गजेन्द्र ठाकुर · गजल-संग्रह / संगीतमय रूप · 827 PDF पृष्ठ
पोथी आ ओकर विषय
दीवान-ए-विदेहक दोसर खण्ड पहिल खण्डक संग रखल गजल-क्रमक निरन्तरता अछि। आरम्भमे गजल-संरचना, छन्द-जाँच आ न्यूनतम औपचारिक योग्यतापर तीन लेख अछि; तकर बाद सत्यापित बहर/मात्रा-सूचना सहित गजलसभ आ प्रत्येक गजलक संग संगीतमय रूप देल अछि।
नीचाँ प्रत्येक गजल-इकाइकेँ पाठ आ संगीतक संयुक्त प्रविष्टि रूपेँ पढ़ल गेल अछि: शीर्षक, काफिया-रदीफ, छन्द-जाँच आ संगीतमय संकेत एक संग देखल गेल अछि। सार एहि दोहरा संरचनाकेँ सुरक्षित रखैत अछि, कविता पुनर्मुद्रित नहि करैत आ छन्दकेँ साहित्यिक पाठक विकल्प नहि बनबैत।
अलग-अलग पाठ
412 इकाइ चर्चा
एहि चर्चामे स्रोत-इकाइक समापन, जतय लागू अछि, शामिल अछि। प्रत्येक प्रविष्टिमे कथात्मक वा गीतात्मक सार आ सम्पादकीय व्याख्या अलग अनुच्छेदमे अछि, आ देल Word संस्करणक स्थानक सन्दर्भ अछि। अंग्रेजी शीर्षक परिचयात्मक अनुवाद अछि।
लेख १ — गजलमे बहर, वजन आ समान मिसरा ओ औपचारिक चौखट बनबैत अछि जाहिसँ खण्ड 2 पढ़बाक आग्रह करैत अछि। विषय मात्र नहि, संरचना, बहर, छन्द-जाँच, काफिया आ रदीफ गजल-अनुशासनक आधार बनैत अछि।
एहि लेखक महत्त्व एहि मे अछि जे बादक कविता केवल गीतात्मक पाठ रूपेँ नहि अबैत; घोषित औपचारिक जाँच आ संगीतमय उपचार संग अबैत अछि। ई टिप्पणी लेखकेँ पोथीक काव्यशास्त्र आ सम्पादकीय विधि मानैत अछि, अलग प्रस्तावना नहि।
लेख २ — छन्द-विधान ओ औपचारिक चौखट बनबैत अछि जाहिसँ खण्ड 2 पढ़बाक आग्रह करैत अछि। विषय मात्र नहि, संरचना, बहर, छन्द-जाँच, काफिया आ रदीफ गजल-अनुशासनक आधार बनैत अछि।
एहि लेखक महत्त्व एहि मे अछि जे बादक कविता केवल गीतात्मक पाठ रूपेँ नहि अबैत; घोषित औपचारिक जाँच आ संगीतमय उपचार संग अबैत अछि। ई टिप्पणी लेखकेँ पोथीक काव्यशास्त्र आ सम्पादकीय विधि मानैत अछि, अलग प्रस्तावना नहि।
लेख ३ — पद्य केँ गजल कहल जाएबाक न्यूनतम औपचारिक योग्यता
लेख ३ — पद्य केँ गजल कहल जाएबाक न्यूनतम औपचारिक योग्यता ओ औपचारिक चौखट बनबैत अछि जाहिसँ खण्ड 2 पढ़बाक आग्रह करैत अछि। विषय मात्र नहि, संरचना, बहर, छन्द-जाँच, काफिया आ रदीफ गजल-अनुशासनक आधार बनैत अछि।
एहि लेखक महत्त्व एहि मे अछि जे बादक कविता केवल गीतात्मक पाठ रूपेँ नहि अबैत; घोषित औपचारिक जाँच आ संगीतमय उपचार संग अबैत अछि। ई टिप्पणी लेखकेँ पोथीक काव्यशास्त्र आ सम्पादकीय विधि मानैत अछि, अलग प्रस्तावना नहि।
गजल ५९२ “साँचक मान” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँचक, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ५९३ “ओकर नाम नोर छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ५९४ “मोन बीच रात रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ५९५ “मीत मोन प्राण छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्राण, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ५९६ “नेहक अन्तिम छोर” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नेहक, अन्तिम, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ५९७ “अहाँ बिनु रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँ, बिनु, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ५९८ “जे मोनसँ नै गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनसँ, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ५९९ “अहाँ मोनमे रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँ, मोनमे, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६०० “जे नोर मोनमे जागल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, जागल, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६०१ “जे हमर संग रहैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रहैत, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६०२ “ओ नोर हमरा मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, पड़ैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६०३ “ओ भोर हमरा मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, पड़ैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६०४ “प्रीत हमरा भीतर अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, हमरा, भीतर, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६०५ “दाग मोनसँ नहि जाइए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनसँ, जाइए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६०६ “मीत फेर नहि भेटल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भेटल, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६०७ “नोर मोनमे बसल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६०८ “नोर अहाँ बिनु रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँ, बिनु, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६०९ “मीत मोनमे रहि जाइए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, जाइए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६१० “भूल मोनसँ नहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनसँ, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६११ “नेह एखनो बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: एखनो, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६१२ “ओ ठोर फेरो मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: फेरो, पड़ैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६१३ “जे नोर हमरा छोड़ि नहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, छोड़ि, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६१४ “नेहक गान बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नेहक, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६१५ “ओ नाम एखनो मोनमे अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: एखनो, मोनमे, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६१६ “आस भीतर रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भीतर, रहैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६१७ “आस संग चलैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चलैत, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६१८ “आस अहाँक पाछाँ रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँक, पाछाँ, रहैए, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६१९ “जे नोर आबो मोनमे अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६२० “नेह राति भरि जागैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, जागैत, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६२१ “आस आबो संग रहैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रहैत, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६२२ “जे नोर अहाँक पाछाँ रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँक, पाछाँ, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६२३ “ओ भोर मोनमे रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६२४ “ओ गान हमरा संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६२५ “ओ नोर हमरा मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, पड़ैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६२६ “ओ नेह मोनमे बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६२७ “ओ नाम आबो संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६२८ “ओ नेह राति भरि जागैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, जागैत, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६२९ “ओ नेह हमरा भीतर रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, भीतर, रहैए, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६३० “मीत फेर नहि भेटल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भेटल, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६३१ “ओ नोर मोनसँ नहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनसँ, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६३२ “ओ नोर मोनमे बसल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६३३ “नोर हमरा संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६३४ “नाम मोनमे रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६३५ “मीत आबो संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६३६ “नेह मोनमे बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६३७ “दाग हमरा भीतर रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, भीतर, रहैए, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६३८ “नोर मोनसँ नहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनसँ, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६३९ “नाम हमरा मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, पड़ैए, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६४० “प्रीत हमरा संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, हमरा, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६४१ “नेह मोनमे रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६४२ “नोर मोनमे बसल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६४३ “नोर फेरो आयल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: फेरो, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६४४ “नाम मोनमे राखू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, राखू, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६४५ “प्रीत फेरो जागल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, फेरो, जागल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६४६ “ध्यान मोनमे राखू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ध्यान, मोनमे, राखू, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६४७ “मीत मोनमे खोजू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, खोजू, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६४८ “गाम मोनमे देखू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, देखू, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६४९ “नोर मोनमे राखू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, राखू, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६५० “ज्ञान फेरो जागल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, फेरो, जागल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६५१ “प्रीत मोनमे राखू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, मोनमे, राखू, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६५२ “नोर मोनमे खोजू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, खोजू, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६५३ “नोर मोन संग छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६५४ “नाम मोन बीच छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६५५ “मीत फेर दूर गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६५६ “नाम मोन संग छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६५७ “प्रीत मोन बीच छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६५८ “गाम फेर दूर गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६५९ “नोर फेर मोन आय” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६६० “मान मोन बीच छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६६१ “नाम फेर लग छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६६२ “मीत साँझ संग आय” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँझ, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६६३ “ओ नाम मोन संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६६४ “ओ डोर मोन पास अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६६५ “ओ नेह मोन बीच अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६६६ “अहाँक नाम, निन्न दूर अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँक, निन्न, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६६७ “ई सोर नोर संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्रिक, छन्द, पारम्परिक, अरूज़ी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६६८ “नोर मौन, नेह गाढ़ अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गाढ़, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६६९ “नेह एखनो मोन संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: एखनो, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६७० “पुरन सोर घर बीच अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरन, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६७१ “अहाँक नाम आबो पास अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अहाँक, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६७२ “पुरन दुआरि फेर मोन पड़ल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरन, दुआरि, पड़ल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६७३ “बुझल दीपक उजियार” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बुझल, दीपक, उजियार, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६७४ “मौनक सोर भीतर जागल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मौनक, भीतर, जागल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६७५ “दूर गेलहुँ तऽ नेह बुझलहुँ” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गेलहुँ, बुझलहुँ, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६७६ “मौनक तान भीतर बजैत रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मौनक, भीतर, बजैत, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६७७ “अन्हारक भोर ककरो नहि देखायल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अन्हारक, ककरो, देखायल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६७८ “मेटल नाम हमरा घर आयल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मेटल, हमरा, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६७९ “अन्हार हमरा मोन बुझायल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अन्हार, हमरा, बुझायल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६८० “जे गेल से भीतर रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भीतर, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६८१ “पानि अपन पिआस कहैत रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पानि, पिआस, कहैत, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६८२ “सून्न दुआरि एतबे कहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सून्न, दुआरि, एतबे, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६८३ “नेहक बाति रहि जाइत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नेहक, बाति, जाइत, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६८४ “अन्हार हमरासँ गप करैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अन्हार, हमरासँ, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६८५ “नोर हमरा संग जागैत रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हमरा, जागैत, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६८६ “साँझक बादो घर नहि सुतल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँझक, बादो, सुतल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६८७ “नाम मेटल, सोर नहि मेटल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मेटल, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६८८ “चान डूबल, नेह नहि डूबल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डूबल, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६८९ “पार भेटल, मझधार बाँचल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भेटल, मझधार, बाँचल, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६९० “सून्न गामक एकटा साँझ” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सून्न, गामक, साँझ, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६९१ “ठोर गुम्म, भीतर गीत” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गुम्म, भीतर, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६९२ “भोर आयल, राति नहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६९३ “जे भोर मोन पड़ैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पड़ैत, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६९४ “जीवनक सार कहू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जीवनक, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६९५ “मोनक भीतर राह रहू” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनक, भीतर, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६९६ “केवल ई मान नहि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: केवल, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६९७ “जीवन आस जकाँ” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जीवन, जकाँ, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६९८ “जीवनमे गाम बिनु” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जीवनमे, बिनु, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ६९९ “ई केवल काल छल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: केवल, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७०० “मोनक भीतर पीर कतए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनक, भीतर, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७०१ “एतेक फेर किएक” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: एतेक, किएक, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७०२ “जीवनमे फूल रहैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जीवनमे, रहैत, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७०३ “एखनो चाह मोनमे अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: एखनो, मोनमे, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७०४ “ओकर सोर रहि गेल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७०५ “मौन एक गीत लगैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लगैत, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७०६ “नाम मोन पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पड़ैए, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७०७ “हमर मोन रुवैए किएक?” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रुवैए, किएक, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७०८ “चाह आबो बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७०९ “मोन राति नाम फेर कहैत रहल” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, कहैत, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७१० “मीत आब दूर गेल; मोनमे भार शेष अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७११ “मोनमे साँचक सार एखनो अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, साँचक, एखनो, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७१२ “भोर मोनमे अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७१३ “नेहक नाम आब अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नेहक, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७१४ “नम्र मोन मान संग अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नम्र, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७१५ “मोनमे सार बचल अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोनमे, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७१६ “भोर रहि जाइत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जाइत, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७१७ “मान बचैए एखनो” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बचैए, एखनो, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७१८ “आन बाट दिसैए फेर” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दिसैए, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७१९ “मोन फेर बाट बदलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलैए, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७२० “साँच लेल कोन माप अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७२१ “दिस आन साँच देख” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७२२ “साँच एक बेर भेल नहि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७२३ “नेहक सार होइत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नेहक, होइत, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७२४ “साँचक नव ढंग रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँचक, रहैए, उच्चारणाधारित, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७२५ “नेह मूल सार अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७२६ “मोन बीच एक नाव अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७२७ “जग मान जागैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जागैए, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७२८ “एक राह सार नहि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७२९ “मुक्त राह सार अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मुक्त, उच्चारणाधारित, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७३० “झट ज्ञान नहि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, उच्चारणाधारित, दीर्घ, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७३१ “आन पीर नोर मात्र नहि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्र, उच्चारणाधारित, दीर्घ, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७३२ “भाव मूल थाह अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, दीर्घ, मात्रिक, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७३३ “प्रश्न बीच गीत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, उच्चारणाधारित, दीर्घ, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७३४ “साँचक सोर अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँचक, उच्चारणाधारित, दीर्घ, मात्रिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७३५ “भीतर आस रहै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भीतर, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७३६ “प्रश्न उठि गेलै, द्वार खुलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, गेलै, द्वार, खुलै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७३७ “अपन मत जाँचै छी, सार दिसै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जाँचै, दिसै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७३८ “छूटल स्वर उठै छै, हाल बदलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: छूटल, स्वर, बदलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७३९ “अंक सभ बोलै छै, सार खोजै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बोलै, खोजै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७४० “नदी रूप बदलै छै, सार बचै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलै, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७४१ “ज्ञान फेर बदलै छै, आधार जाँचै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, बदलै, आधार, जाँचै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७४२ “मान जखन बढ़ै छै, विश्वास रहै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बढ़ै, विश्वास, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७४३ “घाव जखन देखै छी, दाग बुझै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: देखै, बुझै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७४४ “गौरव जखन बढ़ै छै, प्रमाण माँगै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गौरव, बढ़ै, प्रमाण, माँगै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७४५ “दोषो देखलै मोन, सार रहि जाइ छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दोषो, देखलै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७४६ “रूप जखन मिललै, मेल तखन विचार भेलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मिललै, विचार, भेलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७४७ “काल्हिक आधार पूछै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काल्हिक, आधार, पूछै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७४८ “भाग्येँ साँच भेलै, कोन आधार मिलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भाग्येँ, साँच, भेलै, आधार। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७४९ “साँच फेर मिलै छै, सार खुलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, मिलै, खुलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७५० “प्रश्न जखन उठै छै, सार बुझै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, बुझै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७५१ “भाग्य फेर जाँचै छी, आधार खोजै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भाग्य, जाँचै, आधार, खोजै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७५२ “रूप फेर जाँचै छी, आकार खुलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जाँचै, आकार, खुलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७५३ “साँच जखन कहै छी, डोर रहै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७५४ “रूप फेर बदलै छै, सार बचै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलै, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७५५ “छूटल स्वर उठै छै, मान बदलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: छूटल, स्वर, बदलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७५६ “प्रश्न फेर उठै छै, राह दिसै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, दिसै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७५७ “अंक मात्र कहै छै, विचार जगै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मात्र, विचार, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७५८ “नोर-सोर बुझै छी, हाल खुलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बुझै, खुलै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७५९ “काल पार सोचै छी, भोर देखै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सोचै, देखै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७६० “सत्ता फेर जाँचै छी, ध्यान रखै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सत्ता, जाँचै, ध्यान, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७६१ “ज्ञान जखन बदलै छै, उपाय मिलै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, बदलै, उपाय, मिलै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७६२ “दाबी फेर जाँचै छी, विश्वास बचै छै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दाबी, जाँचै, विश्वास, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७६३ “मत जखन सुनै छी, प्रभाव बुझै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सुनै, प्रभाव, बुझै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७६४ “काल जखन मुड़ै छै, ढंग परखै छी” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मुड़ै, परखै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७६५ “माप जखन लगै, ज्ञान मोनमे उतरैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, मोनमे, उतरैत, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७६६ “मान जखन बचै, आस रूप धरैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धरैत, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७६७ “घाव जखन दुखै, उपचार द्वार खोलैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दुखै, उपचार, द्वार, खोलैत। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७६८ “साँच फेर खुलै, नोर सँ जुड़ैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँच, खुलै, जुड़ैत, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७६९ “मोन फेर जागै, प्रीत संग चलैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जागै, प्रीत, चलैत, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७७० “न्याय फेर बढ़ै, माप बनि रहैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: न्याय, बढ़ै, रहैत, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७७१ “पीरक मूल खुलै, निदान दिशा दैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पीरक, खुलै, निदान, दिशा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७७२ “याद फेर उठै, नोर मोन फेरबैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: फेरबैत, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७७३ “प्रश्न जखन उठै, विचार केँ खोजैत अछि” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, विचार, खोजैत, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७७४ “पीर जखन घटै छै, आस जागि उठैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जागि, उठैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७७५ “घर पाछाँ छुटै छै, सार मोनमे बसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाछाँ, छुटै, मोनमे, बसैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७७६ “कूल दूर सरै छै, तरंग संगे बहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: तरंग, संगे, बहैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७७७ “बीज माटि फोड़ै छै, प्रीत माटिमे अँकुरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, फोड़ै, प्रीत, माटिमे। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७७८ “प्रश्न माथ उठै छै, ज्ञान ऊपर चढ़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रश्न, ज्ञान, चढ़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७७९ “पीर नोर कहै छै, नेह नोरमे भीजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नोरमे, भीजैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७८० “राति पाछाँ सरै छै, आस भोरमे फूटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, पाछाँ, भोरमे, फूटैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७८१ “शब्द पवन चढ़ै छै, संवाद पवनमे उड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: शब्द, चढ़ै, संवाद, पवनमे। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७८२ “घाव बात कहै छै, भाव नोरमे चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: नोरमे, चमकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७८३ “रोष देह चढ़ै छै, क्रोध भीतर धधकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चढ़ै, क्रोध, भीतर, धधकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७८४ “सोर दूर रहै छै, राग मौनमे गमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मौनमे, गमकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७८५ “पएर रोक घेरै छै, आकाश पार निकलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: घेरै, आकाश, निकलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७८६ “पुरना बीज बचै छै, मूल जड़ि धरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरना, जड़ि, धरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७८७ “पीर देह कहै छै, ताप देहमे सिहरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: देहमे, सिहरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७८८ “पन्ना फेर खुलै छै, नाम कालमे डोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पन्ना, खुलै, कालमे, डोलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७८९ “दाबी जोर करै छै, बात साँचमे टिकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दाबी, साँचमे, टिकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७९० “दीप राति जरै छै, नेह मोनमे उजरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, मोनमे, उजरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७९१ “राख छाँह धरै छै, गीत राखसँ फूलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: छाँह, राखसँ, फूलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७९२ “रेखा नाम बनै छै, पहचान सीमा गलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेखा, पहचान, सीमा, गलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७९३ “रूप नाम बदलै छै, स्वरूप नामसँ छूटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलै, स्वरूप, नामसँ, छूटैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७९४ “नदी याद बहै छै, धार स्मृतिमे घुरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: स्मृतिमे, घुरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७९५ “लोक सोर जुड़ै छै, रंग लोकमे बजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जुड़ै, लोकमे, बजैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७९६ “पएर माटि छुबै छै, देश माटिसँ जनमैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, छुबै, माटिसँ, जनमैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७९७ “दूर घर रहै छै, प्रीत दूरि घटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: प्रीत, दूरि, घटैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७९८ “डगमग मोन रहै छै, विश्वास डोर सम्हरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डगमग, विश्वास, सम्हरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ७९९ “पएर मोड़ पड़ै छै, उपाय दिशा मुड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मोड़, पड़ै, उपाय, दिशा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८०० “गीत काल लाँघै छै, गीत अन्त लाँघैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लाँघै, अन्त, लाँघैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८०१ “दाम रोज बदलै छै, सार बाजार जँचैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलै, बाजार, जँचैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८०२ “मेह राति बढ़ै छै, धार कूल बनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, बढ़ै, बनैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८०३ “रस्सी हाथ उतरै छै, प्यास कुआँ बोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रस्सी, उतरै, प्यास, कुआँ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८०४ “सीटी दूर बजै छै, राह रेल चलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सीटी, चलैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८०५ “दीप कोन जरै छै, ज्ञान पन्ना खुलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ज्ञान, पन्ना, खुलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८०६ “डाक पएर चलै छै, सार चिट्ठी पहुँचैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चिट्ठी, पहुँचैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८०७ “जड़ि माटि पकड़ै छै, मूल छाँह रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जड़ि, माटि, पकड़ै, छाँह। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८०८ “माटि हाथ नमै छै, रूप चाक घुमैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, घुमैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८०९ “पर्दा धीरे उठै छै, रंग मंच धड़कैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पर्दा, धीरे, धड़कैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८१० “आँखि गोल चमकै छै, नोर बालक पूछैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: आँखि, चमकै, बालक, पूछैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८११ “केश धीर बदलै छै, श्वास उमिर ढलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बदलै, श्वास, उमिर, ढलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८१२ “नाव नीर उतरै छै, धार सीमा काटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उतरै, सीमा, काटैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८१३ “काठ रेखा जागै छै, छाप हाथ गढ़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेखा, जागै, गढ़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८१४ “मेह राति पड़ै छै, नेह छप्पर बजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, पड़ै, छप्पर, बजैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८१५ “रोटी हाथ बाँटै छै, स्वाद थारी जुड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रोटी, बाँटै, स्वाद, थारी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८१६ “गवाही स्वर उठै छै, प्रमाण न्याय तौलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गवाही, स्वर, प्रमाण, न्याय। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८१७ “स्वप्न रूप बदलै छै, रूप भोर जगबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: स्वप्न, बदलै, जगबैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८१८ “बत्ती राति जरै छै, सोर नगर जागैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बत्ती, राति, जागैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८१९ “आखर पात सजै छै, बोल लिपि बचैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लिपि, बचैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८२० “चिता शान्त पड़ै छै, फूल राख बोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चिता, शान्त, पड़ै, बोलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८२१ “दू हाथ मिलै छै, नेह बंधन जँचैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मिलै, बंधन, जँचैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८२२ “ट्रेन गाम छोड़ै छै, द्वार पएर घुरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ट्रेन, छोड़ै, द्वार, घुरैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८२३ “घंटी भोर बजै छै, ज्ञान कक्षा जागैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: घंटी, ज्ञान, कक्षा, जागैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८२४ “पीर धीरे कहै छै, भेद देह सुनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धीरे, सुनैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८२५ “पएर माथ रुकै छै, पार आकाश खुलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रुकै, आकाश, खुलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८२६ “घड़ी भोर बजै छै, काल फेर सरकै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: घड़ी, सरकै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८२७ “धान बीज सुकै छै, अगिला ऋतु टिकै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सुकै, अगिला, टिकै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८२८ “दर्पण भोर चमकै छै, चेहरा रेखा उभरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दर्पण, चमकै, चेहरा, रेखा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८२९ “तान सूता तनै छै, बाना रंग जुड़ै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सूता, बाना, जुड़ै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८३० “ढोल दूर बजै छै, रंग झण्डा लहरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: झण्डा, लहरै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८३१ “पएर ढलान चढ़ै छै, कुहरा दूर सरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ढलान, चढ़ै, कुहरा, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८३२ “मधुमाछि भोर उड़ै छै, फूल गन्ध खोजै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मधुमाछि, उड़ै, गन्ध, खोजै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८३३ “चन्द्र राति चमकै छै, छाँह धीरे चढ़ै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चन्द्र, राति, चमकै, छाँह। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८३४ “पुल नदी लाँघै छै, दू कूल जुड़ै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लाँघै, जुड़ै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८३५ “सीसा टाइप सजै छै, स्याही रोल चढ़ै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सीसा, टाइप, स्याही, चढ़ै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८३६ “रेडियो भोर बजै छै, दूर स्वर अबै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेडियो, स्वर, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८३७ “पुरना फोटो खुलै छै, चेहरा मुस्की रहै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरना, फोटो, खुलै, चेहरा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८३८ “ताला द्वार लटकै छै, हाथ धातु घुमै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ताला, द्वार, लटकै, धातु। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८३९ “सूखल पात सरसरै छै, चिनगी छोट उठै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सूखल, सरसरै, चिनगी, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८४० “नहर खेत मुड़ै छै, नीर रेखा चलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मुड़ै, रेखा, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८४१ “पत्थर रेखा रहै छै, आखर धीरे घिसै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पत्थर, रेखा, धीरे, घिसै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८४२ “बाँस हवा डोलै छै, जड़ि माटि थामै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाँस, डोलै, जड़ि, माटि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८४३ “पतंग छत उठै छै, डोर हाथ तनै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पतंग, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८४४ “चूल्हा भोर जरै छै, दालि गन्ध फैलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चूल्हा, दालि, गन्ध, फैलै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८४५ “राति आकाश खुलै छै, तारा झिलमिल करै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, आकाश, खुलै, तारा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८४६ “पाखी झुण्ड उड़ै छै, आकाश रेखा बनै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाखी, झुण्ड, उड़ै, आकाश। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८४७ “पैडल पएर घुमै छै, चक्का राह धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पैडल, घुमै, चक्का, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८४८ “नमक दाना पड़ै छै, दालि स्वाद बदलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दाना, पड़ै, दालि, स्वाद। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८४९ “भोर अजान उठै छै, घण्टा दूर बजै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अजान, घण्टा, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८५० “लहर भोर उठै छै, क्षितिज रंग बदलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: क्षितिज, बदलै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८५१ “भोर कूप जागै छै, नीर तल चमकै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जागै, चमकै, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८५२ “पोथी पन्ना खुलै छै, छोट टिप्पणी जगै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पोथी, पन्ना, खुलै, टिप्पणी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८५३ “सीटी दूर बजै छै, लोहा ताल धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सीटी, लोहा, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८५४ “माटि हाथ नमै छै, रूप बीच उगै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८५५ “मेह काँच पड़ै छै, बूँद रेखा बनै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काँच, पड़ै, बूँद, रेखा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८५६ “कलम डारि जुड़ै छै, नव फूल खुलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डारि, जुड़ै, खुलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८५७ “न्याय कक्ष खुलै छै, प्रश्न क्रम धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: न्याय, कक्ष, खुलै, प्रश्न। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८५८ “राति नदी बहै छै, मचान दीप जरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, मचान, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८५९ “भोर विद्यालय खुलै छै, आँगन हँसी भरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: विद्यालय, खुलै, आँगन, हँसी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८६० “बाढ़ नीर उतरै छै, खेत माटि दिसै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाढ़, उतरै, माटि, दिसै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८६१ “झोरा काँध चढ़ै छै, माय नोर धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: झोरा, काँध, चढ़ै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८६२ “पुरना बक्सा खुलै छै, कागज गन्ध उठै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरना, बक्सा, खुलै, कागज। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८६३ “भोर बाड़ी खुलै छै, पात ओस चमकै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाड़ी, खुलै, चमकै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८६४ “दुपहर सूरज चढ़ै छै, गाछ छाह सिमटै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दुपहर, सूरज, चढ़ै, सिमटै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८६५ “मेह छत पड़ै छै, नाली नीर बहै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पड़ै, नाली, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८६६ “बोर्ड बीच सजै छै, पहिल चाल खुलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बोर्ड, पहिल, खुलै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८६७ “बाजार भोर खुलै छै, दाना पलड़ा धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाजार, खुलै, दाना, पलड़ा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८६८ “नाव घाट लगै छै, नीर तेज बहै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द, पारम्परिक। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८६९ “साँझ आँगन सजै छै, पहिल लौ उठै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँझ, आँगन, पहिल, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८७० “कागज सफेद रहै छै, स्याही रेखा उतरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कागज, सफेद, स्याही, रेखा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८७१ “देहरी भोर चमकै छै, घर बाहर मिलै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: देहरी, चमकै, बाहर, मिलै। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८७२ “ढोल थाप पड़ै छै, बीच मौन रहै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पड़ै, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८७३ “छत गमला रहै छै, बीज माटि धरै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गमला, माटि, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८७४ “पुरना टीला रहै छै, गाछ छाह पड़ै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरना, टीला, पड़ै, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८७५ “राति झंझा बहै छै, दूर रेखा उगै” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, झंझा, रेखा, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८७६ “पुरान रेखा खुलै, राह नक्शा बतबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरान, रेखा, खुलै, नक्शा। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८७७ “लोहारक श्वास उठै, आग भट्ठी धधकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लोहारक, श्वास, भट्ठी, धधकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८७८ “नीर बहै, भोर जाल पसारैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पसारैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८७९ “कचहरी सोझाँ छाह पसारैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कचहरी, सोझाँ, पसारैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८८० “दीप मन्द जरै, राति सम्हारैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मन्द, राति, सम्हारैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८८१ “धान डोलै, बिजुका तकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डोलै, बिजुका, तकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८८२ “छोट कोन रहै, टिकट पहुँचबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: टिकट, पहुँचबैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८८३ “धूलि बीच अंक रहै, पत्थर गनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धूलि, पत्थर, गनैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८८४ “ताल नीर झलकै, कुमुद खिलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: झलकै, कुमुद, खिलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८८५ “गन्ध उठै, मसाला पिसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गन्ध, मसाला, पिसैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८८६ “काँच हँसै, लहठी खनकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काँच, हँसै, लहठी, खनकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८८७ “पएर उठै, सीढ़ी चढ़बैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सीढ़ी, चढ़बैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८८८ “आँगन थाप धरै, ढेंकी कुटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: आँगन, ढेंकी, कुटैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८८९ “ओस काँपै, पाला जमैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काँपै, पाला, जमैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८९० “समुद्र बीच सूइ बतबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: समुद्र, बतबैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८९१ “जंगल साँस ले, पगडंडी मुड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जंगल, साँस, पगडंडी, मुड़ैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८९२ “तिनका जुड़ै, घोंसला बसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: तिनका, जुड़ै, घोंसला, बसैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८९३ “कपड़ा भीजै, रंगरेज रँगैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कपड़ा, भीजै, रंगरेज, रँगैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८९४ “गाम गोल बैसै, सभा सुनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बैसै, सुनैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८९५ “धूलि हटै, अलमारी खुलबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धूलि, अलमारी, खुलबैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८९६ “लहर चढ़ै, पदचिह्न मिटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चढ़ै, पदचिह्न, मिटैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८९७ “धूलि उठै, घोड़ा दौड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धूलि, घोड़ा, दौड़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८९८ “रेखा बोलै, चित्र उभरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेखा, बोलै, चित्र, उभरैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ८९९ “श्वास उठै, शंख गुँजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: श्वास, गुँजैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९०० “नीर पार खुलै, क्षितिज पसारैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, क्षितिज, पसारैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९०१ “पोखर नीर चमकै, आस मखान खिलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पोखर, चमकै, मखान, खिलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९०२ “ओस पात चमकै, नेह पात महकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चमकै, महकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९०३ “सूत जुड़ै, चाव सुजनी सजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जुड़ै, सुजनी, सजैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९०४ “रेशा तनै, मान सिक्की जुड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेशा, सिक्की, जुड़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९०५ “पाखी खेल उठै, गीत सामा गबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाखी, सामा, गबैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९०६ “व्रत कथा खुलै, स्वर कथा गुँजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: व्रत, खुलै, स्वर, गुँजैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९०७ “आँगन रेखा खुलै, चाव अरिपन खिलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: आँगन, रेखा, खुलै, अरिपन। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९०८ “भोर गन्ध उठै, आस मंजर महकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गन्ध, मंजर, महकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९०९ “पीयर खेत डोलै, प्रीत सरसों हँसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पीयर, डोलै, प्रीत, सरसों। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९१० “गरमी घटै, श्वास पंखा डोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गरमी, श्वास, पंखा, डोलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९११ “माटि पकै, ताल घड़ा झनकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, घड़ा, झनकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९१२ “कपड़ा फाटै, नेह सुई सिअैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कपड़ा, फाटै, सिअैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९१३ “डारि हिलै, चाव झूला डोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डारि, हिलै, झूला, डोलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९१४ “पुरान नीर चमकै, भोर कुण्ड चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पुरान, चमकै, कुण्ड, चमकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९१५ “माथ सजै, मान पाग दमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दमकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९१६ “भोर थारी सजै, प्रीत भोज सजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: थारी, प्रीत, सजैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९१७ “कागज देह जरै, आस लालटेन जरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कागज, लालटेन, जरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९१८ “अन्हार घनै, आस जुगनू चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अन्हार, जुगनू, चमकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९१९ “फूल झरै, नोर मौलश्री झरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मौलश्री, झरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९२० “पाथर बाट बजै, ताल खड़ाऊँ बजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाथर, खड़ाऊँ, बजैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९२१ “ओस पड़ै, भोर जाल चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पड़ै, चमकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९२२ “धान रोपै, गीत रोपनी गबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रोपै, रोपनी, गबैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९२३ “घाट पएर चलै, नोर गगरी छलकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गगरी, छलकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९२४ “मेघ हटै, रंग इन्द्रधनुष उभरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: इन्द्रधनुष, उभरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९२५ “गाछ डोलै, पार पछिया बहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डोलै, पछिया, बहैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९२६ “सूत तनै, सार चर्खा घूमैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चर्खा, घूमैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९२७ “धान जुटै, मान बखार भरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जुटै, बखार, भरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९२८ “माटि कटै, ज्ञान फाल चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, ज्ञान, चमकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९२९ “नीर हटै, भोर चर उभरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: उभरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ, छन्द। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९३० “पोखर गहिरै, आस कमलबीज पकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पोखर, गहिरै, कमलबीज, पकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९३१ “पाथर टकरै, नोर चकमक झिलमिलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाथर, टकरै, चकमक, झिलमिलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९३२ “रेशा जुड़ै, प्रीत पाटी बुनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेशा, जुड़ै, प्रीत, पाटी। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९३३ “तार काँपै, गीत सारंगी रुवैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काँपै, सारंगी, रुवैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९३४ “पात लहरै, भोर तिलकोर लहरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: लहरै, तिलकोर, लहरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९३५ “लोक जुटै, मान सभा जुटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जुटै, जुटैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९३६ “पात खुलै, ज्ञान पंजी बोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, ज्ञान, पंजी, बोलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९३७ “रस्सी तनै, चाव डोल उतरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रस्सी, उतरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९३८ “आग धधकै, आस ईंट पकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धधकै, पकैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९३९ “फूल खुलै, प्रीत चंपा महकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, प्रीत, चंपा, महकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९४० “दाना जुटै, मान कोठी भरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दाना, जुटै, कोठी, भरैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९४१ “नील फूल डोलै, चाव अलसी हँसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डोलै, अलसी, हँसैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९४२ “श्वास मिलै, गीत बाँसुरी सुसकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: श्वास, मिलै, बाँसुरी, सुसकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९४३ “पाथर भीजै, भोर झरना गबैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पाथर, भीजै, झरना, गबैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९४४ “भोर खुलै, आस कुहासा हटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, कुहासा, हटैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९४५ “राति ढलै, नोर चाँद झुकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: राति, चाँद, झुकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९४६ “लहर हटै, आस सीपी खुलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सीपी, खुलैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९४७ “धूलि उठै, भोर गोधूलि उठैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धूलि, गोधूलि, उठैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९४८ “खेत बँटै, मान मेड़ बोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बँटै, मेड़, बोलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९४९ “छत गरमै, चाव धूप उतरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: गरमै, उतरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९५० “दूर रेखा खुलै, पार क्षितिज फैलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: रेखा, खुलै, क्षितिज, फैलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९५१ “राख अँगार खुलै, अँगार बचैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अँगार, खुलै, बचैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९५२ “बीज अँकुर खुलै, मान फेर उठैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अँकुर, खुलै, उठैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९५३ “ओखरि मूसर खुलै, ताल धुनि बजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ओखरि, मूसर, खुलै, धुनि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९५४ “कनेर फूल खुलै, आस फुलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कनेर, खुलै, फुलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९५५ “छप्पर बरखा खुलै, नोर टपकि खसैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: छप्पर, बरखा, खुलै, टपकि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९५६ “भूसी पवन खुलै, राह दूर उड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भूसी, खुलै, उड़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९५७ “कछार कटान खुलै, मूल कटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कछार, कटान, खुलै, कटैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९५८ “बिचड़ा खेत खुलै, रंग फेर हरियैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बिचड़ा, खुलै, हरियैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९५९ “काई पोखर खुलै, नाम जल तिरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पोखर, खुलै, तिरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९६० “बाती दीप खुलै, पीर जरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाती, खुलै, जरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९६१ “सूत तकली खुलै, बात सूत तनैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: तकली, खुलै, तनैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९६२ “माटिक सोंध खुलै, रूप महकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटिक, सोंध, खुलै, महकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९६३ “बबूल काँट खुलै, मेल भीतर चुभैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बबूल, काँट, खुलै, भीतर। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९६४ “ओसार साँझ खुलै, अँगार फेर जगैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ओसार, साँझ, खुलै, अँगार। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९६५ “बान्ह जल खुलै, मान टिकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बान्ह, खुलै, टिकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९६६ “कुट्टी खलिहान खुलै, ताल धूरि उड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कुट्टी, खलिहान, खुलै, धूरि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९६७ “काँच चूड़ी खुलै, आस मृदु खनकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: काँच, चूड़ी, खुलै, मृदु। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९६८ “बेल लता खुलै, नोर लहरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, लहरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९६९ “नाल जल खुलै, राह नीचाँ बहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, नीचाँ, बहैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९७० “चन्द्र ज्योति खुलै, मूल दूर पसरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: चन्द्र, ज्योति, खुलै, पसरैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९७१ “पीतल लोटा खुलै, रंग चमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पीतल, लोटा, खुलै, चमकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९७२ “पोथीक पन्ना खुलै, नाम धीरे सरकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पोथीक, पन्ना, खुलै, धीरे। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९७३ “रुई सूत खुलै, पीर ऊपर उड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खुलै, उड़ैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९७४ “धूरिक बाट खुलै, बात उड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: धूरिक, खुलै, उड़ैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९७५ “साँकल द्वार खुलै, रूप राति खनकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: साँकल, द्वार, खुलै, राति। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९७६ “सिलौट लोढ़ा बजै, सोर धीमे थिरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: सिलौट, लोढ़ा, धीमे, थिरैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९७७ “बाँस दउरा जुड़ै, मान सँचि उठैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बाँस, दउरा, जुड़ै, सँचि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९७८ “तराजू पल्ला झुकै, विचार तोलि देखैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: तराजू, पल्ला, झुकै, विचार। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९७९ “हँसुआ धार चमकै, सार फेर दमकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हँसुआ, चमकै, दमकैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९८० “जाँता दाना पिसै, गान मृदु बजैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: जाँता, दाना, पिसै, मृदु। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९८१ “कोदो बालि डोलै, उमंग साँझ धरि डोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कोदो, बालि, डोलै, उमंग। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९८२ “छत्ता मधु भरै, आस मधु सँ भरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: छत्ता, भरैए, उच्चारणाधारित, दीर्घ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९८३ “तितली रंग उड़ै, रंग पाँख पसारैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: तितली, उड़ै, पाँख, पसारैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९८४ “घोंघा पथ सरकै, पहिचान पाछाँ रहि जाइए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: घोंघा, सरकै, पहिचान, पाछाँ। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९८५ “कछुआ नीर काटै, राह नीरमे बहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कछुआ, काटै, नीरमे, बहैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९८६ “सनई फूल डोलै, रंग पवनमे लहरैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: डोलै, पवनमे, लहरैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९८७ “कनकौआ ऊपर उठै, डोर अकास चढ़ि जाइए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कनकौआ, अकास, चढ़ि, जाइए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९८८ “सूप दाना छाँटै, धान सूपमे छँटैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: दाना, छाँटै, सूपमे, छँटैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९८९ “झाँपी भीतर सजै, नाम भीतर बचि रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: झाँपी, भीतर, रहैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९९० “ताड़पात आखर खुलै, ज्ञान पातमे बोलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: ताड़पात, खुलै, ज्ञान, पातमे। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९९१ “पीपर छाँह पसरै, राह छाँहमे टिकि रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: पीपर, छाँह, पसरै, छाँहमे। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९९२ “खजूर रस टपकै, आस रस टपकैत रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: खजूर, टपकै, टपकैत, रहैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९९३ “बकुल फूल झरै, सुवास भोरमे महकि उठैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: बकुल, सुवास, भोरमे, महकि। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९९४ “ओल माटि फोड़ै, मूल माटि फोड़ि निकलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: माटि, फोड़ै, फोड़ि, निकलैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९९५ “अरुई पात डोलै, बात पवनमे झूमैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: अरुई, डोलै, पवनमे, झूमैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९९६ “मड़ुआ बालि झुकै, बाल नमि जाइए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: मड़ुआ, बालि, झुकै, जाइए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९९७ “कुरथी दालि पकै, दाल भानसमे महकैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: कुरथी, दालि, भानसमे, महकैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९९८ “तिल घानी घुमै, हाथ घानी संग चलैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: घानी, घुमै, चलैए, उच्चारणाधारित। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल ९९९ “मकई भुट्टा खुलै, धान दाना झरि पड़ैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: भुट्टा, खुलै, दाना, पड़ैए। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
गजल १००० “हजारम गजल खुलै, गीत आगाँ गुँजैत रहैए” साहित्यिक आ संगीतमय संयुक्त इकाइ रूपेँ देल अछि। स्रोत-खण्डमे कविता, बहर/छन्द-जाँचक आँकड़ा आ संगीतमय रूप अछि; तेँ एकरा ध्वनि, लय आ औपचारिक अनुशासन संग पढ़ल गेल अछि।
सार शीर्षक-क्षेत्र आ औपचारिक उपकरणपर केन्द्रित अछि: हजारम, खुलै, आगाँ, गुँजैत। आमने-सामनेक संगीतमय उपचार खण्ड 2 केँ खण्ड 1 सँ अलग करैत अछि, कारण भाव, गति, वाद्य-विन्यास वा शेरवार गायन-संकेत उद्धरणयोग्य इकाइक अंश बनैत अछि।
सन्दर्भ: गजेन्द्र ठाकुर, दीवान-ए-विदेह खण्ड २, विदेह, 2026 कॉपीराइट दर्ज देल संस्करण। एकर अर्थ प्रथम प्रकाशन नहि।
परिचयक पाठक आधार: शीर्षक, कॉपीराइट, उपलब्ध विषय-सूची तथा बीच आ अन्तक चुनल अंश। Word पाठक जाँचयोग्य स्थान (दस्तावेजक क्रममे गैर-खाली अनुच्छेद, तालिकाक पाठ सहित): 15–36; 99–124; 11605–11633. निष्कर्षित अनुच्छेद: 11633.
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