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गजेन्द्र ठाकुर / दस स्रोत-संस्करण

दीवान-ए-विदेह खण्ड २

गजेन्द्र ठाकुर · गजल-संग्रह / संगीतमय रूप · 1200 PDF पृष्ठ

पोथी आ ओकर विषय

खण्ड २ आब खण्ड १क कातमे पूर्ण दोसर खण्ड रूपमे अछि: आरम्भमे गजल ५९२–११८१ लेल वर्णक्रमानुसार देवनागरी अनुक्रमणिका अछि, तकर बाद गजलक संरचना, छन्द-विधान आ पद्यकेँ गजल कहल जाएबाक न्यूनतम योग्यता पर तीन औपचारिक लेख। मुख्य भाग ५९० क्रमांकित गजलसँ दीवानकेँ आगाँ बढ़बैत अछि।

एकर विशेषता प्रत्येक गजलक संग देल संगीतमय रूप अछि। तेँ पृष्ठ प्रत्येक गजलकेँ दुहरी इकाइ मानि पढ़ैत अछि: साहित्यिक पाठ आ प्रस्तुति-दिशि खुलल संगीत-नोट। खण्ड २ केवल खण्ड १क संख्यात्मक विस्तार नहि; ई अनुक्रमणिका, छन्द-जाँच आ संगीतिक प्रस्तुति संग बेसी खोजयोग्य आ प्रस्तुतियोग्य खण्ड अछि।

अलग-अलग पाठ

594 इकाइ चर्चा

एहि चर्चामे स्रोत-इकाइक समापन, जतय लागू अछि, शामिल अछि। प्रत्येक प्रविष्टिमे कथात्मक वा गीतात्मक सार आ सम्पादकीय व्याख्या अलग अनुच्छेदमे अछि, आ देल Word संस्करणक स्थानक सन्दर्भ अछि। अंग्रेजी शीर्षक परिचयात्मक अनुवाद अछि।

सन्दर्भमे दस्तावेजक क्रमसँ गैर-खाली Word अनुच्छेद गानल गेल अछि, तालिकाक पाठ सहित; ई मुद्रित पृष्ठ-संख्या नहि। ई AI-सहायतासँ तैयार सम्पादकीय चर्चा अछि; नामित मानवीय समीक्षाक अभिलेख नहि अछि।

वर्णक्रमानुसार अनुक्रमणिका — गजल ५९२–११८१

ई आरम्भिक इकाइ गजल ५९२–११८१क वर्णक्रमानुसार देवनागरी अनुक्रमणिका दर्ज करैत अछि। एहि कारण खण्ड २ केवल क्रमागत गजल-संग्रह नहि रहैत, बल्कि खोजयोग्य दीवान बनैत अछि: शीर्षक, संख्या आ वर्णक्रम पाठ-यन्त्रक हिस्सा बनैत अछि।

एहि सारक स्वर गीतात्मक नहि, ग्रन्थसूचीपरक अछि। पाठक क्रमसँ वा देवनागरी शीर्षक-क्रमसँ पोथीमे प्रवेश कऽ सकैत छथि; उद्धरण, अध्यापन आ कोनो गजलपर पुनः लौटबाक लेल ई महत्त्वपूर्ण सुविधा अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15–16. संस्करणक विवरण.

गजलमे बहर, वजन आ समान मिसरा

“मे बहर, वजन आ समान मिसरा” केँ एतए Diwan-e-Videha Khand 2क स्रोत-सीमित इकाइ मानि पढ़ल गेल अछि। चर्चा देल दस्तावेजक क्रम, शीर्षक, तत्क्षण स्रोत-स्थान आ दोहराइत शब्दावलीपर आधारित अछि; बाहरी कथानक-दावा जोड़ल नहि गेल अछि।

सार रूपमे ई प्रविष्टि देखबैत अछि जे ई इकाइ पोथीक formal ghazal poetics केँ कोना आगाँ बढ़बैत अछि: स्थानीय बिम्ब वा प्रसंग स्मृति, रूप आ सामाजिक निरीक्षणक पैघ रचनामे जुड़ैत अछि। देल अनुच्छेद-सीमा पाठककेँ ठीक स्रोत-खंडपर घुमा दैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 17–38. संस्करणक विवरण.

छन्द-विधान

“छन्द-विधान” केँ एतए Diwan-e-Videha Khand 2क स्रोत-सीमित इकाइ मानि पढ़ल गेल अछि। चर्चा देल दस्तावेजक क्रम, शीर्षक, तत्क्षण स्रोत-स्थान आ दोहराइत शब्दावलीपर आधारित अछि; बाहरी कथानक-दावा जोड़ल नहि गेल अछि।

सार रूपमे ई प्रविष्टि देखबैत अछि जे ई इकाइ पोथीक formal ghazal poetics केँ कोना आगाँ बढ़बैत अछि: स्थानीय बिम्ब वा प्रसंग स्मृति, रूप आ सामाजिक निरीक्षणक पैघ रचनामे जुड़ैत अछि। देल अनुच्छेद-सीमा पाठककेँ ठीक स्रोत-खंडपर घुमा दैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 39–69. संस्करणक विवरण.

पद्य केँ गजल कहल जाएबाक न्यूनतम औपचारिक योग्यता

“पद्य केँ गजल कहल जाएबाक न्यूनतम औपचारिक योग्यता” केँ एतए Diwan-e-Videha Khand 2क स्रोत-सीमित इकाइ मानि पढ़ल गेल अछि। चर्चा देल दस्तावेजक क्रम, शीर्षक, तत्क्षण स्रोत-स्थान आ दोहराइत शब्दावलीपर आधारित अछि; बाहरी कथानक-दावा जोड़ल नहि गेल अछि।

सार रूपमे ई प्रविष्टि देखबैत अछि जे ई इकाइ पोथीक formal ghazal poetics केँ कोना आगाँ बढ़बैत अछि: स्थानीय बिम्ब वा प्रसंग स्मृति, रूप आ सामाजिक निरीक्षणक पैघ रचनामे जुड़ैत अछि। देल अनुच्छेद-सीमा पाठककेँ ठीक स्रोत-खंडपर घुमा दैत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 70–98. संस्करणक विवरण.

गजल ५९२ — साँचक मान

गजल ५९२, “साँचक मान,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 101–126. संस्करणक विवरण.

गजल ५९३ — ओकर नाम नोर छल

गजल ५९३, “ओकर नाम नोर छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 127–152. संस्करणक विवरण.

गजल ५९४ — मोन बीच रात रहल

गजल ५९४, “मोन बीच रात रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 153–178. संस्करणक विवरण.

गजल ५९५ — मीत मोन प्राण छल

गजल ५९५, “मीत मोन प्राण छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 179–204. संस्करणक विवरण.

गजल ५९६ — नेहक अन्तिम छोर

गजल ५९६, “नेहक अन्तिम छोर,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 205–236. संस्करणक विवरण.

गजल ५९७ — अहाँ बिनु रहल

गजल ५९७, “अहाँ बिनु रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 237–268. संस्करणक विवरण.

गजल ५९८ — जे मोनसँ नै गेल

गजल ५९८, “जे मोनसँ नै गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 269–300. संस्करणक विवरण.

गजल ५९९ — अहाँ मोनमे रहि गेल

गजल ५९९, “अहाँ मोनमे रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 301–326. संस्करणक विवरण.

गजल ६०० — जे नोर मोनमे जागल अछि

गजल ६००, “जे नोर मोनमे जागल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 327–352. संस्करणक विवरण.

गजल ६०१ — जे हमर संग रहैत अछि

गजल ६०१, “जे हमर संग रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 353–378. संस्करणक विवरण.

गजल ६०२ — ओ नोर हमरा मोन पड़ैए

गजल ६०२, “ओ नोर हमरा मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 379–407. संस्करणक विवरण.

गजल ६०३ — ओ भोर हमरा मोन पड़ैए

गजल ६०३, “ओ भोर हमरा मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 408–433. संस्करणक विवरण.

गजल ६०४ — प्रीत हमरा भीतर अछि

गजल ६०४, “प्रीत हमरा भीतर अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 434–459. संस्करणक विवरण.

गजल ६०५ — दाग मोनसँ नहि जाइए

गजल ६०५, “दाग मोनसँ नहि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 460–485. संस्करणक विवरण.

गजल ६०६ — मीत फेर नहि भेटल

गजल ६०६, “मीत फेर नहि भेटल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 486–511. संस्करणक विवरण.

गजल ६०७ — नोर मोनमे बसल अछि

गजल ६०७, “नोर मोनमे बसल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 512–537. संस्करणक विवरण.

गजल ६०८ — नोर अहाँ बिनु रहि गेल

गजल ६०८, “नोर अहाँ बिनु रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 538–563. संस्करणक विवरण.

गजल ६०९ — मीत मोनमे रहि जाइए

गजल ६०९, “मीत मोनमे रहि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 564–589. संस्करणक विवरण.

गजल ६१० — भूल मोनसँ नहि गेल

गजल ६१०, “भूल मोनसँ नहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 590–615. संस्करणक विवरण.

गजल ६११ — नेह एखनो बचल अछि

गजल ६११, “नेह एखनो बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 616–641. संस्करणक विवरण.

गजल ६१२ — ओ ठोर फेरो मोन पड़ैए

गजल ६१२, “ओ ठोर फेरो मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 642–667. संस्करणक विवरण.

गजल ६१३ — जे नोर हमरा छोड़ि नहि गेल

गजल ६१३, “जे नोर हमरा छोड़ि नहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 668–693. संस्करणक विवरण.

गजल ६१४ — नेहक गान बचल अछि

गजल ६१४, “नेहक गान बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 694–719. संस्करणक विवरण.

गजल ६१५ — ओ नाम एखनो मोनमे अछि

गजल ६१५, “ओ नाम एखनो मोनमे अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 720–745. संस्करणक विवरण.

गजल ६१६ — आस भीतर रहैए

गजल ६१६, “आस भीतर रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 746–771. संस्करणक विवरण.

गजल ६१७ — आस संग चलैत अछि

गजल ६१७, “आस संग चलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 772–797. संस्करणक विवरण.

गजल ६१८ — आस अहाँक पाछाँ रहैए

गजल ६१८, “आस अहाँक पाछाँ रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 798–823. संस्करणक विवरण.

गजल ६१९ — जे नोर आबो मोनमे अछि

गजल ६१९, “जे नोर आबो मोनमे अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 824–849. संस्करणक विवरण.

गजल ६२० — नेह राति भरि जागैत अछि

गजल ६२०, “नेह राति भरि जागैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 850–875. संस्करणक विवरण.

गजल ६२१ — आस आबो संग रहैत अछि

गजल ६२१, “आस आबो संग रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 876–901. संस्करणक विवरण.

गजल ६२२ — जे नोर अहाँक पाछाँ रहि गेल

गजल ६२२, “जे नोर अहाँक पाछाँ रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 902–927. संस्करणक विवरण.

गजल ६२३ — ओ भोर मोनमे रहि गेल

गजल ६२३, “ओ भोर मोनमे रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 928–953. संस्करणक विवरण.

गजल ६२४ — ओ गान हमरा संग अछि

गजल ६२४, “ओ गान हमरा संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 954–979. संस्करणक विवरण.

गजल ६२५ — ओ नोर हमरा मोन पड़ैए

गजल ६२५, “ओ नोर हमरा मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 980–1005. संस्करणक विवरण.

गजल ६२६ — ओ नेह मोनमे बचल अछि

गजल ६२६, “ओ नेह मोनमे बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1006–1031. संस्करणक विवरण.

गजल ६२७ — ओ नाम आबो संग अछि

गजल ६२७, “ओ नाम आबो संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1032–1057. संस्करणक विवरण.

गजल ६२८ — ओ नेह राति भरि जागैत अछि

गजल ६२८, “ओ नेह राति भरि जागैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1058–1083. संस्करणक विवरण.

गजल ६२९ — ओ नेह हमरा भीतर रहैए

गजल ६२९, “ओ नेह हमरा भीतर रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1084–1109. संस्करणक विवरण.

गजल ६३० — मीत फेर नहि भेटल

गजल ६३०, “मीत फेर नहि भेटल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1110–1135. संस्करणक विवरण.

गजल ६३१ — ओ नोर मोनसँ नहि गेल

गजल ६३१, “ओ नोर मोनसँ नहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1136–1161. संस्करणक विवरण.

गजल ६३२ — ओ नोर मोनमे बसल अछि

गजल ६३२, “ओ नोर मोनमे बसल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1162–1187. संस्करणक विवरण.

गजल ६३३ — नोर हमरा संग अछि

गजल ६३३, “नोर हमरा संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1188–1213. संस्करणक विवरण.

गजल ६३४ — नाम मोनमे रहि गेल

गजल ६३४, “नाम मोनमे रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1214–1239. संस्करणक विवरण.

गजल ६३५ — मीत आबो संग अछि

गजल ६३५, “मीत आबो संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1240–1265. संस्करणक विवरण.

गजल ६३६ — नेह मोनमे बचल अछि

गजल ६३६, “नेह मोनमे बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1266–1291. संस्करणक विवरण.

गजल ६३७ — दाग हमरा भीतर रहैए

गजल ६३७, “दाग हमरा भीतर रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1292–1317. संस्करणक विवरण.

गजल ६३८ — नोर मोनसँ नहि गेल

गजल ६३८, “नोर मोनसँ नहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1318–1343. संस्करणक विवरण.

गजल ६३९ — नाम हमरा मोन पड़ैए

गजल ६३९, “नाम हमरा मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1344–1369. संस्करणक विवरण.

गजल ६४० — प्रीत हमरा संग अछि

गजल ६४०, “प्रीत हमरा संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1370–1395. संस्करणक विवरण.

गजल ६४१ — नेह मोनमे रहि गेल

गजल ६४१, “नेह मोनमे रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1396–1421. संस्करणक विवरण.

गजल ६४२ — नोर मोनमे बसल अछि

गजल ६४२, “नोर मोनमे बसल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1422–1447. संस्करणक विवरण.

गजल ६४३ — नोर फेरो आयल

गजल ६४३, “नोर फेरो आयल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1448–1473. संस्करणक विवरण.

गजल ६४४ — नाम मोनमे राखू

गजल ६४४, “नाम मोनमे राखू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1474–1499. संस्करणक विवरण.

गजल ६४५ — प्रीत फेरो जागल

गजल ६४५, “प्रीत फेरो जागल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1500–1525. संस्करणक विवरण.

गजल ६४६ — ध्यान मोनमे राखू

गजल ६४६, “ध्यान मोनमे राखू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1526–1551. संस्करणक विवरण.

गजल ६४७ — मीत मोनमे खोजू

गजल ६४७, “मीत मोनमे खोजू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1552–1577. संस्करणक विवरण.

गजल ६४८ — गाम मोनमे देखू

गजल ६४८, “गाम मोनमे देखू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1578–1603. संस्करणक विवरण.

गजल ६४९ — नोर मोनमे राखू

गजल ६४९, “नोर मोनमे राखू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1604–1629. संस्करणक विवरण.

गजल ६५० — ज्ञान फेरो जागल

गजल ६५०, “ज्ञान फेरो जागल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1630–1655. संस्करणक विवरण.

गजल ६५१ — प्रीत मोनमे राखू

गजल ६५१, “प्रीत मोनमे राखू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1656–1681. संस्करणक विवरण.

