भीतर आस रहै छै

गजल ७३५ “भीतर आस रहै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भीतर, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3920–3948. संस्करणक विवरण.

गजल ७३६ — प्रश्न उठि गेलै, द्वार खुलै छै

गजल ७३६ “प्रश्न उठि गेलै, द्वार खुलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, गेलै, द्वार, खुलै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3949–3977. संस्करणक विवरण.

गजल ७३७ — अपन मत जाँचै छी, सार दिसै छै

गजल ७३७ “अपन मत जाँचै छी, सार दिसै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जाँचै, दिसै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3978–4006. संस्करणक विवरण.

गजल ७३८ — छूटल स्वर उठै छै, हाल बदलै छै

गजल ७३८ “छूटल स्वर उठै छै, हाल बदलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: छूटल, स्वर, बदलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4007–4035. संस्करणक विवरण.

गजल ७३९ — अंक सभ बोलै छै, सार खोजै छी

गजल ७३९ “अंक सभ बोलै छै, सार खोजै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बोलै, खोजै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4036–4064. संस्करणक विवरण.

गजल ७४० — नदी रूप बदलै छै, सार बचै छै

गजल ७४० “नदी रूप बदलै छै, सार बचै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलै, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4065–4093. संस्करणक विवरण.

गजल ७४१ — ज्ञान फेर बदलै छै, आधार जाँचै छी

गजल ७४१ “ज्ञान फेर बदलै छै, आधार जाँचै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, बदलै, आधार, जाँचै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4094–4122. संस्करणक विवरण.

गजल ७४२ — मान जखन बढ़ै छै, विश्वास रहै छै

गजल ७४२ “मान जखन बढ़ै छै, विश्वास रहै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बढ़ै, विश्वास, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4123–4151. संस्करणक विवरण.

गजल ७४३ — घाव जखन देखै छी, दाग बुझै छी

गजल ७४३ “घाव जखन देखै छी, दाग बुझै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: देखै, बुझै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4152–4180. संस्करणक विवरण.

गजल ७४४ — गौरव जखन बढ़ै छै, प्रमाण माँगै छै

गजल ७४४ “गौरव जखन बढ़ै छै, प्रमाण माँगै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गौरव, बढ़ै, प्रमाण, माँगै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4181–4209. संस्करणक विवरण.

गजल ७४५ — दोषो देखलै मोन, सार रहि जाइ छै

गजल ७४५ “दोषो देखलै मोन, सार रहि जाइ छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दोषो, देखलै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4210–4238. संस्करणक विवरण.

गजल ७४६ — रूप जखन मिललै, मेल तखन विचार भेलै

गजल ७४६ “रूप जखन मिललै, मेल तखन विचार भेलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मिललै, विचार, भेलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4239–4267. संस्करणक विवरण.

गजल ७४७ — काल्हिक आधार पूछै छी

गजल ७४७ “काल्हिक आधार पूछै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काल्हिक, आधार, पूछै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4268–4296. संस्करणक विवरण.

गजल ७४८ — भाग्येँ साँच भेलै, कोन आधार मिलै छै

गजल ७४८ “भाग्येँ साँच भेलै, कोन आधार मिलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भाग्येँ, साँच, भेलै, आधार। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4297–4325. संस्करणक विवरण.

गजल ७४९ — साँच फेर मिलै छै, सार खुलै छै

गजल ७४९ “साँच फेर मिलै छै, सार खुलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, मिलै, खुलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4326–4354. संस्करणक विवरण.

गजल ७५० — प्रश्न जखन उठै छै, सार बुझै छी

गजल ७५० “प्रश्न जखन उठै छै, सार बुझै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, बुझै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4355–4383. संस्करणक विवरण.

गजल ७५१ — भाग्य फेर जाँचै छी, आधार खोजै छी

गजल ७५१ “भाग्य फेर जाँचै छी, आधार खोजै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भाग्य, जाँचै, आधार, खोजै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4384–4412. संस्करणक विवरण.

गजल ७५२ — रूप फेर जाँचै छी, आकार खुलै छै

गजल ७५२ “रूप फेर जाँचै छी, आकार खुलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जाँचै, आकार, खुलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4413–4441. संस्करणक विवरण.

गजल ७५३ — साँच जखन कहै छी, डोर रहै छै

गजल ७५३ “साँच जखन कहै छी, डोर रहै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4442–4470. संस्करणक विवरण.

गजल ७५४ — रूप फेर बदलै छै, सार बचै छै

गजल ७५४ “रूप फेर बदलै छै, सार बचै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलै, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4471–4499. संस्करणक विवरण.

गजल ७५५ — छूटल स्वर उठै छै, मान बदलै छै

गजल ७५५ “छूटल स्वर उठै छै, मान बदलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: छूटल, स्वर, बदलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4500–4528. संस्करणक विवरण.

गजल ७५६ — प्रश्न फेर उठै छै, राह दिसै छै

गजल ७५६ “प्रश्न फेर उठै छै, राह दिसै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, दिसै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4529–4557. संस्करणक विवरण.

गजल ७५७ — अंक मात्र कहै छै, विचार जगै छै

गजल ७५७ “अंक मात्र कहै छै, विचार जगै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्र, विचार, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4558–4586. संस्करणक विवरण.

गजल ७५८ — नोर-सोर बुझै छी, हाल खुलै छै

गजल ७५८ “नोर-सोर बुझै छी, हाल खुलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बुझै, खुलै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4587–4615. संस्करणक विवरण.

गजल ७५९ — काल पार सोचै छी, भोर देखै छी

गजल ७५९ “काल पार सोचै छी, भोर देखै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सोचै, देखै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4616–4644. संस्करणक विवरण.

गजल ७६० — सत्ता फेर जाँचै छी, ध्यान रखै छी

गजल ७६० “सत्ता फेर जाँचै छी, ध्यान रखै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सत्ता, जाँचै, ध्यान, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4645–4673. संस्करणक विवरण.

गजल ७६१ — ज्ञान जखन बदलै छै, उपाय मिलै छै

गजल ७६१ “ज्ञान जखन बदलै छै, उपाय मिलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, बदलै, उपाय, मिलै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4674–4702. संस्करणक विवरण.

गजल ७६२ — दाबी फेर जाँचै छी, विश्वास बचै छै

गजल ७६२ “दाबी फेर जाँचै छी, विश्वास बचै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दाबी, जाँचै, विश्वास, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4703–4731. संस्करणक विवरण.

गजल ७६३ — मत जखन सुनै छी, प्रभाव बुझै छी

गजल ७६३ “मत जखन सुनै छी, प्रभाव बुझै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सुनै, प्रभाव, बुझै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4732–4760. संस्करणक विवरण.

गजल ७६४ — काल जखन मुड़ै छै, ढंग परखै छी

गजल ७६४ “काल जखन मुड़ै छै, ढंग परखै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मुड़ै, परखै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4761–4789. संस्करणक विवरण.

गजल ७६५ — माप जखन लगै, ज्ञान मोनमे उतरैत अछि

गजल ७६५ “माप जखन लगै, ज्ञान मोनमे उतरैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, मोनमे, उतरैत, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4790–4818. संस्करणक विवरण.

गजल ७६६ — मान जखन बचै, आस रूप धरैत अछि

गजल ७६६ “मान जखन बचै, आस रूप धरैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धरैत, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4819–4847. संस्करणक विवरण.

गजल ७६७ — घाव जखन दुखै, उपचार द्वार खोलैत अछि

गजल ७६७ “घाव जखन दुखै, उपचार द्वार खोलैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दुखै, उपचार, द्वार, खोलैत। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4848–4876. संस्करणक विवरण.

गजल ७६८ — साँच फेर खुलै, नोर सँ जुड़ैत अछि

गजल ७६८ “साँच फेर खुलै, नोर सँ जुड़ैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, खुलै, जुड़ैत, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4877–4905. संस्करणक विवरण.

गजल ७६९ — मोन फेर जागै, प्रीत संग चलैत अछि

गजल ७६९ “मोन फेर जागै, प्रीत संग चलैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जागै, प्रीत, चलैत, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4906–4934. संस्करणक विवरण.

गजल ७७० — न्याय फेर बढ़ै, माप बनि रहैत अछि

गजल ७७० “न्याय फेर बढ़ै, माप बनि रहैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: न्याय, बढ़ै, रहैत, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4935–4963. संस्करणक विवरण.

