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लोकतन्त्रके केवल चुनाव, संसद वा राजधानीक संस्थासँ समाप्त नहि कएल जा सकैत अछि। समानान्तर
दर्शनक राजनीतिक सिद्धान्त अछि-बहुकेन्द्रिक लोकतन्त्र। एकर अर्थ सत्ता, ज्ञान, संसाधन आ निर्णयक
सम्भव विकेन्द्रण, मुदा मूल अधिकारक समान संवैधानिक रक्षा।
68.1 सत्ता आ दूरी
जे निर्णय लोकजीवनकेँ प्रत्यक्ष प्रभावित करैत अछि, ओकरा यथासम्भव प्रभावित लोकक निकट आनब
उत्तरदायित्व बढ़ा सकैत अछि। ग्राम, नगर, क्षेत्र, राज्य, संघ--भिन्न प्रश्न भिन्न स्तरपर समाधान माँगैत अछि।
प्रत्येक समस्या दूरस्थ केन्द्रक एकहि समाधान नहि माँगैत।
68.2 विकेन्द्रण स्वतः न्याय नहि
स्थानीय सत्ता सेहो जाति, लिंग, धन वा बहुसंख्यक प्रभुत्वक साधन बनि सकैत अछि। तें बहुकेन्द्रिक
लोकतन्त्रक दोसर आधा अनिवार्य अछि-मूल अधिकार, समान नागरिकता, न्यायिक सुरक्षा आ अपीलक
उच्चतर संरचना। स्थानीय स्वायत्तता मानवाधिकारसँ ऊपर नहि।
68.3 बहुमत आ वैधता
बहुमत निर्णयक एक पद्धति अछि, सत्यक प्रमाण नहि। लोकतन्त्रमे विपक्ष, स्वतंत्र प्रेस, न्यायपालिका, संघ-
स्वतंत्रता, सूचना-पहुँच आ शांतिपूर्ण असहमति बहुमतक सीमा निर्धारित करैत अछि। चुनाव जितब राज्यक
सभ संस्था पर अनियंत्रित स्वामित्व नहि दैत।
68.4 ज्ञानक बहुकेन्द्रिकता
राजनीतिक विकेन्द्रण मात्र पर्याप्त नहि। विश्वविद्यालय, भाषा, प्रकाशन, मीडिया, अभिलेखागार आ
सांस्कृतिक संस्था जँ एकहि केन्द्रमे सीमित हो, तखन ज्ञान-सत्ता असमान रहैत अछि। बहुकेन्द्रिक लोकतन्त्र
क्षेत्रीय भाषा, स्थानीय विशेषज्ञता आ विविध संस्थागत केन्द्रक विकासकें लोकतान्त्रिक मूल्य मानेत अछि।
68.5 आर्थिक सत्ता
अत्यधिक निजी आर्थिक संकेन्द्रण सेहो लोकतन्त्र प्रभावित कऽ सकैत अछि। जे संस्था सार्वजनिक बहस,
रोजगार, सूचना वा संसाधनपर असामान्य नियन्त्रण रखैत अछि, ओकर उत्तरदायित्वक प्रश्न राज्य-जकाँ
महत्त्वपूर्ण हो सकैत अछि। बहुकेन्द्रिकता सत्ता केवल सरकारी रुपमे नहि देखैत।
68.6 संघवाद, स्थानीय शासन आ अधिकार
संघीय व्यवस्था बहुकेन्द्रिकताक एक रूप हो सकैत अछि, मुदा सिद्धान्त ओकरा सँ व्यापक अछि। मूल प्रश्न
अछि--कोन निर्णय कोन स्तरपर सर्वाधिक ज्ञान, उत्तरदायित्व, सहभागिता आ अधिकार-सुरक्षा संग लेल जा
सकैत अछि? एहि प्रश्नक उत्तर विषयानुसार बदलि सकैत अछि।