गजल ६५२ — नोर मोनमे खोजू

गजल ६५२, “नोर मोनमे खोजू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1682–1707. संस्करणक विवरण.

गजल ६५३ — नोर मोन संग छल

गजल ६५३, “नोर मोन संग छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1708–1733. संस्करणक विवरण.

गजल ६५४ — नाम मोन बीच छल

गजल ६५४, “नाम मोन बीच छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1734–1759. संस्करणक विवरण.

गजल ६५५ — मीत फेर दूर गेल

गजल ६५५, “मीत फेर दूर गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1760–1785. संस्करणक विवरण.

गजल ६५६ — नाम मोन संग छल

गजल ६५६, “नाम मोन संग छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1786–1811. संस्करणक विवरण.

गजल ६५७ — प्रीत मोन बीच छल

गजल ६५७, “प्रीत मोन बीच छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1812–1837. संस्करणक विवरण.

गजल ६५८ — गाम फेर दूर गेल

गजल ६५८, “गाम फेर दूर गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1838–1863. संस्करणक विवरण.

गजल ६५९ — नोर फेर मोन आय

गजल ६५९, “नोर फेर मोन आय,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1864–1889. संस्करणक विवरण.

गजल ६६० — मान मोन बीच छल

गजल ६६०, “मान मोन बीच छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1890–1915. संस्करणक विवरण.

गजल ६६१ — नाम फेर लग छल

गजल ६६१, “नाम फेर लग छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1916–1941. संस्करणक विवरण.

गजल ६६२ — मीत साँझ संग आय

गजल ६६२, “मीत साँझ संग आय,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1942–1967. संस्करणक विवरण.

गजल ६६३ — ओ नाम मोन संग अछि

गजल ६६३, “ओ नाम मोन संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1968–1993. संस्करणक विवरण.

गजल ६६४ — ओ डोर मोन पास अछि

गजल ६६४, “ओ डोर मोन पास अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 1994–2019. संस्करणक विवरण.

गजल ६६५ — ओ नेह मोन बीच अछि

गजल ६६५, “ओ नेह मोन बीच अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2020–2045. संस्करणक विवरण.

गजल ६६६ — अहाँक नाम, निन्न दूर अछि

गजल ६६६, “अहाँक नाम, निन्न दूर अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2046–2071. संस्करणक विवरण.

गजल ६६७ — ई सोर नोर संग अछि

गजल ६६७, “ई सोर नोर संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2072–2097. संस्करणक विवरण.

गजल ६६८ — नोर मौन, नेह गाढ़ अछि

गजल ६६८, “नोर मौन, नेह गाढ़ अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2098–2123. संस्करणक विवरण.

गजल ६६९ — नेह एखनो मोन संग अछि

गजल ६६९, “नेह एखनो मोन संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2124–2149. संस्करणक विवरण.

गजल ६७० — पुरन सोर घर बीच अछि

गजल ६७०, “पुरन सोर घर बीच अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2150–2175. संस्करणक विवरण.

गजल ६७१ — अहाँक नाम आबो पास अछि

गजल ६७१, “अहाँक नाम आबो पास अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2176–2201. संस्करणक विवरण.

गजल ६७२ — पुरन दुआरि फेर मोन पड़ल

गजल ६७२, “पुरन दुआरि फेर मोन पड़ल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2202–2227. संस्करणक विवरण.

गजल ६७३ — बुझल दीपक उजियार

गजल ६७३, “बुझल दीपक उजियार,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2228–2253. संस्करणक विवरण.

गजल ६७४ — मौनक सोर भीतर जागल

गजल ६७४, “मौनक सोर भीतर जागल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2254–2279. संस्करणक विवरण.

गजल ६७५ — दूर गेलहुँ तऽ नेह बुझलहुँ

गजल ६७५, “दूर गेलहुँ तऽ नेह बुझलहुँ,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2280–2305. संस्करणक विवरण.

गजल ६७६ — मौनक तान भीतर बजैत रहल

गजल ६७६, “मौनक तान भीतर बजैत रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2306–2331. संस्करणक विवरण.

गजल ६७७ — अन्हारक भोर ककरो नहि देखायल

गजल ६७७, “अन्हारक भोर ककरो नहि देखायल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2332–2357. संस्करणक विवरण.

गजल ६७८ — मेटल नाम हमरा घर आयल

गजल ६७८, “मेटल नाम हमरा घर आयल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2358–2383. संस्करणक विवरण.

गजल ६७९ — अन्हार हमरा मोन बुझायल

गजल ६७९, “अन्हार हमरा मोन बुझायल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2384–2409. संस्करणक विवरण.

गजल ६८० — जे गेल से भीतर रहि गेल

गजल ६८०, “जे गेल से भीतर रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2410–2435. संस्करणक विवरण.

गजल ६८१ — पानि अपन पिआस कहैत रहल

गजल ६८१, “पानि अपन पिआस कहैत रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2436–2461. संस्करणक विवरण.

गजल ६८२ — सून्न दुआरि एतबे कहि गेल

गजल ६८२, “सून्न दुआरि एतबे कहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2462–2487. संस्करणक विवरण.

गजल ६८३ — नेहक बाति रहि जाइत अछि

गजल ६८३, “नेहक बाति रहि जाइत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2488–2513. संस्करणक विवरण.

गजल ६८४ — अन्हार हमरासँ गप करैत अछि

गजल ६८४, “अन्हार हमरासँ गप करैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2514–2539. संस्करणक विवरण.

गजल ६८५ — नोर हमरा संग जागैत रहल

गजल ६८५, “नोर हमरा संग जागैत रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2540–2565. संस्करणक विवरण.

गजल ६८६ — साँझक बादो घर नहि सुतल

गजल ६८६, “साँझक बादो घर नहि सुतल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2566–2591. संस्करणक विवरण.

गजल ६८७ — नाम मेटल, सोर नहि मेटल

गजल ६८७, “नाम मेटल, सोर नहि मेटल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2592–2617. संस्करणक विवरण.

गजल ६८८ — चान डूबल, नेह नहि डूबल

गजल ६८८, “चान डूबल, नेह नहि डूबल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2618–2643. संस्करणक विवरण.

गजल ६८९ — पार भेटल, मझधार बाँचल

गजल ६८९, “पार भेटल, मझधार बाँचल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2644–2669. संस्करणक विवरण.

गजल ६९० — सून्न गामक एकटा साँझ

गजल ६९०, “सून्न गामक एकटा साँझ,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2670–2695. संस्करणक विवरण.

गजल ६९१ — ठोर गुम्म, भीतर गीत

गजल ६९१, “ठोर गुम्म, भीतर गीत,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2696–2721. संस्करणक विवरण.

गजल ६९२ — भोर आयल, राति नहि गेल

गजल ६९२, “भोर आयल, राति नहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2722–2747. संस्करणक विवरण.

गजल ६९३ — जे भोर मोन पड़ैत अछि

गजल ६९३, “जे भोर मोन पड़ैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2748–2773. संस्करणक विवरण.

गजल ६९४ — जीवनक सार कहू

गजल ६९४, “जीवनक सार कहू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2774–2799. संस्करणक विवरण.

गजल ६९५ — मोनक भीतर राह रहू

गजल ६९५, “मोनक भीतर राह रहू,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2800–2825. संस्करणक विवरण.

गजल ६९६ — केवल ई मान नहि

गजल ६९६, “केवल ई मान नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2826–2851. संस्करणक विवरण.

गजल ६९७ — जीवन आस जकाँ

गजल ६९७, “जीवन आस जकाँ,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2852–2877. संस्करणक विवरण.

गजल ६९८ — जीवनमे गाम बिनु

गजल ६९८, “जीवनमे गाम बिनु,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2878–2903. संस्करणक विवरण.

गजल ६९९ — ई केवल काल छल

गजल ६९९, “ई केवल काल छल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2904–2929. संस्करणक विवरण.

गजल ७०० — मोनक भीतर पीर कतए

गजल ७००, “मोनक भीतर पीर कतए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2930–2955. संस्करणक विवरण.

गजल ७०१ — एतेक फेर किएक

गजल ७०१, “एतेक फेर किएक,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2956–2981. संस्करणक विवरण.

गजल ७०२ — जीवनमे फूल रहैत अछि

गजल ७०२, “जीवनमे फूल रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 2982–3007. संस्करणक विवरण.

गजल ७०३ — एखनो चाह मोनमे अछि

गजल ७०३, “एखनो चाह मोनमे अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3008–3034. संस्करणक विवरण.

गजल ७०४ — ओकर सोर रहि गेल

गजल ७०४, “ओकर सोर रहि गेल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3035–3061. संस्करणक विवरण.

गजल ७०५ — मौन एक गीत लगैत अछि

गजल ७०५, “मौन एक गीत लगैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3062–3088. संस्करणक विवरण.

गजल ७०६ — नाम मोन पड़ैए

गजल ७०६, “नाम मोन पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3089–3115. संस्करणक विवरण.

गजल ७०७ — हमर मोन रुवैए किएक?

गजल ७०७, “हमर मोन रुवैए किएक?,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3116–3142. संस्करणक विवरण.

गजल ७०८ — चाह आबो बचल अछि

गजल ७०८, “चाह आबो बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3143–3169. संस्करणक विवरण.

गजल ७०९ — मोन राति नाम फेर कहैत रहल

गजल ७०९, “मोन राति नाम फेर कहैत रहल,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3170–3196. संस्करणक विवरण.

गजल ७१० — मीत आब दूर गेल; मोनमे भार शेष अछि

गजल ७१०, “मीत आब दूर गेल; मोनमे भार शेष अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3197–3223. संस्करणक विवरण.

गजल ७११ — मोनमे साँचक सार एखनो अछि

गजल ७११, “मोनमे साँचक सार एखनो अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3224–3253. संस्करणक विवरण.

गजल ७१२ — भोर मोनमे अछि

गजल ७१२, “भोर मोनमे अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3254–3283. संस्करणक विवरण.

गजल ७१३ — नेहक नाम आब अछि

गजल ७१३, “नेहक नाम आब अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3284–3312. संस्करणक विवरण.

गजल ७१४ — नम्र मोन मान संग अछि

गजल ७१४, “नम्र मोन मान संग अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3313–3341. संस्करणक विवरण.

गजल ७१५ — मोनमे सार बचल अछि

गजल ७१५, “मोनमे सार बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3342–3370. संस्करणक विवरण.

गजल ७१६ — भोर रहि जाइत अछि

गजल ७१६, “भोर रहि जाइत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3371–3399. संस्करणक विवरण.

गजल ७१७ — मान बचैए एखनो

गजल ७१७, “मान बचैए एखनो,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3400–3428. संस्करणक विवरण.

गजल ७१८ — आन बाट दिसैए फेर

गजल ७१८, “आन बाट दिसैए फेर,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3429–3457. संस्करणक विवरण.

गजल ७१९ — मोन फेर बाट बदलैए

गजल ७१९, “मोन फेर बाट बदलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3458–3486. संस्करणक विवरण.

गजल ७२० — साँच लेल कोन माप अछि

गजल ७२०, “साँच लेल कोन माप अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3487–3515. संस्करणक विवरण.

गजल ७२१ — दिस आन साँच देख

गजल ७२१, “दिस आन साँच देख,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3516–3544. संस्करणक विवरण.

गजल ७२२ — साँच एक बेर भेल नहि

गजल ७२२, “साँच एक बेर भेल नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3545–3573. संस्करणक विवरण.

गजल ७२३ — नेहक सार होइत अछि

गजल ७२३, “नेहक सार होइत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3574–3602. संस्करणक विवरण.

गजल ७२४ — साँचक नव ढंग रहैए

गजल ७२४, “साँचक नव ढंग रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3603–3631. संस्करणक विवरण.

गजल ७२५ — नेह मूल सार अछि

गजल ७२५, “नेह मूल सार अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3632–3660. संस्करणक विवरण.

गजल ७२६ — मोन बीच एक नाव अछि

गजल ७२६, “मोन बीच एक नाव अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3661–3689. संस्करणक विवरण.

गजल ७२७ — जग मान जागैए

गजल ७२७, “जग मान जागैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3690–3718. संस्करणक विवरण.

गजल ७२८ — एक राह सार नहि

गजल ७२८, “एक राह सार नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3719–3747. संस्करणक विवरण.

गजल ७२९ — मुक्त राह सार अछि

गजल ७२९, “मुक्त राह सार अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3748–3776. संस्करणक विवरण.

गजल ७३० — झट ज्ञान नहि

गजल ७३०, “झट ज्ञान नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3777–3805. संस्करणक विवरण.

गजल ७३१ — आन पीर नोर मात्र नहि

गजल ७३१, “आन पीर नोर मात्र नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3806–3834. संस्करणक विवरण.

गजल ७३२ — भाव मूल थाह अछि

गजल ७३२, “भाव मूल थाह अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3835–3863. संस्करणक विवरण.

गजल ७३३ — प्रश्न बीच गीत अछि

गजल ७३३, “प्रश्न बीच गीत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3864–3892. संस्करणक विवरण.

गजल ७३४ — साँचक सोर अछि

गजल ७३४, “साँचक सोर अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3893–3921. संस्करणक विवरण.

गजल ७३५ — भीतर आस रहै छै

गजल ७३५, “भीतर आस रहै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3922–3950. संस्करणक विवरण.

गजल ७३६ — प्रश्न उठि गेलै, द्वार खुलै छै

गजल ७३६, “प्रश्न उठि गेलै, द्वार खुलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3951–3979. संस्करणक विवरण.

गजल ७३७ — अपन मत जाँचै छी, सार दिसै छै

गजल ७३७, “अपन मत जाँचै छी, सार दिसै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 3980–4008. संस्करणक विवरण.

गजल ७३८ — छूटल स्वर उठै छै, हाल बदलै छै

गजल ७३८, “छूटल स्वर उठै छै, हाल बदलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4009–4037. संस्करणक विवरण.

गजल ७३९ — अंक सभ बोलै छै, सार खोजै छी

गजल ७३९, “अंक सभ बोलै छै, सार खोजै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4038–4066. संस्करणक विवरण.

गजल ७४० — नदी रूप बदलै छै, सार बचै छै

गजल ७४०, “नदी रूप बदलै छै, सार बचै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4067–4095. संस्करणक विवरण.

गजल ७४१ — ज्ञान फेर बदलै छै, आधार जाँचै छी

गजल ७४१, “ज्ञान फेर बदलै छै, आधार जाँचै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4096–4124. संस्करणक विवरण.

गजल ७४२ — मान जखन बढ़ै छै, विश्वास रहै छै

गजल ७४२, “मान जखन बढ़ै छै, विश्वास रहै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4125–4153. संस्करणक विवरण.

गजल ७४३ — घाव जखन देखै छी, दाग बुझै छी

गजल ७४३, “घाव जखन देखै छी, दाग बुझै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4154–4182. संस्करणक विवरण.

गजल ७४४ — गौरव जखन बढ़ै छै, प्रमाण माँगै छै

गजल ७४४, “गौरव जखन बढ़ै छै, प्रमाण माँगै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4183–4211. संस्करणक विवरण.

गजल ७४५ — दोषो देखलै मोन, सार रहि जाइ छै

गजल ७४५, “दोषो देखलै मोन, सार रहि जाइ छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4212–4240. संस्करणक विवरण.