गजल ७७१ — पीरक मूल खुलै, निदान दिशा दैत अछि

गजल ७७१ “पीरक मूल खुलै, निदान दिशा दैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पीरक, खुलै, निदान, दिशा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4964–4992. संस्करणक विवरण.

गजल ७७२ — याद फेर उठै, नोर मोन फेरबैत अछि

गजल ७७२ “याद फेर उठै, नोर मोन फेरबैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: फेरबैत, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4993–5021. संस्करणक विवरण.

गजल ७७३ — प्रश्न जखन उठै, विचार केँ खोजैत अछि

गजल ७७३ “प्रश्न जखन उठै, विचार केँ खोजैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, विचार, खोजैत, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5022–5050. संस्करणक विवरण.

गजल ७७४ — पीर जखन घटै छै, आस जागि उठैए

गजल ७७४ “पीर जखन घटै छै, आस जागि उठैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जागि, उठैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5051–5079. संस्करणक विवरण.

गजल ७७५ — घर पाछाँ छुटै छै, सार मोनमे बसैए

गजल ७७५ “घर पाछाँ छुटै छै, सार मोनमे बसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाछाँ, छुटै, मोनमे, बसैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5080–5108. संस्करणक विवरण.

गजल ७७६ — कूल दूर सरै छै, तरंग संगे बहैए

गजल ७७६ “कूल दूर सरै छै, तरंग संगे बहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: तरंग, संगे, बहैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5109–5137. संस्करणक विवरण.

गजल ७७७ — बीज माटि फोड़ै छै, प्रीत माटिमे अँकुरैए

गजल ७७७ “बीज माटि फोड़ै छै, प्रीत माटिमे अँकुरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, फोड़ै, प्रीत, माटिमे। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5138–5166. संस्करणक विवरण.

गजल ७७८ — प्रश्न माथ उठै छै, ज्ञान ऊपर चढ़ैए

गजल ७७८ “प्रश्न माथ उठै छै, ज्ञान ऊपर चढ़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, ज्ञान, चढ़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5167–5195. संस्करणक विवरण.

गजल ७७९ — पीर नोर कहै छै, नेह नोरमे भीजैए

गजल ७७९ “पीर नोर कहै छै, नेह नोरमे भीजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नोरमे, भीजैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5196–5224. संस्करणक विवरण.

गजल ७८० — राति पाछाँ सरै छै, आस भोरमे फूटैए

गजल ७८० “राति पाछाँ सरै छै, आस भोरमे फूटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, पाछाँ, भोरमे, फूटैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5225–5253. संस्करणक विवरण.

गजल ७८१ — शब्द पवन चढ़ै छै, संवाद पवनमे उड़ैए

गजल ७८१ “शब्द पवन चढ़ै छै, संवाद पवनमे उड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: शब्द, चढ़ै, संवाद, पवनमे। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5254–5282. संस्करणक विवरण.

गजल ७८२ — घाव बात कहै छै, भाव नोरमे चमकैए

गजल ७८२ “घाव बात कहै छै, भाव नोरमे चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नोरमे, चमकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5283–5311. संस्करणक विवरण.

गजल ७८३ — रोष देह चढ़ै छै, क्रोध भीतर धधकैए

गजल ७८३ “रोष देह चढ़ै छै, क्रोध भीतर धधकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चढ़ै, क्रोध, भीतर, धधकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5312–5340. संस्करणक विवरण.

गजल ७८४ — सोर दूर रहै छै, राग मौनमे गमकैए

गजल ७८४ “सोर दूर रहै छै, राग मौनमे गमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मौनमे, गमकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5341–5369. संस्करणक विवरण.

गजल ७८५ — पएर रोक घेरै छै, आकाश पार निकलैए

गजल ७८५ “पएर रोक घेरै छै, आकाश पार निकलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: घेरै, आकाश, निकलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5370–5398. संस्करणक विवरण.

गजल ७८६ — पुरना बीज बचै छै, मूल जड़ि धरैए

गजल ७८६ “पुरना बीज बचै छै, मूल जड़ि धरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरना, जड़ि, धरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5399–5427. संस्करणक विवरण.

गजल ७८७ — पीर देह कहै छै, ताप देहमे सिहरैए

गजल ७८७ “पीर देह कहै छै, ताप देहमे सिहरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: देहमे, सिहरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5428–5456. संस्करणक विवरण.

गजल ७८८ — पन्ना फेर खुलै छै, नाम कालमे डोलैए

गजल ७८८ “पन्ना फेर खुलै छै, नाम कालमे डोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पन्ना, खुलै, कालमे, डोलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5457–5485. संस्करणक विवरण.

गजल ७८९ — दाबी जोर करै छै, बात साँचमे टिकैए

गजल ७८९ “दाबी जोर करै छै, बात साँचमे टिकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दाबी, साँचमे, टिकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5486–5514. संस्करणक विवरण.

गजल ७९० — दीप राति जरै छै, नेह मोनमे उजरैए

गजल ७९० “दीप राति जरै छै, नेह मोनमे उजरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, मोनमे, उजरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5515–5543. संस्करणक विवरण.

गजल ७९१ — राख छाँह धरै छै, गीत राखसँ फूलैए

गजल ७९१ “राख छाँह धरै छै, गीत राखसँ फूलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: छाँह, राखसँ, फूलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5544–5572. संस्करणक विवरण.

गजल ७९२ — रेखा नाम बनै छै, पहचान सीमा गलैए

गजल ७९२ “रेखा नाम बनै छै, पहचान सीमा गलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेखा, पहचान, सीमा, गलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5573–5601. संस्करणक विवरण.

गजल ७९३ — रूप नाम बदलै छै, स्वरूप नामसँ छूटैए

गजल ७९३ “रूप नाम बदलै छै, स्वरूप नामसँ छूटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलै, स्वरूप, नामसँ, छूटैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5602–5630. संस्करणक विवरण.

गजल ७९४ — नदी याद बहै छै, धार स्मृतिमे घुरैए

गजल ७९४ “नदी याद बहै छै, धार स्मृतिमे घुरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: स्मृतिमे, घुरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5631–5659. संस्करणक विवरण.

गजल ७९५ — लोक सोर जुड़ै छै, रंग लोकमे बजैए

गजल ७९५ “लोक सोर जुड़ै छै, रंग लोकमे बजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जुड़ै, लोकमे, बजैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5660–5688. संस्करणक विवरण.

गजल ७९६ — पएर माटि छुबै छै, देश माटिसँ जनमैए

गजल ७९६ “पएर माटि छुबै छै, देश माटिसँ जनमैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, छुबै, माटिसँ, जनमैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5689–5717. संस्करणक विवरण.

गजल ७९७ — दूर घर रहै छै, प्रीत दूरि घटैए

गजल ७९७ “दूर घर रहै छै, प्रीत दूरि घटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, दूरि, घटैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5718–5746. संस्करणक विवरण.

गजल ७९८ — डगमग मोन रहै छै, विश्वास डोर सम्हरैए

गजल ७९८ “डगमग मोन रहै छै, विश्वास डोर सम्हरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डगमग, विश्वास, सम्हरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5747–5775. संस्करणक विवरण.

गजल ७९९ — पएर मोड़ पड़ै छै, उपाय दिशा मुड़ैए

गजल ७९९ “पएर मोड़ पड़ै छै, उपाय दिशा मुड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोड़, पड़ै, उपाय, दिशा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5776–5804. संस्करणक विवरण.

गजल ८०० — गीत काल लाँघै छै, गीत अन्त लाँघैए

गजल ८०० “गीत काल लाँघै छै, गीत अन्त लाँघैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लाँघै, अन्त, लाँघैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5805–5833. संस्करणक विवरण.

गजल ८०१ — दाम रोज बदलै छै, सार बाजार जँचैए

गजल ८०१ “दाम रोज बदलै छै, सार बाजार जँचैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलै, बाजार, जँचैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5834–5862. संस्करणक विवरण.

गजल ८०२ — मेह राति बढ़ै छै, धार कूल बनैए

गजल ८०२ “मेह राति बढ़ै छै, धार कूल बनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, बढ़ै, बनैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5863–5891. संस्करणक विवरण.