68.7 पूर्वपक्षः मजबूत केन्द्र बिना व्यवस्था ced
आपत्ति ई जे अधिक केन्द्र निर्णय-अक्षमता, असमानता आ विखण्डन बढ़ा सकैत अछि।
उत्तरपक्षः बहुकेन्द्रिकता विखण्डन नहि, स्तरित उत्तरदायित्व अछि
राष्ट्रीय रक्षा, मुद्रा, व्यापक अधिकार-सुरक्षा, अन्तरराज्यीय समन्वय जकाँ विषय केन्द्र माँगि सकैत अछि;
स्थानीय जल, विद्यालय, संस्कृति वा नगर-योजना स्थानीय भूमिका माँगि सकैत अछि। सिद्धान्त केन्द्र-विरोध
नहि; अनावश्यक संकेन्द्रण-विरोध अछि।
68.13 महानगर आ क्षेत्रक सम्बन्ध
महानगर रोजगार, विश्वविद्यालय आ पूँजी केन्द्रित Hed; आसपासक क्षेत्र श्रम, जल आ खाद्य देत। प्रशासनिक
सीमा वास्तविक निर्भरता नहि पकड़ैत। केन्द्रक विकासक लागत बाहरी क्षेत्र वहन करि सकैत अछि।
बहुकेन्द्रिक योजना परिवहन, आवास, पर्यावरण आ राजस्वक साझा संस्था माँगैत अछि। मुदा क्षेत्रीय समन्वय
स्थानीय निकाय केँ नाममात्र नहि बनाए।
प्रतिनिधित्व जनसंख्या संग प्रभावित संसाधनक आवाज सेहो देखय। निर्णयक डेटा स्थानीय भाषा मे उपलब्ध
हो।
68.14 डेटा-केंद्र आ निगरानी
केंद्रीकृत डेटा सेवा जोड़ि धोखा घटा सकैत, मुदा एक Ale अनेक अधिकार रोकि सकैत अछि। व्यापक निगरानी
राजनीतिक दुरुपयोगक शक्ति बनि सकैत।
उद्देश्य-सीमा, न्यूनतम डेटा, स्थानीय सुधार आ स्वतंत्र निरीक्षण आवश्यक। नागरिक जानथि ककरा पहुँच
अछि आ गलत अभिलेख कोना सुधरत।
विकेन्द्रित प्रति निजता स्वतः नहि बचबैत; स्थानीय दुरुपयोग सम्भव। तकनीकी रचना संग कानून आ
उत्तरदायित्व चाही।
68.15 प्रयोग आ नीति-विविधता
अलग स्थानीय इकाई नूतन नीति परीक्षण HS सकैत अछि। सफल अनुभव साझा हो, असफलतासँ सीखल
जाए। एकर लाभ विशाल एकरूप प्रयोगक जोखिम घटेबा मे अछि।
मुदा नागरिक मूल अधिकार प्रयोगक वस्तु नहि। परीक्षण सूचित, समयबद्ध आ मापनीय हो; कमजोर क्षेत्रपर
जोखिम मात्र नहि डाला जाए।
तुलना लेल सामान्य सूचक चाही, संगहि स्थानीय लक्ष्यक स्थान। नकल प्रसंग देखिकऽ हो।
68.16 पूर्वपक्षः बहुकेन्द्र निर्णय बहुत धीमा
अनेक स्तर सहमति मॉगिते विलम्ब, दोहराव आ जिम्मेदारीक भ्रम उत्पन्न हो सकैत। संकट वा बुनियादी ढाँचा
मे स्पष्ट केन्द्र चाही।
उत्तर पूर्ण विखण्डन नहि, भूमिका-विभाजन। कोन स्तर मानक बनायत, कोन लागू, कोन अपील--पहिनेसँ
स्पष्ट हो। साझा डिजिटल सूचना समन्वय बढ़ा सकैत अछि।