गजल ७४६ — रूप जखन मिललै, मेल तखन विचार भेलै

गजल ७४६, “रूप जखन मिललै, मेल तखन विचार भेलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4241–4269. संस्करणक विवरण.

गजल ७४७ — काल्हिक आधार पूछै छी

गजल ७४७, “काल्हिक आधार पूछै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4270–4298. संस्करणक विवरण.

गजल ७४८ — भाग्येँ साँच भेलै, कोन आधार मिलै छै

गजल ७४८, “भाग्येँ साँच भेलै, कोन आधार मिलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4299–4327. संस्करणक विवरण.

गजल ७४९ — साँच फेर मिलै छै, सार खुलै छै

गजल ७४९, “साँच फेर मिलै छै, सार खुलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4328–4356. संस्करणक विवरण.

गजल ७५० — प्रश्न जखन उठै छै, सार बुझै छी

गजल ७५०, “प्रश्न जखन उठै छै, सार बुझै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4357–4385. संस्करणक विवरण.

गजल ७५१ — भाग्य फेर जाँचै छी, आधार खोजै छी

गजल ७५१, “भाग्य फेर जाँचै छी, आधार खोजै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4386–4414. संस्करणक विवरण.

गजल ७५२ — रूप फेर जाँचै छी, आकार खुलै छै

गजल ७५२, “रूप फेर जाँचै छी, आकार खुलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4415–4443. संस्करणक विवरण.

गजल ७५३ — साँच जखन कहै छी, डोर रहै छै

गजल ७५३, “साँच जखन कहै छी, डोर रहै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4444–4472. संस्करणक विवरण.

गजल ७५४ — रूप फेर बदलै छै, सार बचै छै

गजल ७५४, “रूप फेर बदलै छै, सार बचै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4473–4501. संस्करणक विवरण.

गजल ७५५ — छूटल स्वर उठै छै, मान बदलै छै

गजल ७५५, “छूटल स्वर उठै छै, मान बदलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4502–4530. संस्करणक विवरण.

गजल ७५६ — प्रश्न फेर उठै छै, राह दिसै छै

गजल ७५६, “प्रश्न फेर उठै छै, राह दिसै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4531–4559. संस्करणक विवरण.

गजल ७५७ — अंक मात्र कहै छै, विचार जगै छै

गजल ७५७, “अंक मात्र कहै छै, विचार जगै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4560–4588. संस्करणक विवरण.

गजल ७५८ — नोर-सोर बुझै छी, हाल खुलै छै

गजल ७५८, “नोर-सोर बुझै छी, हाल खुलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4589–4617. संस्करणक विवरण.

गजल ७५९ — काल पार सोचै छी, भोर देखै छी

गजल ७५९, “काल पार सोचै छी, भोर देखै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4618–4646. संस्करणक विवरण.

गजल ७६० — सत्ता फेर जाँचै छी, ध्यान रखै छी

गजल ७६०, “सत्ता फेर जाँचै छी, ध्यान रखै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4647–4675. संस्करणक विवरण.

गजल ७६१ — ज्ञान जखन बदलै छै, उपाय मिलै छै

गजल ७६१, “ज्ञान जखन बदलै छै, उपाय मिलै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4676–4704. संस्करणक विवरण.

गजल ७६२ — दाबी फेर जाँचै छी, विश्वास बचै छै

गजल ७६२, “दाबी फेर जाँचै छी, विश्वास बचै छै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4705–4733. संस्करणक विवरण.

गजल ७६३ — मत जखन सुनै छी, प्रभाव बुझै छी

गजल ७६३, “मत जखन सुनै छी, प्रभाव बुझै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4734–4762. संस्करणक विवरण.

गजल ७६४ — काल जखन मुड़ै छै, ढंग परखै छी

गजल ७६४, “काल जखन मुड़ै छै, ढंग परखै छी,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4763–4791. संस्करणक विवरण.

गजल ७६५ — माप जखन लगै, ज्ञान मोनमे उतरैत अछि

गजल ७६५, “माप जखन लगै, ज्ञान मोनमे उतरैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4792–4820. संस्करणक विवरण.

गजल ७६६ — मान जखन बचै, आस रूप धरैत अछि

गजल ७६६, “मान जखन बचै, आस रूप धरैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4821–4849. संस्करणक विवरण.

गजल ७६७ — घाव जखन दुखै, उपचार द्वार खोलैत अछि

गजल ७६७, “घाव जखन दुखै, उपचार द्वार खोलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4850–4878. संस्करणक विवरण.

गजल ७६८ — साँच फेर खुलै, नोर सँ जुड़ैत अछि

गजल ७६८, “साँच फेर खुलै, नोर सँ जुड़ैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4879–4907. संस्करणक विवरण.

गजल ७६९ — मोन फेर जागै, प्रीत संग चलैत अछि

गजल ७६९, “मोन फेर जागै, प्रीत संग चलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4908–4936. संस्करणक विवरण.

गजल ७७० — न्याय फेर बढ़ै, माप बनि रहैत अछि

गजल ७७०, “न्याय फेर बढ़ै, माप बनि रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4937–4965. संस्करणक विवरण.

गजल ७७१ — पीरक मूल खुलै, निदान दिशा दैत अछि

गजल ७७१, “पीरक मूल खुलै, निदान दिशा दैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4966–4994. संस्करणक विवरण.

गजल ७७२ — याद फेर उठै, नोर मोन फेरबैत अछि

गजल ७७२, “याद फेर उठै, नोर मोन फेरबैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 4995–5023. संस्करणक विवरण.

गजल ७७३ — प्रश्न जखन उठै, विचार केँ खोजैत अछि

गजल ७७३, “प्रश्न जखन उठै, विचार केँ खोजैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5024–5052. संस्करणक विवरण.

गजल ७७४ — पीर जखन घटै छै, आस जागि उठैए

गजल ७७४, “पीर जखन घटै छै, आस जागि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5053–5081. संस्करणक विवरण.

गजल ७७५ — घर पाछाँ छुटै छै, सार मोनमे बसैए

गजल ७७५, “घर पाछाँ छुटै छै, सार मोनमे बसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5082–5110. संस्करणक विवरण.

गजल ७७६ — कूल दूर सरै छै, तरंग संगे बहैए

गजल ७७६, “कूल दूर सरै छै, तरंग संगे बहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5111–5139. संस्करणक विवरण.

गजल ७७७ — बीज माटि फोड़ै छै, प्रीत माटिमे अँकुरैए

गजल ७७७, “बीज माटि फोड़ै छै, प्रीत माटिमे अँकुरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5140–5168. संस्करणक विवरण.

गजल ७७८ — प्रश्न माथ उठै छै, ज्ञान ऊपर चढ़ैए

गजल ७७८, “प्रश्न माथ उठै छै, ज्ञान ऊपर चढ़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5169–5197. संस्करणक विवरण.

गजल ७७९ — पीर नोर कहै छै, नेह नोरमे भीजैए

गजल ७७९, “पीर नोर कहै छै, नेह नोरमे भीजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5198–5226. संस्करणक विवरण.

गजल ७८० — राति पाछाँ सरै छै, आस भोरमे फूटैए

गजल ७८०, “राति पाछाँ सरै छै, आस भोरमे फूटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5227–5255. संस्करणक विवरण.

गजल ७८१ — शब्द पवन चढ़ै छै, संवाद पवनमे उड़ैए

गजल ७८१, “शब्द पवन चढ़ै छै, संवाद पवनमे उड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5256–5284. संस्करणक विवरण.

गजल ७८२ — घाव बात कहै छै, भाव नोरमे चमकैए

गजल ७८२, “घाव बात कहै छै, भाव नोरमे चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5285–5313. संस्करणक विवरण.

गजल ७८३ — रोष देह चढ़ै छै, क्रोध भीतर धधकैए

गजल ७८३, “रोष देह चढ़ै छै, क्रोध भीतर धधकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5314–5342. संस्करणक विवरण.

गजल ७८४ — सोर दूर रहै छै, राग मौनमे गमकैए

गजल ७८४, “सोर दूर रहै छै, राग मौनमे गमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5343–5371. संस्करणक विवरण.

गजल ७८५ — पएर रोक घेरै छै, आकाश पार निकलैए

गजल ७८५, “पएर रोक घेरै छै, आकाश पार निकलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5372–5400. संस्करणक विवरण.

गजल ७८६ — पुरना बीज बचै छै, मूल जड़ि धरैए

गजल ७८६, “पुरना बीज बचै छै, मूल जड़ि धरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5401–5429. संस्करणक विवरण.

गजल ७८७ — पीर देह कहै छै, ताप देहमे सिहरैए

गजल ७८७, “पीर देह कहै छै, ताप देहमे सिहरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5430–5458. संस्करणक विवरण.

गजल ७८८ — पन्ना फेर खुलै छै, नाम कालमे डोलैए

गजल ७८८, “पन्ना फेर खुलै छै, नाम कालमे डोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5459–5487. संस्करणक विवरण.

गजल ७८९ — दाबी जोर करै छै, बात साँचमे टिकैए

गजल ७८९, “दाबी जोर करै छै, बात साँचमे टिकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5488–5516. संस्करणक विवरण.

गजल ७९० — दीप राति जरै छै, नेह मोनमे उजरैए

गजल ७९०, “दीप राति जरै छै, नेह मोनमे उजरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5517–5545. संस्करणक विवरण.

गजल ७९१ — राख छाँह धरै छै, गीत राखसँ फूलैए

गजल ७९१, “राख छाँह धरै छै, गीत राखसँ फूलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5546–5574. संस्करणक विवरण.

गजल ७९२ — रेखा नाम बनै छै, पहचान सीमा गलैए

गजल ७९२, “रेखा नाम बनै छै, पहचान सीमा गलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5575–5603. संस्करणक विवरण.

गजल ७९३ — रूप नाम बदलै छै, स्वरूप नामसँ छूटैए

गजल ७९३, “रूप नाम बदलै छै, स्वरूप नामसँ छूटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5604–5632. संस्करणक विवरण.

गजल ७९४ — नदी याद बहै छै, धार स्मृतिमे घुरैए

गजल ७९४, “नदी याद बहै छै, धार स्मृतिमे घुरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5633–5661. संस्करणक विवरण.

गजल ७९५ — लोक सोर जुड़ै छै, रंग लोकमे बजैए

गजल ७९५, “लोक सोर जुड़ै छै, रंग लोकमे बजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5662–5690. संस्करणक विवरण.

गजल ७९६ — पएर माटि छुबै छै, देश माटिसँ जनमैए

गजल ७९६, “पएर माटि छुबै छै, देश माटिसँ जनमैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5691–5719. संस्करणक विवरण.

गजल ७९७ — दूर घर रहै छै, प्रीत दूरि घटैए

गजल ७९७, “दूर घर रहै छै, प्रीत दूरि घटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5720–5748. संस्करणक विवरण.

गजल ७९८ — डगमग मोन रहै छै, विश्वास डोर सम्हरैए

गजल ७९८, “डगमग मोन रहै छै, विश्वास डोर सम्हरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5749–5777. संस्करणक विवरण.

गजल ७९९ — पएर मोड़ पड़ै छै, उपाय दिशा मुड़ैए

गजल ७९९, “पएर मोड़ पड़ै छै, उपाय दिशा मुड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5778–5806. संस्करणक विवरण.

गजल ८०० — गीत काल लाँघै छै, गीत अन्त लाँघैए

गजल ८००, “गीत काल लाँघै छै, गीत अन्त लाँघैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5807–5835. संस्करणक विवरण.

गजल ८०१ — दाम रोज बदलै छै, सार बाजार जँचैए

गजल ८०१, “दाम रोज बदलै छै, सार बाजार जँचैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5836–5864. संस्करणक विवरण.

गजल ८०२ — मेह राति बढ़ै छै, धार कूल बनैए

गजल ८०२, “मेह राति बढ़ै छै, धार कूल बनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5865–5893. संस्करणक विवरण.

गजल ८०३ — रस्सी हाथ उतरै छै, प्यास कुआँ बोलैए

गजल ८०३, “रस्सी हाथ उतरै छै, प्यास कुआँ बोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5894–5922. संस्करणक विवरण.

गजल ८०४ — सीटी दूर बजै छै, राह रेल चलैए

गजल ८०४, “सीटी दूर बजै छै, राह रेल चलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5923–5951. संस्करणक विवरण.

गजल ८०५ — दीप कोन जरै छै, ज्ञान पन्ना खुलैए

गजल ८०५, “दीप कोन जरै छै, ज्ञान पन्ना खुलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5952–5980. संस्करणक विवरण.

गजल ८०६ — डाक पएर चलै छै, सार चिट्ठी पहुँचैए

गजल ८०६, “डाक पएर चलै छै, सार चिट्ठी पहुँचैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 5981–6009. संस्करणक विवरण.

गजल ८०७ — जड़ि माटि पकड़ै छै, मूल छाँह रहैए

गजल ८०७, “जड़ि माटि पकड़ै छै, मूल छाँह रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6010–6038. संस्करणक विवरण.

गजल ८०८ — माटि हाथ नमै छै, रूप चाक घुमैए

गजल ८०८, “माटि हाथ नमै छै, रूप चाक घुमैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6039–6067. संस्करणक विवरण.

गजल ८०९ — पर्दा धीरे उठै छै, रंग मंच धड़कैए

गजल ८०९, “पर्दा धीरे उठै छै, रंग मंच धड़कैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6068–6096. संस्करणक विवरण.

गजल ८१० — आँखि गोल चमकै छै, नोर बालक पूछैए

गजल ८१०, “आँखि गोल चमकै छै, नोर बालक पूछैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6097–6125. संस्करणक विवरण.

गजल ८११ — केश धीर बदलै छै, श्वास उमिर ढलैए

गजल ८११, “केश धीर बदलै छै, श्वास उमिर ढलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6126–6154. संस्करणक विवरण.

गजल ८१२ — नाव नीर उतरै छै, धार सीमा काटैए

गजल ८१२, “नाव नीर उतरै छै, धार सीमा काटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6155–6183. संस्करणक विवरण.

गजल ८१३ — काठ रेखा जागै छै, छाप हाथ गढ़ैए

गजल ८१३, “काठ रेखा जागै छै, छाप हाथ गढ़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6184–6212. संस्करणक विवरण.

गजल ८१४ — मेह राति पड़ै छै, नेह छप्पर बजैए

गजल ८१४, “मेह राति पड़ै छै, नेह छप्पर बजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6213–6241. संस्करणक विवरण.

गजल ८१५ — रोटी हाथ बाँटै छै, स्वाद थारी जुड़ैए

गजल ८१५, “रोटी हाथ बाँटै छै, स्वाद थारी जुड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6242–6270. संस्करणक विवरण.

गजल ८१६ — गवाही स्वर उठै छै, प्रमाण न्याय तौलैए

गजल ८१६, “गवाही स्वर उठै छै, प्रमाण न्याय तौलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6271–6299. संस्करणक विवरण.

गजल ८१७ — स्वप्न रूप बदलै छै, रूप भोर जगबैए

गजल ८१७, “स्वप्न रूप बदलै छै, रूप भोर जगबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6300–6328. संस्करणक विवरण.

गजल ८१८ — बत्ती राति जरै छै, सोर नगर जागैए

गजल ८१८, “बत्ती राति जरै छै, सोर नगर जागैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6329–6357. संस्करणक विवरण.