गजल ८०३ — रस्सी हाथ उतरै छै, प्यास कुआँ बोलैए

गजल ८०३ “रस्सी हाथ उतरै छै, प्यास कुआँ बोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रस्सी, उतरै, प्यास, कुआँ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5892–5920. संस्करणक विवरण.

गजल ८०४ — सीटी दूर बजै छै, राह रेल चलैए

गजल ८०४ “सीटी दूर बजै छै, राह रेल चलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सीटी, चलैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5921–5949. संस्करणक विवरण.

गजल ८०५ — दीप कोन जरै छै, ज्ञान पन्ना खुलैए

गजल ८०५ “दीप कोन जरै छै, ज्ञान पन्ना खुलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, पन्ना, खुलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5950–5978. संस्करणक विवरण.

गजल ८०६ — डाक पएर चलै छै, सार चिट्ठी पहुँचैए

गजल ८०६ “डाक पएर चलै छै, सार चिट्ठी पहुँचैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चिट्ठी, पहुँचैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5979–6007. संस्करणक विवरण.

गजल ८०७ — जड़ि माटि पकड़ै छै, मूल छाँह रहैए

गजल ८०७ “जड़ि माटि पकड़ै छै, मूल छाँह रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जड़ि, माटि, पकड़ै, छाँह। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6008–6036. संस्करणक विवरण.

गजल ८०८ — माटि हाथ नमै छै, रूप चाक घुमैए

गजल ८०८ “माटि हाथ नमै छै, रूप चाक घुमैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, घुमैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6037–6065. संस्करणक विवरण.

गजल ८०९ — पर्दा धीरे उठै छै, रंग मंच धड़कैए

गजल ८०९ “पर्दा धीरे उठै छै, रंग मंच धड़कैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पर्दा, धीरे, धड़कैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6066–6094. संस्करणक विवरण.

गजल ८१० — आँखि गोल चमकै छै, नोर बालक पूछैए

गजल ८१० “आँखि गोल चमकै छै, नोर बालक पूछैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: आँखि, चमकै, बालक, पूछैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6095–6123. संस्करणक विवरण.

गजल ८११ — केश धीर बदलै छै, श्वास उमिर ढलैए

गजल ८११ “केश धीर बदलै छै, श्वास उमिर ढलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलै, श्वास, उमिर, ढलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6124–6152. संस्करणक विवरण.

गजल ८१२ — नाव नीर उतरै छै, धार सीमा काटैए

गजल ८१२ “नाव नीर उतरै छै, धार सीमा काटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उतरै, सीमा, काटैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6153–6181. संस्करणक विवरण.

गजल ८१३ — काठ रेखा जागै छै, छाप हाथ गढ़ैए

गजल ८१३ “काठ रेखा जागै छै, छाप हाथ गढ़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेखा, जागै, गढ़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6182–6210. संस्करणक विवरण.

गजल ८१४ — मेह राति पड़ै छै, नेह छप्पर बजैए

गजल ८१४ “मेह राति पड़ै छै, नेह छप्पर बजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, पड़ै, छप्पर, बजैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6211–6239. संस्करणक विवरण.

गजल ८१५ — रोटी हाथ बाँटै छै, स्वाद थारी जुड़ैए

गजल ८१५ “रोटी हाथ बाँटै छै, स्वाद थारी जुड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रोटी, बाँटै, स्वाद, थारी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6240–6268. संस्करणक विवरण.

गजल ८१६ — गवाही स्वर उठै छै, प्रमाण न्याय तौलैए

गजल ८१६ “गवाही स्वर उठै छै, प्रमाण न्याय तौलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गवाही, स्वर, प्रमाण, न्याय। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6269–6297. संस्करणक विवरण.

गजल ८१७ — स्वप्न रूप बदलै छै, रूप भोर जगबैए

गजल ८१७ “स्वप्न रूप बदलै छै, रूप भोर जगबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: स्वप्न, बदलै, जगबैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6298–6326. संस्करणक विवरण.

गजल ८१८ — बत्ती राति जरै छै, सोर नगर जागैए

गजल ८१८ “बत्ती राति जरै छै, सोर नगर जागैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बत्ती, राति, जागैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6327–6355. संस्करणक विवरण.

गजल ८१९ — आखर पात सजै छै, बोल लिपि बचैए

गजल ८१९ “आखर पात सजै छै, बोल लिपि बचैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लिपि, बचैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6356–6384. संस्करणक विवरण.

गजल ८२० — चिता शान्त पड़ै छै, फूल राख बोलैए

गजल ८२० “चिता शान्त पड़ै छै, फूल राख बोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चिता, शान्त, पड़ै, बोलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6385–6413. संस्करणक विवरण.

गजल ८२१ — दू हाथ मिलै छै, नेह बंधन जँचैए

गजल ८२१ “दू हाथ मिलै छै, नेह बंधन जँचैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मिलै, बंधन, जँचैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6414–6442. संस्करणक विवरण.

गजल ८२२ — ट्रेन गाम छोड़ै छै, द्वार पएर घुरैए

गजल ८२२ “ट्रेन गाम छोड़ै छै, द्वार पएर घुरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ट्रेन, छोड़ै, द्वार, घुरैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6443–6471. संस्करणक विवरण.

गजल ८२३ — घंटी भोर बजै छै, ज्ञान कक्षा जागैए

गजल ८२३ “घंटी भोर बजै छै, ज्ञान कक्षा जागैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: घंटी, ज्ञान, कक्षा, जागैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6472–6500. संस्करणक विवरण.

गजल ८२४ — पीर धीरे कहै छै, भेद देह सुनैए

गजल ८२४ “पीर धीरे कहै छै, भेद देह सुनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धीरे, सुनैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6501–6529. संस्करणक विवरण.

गजल ८२५ — पएर माथ रुकै छै, पार आकाश खुलैए

गजल ८२५ “पएर माथ रुकै छै, पार आकाश खुलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रुकै, आकाश, खुलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6530–6558. संस्करणक विवरण.

गजल ८२६ — घड़ी भोर बजै छै, काल फेर सरकै

गजल ८२६ “घड़ी भोर बजै छै, काल फेर सरकै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: घड़ी, सरकै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6559–6587. संस्करणक विवरण.

गजल ८२७ — धान बीज सुकै छै, अगिला ऋतु टिकै

गजल ८२७ “धान बीज सुकै छै, अगिला ऋतु टिकै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सुकै, अगिला, टिकै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6588–6616. संस्करणक विवरण.

गजल ८२८ — दर्पण भोर चमकै छै, चेहरा रेखा उभरै

गजल ८२८ “दर्पण भोर चमकै छै, चेहरा रेखा उभरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दर्पण, चमकै, चेहरा, रेखा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6617–6645. संस्करणक विवरण.

गजल ८२९ — तान सूता तनै छै, बाना रंग जुड़ै

गजल ८२९ “तान सूता तनै छै, बाना रंग जुड़ै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सूता, बाना, जुड़ै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6646–6674. संस्करणक विवरण.

गजल ८३० — ढोल दूर बजै छै, रंग झण्डा लहरै

गजल ८३० “ढोल दूर बजै छै, रंग झण्डा लहरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: झण्डा, लहरै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6675–6703. संस्करणक विवरण.

गजल ८३१ — पएर ढलान चढ़ै छै, कुहरा दूर सरै

गजल ८३१ “पएर ढलान चढ़ै छै, कुहरा दूर सरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ढलान, चढ़ै, कुहरा, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6704–6732. संस्करणक विवरण.

गजल ८३२ — मधुमाछि भोर उड़ै छै, फूल गन्ध खोजै

गजल ८३२ “मधुमाछि भोर उड़ै छै, फूल गन्ध खोजै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मधुमाछि, उड़ै, गन्ध, खोजै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6733–6761. संस्करणक विवरण.

गजल ८३३ — चन्द्र राति चमकै छै, छाँह धीरे चढ़ै

गजल ८३३ “चन्द्र राति चमकै छै, छाँह धीरे चढ़ै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चन्द्र, राति, चमकै, छाँह। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6762–6790. संस्करणक विवरण.

गजल ८३४ — पुल नदी लाँघै छै, दू कूल जुड़ै

गजल ८३४ “पुल नदी लाँघै छै, दू कूल जुड़ै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लाँघै, जुड़ै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6791–6819. संस्करणक विवरण.