गति एकमात्र मूल्य नहि। त्वरित गलत निर्णयक लागत अधिक हो सकैत। निर्णयक समय जोखिम अनुसार
तय हो।
68.8 सहायकता सिद्धान्त
जे निर्णय स्थानीय स्तर प्रभावी STS भऽ सकैत, ओकरा अनावश्यक रूपसँ दूर केन्द्र नहि लय। मुदा स्थानीय
क्षमता वा अधिकार-सुरक्षा विफल हो तखन उच्च स्तर सहायता दे। ई सहायकता केवल विकेन्द्रण नहि,
स्तरानुकूल जिम्मेदारी अछि।
क्षमता, बाहरी प्रभाव आ समान अधिकार तीन कसौटी छथि। नदी, महामारी वा अन्तरक्षेत्रीय बाजार स्थानीय
सीमा पार करैत; समन्वय चाही। विद्यालयक दैनिक प्रबन्ध स्थानीय सहभागितासँ Bale सकैत अछि।
68.9 वित्तीय विकेन्द्रण
कार्य स्थानीय संस्थाकें देल जाए मुदा धन आ कर्मचारी केन्द्र राखल जाए, तँ विकेन्द्रण कागजी रहैत अछि।
आय, हस्तान्तरण आ खर्चक स्पष्ट अधिकार चाही।
स्थानीय कर-क्षमता असमान हो सकैत, तँ समानीकरणक व्यवस्था आवश्यक। धनक उपयोग खुलल लेखा,
सामाजिक समीक्षा आ भ्रष्टाचार-विरोधी प्रक्रिया भीतर हो।
68.10 स्थानीय अल्पमतक सुरक्षा
स्थानीय बहुमत राष्ट्रिय TACT अलग होइतहुँ अपन अल्पमतपर प्रभुत्व HS सकैत अछि। विकेन्द्रण मूल
अधिकारक सीमा भीतर हो।
बाहरी अपील, स्वतंत्र न्याय, आरक्षित प्रतिनिधित्व आ गोपनीय शिकायत स्थानीय लोकतन्त्रक विरोधी नहि।
ओ स्थानीय सत्ता कें वैध बनबैत अछि।
68.11 ज्ञानक ऊपर-नीच प्रवाह
स्थानीय ज्ञान समस्या पहचानेत, विशेषज्ञ ज्ञान व्यापक तुलना आ तकनीकी उपाय दैत अछि। एकदिश आदेश
दूनूक क्षमता घटबैत अछि।
नीति प्रयोग, प्रतिपुष्टि आ संशोधनक चक्र बनाय। स्थानीय साक्ष्य दर्ज हो, विशेषज्ञ कारण सरल भाषामे आए,
आ निर्णयक असहमति प्रकाशित हो।
68.12 बहुकेन्द्रिक संकट-प्रबन्ध
संकटमे स्पष्ट समन्वय आवश्यक, मुदा एक केन्द्रक विफलता सम्पूर्ण व्यवस्था रोकि सकैत अछि। बहुकेन्द्र
स्थानीय अनुकूलन आ वैकल्पिक क्षमता दैत अछि।
दोहोराव संसाधन-बर्बादी सेहो भऽ सकैत। भूमिका, सूचना-साझेदारी आ अन्तिम जवाबदेही पहिनेसँ स्पष्ट हो।
संकट स्थायी केंद्रीकरणक बहाना नहि बनय।
अध्याय-निष्कर्ष
बहुकेन्द्रिक लोकतन्त्रक सूत्र अछि-सत्ता जतय आवश्यक, ओतय; जतेक आवश्यक, ततेक; आ प्रत्येक
स्तरपर अधिकार, पारदर्शिता आ उत्तरदायित्व। लोकतन्त्र केवल शासनक रूप नहि, सत्ता-वितरणक नैतिक
अनुशासन अछि।
अध्याय-ग्रन्थसूचौ
Alexis de Tocqueville — Democracy in America.
John Stuart Mill — Considerations on Representative Government.