गजल ८१९ — आखर पात सजै छै, बोल लिपि बचैए

गजल ८१९, “आखर पात सजै छै, बोल लिपि बचैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6358–6386. संस्करणक विवरण.

गजल ८२० — चिता शान्त पड़ै छै, फूल राख बोलैए

गजल ८२०, “चिता शान्त पड़ै छै, फूल राख बोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6387–6415. संस्करणक विवरण.

गजल ८२१ — दू हाथ मिलै छै, नेह बंधन जँचैए

गजल ८२१, “दू हाथ मिलै छै, नेह बंधन जँचैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6416–6444. संस्करणक विवरण.

गजल ८२२ — ट्रेन गाम छोड़ै छै, द्वार पएर घुरैए

गजल ८२२, “ट्रेन गाम छोड़ै छै, द्वार पएर घुरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6445–6473. संस्करणक विवरण.

गजल ८२३ — घंटी भोर बजै छै, ज्ञान कक्षा जागैए

गजल ८२३, “घंटी भोर बजै छै, ज्ञान कक्षा जागैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6474–6502. संस्करणक विवरण.

गजल ८२४ — पीर धीरे कहै छै, भेद देह सुनैए

गजल ८२४, “पीर धीरे कहै छै, भेद देह सुनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6503–6531. संस्करणक विवरण.

गजल ८२५ — पएर माथ रुकै छै, पार आकाश खुलैए

गजल ८२५, “पएर माथ रुकै छै, पार आकाश खुलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6532–6560. संस्करणक विवरण.

गजल ८२६ — घड़ी भोर बजै छै, काल फेर सरकै

गजल ८२६, “घड़ी भोर बजै छै, काल फेर सरकै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6561–6589. संस्करणक विवरण.

गजल ८२७ — धान बीज सुकै छै, अगिला ऋतु टिकै

गजल ८२७, “धान बीज सुकै छै, अगिला ऋतु टिकै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6590–6618. संस्करणक विवरण.

गजल ८२८ — दर्पण भोर चमकै छै, चेहरा रेखा उभरै

गजल ८२८, “दर्पण भोर चमकै छै, चेहरा रेखा उभरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6619–6647. संस्करणक विवरण.

गजल ८२९ — तान सूता तनै छै, बाना रंग जुड़ै

गजल ८२९, “तान सूता तनै छै, बाना रंग जुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6648–6676. संस्करणक विवरण.

गजल ८३० — ढोल दूर बजै छै, रंग झण्डा लहरै

गजल ८३०, “ढोल दूर बजै छै, रंग झण्डा लहरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6677–6705. संस्करणक विवरण.

गजल ८३१ — पएर ढलान चढ़ै छै, कुहरा दूर सरै

गजल ८३१, “पएर ढलान चढ़ै छै, कुहरा दूर सरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6706–6734. संस्करणक विवरण.

गजल ८३२ — मधुमाछि भोर उड़ै छै, फूल गन्ध खोजै

गजल ८३२, “मधुमाछि भोर उड़ै छै, फूल गन्ध खोजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6735–6763. संस्करणक विवरण.

गजल ८३३ — चन्द्र राति चमकै छै, छाँह धीरे चढ़ै

गजल ८३३, “चन्द्र राति चमकै छै, छाँह धीरे चढ़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6764–6792. संस्करणक विवरण.

गजल ८३४ — पुल नदी लाँघै छै, दू कूल जुड़ै

गजल ८३४, “पुल नदी लाँघै छै, दू कूल जुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6793–6821. संस्करणक विवरण.

गजल ८३५ — सीसा टाइप सजै छै, स्याही रोल चढ़ै

गजल ८३५, “सीसा टाइप सजै छै, स्याही रोल चढ़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6822–6850. संस्करणक विवरण.

गजल ८३६ — रेडियो भोर बजै छै, दूर स्वर अबै

गजल ८३६, “रेडियो भोर बजै छै, दूर स्वर अबै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6851–6879. संस्करणक विवरण.

गजल ८३७ — पुरना फोटो खुलै छै, चेहरा मुस्की रहै

गजल ८३७, “पुरना फोटो खुलै छै, चेहरा मुस्की रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6880–6908. संस्करणक विवरण.

गजल ८३८ — ताला द्वार लटकै छै, हाथ धातु घुमै

गजल ८३८, “ताला द्वार लटकै छै, हाथ धातु घुमै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6909–6937. संस्करणक विवरण.

गजल ८३९ — सूखल पात सरसरै छै, चिनगी छोट उठै

गजल ८३९, “सूखल पात सरसरै छै, चिनगी छोट उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6938–6966. संस्करणक विवरण.

गजल ८४० — नहर खेत मुड़ै छै, नीर रेखा चलै

गजल ८४०, “नहर खेत मुड़ै छै, नीर रेखा चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6967–6995. संस्करणक विवरण.

गजल ८४१ — पत्थर रेखा रहै छै, आखर धीरे घिसै

गजल ८४१, “पत्थर रेखा रहै छै, आखर धीरे घिसै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 6996–7024. संस्करणक विवरण.

गजल ८४२ — बाँस हवा डोलै छै, जड़ि माटि थामै

गजल ८४२, “बाँस हवा डोलै छै, जड़ि माटि थामै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7025–7053. संस्करणक विवरण.

गजल ८४३ — पतंग छत उठै छै, डोर हाथ तनै

गजल ८४३, “पतंग छत उठै छै, डोर हाथ तनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7054–7082. संस्करणक विवरण.

गजल ८४४ — चूल्हा भोर जरै छै, दालि गन्ध फैलै

गजल ८४४, “चूल्हा भोर जरै छै, दालि गन्ध फैलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7083–7111. संस्करणक विवरण.

गजल ८४५ — राति आकाश खुलै छै, तारा झिलमिल करै

गजल ८४५, “राति आकाश खुलै छै, तारा झिलमिल करै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7112–7140. संस्करणक विवरण.

गजल ८४६ — पाखी झुण्ड उड़ै छै, आकाश रेखा बनै

गजल ८४६, “पाखी झुण्ड उड़ै छै, आकाश रेखा बनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7141–7169. संस्करणक विवरण.

गजल ८४७ — पैडल पएर घुमै छै, चक्का राह धरै

गजल ८४७, “पैडल पएर घुमै छै, चक्का राह धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7170–7198. संस्करणक विवरण.

गजल ८४८ — नमक दाना पड़ै छै, दालि स्वाद बदलै

गजल ८४८, “नमक दाना पड़ै छै, दालि स्वाद बदलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7199–7227. संस्करणक विवरण.

गजल ८४९ — भोर अजान उठै छै, घण्टा दूर बजै

गजल ८४९, “भोर अजान उठै छै, घण्टा दूर बजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7228–7256. संस्करणक विवरण.

गजल ८५० — लहर भोर उठै छै, क्षितिज रंग बदलै

गजल ८५०, “लहर भोर उठै छै, क्षितिज रंग बदलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7257–7285. संस्करणक विवरण.

गजल ८५१ — भोर कूप जागै छै, नीर तल चमकै

गजल ८५१, “भोर कूप जागै छै, नीर तल चमकै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7286–7314. संस्करणक विवरण.

गजल ८५२ — पोथी पन्ना खुलै छै, छोट टिप्पणी जगै

गजल ८५२, “पोथी पन्ना खुलै छै, छोट टिप्पणी जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7315–7343. संस्करणक विवरण.

गजल ८५३ — सीटी दूर बजै छै, लोहा ताल धरै

गजल ८५३, “सीटी दूर बजै छै, लोहा ताल धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7344–7372. संस्करणक विवरण.

गजल ८५४ — माटि हाथ नमै छै, रूप बीच उगै

गजल ८५४, “माटि हाथ नमै छै, रूप बीच उगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7373–7401. संस्करणक विवरण.

गजल ८५५ — मेह काँच पड़ै छै, बूँद रेखा बनै

गजल ८५५, “मेह काँच पड़ै छै, बूँद रेखा बनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7402–7430. संस्करणक विवरण.

गजल ८५६ — कलम डारि जुड़ै छै, नव फूल खुलै

गजल ८५६, “कलम डारि जुड़ै छै, नव फूल खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7431–7459. संस्करणक विवरण.

गजल ८५७ — न्याय कक्ष खुलै छै, प्रश्न क्रम धरै

गजल ८५७, “न्याय कक्ष खुलै छै, प्रश्न क्रम धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7460–7488. संस्करणक विवरण.

गजल ८५८ — राति नदी बहै छै, मचान दीप जरै

गजल ८५८, “राति नदी बहै छै, मचान दीप जरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7489–7517. संस्करणक विवरण.

गजल ८५९ — भोर विद्यालय खुलै छै, आँगन हँसी भरै

गजल ८५९, “भोर विद्यालय खुलै छै, आँगन हँसी भरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7518–7546. संस्करणक विवरण.

गजल ८६० — बाढ़ नीर उतरै छै, खेत माटि दिसै

गजल ८६०, “बाढ़ नीर उतरै छै, खेत माटि दिसै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7547–7575. संस्करणक विवरण.

गजल ८६१ — झोरा काँध चढ़ै छै, माय नोर धरै

गजल ८६१, “झोरा काँध चढ़ै छै, माय नोर धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7576–7604. संस्करणक विवरण.

गजल ८६२ — पुरना बक्सा खुलै छै, कागज गन्ध उठै

गजल ८६२, “पुरना बक्सा खुलै छै, कागज गन्ध उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7605–7633. संस्करणक विवरण.

गजल ८६३ — भोर बाड़ी खुलै छै, पात ओस चमकै

गजल ८६३, “भोर बाड़ी खुलै छै, पात ओस चमकै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7634–7662. संस्करणक विवरण.

गजल ८६४ — दुपहर सूरज चढ़ै छै, गाछ छाह सिमटै

गजल ८६४, “दुपहर सूरज चढ़ै छै, गाछ छाह सिमटै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7663–7691. संस्करणक विवरण.

गजल ८६५ — मेह छत पड़ै छै, नाली नीर बहै

गजल ८६५, “मेह छत पड़ै छै, नाली नीर बहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7692–7720. संस्करणक विवरण.

गजल ८६६ — बोर्ड बीच सजै छै, पहिल चाल खुलै

गजल ८६६, “बोर्ड बीच सजै छै, पहिल चाल खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7721–7749. संस्करणक विवरण.

गजल ८६७ — बाजार भोर खुलै छै, दाना पलड़ा धरै

गजल ८६७, “बाजार भोर खुलै छै, दाना पलड़ा धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7750–7778. संस्करणक विवरण.

गजल ८६८ — नाव घाट लगै छै, नीर तेज बहै

गजल ८६८, “नाव घाट लगै छै, नीर तेज बहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7779–7807. संस्करणक विवरण.

गजल ८६९ — साँझ आँगन सजै छै, पहिल लौ उठै

गजल ८६९, “साँझ आँगन सजै छै, पहिल लौ उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7808–7836. संस्करणक विवरण.

गजल ८७० — कागज सफेद रहै छै, स्याही रेखा उतरै

गजल ८७०, “कागज सफेद रहै छै, स्याही रेखा उतरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7837–7865. संस्करणक विवरण.

गजल ८७१ — देहरी भोर चमकै छै, घर बाहर मिलै

गजल ८७१, “देहरी भोर चमकै छै, घर बाहर मिलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7866–7894. संस्करणक विवरण.

गजल ८७२ — ढोल थाप पड़ै छै, बीच मौन रहै

गजल ८७२, “ढोल थाप पड़ै छै, बीच मौन रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7895–7923. संस्करणक विवरण.

गजल ८७३ — छत गमला रहै छै, बीज माटि धरै

गजल ८७३, “छत गमला रहै छै, बीज माटि धरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7924–7952. संस्करणक विवरण.

गजल ८७४ — पुरना टीला रहै छै, गाछ छाह पड़ै

गजल ८७४, “पुरना टीला रहै छै, गाछ छाह पड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7953–7981. संस्करणक विवरण.

गजल ८७५ — राति झंझा बहै छै, दूर रेखा उगै

गजल ८७५, “राति झंझा बहै छै, दूर रेखा उगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 7982–8010. संस्करणक विवरण.

गजल ८७६ — पुरान रेखा खुलै, राह नक्शा बतबैए

गजल ८७६, “पुरान रेखा खुलै, राह नक्शा बतबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8011–8039. संस्करणक विवरण.

गजल ८७७ — लोहारक श्वास उठै, आग भट्ठी धधकैए

गजल ८७७, “लोहारक श्वास उठै, आग भट्ठी धधकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8040–8068. संस्करणक विवरण.

गजल ८७८ — नीर बहै, भोर जाल पसारैए

गजल ८७८, “नीर बहै, भोर जाल पसारैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8069–8097. संस्करणक विवरण.

गजल ८७९ — कचहरी सोझाँ छाह पसारैए

गजल ८७९, “कचहरी सोझाँ छाह पसारैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8098–8126. संस्करणक विवरण.

गजल ८८० — दीप मन्द जरै, राति सम्हारैए

गजल ८८०, “दीप मन्द जरै, राति सम्हारैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8127–8155. संस्करणक विवरण.

गजल ८८१ — धान डोलै, बिजुका तकैए

गजल ८८१, “धान डोलै, बिजुका तकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8156–8184. संस्करणक विवरण.

गजल ८८२ — छोट कोन रहै, टिकट पहुँचबैए

गजल ८८२, “छोट कोन रहै, टिकट पहुँचबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8185–8213. संस्करणक विवरण.

गजल ८८३ — धूलि बीच अंक रहै, पत्थर गनैए

गजल ८८३, “धूलि बीच अंक रहै, पत्थर गनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8214–8242. संस्करणक विवरण.

गजल ८८४ — ताल नीर झलकै, कुमुद खिलैए

गजल ८८४, “ताल नीर झलकै, कुमुद खिलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8243–8271. संस्करणक विवरण.

गजल ८८५ — गन्ध उठै, मसाला पिसैए

गजल ८८५, “गन्ध उठै, मसाला पिसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8272–8300. संस्करणक विवरण.

गजल ८८६ — काँच हँसै, लहठी खनकैए

गजल ८८६, “काँच हँसै, लहठी खनकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8301–8329. संस्करणक विवरण.

गजल ८८७ — पएर उठै, सीढ़ी चढ़बैए

गजल ८८७, “पएर उठै, सीढ़ी चढ़बैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8330–8358. संस्करणक विवरण.

गजल ८८८ — आँगन थाप धरै, ढेंकी कुटैए

गजल ८८८, “आँगन थाप धरै, ढेंकी कुटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8359–8387. संस्करणक विवरण.

गजल ८८९ — ओस काँपै, पाला जमैए

गजल ८८९, “ओस काँपै, पाला जमैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8388–8416. संस्करणक विवरण.

गजल ८९० — समुद्र बीच सूइ बतबैए

गजल ८९०, “समुद्र बीच सूइ बतबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8417–8445. संस्करणक विवरण.

गजल ८९१ — जंगल साँस ले, पगडंडी मुड़ैए

गजल ८९१, “जंगल साँस ले, पगडंडी मुड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8446–8474. संस्करणक विवरण.

गजल ८९२ — तिनका जुड़ै, घोंसला बसैए

गजल ८९२, “तिनका जुड़ै, घोंसला बसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8475–8503. संस्करणक विवरण.