गजल ८३५ — सीसा टाइप सजै छै, स्याही रोल चढ़ै

गजल ८३५ “सीसा टाइप सजै छै, स्याही रोल चढ़ै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सीसा, टाइप, स्याही, चढ़ै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6820–6848. संस्करणक विवरण.

गजल ८३६ — रेडियो भोर बजै छै, दूर स्वर अबै

गजल ८३६ “रेडियो भोर बजै छै, दूर स्वर अबै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेडियो, स्वर, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6849–6877. संस्करणक विवरण.

गजल ८३७ — पुरना फोटो खुलै छै, चेहरा मुस्की रहै

गजल ८३७ “पुरना फोटो खुलै छै, चेहरा मुस्की रहै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरना, फोटो, खुलै, चेहरा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6878–6906. संस्करणक विवरण.

गजल ८३८ — ताला द्वार लटकै छै, हाथ धातु घुमै

गजल ८३८ “ताला द्वार लटकै छै, हाथ धातु घुमै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ताला, द्वार, लटकै, धातु। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6907–6935. संस्करणक विवरण.

गजल ८३९ — सूखल पात सरसरै छै, चिनगी छोट उठै

गजल ८३९ “सूखल पात सरसरै छै, चिनगी छोट उठै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सूखल, सरसरै, चिनगी, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6936–6964. संस्करणक विवरण.

गजल ८४० — नहर खेत मुड़ै छै, नीर रेखा चलै

गजल ८४० “नहर खेत मुड़ै छै, नीर रेखा चलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मुड़ै, रेखा, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6965–6993. संस्करणक विवरण.

गजल ८४१ — पत्थर रेखा रहै छै, आखर धीरे घिसै

गजल ८४१ “पत्थर रेखा रहै छै, आखर धीरे घिसै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पत्थर, रेखा, धीरे, घिसै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6994–7022. संस्करणक विवरण.

गजल ८४२ — बाँस हवा डोलै छै, जड़ि माटि थामै

गजल ८४२ “बाँस हवा डोलै छै, जड़ि माटि थामै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाँस, डोलै, जड़ि, माटि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7023–7051. संस्करणक विवरण.

गजल ८४३ — पतंग छत उठै छै, डोर हाथ तनै

गजल ८४३ “पतंग छत उठै छै, डोर हाथ तनै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पतंग, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7052–7080. संस्करणक विवरण.

गजल ८४४ — चूल्हा भोर जरै छै, दालि गन्ध फैलै

गजल ८४४ “चूल्हा भोर जरै छै, दालि गन्ध फैलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चूल्हा, दालि, गन्ध, फैलै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7081–7109. संस्करणक विवरण.

गजल ८४५ — राति आकाश खुलै छै, तारा झिलमिल करै

गजल ८४५ “राति आकाश खुलै छै, तारा झिलमिल करै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, आकाश, खुलै, तारा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7110–7138. संस्करणक विवरण.

गजल ८४६ — पाखी झुण्ड उड़ै छै, आकाश रेखा बनै

गजल ८४६ “पाखी झुण्ड उड़ै छै, आकाश रेखा बनै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाखी, झुण्ड, उड़ै, आकाश। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7139–7167. संस्करणक विवरण.

गजल ८४७ — पैडल पएर घुमै छै, चक्का राह धरै

गजल ८४७ “पैडल पएर घुमै छै, चक्का राह धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पैडल, घुमै, चक्का, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7168–7196. संस्करणक विवरण.

गजल ८४८ — नमक दाना पड़ै छै, दालि स्वाद बदलै

गजल ८४८ “नमक दाना पड़ै छै, दालि स्वाद बदलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दाना, पड़ै, दालि, स्वाद। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7197–7225. संस्करणक विवरण.

गजल ८४९ — भोर अजान उठै छै, घण्टा दूर बजै

गजल ८४९ “भोर अजान उठै छै, घण्टा दूर बजै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अजान, घण्टा, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7226–7254. संस्करणक विवरण.

गजल ८५० — लहर भोर उठै छै, क्षितिज रंग बदलै

गजल ८५० “लहर भोर उठै छै, क्षितिज रंग बदलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: क्षितिज, बदलै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7255–7283. संस्करणक विवरण.

गजल ८५१ — भोर कूप जागै छै, नीर तल चमकै

गजल ८५१ “भोर कूप जागै छै, नीर तल चमकै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जागै, चमकै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7284–7312. संस्करणक विवरण.

गजल ८५२ — पोथी पन्ना खुलै छै, छोट टिप्पणी जगै

गजल ८५२ “पोथी पन्ना खुलै छै, छोट टिप्पणी जगै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पोथी, पन्ना, खुलै, टिप्पणी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7313–7341. संस्करणक विवरण.

गजल ८५३ — सीटी दूर बजै छै, लोहा ताल धरै

गजल ८५३ “सीटी दूर बजै छै, लोहा ताल धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सीटी, लोहा, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7342–7370. संस्करणक विवरण.

गजल ८५४ — माटि हाथ नमै छै, रूप बीच उगै

गजल ८५४ “माटि हाथ नमै छै, रूप बीच उगै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7371–7399. संस्करणक विवरण.

गजल ८५५ — मेह काँच पड़ै छै, बूँद रेखा बनै

गजल ८५५ “मेह काँच पड़ै छै, बूँद रेखा बनै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काँच, पड़ै, बूँद, रेखा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7400–7428. संस्करणक विवरण.

गजल ८५६ — कलम डारि जुड़ै छै, नव फूल खुलै

गजल ८५६ “कलम डारि जुड़ै छै, नव फूल खुलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डारि, जुड़ै, खुलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7429–7457. संस्करणक विवरण.

गजल ८५७ — न्याय कक्ष खुलै छै, प्रश्न क्रम धरै

गजल ८५७ “न्याय कक्ष खुलै छै, प्रश्न क्रम धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: न्याय, कक्ष, खुलै, प्रश्न। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7458–7486. संस्करणक विवरण.

गजल ८५८ — राति नदी बहै छै, मचान दीप जरै

गजल ८५८ “राति नदी बहै छै, मचान दीप जरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, मचान, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7487–7515. संस्करणक विवरण.

गजल ८५९ — भोर विद्यालय खुलै छै, आँगन हँसी भरै

गजल ८५९ “भोर विद्यालय खुलै छै, आँगन हँसी भरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: विद्यालय, खुलै, आँगन, हँसी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7516–7544. संस्करणक विवरण.

गजल ८६० — बाढ़ नीर उतरै छै, खेत माटि दिसै

गजल ८६० “बाढ़ नीर उतरै छै, खेत माटि दिसै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाढ़, उतरै, माटि, दिसै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7545–7573. संस्करणक विवरण.

गजल ८६१ — झोरा काँध चढ़ै छै, माय नोर धरै

गजल ८६१ “झोरा काँध चढ़ै छै, माय नोर धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: झोरा, काँध, चढ़ै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7574–7602. संस्करणक विवरण.

गजल ८६२ — पुरना बक्सा खुलै छै, कागज गन्ध उठै

गजल ८६२ “पुरना बक्सा खुलै छै, कागज गन्ध उठै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरना, बक्सा, खुलै, कागज। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7603–7631. संस्करणक विवरण.

गजल ८६३ — भोर बाड़ी खुलै छै, पात ओस चमकै

गजल ८६३ “भोर बाड़ी खुलै छै, पात ओस चमकै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाड़ी, खुलै, चमकै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7632–7660. संस्करणक विवरण.

गजल ८६४ — दुपहर सूरज चढ़ै छै, गाछ छाह सिमटै

गजल ८६४ “दुपहर सूरज चढ़ै छै, गाछ छाह सिमटै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दुपहर, सूरज, चढ़ै, सिमटै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7661–7689. संस्करणक विवरण.

गजल ८६५ — मेह छत पड़ै छै, नाली नीर बहै

गजल ८६५ “मेह छत पड़ै छै, नाली नीर बहै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पड़ै, नाली, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7690–7718. संस्करणक विवरण.

गजल ८६६ — बोर्ड बीच सजै छै, पहिल चाल खुलै

गजल ८६६ “बोर्ड बीच सजै छै, पहिल चाल खुलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बोर्ड, पहिल, खुलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7719–7747. संस्करणक विवरण.