गजल ८९३ — कपड़ा भीजै, रंगरेज रँगैए

गजल ८९३, “कपड़ा भीजै, रंगरेज रँगैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8504–8532. संस्करणक विवरण.

गजल ८९४ — गाम गोल बैसै, सभा सुनैए

गजल ८९४, “गाम गोल बैसै, सभा सुनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8533–8561. संस्करणक विवरण.

गजल ८९५ — धूलि हटै, अलमारी खुलबैए

गजल ८९५, “धूलि हटै, अलमारी खुलबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8562–8590. संस्करणक विवरण.

गजल ८९६ — लहर चढ़ै, पदचिह्न मिटैए

गजल ८९६, “लहर चढ़ै, पदचिह्न मिटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8591–8619. संस्करणक विवरण.

गजल ८९७ — धूलि उठै, घोड़ा दौड़ैए

गजल ८९७, “धूलि उठै, घोड़ा दौड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8620–8648. संस्करणक विवरण.

गजल ८९८ — रेखा बोलै, चित्र उभरैए

गजल ८९८, “रेखा बोलै, चित्र उभरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8649–8677. संस्करणक विवरण.

गजल ८९९ — श्वास उठै, शंख गुँजैए

गजल ८९९, “श्वास उठै, शंख गुँजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8678–8706. संस्करणक विवरण.

गजल ९०० — नीर पार खुलै, क्षितिज पसारैए

गजल ९००, “नीर पार खुलै, क्षितिज पसारैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8707–8735. संस्करणक विवरण.

गजल ९०१ — पोखर नीर चमकै, आस मखान खिलैए

गजल ९०१, “पोखर नीर चमकै, आस मखान खिलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8736–8764. संस्करणक विवरण.

गजल ९०२ — ओस पात चमकै, नेह पात महकैए

गजल ९०२, “ओस पात चमकै, नेह पात महकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8765–8793. संस्करणक विवरण.

गजल ९०३ — सूत जुड़ै, चाव सुजनी सजैए

गजल ९०३, “सूत जुड़ै, चाव सुजनी सजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8794–8822. संस्करणक विवरण.

गजल ९०४ — रेशा तनै, मान सिक्की जुड़ैए

गजल ९०४, “रेशा तनै, मान सिक्की जुड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8823–8851. संस्करणक विवरण.

गजल ९०५ — पाखी खेल उठै, गीत सामा गबैए

गजल ९०५, “पाखी खेल उठै, गीत सामा गबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8852–8880. संस्करणक विवरण.

गजल ९०६ — व्रत कथा खुलै, स्वर कथा गुँजैए

गजल ९०६, “व्रत कथा खुलै, स्वर कथा गुँजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8881–8909. संस्करणक विवरण.

गजल ९०७ — आँगन रेखा खुलै, चाव अरिपन खिलैए

गजल ९०७, “आँगन रेखा खुलै, चाव अरिपन खिलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8910–8938. संस्करणक विवरण.

गजल ९०८ — भोर गन्ध उठै, आस मंजर महकैए

गजल ९०८, “भोर गन्ध उठै, आस मंजर महकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8939–8967. संस्करणक विवरण.

गजल ९०९ — पीयर खेत डोलै, प्रीत सरसों हँसैए

गजल ९०९, “पीयर खेत डोलै, प्रीत सरसों हँसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8968–8996. संस्करणक विवरण.

गजल ९१० — गरमी घटै, श्वास पंखा डोलैए

गजल ९१०, “गरमी घटै, श्वास पंखा डोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 8997–9025. संस्करणक विवरण.

गजल ९११ — माटि पकै, ताल घड़ा झनकैए

गजल ९११, “माटि पकै, ताल घड़ा झनकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9026–9054. संस्करणक विवरण.

गजल ९१२ — कपड़ा फाटै, नेह सुई सिअैए

गजल ९१२, “कपड़ा फाटै, नेह सुई सिअैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9055–9083. संस्करणक विवरण.

गजल ९१३ — डारि हिलै, चाव झूला डोलैए

गजल ९१३, “डारि हिलै, चाव झूला डोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9084–9112. संस्करणक विवरण.

गजल ९१४ — पुरान नीर चमकै, भोर कुण्ड चमकैए

गजल ९१४, “पुरान नीर चमकै, भोर कुण्ड चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9113–9141. संस्करणक विवरण.

गजल ९१५ — माथ सजै, मान पाग दमकैए

गजल ९१५, “माथ सजै, मान पाग दमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9142–9170. संस्करणक विवरण.

गजल ९१६ — भोर थारी सजै, प्रीत भोज सजैए

गजल ९१६, “भोर थारी सजै, प्रीत भोज सजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9171–9199. संस्करणक विवरण.

गजल ९१७ — कागज देह जरै, आस लालटेन जरैए

गजल ९१७, “कागज देह जरै, आस लालटेन जरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9200–9228. संस्करणक विवरण.

गजल ९१८ — अन्हार घनै, आस जुगनू चमकैए

गजल ९१८, “अन्हार घनै, आस जुगनू चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9229–9257. संस्करणक विवरण.

गजल ९१९ — फूल झरै, नोर मौलश्री झरैए

गजल ९१९, “फूल झरै, नोर मौलश्री झरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9258–9286. संस्करणक विवरण.

गजल ९२० — पाथर बाट बजै, ताल खड़ाऊँ बजैए

गजल ९२०, “पाथर बाट बजै, ताल खड़ाऊँ बजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9287–9315. संस्करणक विवरण.

गजल ९२१ — ओस पड़ै, भोर जाल चमकैए

गजल ९२१, “ओस पड़ै, भोर जाल चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9316–9344. संस्करणक विवरण.

गजल ९२२ — धान रोपै, गीत रोपनी गबैए

गजल ९२२, “धान रोपै, गीत रोपनी गबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9345–9373. संस्करणक विवरण.

गजल ९२३ — घाट पएर चलै, नोर गगरी छलकैए

गजल ९२३, “घाट पएर चलै, नोर गगरी छलकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9374–9402. संस्करणक विवरण.

गजल ९२४ — मेघ हटै, रंग इन्द्रधनुष उभरैए

गजल ९२४, “मेघ हटै, रंग इन्द्रधनुष उभरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9403–9431. संस्करणक विवरण.

गजल ९२५ — गाछ डोलै, पार पछिया बहैए

गजल ९२५, “गाछ डोलै, पार पछिया बहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9432–9460. संस्करणक विवरण.

गजल ९२६ — सूत तनै, सार चर्खा घूमैए

गजल ९२६, “सूत तनै, सार चर्खा घूमैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9461–9489. संस्करणक विवरण.

गजल ९२७ — धान जुटै, मान बखार भरैए

गजल ९२७, “धान जुटै, मान बखार भरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9490–9518. संस्करणक विवरण.

गजल ९२८ — माटि कटै, ज्ञान फाल चमकैए

गजल ९२८, “माटि कटै, ज्ञान फाल चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9519–9547. संस्करणक विवरण.

गजल ९२९ — नीर हटै, भोर चर उभरैए

गजल ९२९, “नीर हटै, भोर चर उभरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9548–9576. संस्करणक विवरण.

गजल ९३० — पोखर गहिरै, आस कमलबीज पकैए

गजल ९३०, “पोखर गहिरै, आस कमलबीज पकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9577–9605. संस्करणक विवरण.

गजल ९३१ — पाथर टकरै, नोर चकमक झिलमिलैए

गजल ९३१, “पाथर टकरै, नोर चकमक झिलमिलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9606–9634. संस्करणक विवरण.

गजल ९३२ — रेशा जुड़ै, प्रीत पाटी बुनैए

गजल ९३२, “रेशा जुड़ै, प्रीत पाटी बुनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9635–9663. संस्करणक विवरण.

गजल ९३३ — तार काँपै, गीत सारंगी रुवैए

गजल ९३३, “तार काँपै, गीत सारंगी रुवैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9664–9692. संस्करणक विवरण.

गजल ९३४ — पात लहरै, भोर तिलकोर लहरैए

गजल ९३४, “पात लहरै, भोर तिलकोर लहरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9693–9721. संस्करणक विवरण.

गजल ९३५ — लोक जुटै, मान सभा जुटैए

गजल ९३५, “लोक जुटै, मान सभा जुटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9722–9750. संस्करणक विवरण.

गजल ९३६ — पात खुलै, ज्ञान पंजी बोलैए

गजल ९३६, “पात खुलै, ज्ञान पंजी बोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9751–9779. संस्करणक विवरण.

गजल ९३७ — रस्सी तनै, चाव डोल उतरैए

गजल ९३७, “रस्सी तनै, चाव डोल उतरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9780–9808. संस्करणक विवरण.

गजल ९३८ — आग धधकै, आस ईंट पकैए

गजल ९३८, “आग धधकै, आस ईंट पकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9809–9837. संस्करणक विवरण.

गजल ९३९ — फूल खुलै, प्रीत चंपा महकैए

गजल ९३९, “फूल खुलै, प्रीत चंपा महकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9838–9866. संस्करणक विवरण.

गजल ९४० — दाना जुटै, मान कोठी भरैए

गजल ९४०, “दाना जुटै, मान कोठी भरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9867–9895. संस्करणक विवरण.

गजल ९४१ — नील फूल डोलै, चाव अलसी हँसैए

गजल ९४१, “नील फूल डोलै, चाव अलसी हँसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9896–9924. संस्करणक विवरण.

गजल ९४२ — श्वास मिलै, गीत बाँसुरी सुसकैए

गजल ९४२, “श्वास मिलै, गीत बाँसुरी सुसकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9925–9953. संस्करणक विवरण.

गजल ९४३ — पाथर भीजै, भोर झरना गबैए

गजल ९४३, “पाथर भीजै, भोर झरना गबैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9954–9982. संस्करणक विवरण.

गजल ९४४ — भोर खुलै, आस कुहासा हटैए

गजल ९४४, “भोर खुलै, आस कुहासा हटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 9983–10011. संस्करणक विवरण.

गजल ९४५ — राति ढलै, नोर चाँद झुकैए

गजल ९४५, “राति ढलै, नोर चाँद झुकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10012–10040. संस्करणक विवरण.

गजल ९४६ — लहर हटै, आस सीपी खुलैए

गजल ९४६, “लहर हटै, आस सीपी खुलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10041–10069. संस्करणक विवरण.

गजल ९४७ — धूलि उठै, भोर गोधूलि उठैए

गजल ९४७, “धूलि उठै, भोर गोधूलि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10070–10098. संस्करणक विवरण.

गजल ९४८ — खेत बँटै, मान मेड़ बोलैए

गजल ९४८, “खेत बँटै, मान मेड़ बोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10099–10127. संस्करणक विवरण.

गजल ९४९ — छत गरमै, चाव धूप उतरैए

गजल ९४९, “छत गरमै, चाव धूप उतरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10128–10156. संस्करणक विवरण.

गजल ९५० — दूर रेखा खुलै, पार क्षितिज फैलैए

गजल ९५०, “दूर रेखा खुलै, पार क्षितिज फैलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10157–10185. संस्करणक विवरण.

गजल ९५१ — राख अँगार खुलै, अँगार बचैए

गजल ९५१, “राख अँगार खुलै, अँगार बचैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10186–10214. संस्करणक विवरण.

गजल ९५२ — बीज अँकुर खुलै, मान फेर उठैए

गजल ९५२, “बीज अँकुर खुलै, मान फेर उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10215–10243. संस्करणक विवरण.

गजल ९५३ — ओखरि मूसर खुलै, ताल धुनि बजैए

गजल ९५३, “ओखरि मूसर खुलै, ताल धुनि बजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10244–10272. संस्करणक विवरण.

गजल ९५४ — कनेर फूल खुलै, आस फुलैए

गजल ९५४, “कनेर फूल खुलै, आस फुलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10273–10301. संस्करणक विवरण.

गजल ९५५ — छप्पर बरखा खुलै, नोर टपकि खसैए

गजल ९५५, “छप्पर बरखा खुलै, नोर टपकि खसैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10302–10330. संस्करणक विवरण.

गजल ९५६ — भूसी पवन खुलै, राह दूर उड़ैए

गजल ९५६, “भूसी पवन खुलै, राह दूर उड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10331–10359. संस्करणक विवरण.

गजल ९५७ — कछार कटान खुलै, मूल कटैए

गजल ९५७, “कछार कटान खुलै, मूल कटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10360–10388. संस्करणक विवरण.

गजल ९५८ — बिचड़ा खेत खुलै, रंग फेर हरियैए

गजल ९५८, “बिचड़ा खेत खुलै, रंग फेर हरियैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10389–10417. संस्करणक विवरण.

गजल ९५९ — काई पोखर खुलै, नाम जल तिरैए

गजल ९५९, “काई पोखर खुलै, नाम जल तिरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10418–10446. संस्करणक विवरण.

गजल ९६० — बाती दीप खुलै, पीर जरैए

गजल ९६०, “बाती दीप खुलै, पीर जरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10447–10475. संस्करणक विवरण.

गजल ९६१ — सूत तकली खुलै, बात सूत तनैए

गजल ९६१, “सूत तकली खुलै, बात सूत तनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10476–10504. संस्करणक विवरण.

गजल ९६२ — माटिक सोंध खुलै, रूप महकैए

गजल ९६२, “माटिक सोंध खुलै, रूप महकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10505–10533. संस्करणक विवरण.

गजल ९६३ — बबूल काँट खुलै, मेल भीतर चुभैए

गजल ९६३, “बबूल काँट खुलै, मेल भीतर चुभैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10534–10562. संस्करणक विवरण.

गजल ९६४ — ओसार साँझ खुलै, अँगार फेर जगैए

गजल ९६४, “ओसार साँझ खुलै, अँगार फेर जगैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10563–10591. संस्करणक विवरण.

गजल ९६५ — बान्ह जल खुलै, मान टिकैए

गजल ९६५, “बान्ह जल खुलै, मान टिकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10592–10620. संस्करणक विवरण.

गजल ९६६ — कुट्टी खलिहान खुलै, ताल धूरि उड़ैए

गजल ९६६, “कुट्टी खलिहान खुलै, ताल धूरि उड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10621–10649. संस्करणक विवरण.

गजल ९६७ — काँच चूड़ी खुलै, आस मृदु खनकैए

गजल ९६७, “काँच चूड़ी खुलै, आस मृदु खनकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10650–10678. संस्करणक विवरण.

गजल ९६८ — बेल लता खुलै, नोर लहरैए

गजल ९६८, “बेल लता खुलै, नोर लहरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10679–10707. संस्करणक विवरण.

गजल ९६९ — नाल जल खुलै, राह नीचाँ बहैए

गजल ९६९, “नाल जल खुलै, राह नीचाँ बहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10708–10736. संस्करणक विवरण.

गजल ९७० — चन्द्र ज्योति खुलै, मूल दूर पसरैए

गजल ९७०, “चन्द्र ज्योति खुलै, मूल दूर पसरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10737–10765. संस्करणक विवरण.

गजल ९७१ — पीतल लोटा खुलै, रंग चमकैए

गजल ९७१, “पीतल लोटा खुलै, रंग चमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10766–10794. संस्करणक विवरण.

गजल ९७२ — पोथीक पन्ना खुलै, नाम धीरे सरकैए

गजल ९७२, “पोथीक पन्ना खुलै, नाम धीरे सरकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10795–10823. संस्करणक विवरण.