गजल ८६७ — बाजार भोर खुलै छै, दाना पलड़ा धरै

गजल ८६७ “बाजार भोर खुलै छै, दाना पलड़ा धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाजार, खुलै, दाना, पलड़ा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7748–7776. संस्करणक विवरण.

गजल ८६८ — नाव घाट लगै छै, नीर तेज बहै

गजल ८६८ “नाव घाट लगै छै, नीर तेज बहै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7777–7805. संस्करणक विवरण.

गजल ८६९ — साँझ आँगन सजै छै, पहिल लौ उठै

गजल ८६९ “साँझ आँगन सजै छै, पहिल लौ उठै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँझ, आँगन, पहिल, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7806–7834. संस्करणक विवरण.

गजल ८७० — कागज सफेद रहै छै, स्याही रेखा उतरै

गजल ८७० “कागज सफेद रहै छै, स्याही रेखा उतरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कागज, सफेद, स्याही, रेखा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7835–7863. संस्करणक विवरण.

गजल ८७१ — देहरी भोर चमकै छै, घर बाहर मिलै

गजल ८७१ “देहरी भोर चमकै छै, घर बाहर मिलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: देहरी, चमकै, बाहर, मिलै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7864–7892. संस्करणक विवरण.

गजल ८७२ — ढोल थाप पड़ै छै, बीच मौन रहै

गजल ८७२ “ढोल थाप पड़ै छै, बीच मौन रहै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पड़ै, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7893–7921. संस्करणक विवरण.

गजल ८७३ — छत गमला रहै छै, बीज माटि धरै

गजल ८७३ “छत गमला रहै छै, बीज माटि धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गमला, माटि, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7922–7950. संस्करणक विवरण.

गजल ८७४ — पुरना टीला रहै छै, गाछ छाह पड़ै

गजल ८७४ “पुरना टीला रहै छै, गाछ छाह पड़ै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरना, टीला, पड़ै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7951–7979. संस्करणक विवरण.

गजल ८७५ — राति झंझा बहै छै, दूर रेखा उगै

गजल ८७५ “राति झंझा बहै छै, दूर रेखा उगै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, झंझा, रेखा, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7980–8008. संस्करणक विवरण.

गजल ८७६ — पुरान रेखा खुलै, राह नक्शा बतबैए

गजल ८७६ “पुरान रेखा खुलै, राह नक्शा बतबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरान, रेखा, खुलै, नक्शा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8009–8037. संस्करणक विवरण.

गजल ८७७ — लोहारक श्वास उठै, आग भट्ठी धधकैए

गजल ८७७ “लोहारक श्वास उठै, आग भट्ठी धधकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लोहारक, श्वास, भट्ठी, धधकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8038–8066. संस्करणक विवरण.

गजल ८७८ — नीर बहै, भोर जाल पसारैए

गजल ८७८ “नीर बहै, भोर जाल पसारैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पसारैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8067–8095. संस्करणक विवरण.

गजल ८७९ — कचहरी सोझाँ छाह पसारैए

गजल ८७९ “कचहरी सोझाँ छाह पसारैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कचहरी, सोझाँ, पसारैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8096–8124. संस्करणक विवरण.

गजल ८८० — दीप मन्द जरै, राति सम्हारैए

गजल ८८० “दीप मन्द जरै, राति सम्हारैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मन्द, राति, सम्हारैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8125–8153. संस्करणक विवरण.

गजल ८८१ — धान डोलै, बिजुका तकैए

गजल ८८१ “धान डोलै, बिजुका तकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डोलै, बिजुका, तकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8154–8182. संस्करणक विवरण.

गजल ८८२ — छोट कोन रहै, टिकट पहुँचबैए

गजल ८८२ “छोट कोन रहै, टिकट पहुँचबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: टिकट, पहुँचबैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8183–8211. संस्करणक विवरण.

गजल ८८३ — धूलि बीच अंक रहै, पत्थर गनैए

गजल ८८३ “धूलि बीच अंक रहै, पत्थर गनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धूलि, पत्थर, गनैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8212–8240. संस्करणक विवरण.

गजल ८८४ — ताल नीर झलकै, कुमुद खिलैए

गजल ८८४ “ताल नीर झलकै, कुमुद खिलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: झलकै, कुमुद, खिलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8241–8269. संस्करणक विवरण.

गजल ८८५ — गन्ध उठै, मसाला पिसैए

गजल ८८५ “गन्ध उठै, मसाला पिसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गन्ध, मसाला, पिसैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8270–8298. संस्करणक विवरण.

गजल ८८६ — काँच हँसै, लहठी खनकैए

गजल ८८६ “काँच हँसै, लहठी खनकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काँच, हँसै, लहठी, खनकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8299–8327. संस्करणक विवरण.

गजल ८८७ — पएर उठै, सीढ़ी चढ़बैए

गजल ८८७ “पएर उठै, सीढ़ी चढ़बैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सीढ़ी, चढ़बैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8328–8356. संस्करणक विवरण.

गजल ८८८ — आँगन थाप धरै, ढेंकी कुटैए

गजल ८८८ “आँगन थाप धरै, ढेंकी कुटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: आँगन, ढेंकी, कुटैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8357–8385. संस्करणक विवरण.

गजल ८८९ — ओस काँपै, पाला जमैए

गजल ८८९ “ओस काँपै, पाला जमैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काँपै, पाला, जमैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8386–8414. संस्करणक विवरण.

गजल ८९० — समुद्र बीच सूइ बतबैए

गजल ८९० “समुद्र बीच सूइ बतबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: समुद्र, बतबैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8415–8443. संस्करणक विवरण.

गजल ८९१ — जंगल साँस ले, पगडंडी मुड़ैए

गजल ८९१ “जंगल साँस ले, पगडंडी मुड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जंगल, साँस, पगडंडी, मुड़ैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8444–8472. संस्करणक विवरण.

गजल ८९२ — तिनका जुड़ै, घोंसला बसैए

गजल ८९२ “तिनका जुड़ै, घोंसला बसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: तिनका, जुड़ै, घोंसला, बसैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8473–8501. संस्करणक विवरण.

गजल ८९३ — कपड़ा भीजै, रंगरेज रँगैए

गजल ८९३ “कपड़ा भीजै, रंगरेज रँगैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कपड़ा, भीजै, रंगरेज, रँगैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8502–8530. संस्करणक विवरण.

गजल ८९४ — गाम गोल बैसै, सभा सुनैए

गजल ८९४ “गाम गोल बैसै, सभा सुनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बैसै, सुनैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8531–8559. संस्करणक विवरण.

गजल ८९५ — धूलि हटै, अलमारी खुलबैए

गजल ८९५ “धूलि हटै, अलमारी खुलबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धूलि, अलमारी, खुलबैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8560–8588. संस्करणक विवरण.

गजल ८९६ — लहर चढ़ै, पदचिह्न मिटैए

गजल ८९६ “लहर चढ़ै, पदचिह्न मिटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चढ़ै, पदचिह्न, मिटैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8589–8617. संस्करणक विवरण.

गजल ८९७ — धूलि उठै, घोड़ा दौड़ैए

गजल ८९७ “धूलि उठै, घोड़ा दौड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धूलि, घोड़ा, दौड़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8618–8646. संस्करणक विवरण.

गजल ८९८ — रेखा बोलै, चित्र उभरैए

गजल ८९८ “रेखा बोलै, चित्र उभरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेखा, बोलै, चित्र, उभरैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8647–8675. संस्करणक विवरण.

गजल ८९९ — श्वास उठै, शंख गुँजैए

गजल ८९९ “श्वास उठै, शंख गुँजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: श्वास, गुँजैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8676–8704. संस्करणक विवरण.

गजल ९०० — नीर पार खुलै, क्षितिज पसारैए

गजल ९०० “नीर पार खुलै, क्षितिज पसारैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, क्षितिज, पसारैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8705–8733. संस्करणक विवरण.

गजल ९०१ — पोखर नीर चमकै, आस मखान खिलैए

गजल ९०१ “पोखर नीर चमकै, आस मखान खिलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पोखर, चमकै, मखान, खिलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8734–8762. संस्करणक विवरण.

गजल ९०२ — ओस पात चमकै, नेह पात महकैए

गजल ९०२ “ओस पात चमकै, नेह पात महकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चमकै, महकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8763–8791. संस्करणक विवरण.

गजल ९०३ — सूत जुड़ै, चाव सुजनी सजैए

गजल ९०३ “सूत जुड़ै, चाव सुजनी सजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जुड़ै, सुजनी, सजैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8792–8820. संस्करणक विवरण.

गजल ९०४ — रेशा तनै, मान सिक्की जुड़ैए

गजल ९०४ “रेशा तनै, मान सिक्की जुड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेशा, सिक्की, जुड़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8821–8849. संस्करणक विवरण.

गजल ९०५ — पाखी खेल उठै, गीत सामा गबैए

गजल ९०५ “पाखी खेल उठै, गीत सामा गबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाखी, सामा, गबैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8850–8878. संस्करणक विवरण.

गजल ९०६ — व्रत कथा खुलै, स्वर कथा गुँजैए

गजल ९०६ “व्रत कथा खुलै, स्वर कथा गुँजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: व्रत, खुलै, स्वर, गुँजैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8879–8907. संस्करणक विवरण.

गजल ९०७ — आँगन रेखा खुलै, चाव अरिपन खिलैए

गजल ९०७ “आँगन रेखा खुलै, चाव अरिपन खिलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: आँगन, रेखा, खुलै, अरिपन। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8908–8936. संस्करणक विवरण.

गजल ९०८ — भोर गन्ध उठै, आस मंजर महकैए

गजल ९०८ “भोर गन्ध उठै, आस मंजर महकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गन्ध, मंजर, महकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8937–8965. संस्करणक विवरण.

गजल ९०९ — पीयर खेत डोलै, प्रीत सरसों हँसैए

गजल ९०९ “पीयर खेत डोलै, प्रीत सरसों हँसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पीयर, डोलै, प्रीत, सरसों। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8966–8994. संस्करणक विवरण.

गजल ९१० — गरमी घटै, श्वास पंखा डोलैए

गजल ९१० “गरमी घटै, श्वास पंखा डोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गरमी, श्वास, पंखा, डोलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8995–9023. संस्करणक विवरण.

गजल ९११ — माटि पकै, ताल घड़ा झनकैए

गजल ९११ “माटि पकै, ताल घड़ा झनकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, घड़ा, झनकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9024–9052. संस्करणक विवरण.

गजल ९१२ — कपड़ा फाटै, नेह सुई सिअैए

गजल ९१२ “कपड़ा फाटै, नेह सुई सिअैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कपड़ा, फाटै, सिअैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9053–9081. संस्करणक विवरण.

गजल ९१३ — डारि हिलै, चाव झूला डोलैए

गजल ९१३ “डारि हिलै, चाव झूला डोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डारि, हिलै, झूला, डोलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9082–9110. संस्करणक विवरण.

गजल ९१४ — पुरान नीर चमकै, भोर कुण्ड चमकैए

गजल ९१४ “पुरान नीर चमकै, भोर कुण्ड चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरान, चमकै, कुण्ड, चमकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9111–9139. संस्करणक विवरण.

गजल ९१५ — माथ सजै, मान पाग दमकैए

गजल ९१५ “माथ सजै, मान पाग दमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दमकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9140–9168. संस्करणक विवरण.

गजल ९१६ — भोर थारी सजै, प्रीत भोज सजैए

गजल ९१६ “भोर थारी सजै, प्रीत भोज सजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: थारी, प्रीत, सजैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9169–9197. संस्करणक विवरण.

गजल ९१७ — कागज देह जरै, आस लालटेन जरैए

गजल ९१७ “कागज देह जरै, आस लालटेन जरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कागज, लालटेन, जरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9198–9226. संस्करणक विवरण.

गजल ९१८ — अन्हार घनै, आस जुगनू चमकैए

गजल ९१८ “अन्हार घनै, आस जुगनू चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अन्हार, जुगनू, चमकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9227–9255. संस्करणक विवरण.

गजल ९१९ — फूल झरै, नोर मौलश्री झरैए

गजल ९१९ “फूल झरै, नोर मौलश्री झरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मौलश्री, झरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9256–9284. संस्करणक विवरण.

गजल ९२० — पाथर बाट बजै, ताल खड़ाऊँ बजैए

गजल ९२० “पाथर बाट बजै, ताल खड़ाऊँ बजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाथर, खड़ाऊँ, बजैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9285–9313. संस्करणक विवरण.

गजल ९२१ — ओस पड़ै, भोर जाल चमकैए

गजल ९२१ “ओस पड़ै, भोर जाल चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पड़ै, चमकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9314–9342. संस्करणक विवरण.

गजल ९२२ — धान रोपै, गीत रोपनी गबैए

गजल ९२२ “धान रोपै, गीत रोपनी गबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रोपै, रोपनी, गबैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9343–9371. संस्करणक विवरण.

गजल ९२३ — घाट पएर चलै, नोर गगरी छलकैए

गजल ९२३ “घाट पएर चलै, नोर गगरी छलकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गगरी, छलकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9372–9400. संस्करणक विवरण.

गजल ९२४ — मेघ हटै, रंग इन्द्रधनुष उभरैए

गजल ९२४ “मेघ हटै, रंग इन्द्रधनुष उभरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: इन्द्रधनुष, उभरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9401–9429. संस्करणक विवरण.

गजल ९२५ — गाछ डोलै, पार पछिया बहैए

गजल ९२५ “गाछ डोलै, पार पछिया बहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डोलै, पछिया, बहैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9430–9458. संस्करणक विवरण.

गजल ९२६ — सूत तनै, सार चर्खा घूमैए

गजल ९२६ “सूत तनै, सार चर्खा घूमैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चर्खा, घूमैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9459–9487. संस्करणक विवरण.

गजल ९२७ — धान जुटै, मान बखार भरैए

गजल ९२७ “धान जुटै, मान बखार भरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जुटै, बखार, भरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9488–9516. संस्करणक विवरण.

गजल ९२८ — माटि कटै, ज्ञान फाल चमकैए

गजल ९२८ “माटि कटै, ज्ञान फाल चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, ज्ञान, चमकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9517–9545. संस्करणक विवरण.

गजल ९२९ — नीर हटै, भोर चर उभरैए

गजल ९२९ “नीर हटै, भोर चर उभरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उभरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9546–9574. संस्करणक विवरण.

गजल ९३० — पोखर गहिरै, आस कमलबीज पकैए

गजल ९३० “पोखर गहिरै, आस कमलबीज पकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पोखर, गहिरै, कमलबीज, पकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9575–9603. संस्करणक विवरण.

गजल ९३१ — पाथर टकरै, नोर चकमक झिलमिलैए

गजल ९३१ “पाथर टकरै, नोर चकमक झिलमिलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाथर, टकरै, चकमक, झिलमिलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9604–9632. संस्करणक विवरण.

गजल ९३२ — रेशा जुड़ै, प्रीत पाटी बुनैए

गजल ९३२ “रेशा जुड़ै, प्रीत पाटी बुनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेशा, जुड़ै, प्रीत, पाटी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9633–9661. संस्करणक विवरण.

गजल ९३३ — तार काँपै, गीत सारंगी रुवैए

गजल ९३३ “तार काँपै, गीत सारंगी रुवैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काँपै, सारंगी, रुवैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9662–9690. संस्करणक विवरण.

गजल ९३४ — पात लहरै, भोर तिलकोर लहरैए

गजल ९३४ “पात लहरै, भोर तिलकोर लहरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लहरै, तिलकोर, लहरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9691–9719. संस्करणक विवरण.

गजल ९३५ — लोक जुटै, मान सभा जुटैए

गजल ९३५ “लोक जुटै, मान सभा जुटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जुटै, जुटैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9720–9748. संस्करणक विवरण.

गजल ९३६ — पात खुलै, ज्ञान पंजी बोलैए

गजल ९३६ “पात खुलै, ज्ञान पंजी बोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, ज्ञान, पंजी, बोलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9749–9777. संस्करणक विवरण.

गजल ९३७ — रस्सी तनै, चाव डोल उतरैए

गजल ९३७ “रस्सी तनै, चाव डोल उतरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रस्सी, उतरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9778–9806. संस्करणक विवरण.