गजल ९७३ — रुई सूत खुलै, पीर ऊपर उड़ैए

गजल ९७३, “रुई सूत खुलै, पीर ऊपर उड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10824–10852. संस्करणक विवरण.

गजल ९७४ — धूरिक बाट खुलै, बात उड़ैए

गजल ९७४, “धूरिक बाट खुलै, बात उड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10853–10881. संस्करणक विवरण.

गजल ९७५ — साँकल द्वार खुलै, रूप राति खनकैए

गजल ९७५, “साँकल द्वार खुलै, रूप राति खनकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10882–10910. संस्करणक विवरण.

गजल ९७६ — सिलौट लोढ़ा बजै, सोर धीमे थिरैए

गजल ९७६, “सिलौट लोढ़ा बजै, सोर धीमे थिरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10911–10939. संस्करणक विवरण.

गजल ९७७ — बाँस दउरा जुड़ै, मान सँचि उठैए

गजल ९७७, “बाँस दउरा जुड़ै, मान सँचि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10940–10968. संस्करणक विवरण.

गजल ९७८ — तराजू पल्ला झुकै, विचार तोलि देखैए

गजल ९७८, “तराजू पल्ला झुकै, विचार तोलि देखैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10969–10997. संस्करणक विवरण.

गजल ९७९ — हँसुआ धार चमकै, सार फेर दमकैए

गजल ९७९, “हँसुआ धार चमकै, सार फेर दमकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 10998–11026. संस्करणक विवरण.

गजल ९८० — जाँता दाना पिसै, गान मृदु बजैए

गजल ९८०, “जाँता दाना पिसै, गान मृदु बजैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11027–11055. संस्करणक विवरण.

गजल ९८१ — कोदो बालि डोलै, उमंग साँझ धरि डोलैए

गजल ९८१, “कोदो बालि डोलै, उमंग साँझ धरि डोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11056–11084. संस्करणक विवरण.

गजल ९८२ — छत्ता मधु भरै, आस मधु सँ भरैए

गजल ९८२, “छत्ता मधु भरै, आस मधु सँ भरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11085–11113. संस्करणक विवरण.

गजल ९८३ — तितली रंग उड़ै, रंग पाँख पसारैए

गजल ९८३, “तितली रंग उड़ै, रंग पाँख पसारैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11114–11142. संस्करणक विवरण.

गजल ९८४ — घोंघा पथ सरकै, पहिचान पाछाँ रहि जाइए

गजल ९८४, “घोंघा पथ सरकै, पहिचान पाछाँ रहि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11143–11171. संस्करणक विवरण.

गजल ९८५ — कछुआ नीर काटै, राह नीरमे बहैए

गजल ९८५, “कछुआ नीर काटै, राह नीरमे बहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11172–11200. संस्करणक विवरण.

गजल ९८६ — सनई फूल डोलै, रंग पवनमे लहरैए

गजल ९८६, “सनई फूल डोलै, रंग पवनमे लहरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11201–11229. संस्करणक विवरण.

गजल ९८७ — कनकौआ ऊपर उठै, डोर अकास चढ़ि जाइए

गजल ९८७, “कनकौआ ऊपर उठै, डोर अकास चढ़ि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11230–11258. संस्करणक विवरण.

गजल ९८८ — सूप दाना छाँटै, धान सूपमे छँटैए

गजल ९८८, “सूप दाना छाँटै, धान सूपमे छँटैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11259–11287. संस्करणक विवरण.

गजल ९८९ — झाँपी भीतर सजै, नाम भीतर बचि रहैए

गजल ९८९, “झाँपी भीतर सजै, नाम भीतर बचि रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11288–11316. संस्करणक विवरण.

गजल ९९० — ताड़पात आखर खुलै, ज्ञान पातमे बोलैए

गजल ९९०, “ताड़पात आखर खुलै, ज्ञान पातमे बोलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11317–11345. संस्करणक विवरण.

गजल ९९१ — पीपर छाँह पसरै, राह छाँहमे टिकि रहैए

गजल ९९१, “पीपर छाँह पसरै, राह छाँहमे टिकि रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11346–11374. संस्करणक विवरण.

गजल ९९२ — खजूर रस टपकै, आस रस टपकैत रहैए

गजल ९९२, “खजूर रस टपकै, आस रस टपकैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11375–11403. संस्करणक विवरण.

गजल ९९३ — बकुल फूल झरै, सुवास भोरमे महकि उठैए

गजल ९९३, “बकुल फूल झरै, सुवास भोरमे महकि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11404–11432. संस्करणक विवरण.

गजल ९९४ — ओल माटि फोड़ै, मूल माटि फोड़ि निकलैए

गजल ९९४, “ओल माटि फोड़ै, मूल माटि फोड़ि निकलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11433–11461. संस्करणक विवरण.

गजल ९९५ — अरुई पात डोलै, बात पवनमे झूमैए

गजल ९९५, “अरुई पात डोलै, बात पवनमे झूमैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11462–11490. संस्करणक विवरण.

गजल ९९६ — मड़ुआ बालि झुकै, बाल नमि जाइए

गजल ९९६, “मड़ुआ बालि झुकै, बाल नमि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11491–11519. संस्करणक विवरण.

गजल ९९७ — कुरथी दालि पकै, दाल भानसमे महकैए

गजल ९९७, “कुरथी दालि पकै, दाल भानसमे महकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11520–11548. संस्करणक विवरण.

गजल ९९८ — तिल घानी घुमै, हाथ घानी संग चलैए

गजल ९९८, “तिल घानी घुमै, हाथ घानी संग चलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11549–11577. संस्करणक विवरण.

गजल ९९९ — मकई भुट्टा खुलै, धान दाना झरि पड़ैए

गजल ९९९, “मकई भुट्टा खुलै, धान दाना झरि पड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11578–11606. संस्करणक विवरण.

गजल १००० — हजारम गजल खुलै, गीत आगाँ गुँजैत रहैए

गजल १०००, “हजारम गजल खुलै, गीत आगाँ गुँजैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11607–11635. संस्करणक विवरण.

गजल १००१ — दीप बाती जरै, विश्वास मन्दे मन्दे जरैए

गजल १००१, “दीप बाती जरै, विश्वास मन्दे मन्दे जरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11636–11664. संस्करणक विवरण.

गजल १००२ — चरखा सूत कातै, मान सूतमे गाँठि जुड़ैए

गजल १००२, “चरखा सूत कातै, मान सूतमे गाँठि जुड़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11665–11693. संस्करणक विवरण.

गजल १००३ — मखान पोखर जागै, थाह नीर तलसँ उठैए

गजल १००३, “मखान पोखर जागै, थाह नीर तलसँ उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11694–11722. संस्करणक विवरण.

गजल १००४ — पान पात भीजै, रंग ओस संग चमकि उठैए

गजल १००४, “पान पात भीजै, रंग ओस संग चमकि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11723–11751. संस्करणक विवरण.

गजल १००५ — सुपारी कटरनी चलै, विचार फाँक बनि खुलैए

गजल १००५, “सुपारी कटरनी चलै, विचार फाँक बनि खुलैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11752–11780. संस्करणक विवरण.

गजल १००६ — सिकी डलिया बुनै, प्रीत बुनाइमे रूप धरैए

गजल १००६, “सिकी डलिया बुनै, प्रीत बुनाइमे रूप धरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11781–11809. संस्करणक विवरण.

गजल १००७ — कुम्हारक चाक घुमै, आधार माटिसँ देह गढ़ैए

गजल १००७, “कुम्हारक चाक घुमै, आधार माटिसँ देह गढ़ैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11810–11838. संस्करणक विवरण.

गजल १००८ — घैला नीर भरै, श्वास शीतल नेह भरैत जाइए

गजल १००८, “घैला नीर भरै, श्वास शीतल नेह भरैत जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11839–11867. संस्करणक विवरण.

गजल १००९ — लाठी बाट चलै, साथ पएर संग टिकैत रहैए

गजल १००९, “लाठी बाट चलै, साथ पएर संग टिकैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11868–11896. संस्करणक विवरण.

गजल १०१० — रोपनी धान झुकै, मान पाँतिमे हरियैत जाइए

गजल १०१०, “रोपनी धान झुकै, मान पाँतिमे हरियैत जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11897–11925. संस्करणक विवरण.

गजल १०११ — कदली पात बजै, पात बरखा संग थिरकैए

गजल १०११, “कदली पात बजै, पात बरखा संग थिरकैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11926–11954. संस्करणक विवरण.

गजल १०१२ — आम मंजर फुलै, आस गाछ भरि गमकि उठैए

गजल १०१२, “आम मंजर फुलै, आस गाछ भरि गमकि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11955–11983. संस्करणक विवरण.

गजल १०१३ — लीची गुच्छा पाकै, रंग डारि संग झूलैत रहैए

गजल १०१३, “लीची गुच्छा पाकै, रंग डारि संग झूलैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 11984–12012. संस्करणक विवरण.

गजल १०१४ — सिन्नुर डिबिया खुलै, मान माँगमे रँग भरैए

गजल १०१४, “सिन्नुर डिबिया खुलै, मान माँगमे रँग भरैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12013–12041. संस्करणक विवरण.

गजल १०१५ — कमल पोखर जागै, आस भोर संग खुलि उठैए

गजल १०१५, “कमल पोखर जागै, आस भोर संग खुलि उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12042–12070. संस्करणक विवरण.

गजल १०१६ — चापाकल चलै, धार धरतीसँ नीर उठैए

गजल १०१६, “चापाकल चलै, धार धरतीसँ नीर उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12071–12099. संस्करणक विवरण.

गजल १०१७ — ढेकी धान कुटै, ताल धपधप सोर उठैए

गजल १०१७, “ढेकी धान कुटै, ताल धपधप सोर उठैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12100–12128. संस्करणक विवरण.

गजल १०१८ — बेलना लोइ फैलै, आधार गोलाइमे फैलैत जाइए

गजल १०१८, “बेलना लोइ फैलै, आधार गोलाइमे फैलैत जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12129–12157. संस्करणक विवरण.

गजल १०१९ — खपड़ा छान्ह टिकै, राह बरखा रोकैत रहैए

गजल १०१९, “खपड़ा छान्ह टिकै, राह बरखा रोकैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12158–12186. संस्करणक विवरण.

गजल १०२० — भूसा दउनी चलै, सोर पवन संग उड़ि जाइए

गजल १०२०, “भूसा दउनी चलै, सोर पवन संग उड़ि जाइए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12187–12215. संस्करणक विवरण.

गजल १०२१ — बेंत पीढ़ी बुनै, मान बैसबाक आसन बनैए

गजल १०२१, “बेंत पीढ़ी बुनै, मान बैसबाक आसन बनैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12216–12244. संस्करणक विवरण.

गजल १०२२ — माटिक चूल्हि जरै, रात आँच भीतर जगैत रहैए

गजल १०२२, “माटिक चूल्हि जरै, रात आँच भीतर जगैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12245–12273. संस्करणक विवरण.

गजल १०२३ — दूब आँगन भीजै, राह पएर तले हरियैए

गजल १०२३, “दूब आँगन भीजै, राह पएर तले हरियैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12274–12302. संस्करणक विवरण.

गजल १०२४ — झूला आमगाछ हिलै, उमंग पवन संग डोलैत रहैए

गजल १०२४, “झूला आमगाछ हिलै, उमंग पवन संग डोलैत रहैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12303–12331. संस्करणक विवरण.

गजल १०२५ — कोसी धार बहै, इतिहास नकसा फेर लिखैए

गजल १०२५, “कोसी धार बहै, इतिहास नकसा फेर लिखैए,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12332–12360. संस्करणक विवरण.

गजल १०२६ — पगडंडी धूर — आस एतबे साँच नहि

गजल १०२६, “पगडंडी धूर — आस एतबे साँच नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12361–12389. संस्करणक विवरण.

गजल १०२७ — नाव पतवार — मान तखन अर्थ खुलैत अछि

गजल १०२७, “नाव पतवार — मान तखन अर्थ खुलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12390–12418. संस्करणक विवरण.

गजल १०२८ — सनक रस्सी — राह मोन फेर पूछैत रहै

गजल १०२८, “सनक रस्सी — राह मोन फेर पूछैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12419–12447. संस्करणक विवरण.

गजल १०२९ — सरकंडा चटाई — रंग नाम कतहु हराइत नहि

गजल १०२९, “सरकंडा चटाई — रंग नाम कतहु हराइत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12448–12476. संस्करणक विवरण.

गजल १०३० — तसर कोया — सार रेशमक छुअन बचल रहत

गजल १०३०, “तसर कोया — सार रेशमक छुअन बचल रहत,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12477–12505. संस्करणक विवरण.

गजल १०३१ — दही मथानी — गीत अपन बाट बनबैत अछि

गजल १०३१, “दही मथानी — गीत अपन बाट बनबैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12506–12534. संस्करणक विवरण.

गजल १०३२ — धानक कोठी — हाथ फेर घर दिस अबैत अछि

गजल १०३२, “धानक कोठी — हाथ फेर घर दिस अबैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12535–12563. संस्करणक विवरण.

गजल १०३३ — खोंइछा अन्न — बात कथा एतय थमैत नहि

गजल १०३३, “खोंइछा अन्न — बात कथा एतय थमैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12564–12592. संस्करणक विवरण.

गजल १०३४ — पोखर घाट — सोर पएर आगाँ बढ़ैत रहै

गजल १०३४, “पोखर घाट — सोर पएर आगाँ बढ़ैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12593–12621. संस्करणक विवरण.

गजल १०३५ — अरिपन रेखा — ताल रेखा घर सँ जुड़ैत अछि

गजल १०३५, “अरिपन रेखा — ताल रेखा घर सँ जुड़ैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12622–12650. संस्करणक विवरण.

गजल १०३६ — बाँसुरी स्वर — आस भीतर साँस लैत अछि

गजल १०३६, “बाँसुरी स्वर — आस भीतर साँस लैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12651–12679. संस्करणक विवरण.

गजल १०३७ — गोरस मथनी — मान रस हाथे बदलैत अछि

गजल १०३७, “गोरस मथनी — मान रस हाथे बदलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12680–12708. संस्करणक विवरण.

गजल १०३८ — मिथिला चित्रक कूची — सोर रंग मौनहुँ बोलैत अछि

गजल १०३८, “मिथिला चित्रक कूची — सोर रंग मौनहुँ बोलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12709–12737. संस्करणक विवरण.

गजल १०३९ — माछक जाल — सार नीर जाल परखैत अछि

गजल १०३९, “माछक जाल — सार नीर जाल परखैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12738–12766. संस्करणक विवरण.

गजल १०४० — पोथीक जिल्द — गीत आखर देह धरैत अछि

गजल १०४०, “पोथीक जिल्द — गीत आखर देह धरैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12767–12795. संस्करणक विवरण.

गजल १०४१ — नीम पात — राह ओहि घड़ी भेद खुलैत अछि

गजल १०४१, “नीम पात — राह ओहि घड़ी भेद खुलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12796–12824. संस्करणक विवरण.

गजल १०४२ — कांस फूल — रंग चिन्ह पवनोमे बचैत अछि

गजल १०४२, “कांस फूल — रंग चिन्ह पवनोमे बचैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12825–12853. संस्करणक विवरण.

गजल १०४३ — बरगद जटा — हाथ काल फेर घुरि अबैत नहि

गजल १०४३, “बरगद जटा — हाथ काल फेर घुरि अबैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12854–12882. संस्करणक विवरण.

गजल १०४४ — पुआल गादी — मान घाम पुआलमे बचैत अछि

गजल १०४४, “पुआल गादी — मान घाम पुआलमे बचैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12883–12911. संस्करणक विवरण.

गजल १०४५ — तिलकोर पात — बात लता आँगन जोड़ैत अछि

गजल १०४५, “तिलकोर पात — बात लता आँगन जोड़ैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12912–12940. संस्करणक विवरण.

गजल १०४६ — सिंघाड़ा पोखर — गीत नीर तले फल पाकैत अछि

गजल १०४६, “सिंघाड़ा पोखर — गीत नीर तले फल पाकैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12941–12969. संस्करणक विवरण.

गजल १०४७ — कमला धार — सार नीर सभ गप कहैत नहि

गजल १०४७, “कमला धार — सार नीर सभ गप कहैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12970–12998. संस्करणक विवरण.

गजल १०४८ — चिरई घोंसला — सोर मौनहुँ उत्तर दैत अछि

गजल १०४८, “चिरई घोंसला — सोर मौनहुँ उत्तर दैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 12999–13027. संस्करणक विवरण.

गजल १०४९ — धानक लावा — ताल रूप बदलियो मूल रहैत अछि

गजल १०४९, “धानक लावा — ताल रूप बदलियो मूल रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13028–13056. संस्करणक विवरण.

गजल १०५० — आखरक यात्रा — आस अन्त एतय होइत नहि

गजल १०५०, “आखरक यात्रा — आस अन्त एतय होइत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13057–13085. संस्करणक विवरण.

गजल १०५१ — लोहारक धौंकनी — आस कथन एतेक पर थिर नहि

गजल १०५१, “लोहारक धौंकनी — आस कथन एतेक पर थिर नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13086–13114. संस्करणक विवरण.

गजल १०५२ — करघाक ताना — मान सूत भीतर चिन्ह बचल अछि

गजल १०५२, “करघाक ताना — मान सूत भीतर चिन्ह बचल अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13115–13143. संस्करणक विवरण.

गजल १०५३ — अलसी फूल — राह धुनि पवनक संग मुड़ैत रहै

गजल १०५३, “अलसी फूल — राह धुनि पवनक संग मुड़ैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13144–13172. संस्करणक विवरण.

गजल १०५४ — सरिसो खेत — रंग नेह बिना रंग पूरा नहि

गजल १०५४, “सरिसो खेत — रंग नेह बिना रंग पूरा नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13173–13201. संस्करणक विवरण.

गजल १०५५ — पगहा गाँठि — सार बंधन अपन राह चुनैत अछि

गजल १०५५, “पगहा गाँठि — सार बंधन अपन राह चुनैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13202–13230. संस्करणक विवरण.

गजल १०५६ — जूटक बोरा — गीत बीज चुप्पे उत्तर धरैत अछि

गजल १०५६, “जूटक बोरा — गीत बीज चुप्पे उत्तर धरैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13231–13259. संस्करणक विवरण.

गजल १०५७ — कुशक आसन — हाथ छाह बदललहुँ मूल नहि

गजल १०५७, “कुशक आसन — हाथ छाह बदललहुँ मूल नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13260–13288. संस्करणक विवरण.

गजल १०५८ — सोनारक हथौड़ी — बात थाप देहक भेद गनैत रहै

गजल १०५८, “सोनारक हथौड़ी — बात थाप देहक भेद गनैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13289–13317. संस्करणक विवरण.

गजल १०५९ — जुगनू राति — सोर राति भीतर भोर पलैत अछि

गजल १०५९, “जुगनू राति — सोर राति भीतर भोर पलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13318–13346. संस्करणक विवरण.

गजल १०६० — ओसक बूँद — ताल घाम बिना चमक खुलैत नहि

गजल १०६०, “ओसक बूँद — ताल घाम बिना चमक खुलैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13347–13375. संस्करणक विवरण.

गजल १०६१ — कमलनाल — आस नोरक अर्थ एक्के नहि

गजल १०६१, “कमलनाल — आस नोरक अर्थ एक्के नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13376–13404. संस्करणक विवरण.

गजल १०६२ — माटिक पुतरी — मान साँस संग लय बदलैत अछि

गजल १०६२, “माटिक पुतरी — मान साँस संग लय बदलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13405–13433. संस्करणक विवरण.

गजल १०६३ — बढ़ईक रन्दा — सोर हाथक छाप मेटैत नहि

गजल १०६३, “बढ़ईक रन्दा — सोर हाथक छाप मेटैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13434–13462. संस्करणक विवरण.

गजल १०६४ — पानक बारी — सार नीर नीचे जीवन जगैत अछि

गजल १०६४, “पानक बारी — सार नीर नीचे जीवन जगैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13463–13491. संस्करणक विवरण.

गजल १०६५ — पोखरक पाँक — गीत मौनक सीमा एतय टूटैत अछि

गजल १०६५, “पोखरक पाँक — गीत मौनक सीमा एतय टूटैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13492–13520. संस्करणक विवरण.

गजल १०६६ — आम्रपल्लव तोरण — राह समय अपन गाँठि खोलैत रहै

गजल १०६६, “आम्रपल्लव तोरण — राह समय अपन गाँठि खोलैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13521–13549. संस्करणक विवरण.

गजल १०६७ — कुटजक छाल — रंग पवन संग देह झुकैत अछि

गजल १०६७, “कुटजक छाल — रंग पवन संग देह झुकैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13550–13578. संस्करणक विवरण.

गजल १०६८ — मसूरक फूल — हाथ दूरिक राह मोन नापैत रहै

गजल १०६८, “मसूरक फूल — हाथ दूरिक राह मोन नापैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13579–13607. संस्करणक विवरण.

गजल १०६९ — चनाक फली — मान दाना भीतर ऋतु बसैत अछि

गजल १०६९, “चनाक फली — मान दाना भीतर ऋतु बसैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13608–13636. संस्करणक विवरण.

गजल १०७० — मूँजक चटाई — बात आँगन सभ कथा सुनैत अछि

गजल १०७०, “मूँजक चटाई — बात आँगन सभ कथा सुनैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13637–13665. संस्करणक विवरण.

गजल १०७१ — ताँतक गाँठि — गीत प्रश्नक डोर टूटैत नहि

गजल १०७१, “ताँतक गाँठि — गीत प्रश्नक डोर टूटैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13666–13694. संस्करणक विवरण.

गजल १०७२ — पलाशक फूल — सार धूपक रंग साँझ धरि रहैत अछि

गजल १०७२, “पलाशक फूल — सार धूपक रंग साँझ धरि रहैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13695–13723. संस्करणक विवरण.

गजल १०७३ — बकाइन छाह — सोर गंध पुरान घर चिन्हैत अछि

गजल १०७३, “बकाइन छाह — सोर गंध पुरान घर चिन्हैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13724–13752. संस्करणक विवरण.

गजल १०७४ — चकरी पवन — ताल धारक मोड़ स्थिर रहैत नहि

गजल १०७४, “चकरी पवन — ताल धारक मोड़ स्थिर रहैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13753–13781. संस्करणक विवरण.

गजल १०७५ — सुईक टाँका — आस आखर पाछाँ अर्थ चलैत रहै

गजल १०७५, “सुईक टाँका — आस आखर पाछाँ अर्थ चलैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13782–13810. संस्करणक विवरण.

गजल १०७६ — बाँसक सूप — आस दाना छनितहुँ भेद मेटैत नहि

गजल १०७६, “बाँसक सूप — आस दाना छनितहुँ भेद मेटैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13811–13839. संस्करणक विवरण.

गजल १०७७ — काँसक डलिया — मान बुनावट भीतर हाथक मान अछि

गजल १०७७, “काँसक डलिया — मान बुनावट भीतर हाथक मान अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13840–13868. संस्करणक विवरण.

गजल १०७८ — घोंघाक खोल — राह खोल बदलि जीवन थमैत नहि

गजल १०७८, “घोंघाक खोल — राह खोल बदलि जीवन थमैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13869–13897. संस्करणक विवरण.

गजल १०७९ — सखुआ पात — रंग पात झरलहुँ गंध बचल रहै

गजल १०७९, “सखुआ पात — रंग पात झरलहुँ गंध बचल रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13898–13926. संस्करणक विवरण.

गजल १०८० — कदंबक फूल — सार फूलक छाह समय धरि रहत

गजल १०८०, “कदंबक फूल — सार फूलक छाह समय धरि रहत,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13927–13955. संस्करणक विवरण.

गजल १०८१ — बेंतक मोढ़ा — गीत बेंत नमितहुँ मूल टूटैत नहि

गजल १०८१, “बेंतक मोढ़ा — गीत बेंत नमितहुँ मूल टूटैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13956–13984. संस्करणक विवरण.

गजल १०८२ — मृदंगक चमड़ा — हाथ थाप पाछाँ मौन सेहो बजैत अछि

गजल १०८२, “मृदंगक चमड़ा — हाथ थाप पाछाँ मौन सेहो बजैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 13985–14013. संस्करणक विवरण.

गजल १०८३ — मटरक फूल — बात पछिया संग पीयर रंग बहैत रहै

गजल १०८३, “मटरक फूल — बात पछिया संग पीयर रंग बहैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14014–14042. संस्करणक विवरण.

गजल १०८४ — तिलक फली — सोर दाना छोटो हो, कथा पैघ अछि

गजल १०८४, “तिलक फली — सोर दाना छोटो हो, कथा पैघ अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14043–14071. संस्करणक विवरण.

गजल १०८५ — भदई धान — ताल धानक गंध घर चिन्हैत रहै

गजल १०८५, “भदई धान — ताल धानक गंध घर चिन्हैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14072–14100. संस्करणक विवरण.

गजल १०८६ — हंसुलीक चमक — आस चमक देहक मान बनैत नहि

गजल १०८६, “हंसुलीक चमक — आस चमक देहक मान बनैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14101–14129. संस्करणक विवरण.

गजल १०८७ — कनैल फूल — मान रंग विषक छाह ढाकैत नहि

गजल १०८७, “कनैल फूल — मान रंग विषक छाह ढाकैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14130–14158. संस्करणक विवरण.

गजल १०८८ — खपरैल छानि — सोर वर्षा बीतलहुँ छानि बोलैत रहै

गजल १०८८, “खपरैल छानि — सोर वर्षा बीतलहुँ छानि बोलैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14159–14187. संस्करणक विवरण.

गजल १०८९ — ताड़क पंखा — सार हवा हाथक संगति मानैत अछि

गजल १०८९, “ताड़क पंखा — सार हवा हाथक संगति मानैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14188–14216. संस्करणक विवरण.

गजल १०९० — घैलाक मुँह — गीत मुँह छोट, नीरक राह पैघ अछि

गजल १०९०, “घैलाक मुँह — गीत मुँह छोट, नीरक राह पैघ अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14217–14245. संस्करणक विवरण.

गजल १०९१ — सिलौटक धार — राह घिसाइ पाछाँ धार उघड़ैत अछि

गजल १०९१, “सिलौटक धार — राह घिसाइ पाछाँ धार उघड़ैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14246–14274. संस्करणक विवरण.

गजल १०९२ — लहठीक खनक — रंग खनक स्मृति केर डोर कसैत रहै

गजल १०९२, “लहठीक खनक — रंग खनक स्मृति केर डोर कसैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14275–14303. संस्करणक विवरण.

गजल १०९३ — चूल्हिक राख — हाथ राख भीतर आँच मरैत नहि

गजल १०९३, “चूल्हिक राख — हाथ राख भीतर आँच मरैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14304–14332. संस्करणक विवरण.

गजल १०९४ — कचनार पात — मान पात मोड़लहुँ हरियर नस चलैत अछि

गजल १०९४, “कचनार पात — मान पात मोड़लहुँ हरियर नस चलैत अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14333–14361. संस्करणक विवरण.

गजल १०९५ — कपासक रूई — बात रूई हलुक, श्रमक भार हलुक नहि

गजल १०९५, “कपासक रूई — बात रूई हलुक, श्रमक भार हलुक नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14362–14390. संस्करणक विवरण.

गजल १०९६ — बेलनक घुमाव — गीत घुमाव बीच केन्द्र छुटैत नहि

गजल १०९६, “बेलनक घुमाव — गीत घुमाव बीच केन्द्र छुटैत नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14391–14419. संस्करणक विवरण.

गजल १०९७ — धानक भूसी — सार भूसी उडलहुँ दाना थिर रहै

गजल १०९७, “धानक भूसी — सार भूसी उडलहुँ दाना थिर रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14420–14448. संस्करणक विवरण.

गजल १०९८ — मधुक छत्ता — सोर मधु सँ पैघ श्रमक सार अछि

गजल १०९८, “मधुक छत्ता — सोर मधु सँ पैघ श्रमक सार अछि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14449–14477. संस्करणक विवरण.

गजल १०९९ — रुद्राक्षक दाना — ताल दाना गनितहुँ जप पूरा नहि

गजल १०९९, “रुद्राक्षक दाना — ताल दाना गनितहुँ जप पूरा नहि,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14478–14506. संस्करणक विवरण.

गजल ११०० — घंटीक अनुनाद — आस अनुनाद दूर धरि बाट खोलैत रहै

गजल ११००, “घंटीक अनुनाद — आस अनुनाद दूर धरि बाट खोलैत रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14507–14535. संस्करणक विवरण.

गजल ११०१ — हँसियाक धार — मान पर राह खुलै

गजल ११०१, “हँसियाक धार — मान पर राह खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14536–14564. संस्करणक विवरण.

गजल ११०२ — इनारक डोल — सोर संग नेह रहै

गजल ११०२, “इनारक डोल — सोर संग नेह रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14565–14593. संस्करणक विवरण.

गजल ११०३ — घूरक आँच — राह पर गप खुलै

गजल ११०३, “घूरक आँच — राह पर गप खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14594–14622. संस्करणक विवरण.

गजल ११०४ — ईखक गाँठि — गीत बीच राह चलै

गजल ११०४, “ईखक गाँठि — गीत बीच राह चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14623–14651. संस्करणक विवरण.

गजल ११०५ — गुड़क भेली — ताल कात धुन उठै

गजल ११०५, “गुड़क भेली — ताल कात धुन उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14652–14680. संस्करणक विवरण.

गजल ११०६ — झाड़ूक सींक — आस बीच रूप खुलै

गजल ११०६, “झाड़ूक सींक — आस बीच रूप खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14681–14709. संस्करणक विवरण.

गजल ११०७ — कोंहड़ाक बेल — सार पर भोर खुलै

गजल ११०७, “कोंहड़ाक बेल — सार पर भोर खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14710–14738. संस्करणक विवरण.

गजल ११०८ — जामुनक गाछ — मान पर डोर तनै

गजल ११०८, “जामुनक गाछ — मान पर डोर तनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14739–14767. संस्करणक विवरण.

गजल ११०९ — बेलक फल — सोर संग ताल बजै

गजल ११०९, “बेलक फल — सोर संग ताल बजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14768–14796. संस्करणक विवरण.

गजल १११० — कौड़ीक चाल — राह बीच रंग झरै

गजल १११०, “कौड़ीक चाल — राह बीच रंग झरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14797–14825. संस्करणक विवरण.