गजल ९३८ — आग धधकै, आस ईंट पकैए

गजल ९३८ “आग धधकै, आस ईंट पकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धधकै, पकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9807–9835. संस्करणक विवरण.

गजल ९३९ — फूल खुलै, प्रीत चंपा महकैए

गजल ९३९ “फूल खुलै, प्रीत चंपा महकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, प्रीत, चंपा, महकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9836–9864. संस्करणक विवरण.

गजल ९४० — दाना जुटै, मान कोठी भरैए

गजल ९४० “दाना जुटै, मान कोठी भरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दाना, जुटै, कोठी, भरैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9865–9893. संस्करणक विवरण.

गजल ९४१ — नील फूल डोलै, चाव अलसी हँसैए

गजल ९४१ “नील फूल डोलै, चाव अलसी हँसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डोलै, अलसी, हँसैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9894–9922. संस्करणक विवरण.

गजल ९४२ — श्वास मिलै, गीत बाँसुरी सुसकैए

गजल ९४२ “श्वास मिलै, गीत बाँसुरी सुसकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: श्वास, मिलै, बाँसुरी, सुसकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9923–9951. संस्करणक विवरण.

गजल ९४३ — पाथर भीजै, भोर झरना गबैए

गजल ९४३ “पाथर भीजै, भोर झरना गबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाथर, भीजै, झरना, गबैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9952–9980. संस्करणक विवरण.

गजल ९४४ — भोर खुलै, आस कुहासा हटैए

गजल ९४४ “भोर खुलै, आस कुहासा हटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, कुहासा, हटैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9981–10009. संस्करणक विवरण.

गजल ९४५ — राति ढलै, नोर चाँद झुकैए

गजल ९४५ “राति ढलै, नोर चाँद झुकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, चाँद, झुकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10010–10038. संस्करणक विवरण.

गजल ९४६ — लहर हटै, आस सीपी खुलैए

गजल ९४६ “लहर हटै, आस सीपी खुलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सीपी, खुलैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10039–10067. संस्करणक विवरण.

गजल ९४७ — धूलि उठै, भोर गोधूलि उठैए

गजल ९४७ “धूलि उठै, भोर गोधूलि उठैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धूलि, गोधूलि, उठैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10068–10096. संस्करणक विवरण.

गजल ९४८ — खेत बँटै, मान मेड़ बोलैए

गजल ९४८ “खेत बँटै, मान मेड़ बोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बँटै, मेड़, बोलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10097–10125. संस्करणक विवरण.

गजल ९४९ — छत गरमै, चाव धूप उतरैए

गजल ९४९ “छत गरमै, चाव धूप उतरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गरमै, उतरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10126–10154. संस्करणक विवरण.

गजल ९५० — दूर रेखा खुलै, पार क्षितिज फैलैए

गजल ९५० “दूर रेखा खुलै, पार क्षितिज फैलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेखा, खुलै, क्षितिज, फैलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10155–10183. संस्करणक विवरण.

गजल ९५१ — राख अँगार खुलै, अँगार बचैए

गजल ९५१ “राख अँगार खुलै, अँगार बचैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अँगार, खुलै, बचैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10184–10212. संस्करणक विवरण.

गजल ९५२ — बीज अँकुर खुलै, मान फेर उठैए

गजल ९५२ “बीज अँकुर खुलै, मान फेर उठैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अँकुर, खुलै, उठैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10213–10241. संस्करणक विवरण.

गजल ९५३ — ओखरि मूसर खुलै, ताल धुनि बजैए

गजल ९५३ “ओखरि मूसर खुलै, ताल धुनि बजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ओखरि, मूसर, खुलै, धुनि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10242–10270. संस्करणक विवरण.

गजल ९५४ — कनेर फूल खुलै, आस फुलैए

गजल ९५४ “कनेर फूल खुलै, आस फुलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कनेर, खुलै, फुलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10271–10299. संस्करणक विवरण.

गजल ९५५ — छप्पर बरखा खुलै, नोर टपकि खसैए

गजल ९५५ “छप्पर बरखा खुलै, नोर टपकि खसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: छप्पर, बरखा, खुलै, टपकि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10300–10328. संस्करणक विवरण.

गजल ९५६ — भूसी पवन खुलै, राह दूर उड़ैए

गजल ९५६ “भूसी पवन खुलै, राह दूर उड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भूसी, खुलै, उड़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10329–10357. संस्करणक विवरण.

गजल ९५७ — कछार कटान खुलै, मूल कटैए

गजल ९५७ “कछार कटान खुलै, मूल कटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कछार, कटान, खुलै, कटैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10358–10386. संस्करणक विवरण.

गजल ९५८ — बिचड़ा खेत खुलै, रंग फेर हरियैए

गजल ९५८ “बिचड़ा खेत खुलै, रंग फेर हरियैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बिचड़ा, खुलै, हरियैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10387–10415. संस्करणक विवरण.

गजल ९५९ — काई पोखर खुलै, नाम जल तिरैए

गजल ९५९ “काई पोखर खुलै, नाम जल तिरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पोखर, खुलै, तिरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10416–10444. संस्करणक विवरण.

गजल ९६० — बाती दीप खुलै, पीर जरैए

गजल ९६० “बाती दीप खुलै, पीर जरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाती, खुलै, जरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10445–10473. संस्करणक विवरण.

गजल ९६१ — सूत तकली खुलै, बात सूत तनैए

गजल ९६१ “सूत तकली खुलै, बात सूत तनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: तकली, खुलै, तनैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10474–10502. संस्करणक विवरण.

गजल ९६२ — माटिक सोंध खुलै, रूप महकैए

गजल ९६२ “माटिक सोंध खुलै, रूप महकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटिक, सोंध, खुलै, महकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10503–10531. संस्करणक विवरण.

गजल ९६३ — बबूल काँट खुलै, मेल भीतर चुभैए

गजल ९६३ “बबूल काँट खुलै, मेल भीतर चुभैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बबूल, काँट, खुलै, भीतर। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10532–10560. संस्करणक विवरण.

गजल ९६४ — ओसार साँझ खुलै, अँगार फेर जगैए

गजल ९६४ “ओसार साँझ खुलै, अँगार फेर जगैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ओसार, साँझ, खुलै, अँगार। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10561–10589. संस्करणक विवरण.

गजल ९६५ — बान्ह जल खुलै, मान टिकैए

गजल ९६५ “बान्ह जल खुलै, मान टिकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बान्ह, खुलै, टिकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10590–10618. संस्करणक विवरण.

गजल ९६६ — कुट्टी खलिहान खुलै, ताल धूरि उड़ैए

गजल ९६६ “कुट्टी खलिहान खुलै, ताल धूरि उड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कुट्टी, खलिहान, खुलै, धूरि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10619–10647. संस्करणक विवरण.

गजल ९६७ — काँच चूड़ी खुलै, आस मृदु खनकैए

गजल ९६७ “काँच चूड़ी खुलै, आस मृदु खनकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काँच, चूड़ी, खुलै, मृदु। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10648–10676. संस्करणक विवरण.

गजल ९६८ — बेल लता खुलै, नोर लहरैए

गजल ९६८ “बेल लता खुलै, नोर लहरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, लहरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10677–10705. संस्करणक विवरण.

गजल ९६९ — नाल जल खुलै, राह नीचाँ बहैए

गजल ९६९ “नाल जल खुलै, राह नीचाँ बहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, नीचाँ, बहैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10706–10734. संस्करणक विवरण.

गजल ९७० — चन्द्र ज्योति खुलै, मूल दूर पसरैए

गजल ९७० “चन्द्र ज्योति खुलै, मूल दूर पसरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चन्द्र, ज्योति, खुलै, पसरैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10735–10763. संस्करणक विवरण.

गजल ९७१ — पीतल लोटा खुलै, रंग चमकैए

गजल ९७१ “पीतल लोटा खुलै, रंग चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पीतल, लोटा, खुलै, चमकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10764–10792. संस्करणक विवरण.

गजल ९७२ — पोथीक पन्ना खुलै, नाम धीरे सरकैए

गजल ९७२ “पोथीक पन्ना खुलै, नाम धीरे सरकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पोथीक, पन्ना, खुलै, धीरे। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10793–10821. संस्करणक विवरण.

गजल ९७३ — रुई सूत खुलै, पीर ऊपर उड़ैए

गजल ९७३ “रुई सूत खुलै, पीर ऊपर उड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, उड़ैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10822–10850. संस्करणक विवरण.

गजल ९७४ — धूरिक बाट खुलै, बात उड़ैए

गजल ९७४ “धूरिक बाट खुलै, बात उड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धूरिक, खुलै, उड़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10851–10879. संस्करणक विवरण.

गजल ९७५ — साँकल द्वार खुलै, रूप राति खनकैए

गजल ९७५ “साँकल द्वार खुलै, रूप राति खनकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँकल, द्वार, खुलै, राति। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10880–10908. संस्करणक विवरण.

गजल ९७६ — सिलौट लोढ़ा बजै, सोर धीमे थिरैए

गजल ९७६ “सिलौट लोढ़ा बजै, सोर धीमे थिरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सिलौट, लोढ़ा, धीमे, थिरैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10909–10937. संस्करणक विवरण.

गजल ९७७ — बाँस दउरा जुड़ै, मान सँचि उठैए

गजल ९७७ “बाँस दउरा जुड़ै, मान सँचि उठैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाँस, दउरा, जुड़ै, सँचि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10938–10966. संस्करणक विवरण.

गजल ९७८ — तराजू पल्ला झुकै, विचार तोलि देखैए

गजल ९७८ “तराजू पल्ला झुकै, विचार तोलि देखैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: तराजू, पल्ला, झुकै, विचार। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10967–10995. संस्करणक विवरण.

गजल ९७९ — हँसुआ धार चमकै, सार फेर दमकैए

गजल ९७९ “हँसुआ धार चमकै, सार फेर दमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हँसुआ, चमकै, दमकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10996–11024. संस्करणक विवरण.

गजल ९८० — जाँता दाना पिसै, गान मृदु बजैए

गजल ९८० “जाँता दाना पिसै, गान मृदु बजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जाँता, दाना, पिसै, मृदु। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11025–11053. संस्करणक विवरण.

गजल ९८१ — कोदो बालि डोलै, उमंग साँझ धरि डोलैए

गजल ९८१ “कोदो बालि डोलै, उमंग साँझ धरि डोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कोदो, बालि, डोलै, उमंग। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11054–11082. संस्करणक विवरण.

गजल ९८२ — छत्ता मधु भरै, आस मधु सँ भरैए

गजल ९८२ “छत्ता मधु भरै, आस मधु सँ भरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: छत्ता, भरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11083–11111. संस्करणक विवरण.

गजल ९८३ — तितली रंग उड़ै, रंग पाँख पसारैए

गजल ९८३ “तितली रंग उड़ै, रंग पाँख पसारैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: तितली, उड़ै, पाँख, पसारैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11112–11140. संस्करणक विवरण.

गजल ९८४ — घोंघा पथ सरकै, पहिचान पाछाँ रहि जाइए

गजल ९८४ “घोंघा पथ सरकै, पहिचान पाछाँ रहि जाइए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: घोंघा, सरकै, पहिचान, पाछाँ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11141–11169. संस्करणक विवरण.

गजल ९८५ — कछुआ नीर काटै, राह नीरमे बहैए

गजल ९८५ “कछुआ नीर काटै, राह नीरमे बहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कछुआ, काटै, नीरमे, बहैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11170–11198. संस्करणक विवरण.

गजल ९८६ — सनई फूल डोलै, रंग पवनमे लहरैए

गजल ९८६ “सनई फूल डोलै, रंग पवनमे लहरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डोलै, पवनमे, लहरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11199–11227. संस्करणक विवरण.

गजल ९८७ — कनकौआ ऊपर उठै, डोर अकास चढ़ि जाइए

गजल ९८७ “कनकौआ ऊपर उठै, डोर अकास चढ़ि जाइए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कनकौआ, अकास, चढ़ि, जाइए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11228–11256. संस्करणक विवरण.

गजल ९८८ — सूप दाना छाँटै, धान सूपमे छँटैए

गजल ९८८ “सूप दाना छाँटै, धान सूपमे छँटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दाना, छाँटै, सूपमे, छँटैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11257–11285. संस्करणक विवरण.

गजल ९८९ — झाँपी भीतर सजै, नाम भीतर बचि रहैए

गजल ९८९ “झाँपी भीतर सजै, नाम भीतर बचि रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: झाँपी, भीतर, रहैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11286–11314. संस्करणक विवरण.

गजल ९९० — ताड़पात आखर खुलै, ज्ञान पातमे बोलैए

गजल ९९० “ताड़पात आखर खुलै, ज्ञान पातमे बोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ताड़पात, खुलै, ज्ञान, पातमे। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11315–11343. संस्करणक विवरण.

गजल ९९१ — पीपर छाँह पसरै, राह छाँहमे टिकि रहैए

गजल ९९१ “पीपर छाँह पसरै, राह छाँहमे टिकि रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पीपर, छाँह, पसरै, छाँहमे। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11344–11372. संस्करणक विवरण.

गजल ९९२ — खजूर रस टपकै, आस रस टपकैत रहैए

गजल ९९२ “खजूर रस टपकै, आस रस टपकैत रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खजूर, टपकै, टपकैत, रहैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11373–11401. संस्करणक विवरण.

गजल ९९३ — बकुल फूल झरै, सुवास भोरमे महकि उठैए

गजल ९९३ “बकुल फूल झरै, सुवास भोरमे महकि उठैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बकुल, सुवास, भोरमे, महकि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11402–11430. संस्करणक विवरण.

गजल ९९४ — ओल माटि फोड़ै, मूल माटि फोड़ि निकलैए

गजल ९९४ “ओल माटि फोड़ै, मूल माटि फोड़ि निकलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, फोड़ै, फोड़ि, निकलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11431–11459. संस्करणक विवरण.

गजल ९९५ — अरुई पात डोलै, बात पवनमे झूमैए

गजल ९९५ “अरुई पात डोलै, बात पवनमे झूमैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अरुई, डोलै, पवनमे, झूमैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11460–11488. संस्करणक विवरण.

गजल ९९६ — मड़ुआ बालि झुकै, बाल नमि जाइए

गजल ९९६ “मड़ुआ बालि झुकै, बाल नमि जाइए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मड़ुआ, बालि, झुकै, जाइए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11489–11517. संस्करणक विवरण.

गजल ९९७ — कुरथी दालि पकै, दाल भानसमे महकैए

गजल ९९७ “कुरथी दालि पकै, दाल भानसमे महकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कुरथी, दालि, भानसमे, महकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11518–11546. संस्करणक विवरण.

गजल ९९८ — तिल घानी घुमै, हाथ घानी संग चलैए

गजल ९९८ “तिल घानी घुमै, हाथ घानी संग चलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: घानी, घुमै, चलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11547–11575. संस्करणक विवरण.

गजल ९९९ — मकई भुट्टा खुलै, धान दाना झरि पड़ैए

गजल ९९९ “मकई भुट्टा खुलै, धान दाना झरि पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भुट्टा, खुलै, दाना, पड़ैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11576–11604. संस्करणक विवरण.

गजल १००० — हजारम गजल खुलै, गीत आगाँ गुँजैत रहैए

गजल १००० “हजारम गजल खुलै, गीत आगाँ गुँजैत रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।

सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हजारम, खुलै, आगाँ, गुँजैत। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11605–11633. संस्करणक विवरण.

स्रोत-संस्करण आ पाठक आधार

देल PDF: Diwan-e-Videha_Khand_2.pdf. संगमे देल Word फाइल सेहो देखल गेल: Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1000_Actual_Scansion_Certified_6x9.docx.

सन्दर्भ: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, विदेह, 2026 कॉपीराइट दर्ज देल संस्करण। एकर अर्थ प्रथम प्रकाशन नहि।

परिचयक पाठक आधार: शीर्षक, कॉपीराइट, उपलब्ध विषय-सूची तथा बीच आ अन्तक चुनल अंश। Word पाठक जाँचयोग्य स्थान (दस्तावेजक क्रममे गैर-खाली अनुच्छेद, तालिकाक पाठ सहित): 15–36; 99–124; 11605–11633. निष्कर्षित अनुच्छेद: 11633.

PDF पहिचान45470a19ab0f50ab25d340884fb38348f6067f3a21baccb591cc78e8ffe272ea

मुख्य पृष्ठक सम्बन्धित पोथी →