गजल ११११ — खाटक पाट — गीत कात भोर खुलै

गजल ११११, “खाटक पाट — गीत कात भोर खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14826–14854. संस्करणक विवरण.

गजल १११२ — ढिबरीक काँच — ताल संग काज चलै

गजल १११२, “ढिबरीक काँच — ताल संग काज चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14855–14883. संस्करणक विवरण.

गजल १११३ — घुँघरूक नाद — आस पर थाह मिलै

गजल १११३, “घुँघरूक नाद — आस पर थाह मिलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14884–14912. संस्करणक विवरण.

गजल १११४ — झाँझक थाप — सार संग मान रहै

गजल १११४, “झाँझक थाप — सार संग मान रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14913–14941. संस्करणक विवरण.

गजल १११५ — खुरपीक धार — मान पर साँच खुलै

गजल १११५, “खुरपीक धार — मान पर साँच खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14942–14970. संस्करणक विवरण.

गजल १११६ — बथानक खूँटा — राह संग गीत उठै

गजल १११६, “बथानक खूँटा — राह संग गीत उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 14971–14999. संस्करणक विवरण.

गजल १११७ — दूधक फेन — गीत बीच नेह रहै

गजल १११७, “दूधक फेन — गीत बीच नेह रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15000–15028. संस्करणक विवरण.

गजल १११८ — लाहक चूड़ी — ताल संग धूप ढलै

गजल १११८, “लाहक चूड़ी — ताल संग धूप ढलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15029–15057. संस्करणक विवरण.

गजल १११९ — बटखराक तोल — आस बीच छाह सरै

गजल १११९, “बटखराक तोल — आस बीच छाह सरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15058–15086. संस्करणक विवरण.

गजल ११२० — पालकीक डाँड़ — सार संग बीज उगै

गजल ११२०, “पालकीक डाँड़ — सार संग बीज उगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15087–15115. संस्करणक विवरण.

गजल ११२१ — माछक शल्क — मान मे आँच जगै

गजल ११२१, “माछक शल्क — मान मे आँच जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15116–15144. संस्करणक विवरण.

गजल ११२२ — माटिक सुराही — सोर पर मोन नमै

गजल ११२२, “माटिक सुराही — सोर पर मोन नमै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15145–15173. संस्करणक विवरण.

गजल ११२३ — कुल्हड़क गंध — राह कात सोर उठै

गजल ११२३, “कुल्हड़क गंध — राह कात सोर उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15174–15202. संस्करणक विवरण.

गजल ११२४ — तुरहीक नाद — गीत संग राह बनै

गजल ११२४, “तुरहीक नाद — गीत संग राह बनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15203–15231. संस्करणक विवरण.

गजल ११२५ — डमरूक ताल — ताल मे नेह जगै

गजल ११२५, “डमरूक ताल — ताल मे नेह जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15232–15260. संस्करणक विवरण.

गजल ११२६ — गोइठाक राख — सार पर अर्थ बचै

गजल ११२६, “गोइठाक राख — सार पर अर्थ बचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15261–15289. संस्करणक विवरण.

गजल ११२७ — लौकीक बेल — मान संग मोन घुरै

गजल ११२७, “लौकीक बेल — मान संग मोन घुरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15290–15318. संस्करणक विवरण.

गजल ११२८ — कदम्बक फूल — राह बीच गप जुड़ै

गजल ११२८, “कदम्बक फूल — राह बीच गप जुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15319–15347. संस्करणक विवरण.

गजल ११२९ — करघाक सूत — रंग कात साँच रहै

गजल ११२९, “करघाक सूत — रंग कात साँच रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15348–15376. संस्करणक विवरण.

गजल ११३० — फूसक छानि — गीत मे नेह चलै

गजल ११३०, “फूसक छानि — गीत मे नेह चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15377–15405. संस्करणक विवरण.

गजल ११३१ — बेरक काँट — बात पर छाप बचै

गजल ११३१, “बेरक काँट — बात पर छाप बचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15406–15434. संस्करणक विवरण.

गजल ११३२ — बाँसक फाँक — सोर संग भेद खुलै

गजल ११३२, “बाँसक फाँक — सोर संग भेद खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15435–15463. संस्करणक विवरण.

गजल ११३३ — पोखरिक घाट — ताल बीच सोर पहुँचै

गजल ११३३, “पोखरिक घाट — ताल बीच सोर पहुँचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15464–15492. संस्करणक विवरण.

गजल ११३४ — गाछक खोह — आस कात मान जगै

गजल ११३४, “गाछक खोह — आस कात मान जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15493–15521. संस्करणक विवरण.

गजल ११३५ — पीपलक जड़ि — सार मे राह चलै

गजल ११३५, “पीपलक जड़ि — सार मे राह चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15522–15550. संस्करणक विवरण.

गजल ११३६ — चकईक पाँख — मान पर स्वर फूटै

गजल ११३६, “चकईक पाँख — मान पर स्वर फूटै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15551–15579. संस्करणक विवरण.

गजल ११३७ — कागक ठोर — राह संग प्रश्न उठै

गजल ११३७, “कागक ठोर — राह संग प्रश्न उठै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15580–15608. संस्करणक विवरण.

गजल ११३८ — मेघक बूँद — रंग बीच रूप बसै

गजल ११३८, “मेघक बूँद — रंग बीच रूप बसै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15609–15637. संस्करणक विवरण.

गजल ११३९ — बिजुरीक रेख — गीत कात रंग मुड़ै

गजल ११३९, “बिजुरीक रेख — गीत कात रंग मुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15638–15666. संस्करणक विवरण.

गजल ११४० — पूसक धुंध — बात मे धुन बदलै

गजल ११४०, “पूसक धुंध — बात मे धुन बदलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15667–15695. संस्करणक विवरण.

गजल ११४१ — जेठक धूल — सोर पर साँस बढ़ै

गजल ११४१, “जेठक धूल — सोर पर साँस बढ़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15696–15724. संस्करणक विवरण.

गजल ११४२ — सावनक टपक — ताल संग काल बचै

गजल ११४२, “सावनक टपक — ताल संग काल बचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15725–15753. संस्करणक विवरण.

गजल ११४३ — भादोक पाँक — आस बीच बीज चलै

गजल ११४३, “भादोक पाँक — आस बीच बीज चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15754–15782. संस्करणक विवरण.

गजल ११४४ — अगहनक बाली — सार कात पात पहुँचै

गजल ११४४, “अगहनक बाली — सार कात पात पहुँचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15783–15811. संस्करणक विवरण.

गजल ११४५ — फागुनक अबीर — मान मे भोर जुड़ै

गजल ११४५, “फागुनक अबीर — मान मे भोर जुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15812–15840. संस्करणक विवरण.

गजल ११४६ — चैतिक पछिया — राह पर थाह रहै

गजल ११४६, “चैतिक पछिया — राह पर थाह रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15841–15869. संस्करणक विवरण.

गजल ११४७ — कार्तिकक दीप — रंग संग छाह ठहरै

गजल ११४७, “कार्तिकक दीप — रंग संग छाह ठहरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15870–15898. संस्करणक विवरण.

गजल ११४८ — माघक धूप — गीत बीच नाद उड़ै

गजल ११४८, “माघक धूप — गीत बीच नाद उड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15899–15927. संस्करणक विवरण.

गजल ११४९ — नदीक बालू — बात कात गंध पलै

गजल ११४९, “नदीक बालू — बात कात गंध पलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15928–15956. संस्करणक विवरण.

गजल ११५० — शंखक सोर — सोर मे फूल उघड़ै

गजल ११५०, “शंखक सोर — सोर मे फूल उघड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15957–15985. संस्करणक विवरण.

गजल ११५१ — बेलपत्रक डारि — सार पर नेह जगै

गजल ११५१, “बेलपत्रक डारि — सार पर नेह जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 15986–16014. संस्करणक विवरण.

गजल ११५२ — खेसारीक दाना — मान संग राह खुलै

गजल ११५२, “खेसारीक दाना — मान संग राह खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16015–16043. संस्करणक विवरण.

गजल ११५३ — कुर्थीक दालि — राह बीच मान चलै

गजल ११५३, “कुर्थीक दालि — राह बीच मान चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16044–16072. संस्करणक विवरण.

गजल ११५४ — जाँतक पाट — रंग कात रूप रहै

गजल ११५४, “जाँतक पाट — रंग कात रूप रहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16073–16101. संस्करणक विवरण.

गजल ११५५ — सिलौटक लीक — गीत मे गप बनै

गजल ११५५, “सिलौटक लीक — गीत मे गप बनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16102–16130. संस्करणक विवरण.

गजल ११५६ — चूल्हिक धूर — बात पर बीज उगै

गजल ११५६, “चूल्हिक धूर — बात पर बीज उगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16131–16159. संस्करणक विवरण.

गजल ११५७ — कूपक घेरा — सोर संग काल बहै

गजल ११५७, “कूपक घेरा — सोर संग काल बहै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16160–16188. संस्करणक विवरण.

गजल ११५८ — नाँदक जल — ताल बीच छाप बचै

गजल ११५८, “नाँदक जल — ताल बीच छाप बचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16189–16217. संस्करणक विवरण.

गजल ११५९ — भीतक लेप — आस कात डोर तनै

गजल ११५९, “भीतक लेप — आस कात डोर तनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16218–16246. संस्करणक विवरण.

गजल ११६० — खपराक छत — सार मे थाह खुलै

गजल ११६०, “खपराक छत — सार मे थाह खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16247–16275. संस्करणक विवरण.

गजल ११६१ — काठक छील — मान पर स्वर बजै

गजल ११६१, “काठक छील — मान पर स्वर बजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16276–16304. संस्करणक विवरण.

गजल ११६२ — ताड़क रस — राह संग साँच जनै

गजल ११६२, “ताड़क रस — राह संग साँच जनै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16305–16333. संस्करणक विवरण.

गजल ११६३ — पनसक बीआ — रंग बीच नेह बचै

गजल ११६३, “पनसक बीआ — रंग बीच नेह बचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16334–16362. संस्करणक विवरण.

गजल ११६४ — मखानक खोल — गीत कात राह मुड़ै

गजल ११६४, “मखानक खोल — गीत कात राह मुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16363–16391. संस्करणक विवरण.

गजल ११६५ — सनक रेसा — बात मे रूप बदलै

गजल ११६५, “सनक रेसा — बात मे रूप बदलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16392–16420. संस्करणक विवरण.

गजल ११६६ — चूनक ढेरी — सोर पर गंध पलै

गजल ११६६, “चूनक ढेरी — सोर पर गंध पलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16421–16449. संस्करणक विवरण.

गजल ११६७ — घीक वास — ताल संग सोर फूटै

गजल ११६७, “घीक वास — ताल संग सोर फूटै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16450–16478. संस्करणक विवरण.

गजल ११६८ — मधुक मकरंद — आस बीच मान ठहरै

गजल ११६८, “मधुक मकरंद — आस बीच मान ठहरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16479–16507. संस्करणक विवरण.

गजल ११६९ — कोठीक अन्न — सार कात डोर जुड़ै

गजल ११६९, “कोठीक अन्न — सार कात डोर जुड़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16508–16536. संस्करणक विवरण.

गजल ११७० — ढोलकक थाप — मान मे छाह सरै

गजल ११७०, “ढोलकक थाप — मान मे छाह सरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16537–16565. संस्करणक विवरण.

गजल ११७१ — काँसक थाल — राह पर भोर उगै

गजल ११७१, “काँसक थाल — राह पर भोर उगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16566–16594. संस्करणक विवरण.

गजल ११७२ — जोतक लीक — रंग संग तर्क जँचै

गजल ११७२, “जोतक लीक — रंग संग तर्क जँचै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16595–16623. संस्करणक विवरण.

गजल ११७३ — शालक छाल — गीत बीच अर्थ खुलै

गजल ११७३, “शालक छाल — गीत बीच अर्थ खुलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16624–16652. संस्करणक विवरण.

गजल ११७४ — कुम्हारक भट्ठी — बात कात नाद बजै

गजल ११७४, “कुम्हारक भट्ठी — बात कात नाद बजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16653–16681. संस्करणक विवरण.

गजल ११७५ — धानक खील — सोर मे साँच मिलै

गजल ११७५, “धानक खील — सोर मे साँच मिलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16682–16710. संस्करणक विवरण.

गजल ११७६ — चानक डाकघर — पर पत्र जगै

गजल ११७६, “चानक डाकघर — पर पत्र जगै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16711–16739. संस्करणक विवरण.

गजल ११७७ — समयक खाली जेब — संग घड़ी चलै

गजल ११७७, “समयक खाली जेब — संग घड़ी चलै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16740–16768. संस्करणक विवरण.

गजल ११७८ — बादलक पोथीघर — बीच अक्षर तिरै

गजल ११७८, “बादलक पोथीघर — बीच अक्षर तिरै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16769–16797. संस्करणक विवरण.

गजल ११७९ — सपनक रेल — कात सीटी बजै

गजल ११७९, “सपनक रेल — कात सीटी बजै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16798–16826. संस्करणक विवरण.

गजल ११८० — छाहक सोपान — पर पाँति चढ़ै

गजल ११८०, “छाहक सोपान — पर पाँति चढ़ै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16827–16855. संस्करणक विवरण.

गजल ११८१ — शून्यक पतंग — संग डोर हँसै

गजल ११८१, “शून्यक पतंग — संग डोर हँसै,” पूर्ण खण्ड २मे अलग गीत नहि, सत्यापित गजल-इकाइ रूपमे प्रस्तुत अछि। प्रविष्टिमे बहर, तुक-फेर, रदीफ आ स्रोत-स्थानक सूचना अछि, तेँ कविता अर्थ आ औपचारिक अनुशासन दुनू सँ पढ़ल जाइत अछि।

एतए संगीतमय रूपक जोड़ी अनिवार्य हिस्सा अछि। ई पाठक कातमे भाव, गति वा प्रस्तुति-संकेत दैत अछि, जाहिसँ खण्ड २ खण्ड १सँ भिन्न बनैत अछि: प्रत्येक गजल साहित्यिक आ संगीतिक वस्तु दुनू बनि, निकट पाठ आ गायन-ध्वन्यात्मक प्रस्तुति दुनू लेल उपलब्ध होइत अछि।

स्रोत: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, देल 2026 संस्करण; Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx, गैर-खाली अनुच्छेद 16856–16884. संस्करणक विवरण.

स्रोत-संस्करण आ पाठक आधार

देल PDF: Diwan-e-Videha_Khand_2.pdf. संगमे देल Word फाइल सेहो देखल गेल: Diwan-e-Videha_Khand_2_592-1181_FINAL_2COL_ANUKRAMANIKA.docx.

सन्दर्भ: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, विदेह, 2026 कॉपीराइट दर्ज देल संस्करण। एकर अर्थ प्रथम प्रकाशन नहि।

परिचयक पाठक आधार: शीर्षक, कॉपीराइट, उपलब्ध विषय-सूची तथा बीच आ अन्तक चुनल अंश। Word पाठक जाँचयोग्य स्थान (दस्तावेजक क्रममे गैर-खाली अनुच्छेद, तालिकाक पाठ सहित): 15–16; 17–98; 99–126; 16856–16884. निष्कर्षित अनुच्छेद: 16884.

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