इतिहास विजेताक दस्तावेज मात्र नहि। मुदा “हाशियाक कथा” मात्र कहि देबासँ कोनो कथा सत्य सेहो नहि भऽ जाइत अछि। समानान्तर इतिहास-दृष्टिक उद्देश्य मुख्य कथाकें उलटि एकटा नव मिथक बनायब नहि; स्रोतक्षेत्र विस्तृत करब, मौन चिन्हब, आ सभ दाबीपर समान आलोचनात्मक कसौटी लागू करब अछि। 70.1 अभिलेखक असमानता राज्य, दरबार, संस्था आ शिक्षित वर्ग लिखित अभिलेख अधिक stead अछि। गरीब, स्त्री, श्रमिक, ग्रामीण समुदाय, क्षेत्रीय भाषा आ मौखिक परम्पराक अनुभव कम लिखित रहि सकैत अछि। एहि असमानता कारण उपलब्ध स्रोत स्वयं सामाजिक शक्ति प्रतिबिम्बित करैत अछि। 70.2 मौन सेहो प्रश्‍न अछि कोनो समूह अभिलेखमे कम किएक अछि? दस्तावेज नष्ट भेल? लिखबाक साधन नहि छल? संस्था ओकर अनुभव महत्त्वपूर्ण नहि मानलक? समानान्तर इतिहास मौनकें तथ्य न मानि प्रश्‍न मानेत अछि। मौनक कारण खोजल जाए, रिक्त स्थान कल्पनासँ नहि भरल जाए। 70.3 स्रोत-विस्तार राजकीय अभिलेखक संग निजी पत्र, स्थानीय दस्तावेज, मौखिक इतिहास, गीत, पञ्जी, पुरातात्त्विक वस्तु, नक्शा, समाचारपत्र, न्यायालयी अभिलेख, आर्थिक आँकड़ा, स्त्रीक घरेलू लेखन, क्षेत्रीय भाषा साहित्य सभ उपयोगी हो सकैत अछि। मुदा प्रत्येक स्रोतक प्रकृति, तिथि, उद्देश्य, प्रसारण आ सीमा स्पष्ट कएल जाए। 70.4 केन्द्र आ हाशिया पर समान कसौटी आधिकारिक स्रोत सत्ता-प्रभावित भऽ सकैत अछि; लोकस्मृति सेहो रुपान्तरित हो सकैत अछि। राजकीय दस्तावेज स्वतः सत्य नहि; मौखिक कथा स्वतः सत्य नहि। समानान्तर इतिहासक नैतिकता अछि--अपन प्रिय कथाक लेल नरम प्रमाण-कसौटी नहि। 70.5 बहुकारणीय इतिहास इतिहासकें केवल राजा, केवल वर्ग, केवल धर्म, केवल जाति, केवल भाषा वा केवल अर्थव्यवस्था सँ समझब अधूरा हो सकैत अछि। अनेक स्तरक कारण परस्पर क्रिया Het अछि। समानान्तर इतिहास-दृष्टि एकरेखीय नियतिवादक स्थानपर प्रमाणानुसार बहुकारणीय व्याख्या स्वीकारैत अछि। 70.6 मिथिला आ क्षेत्रीय इतिहास क्षेत्रीय इतिहासक उद्देश्य राष्ट्रीय इतिहाससँ अलग मिथकीय गौरव बनायब नहि। मिथिलाक स्थानीय स्रोत, भाषा, पञ्जी, साहित्य, न्याय-परम्परा, लोकस्मृति आ सीमा-पार नेपाल-भारत सन्दर्भ व्यापक इतिहासकें समृद्ध करि सकैत अछि। मुदा प्रत्येक दाबी तिथि, स्रोत आ तुलनात्मक प्रमाण माँगत। क्षेत्रीय आत्मसम्मान इतिहासलेखनक प्रेरणा भऽ सकैत अछि; प्रमाणक विकल्प नहि। 70.7 अनिश्चितताक भाषा इतिहासकारक ईमानदारी निष्कर्षक स्तर स्पष्ट करबमे अछि। मजबूत प्रमाण हो तँ स्पष्ट कहू; आंशिक हो तेँ सम्भावना; स्रोत-विरोध हो तँ विवादित; प्रमाण नहि हो तँ अज्ञात। उपलब्ध प्रमाणसँ बाहर निष्कर्षकें “तथ्य” नहि, “सम्भावना” कहू। 70.8 पूर्वपक्षः समानान्तर इतिहास वस्तुनिष्ठता नष्ट करत उत्तरपक्षः समानान्तरता प्रमाणक्षेत्र विस्तृत करैत अछि जँ नूतन स्रोत जोड़लासँ पुरान निष्कर्ष बदलैत अछि, ई वस्तुनिष्ठताक पराजय नहि; ओकर सुधार अछि। वस्तुनिष्ठता एकटा “दृष्टिहीन” स्थान नहि, बल्कि विविध स्रोत, स्पष्ट पद्धति, आलोचनात्मक परीक्षण आ संशोधनक उपलब्धता अछि। 70.14 अवधिक चयन आ इतिहासक अर्थ इतिहास कखन सँ कखन धरि बाँटल जाए से निष्कर्ष प्रभावित करैत अछि। राजवंशक परिवर्तन, आर्थिक रूपान्तरण वा भाषिक आन्दोलनक अवधि अलग हो सकैत। सुविधाजनक शताब्दी वास्तविक प्रक्रिया काटि सकैत अछि। अवधि-निर्धारणक कारण स्पष्ट हो। सीमा पार निरन्तरता आ टूटन दुनू देखल जाए। स्थानीय समय राष्ट्रीय काल-विभाजनसँ मेल नहि खा सकैत। एकहि घटनाक अनेक वैध कालक्रम सम्भव, मुदा मनमाना नहि। स्रोत आ विश्‍श्लेषणक उद्देश्य आधार देत। 70.15 मिथिलाक बौद्धिक भूगोल बौद्धिक इतिहास केवल जन्मस्थानक सूची नहि। शिक्षा-केंद्र, गुरु-शिष्य सम्बन्ध, पाण्डुलिपि-संचरण, राजाश्रय, बहस आ प्रवासन ज्ञानक भूगोल बनबैत अछि। ककरा “मिथिलाक दार्शनिक? कहल जाए--जन्म, कार्य, परम्परा वा प्रभाव? कसौटी कृतिविशेष अनुसार स्पष्ट हो; गौरव बढ़ेबाक लेल सीमा मनमाना नहि। मिथिला बाहरी संवादसँ बनल अछि। विचारक आवागमन क्षेत्रीय विशिष्टता नष्ट नहि, ओकर ऐतिहासिक रूप समझबैत अछि। 70.16 डिजिटल इतिहासक अवसर आ संकट डिजिटल प्रतिलिपि दूरस्थ स्रोत जोड़ेत, खोज सहज करैत आ नूतन तुलना सम्भव बनबैत अछि। मुदा गलत पाठ-पहिचान, अधूरा मेटाडेटा आ प्रतिलिपिक पुनरावृत्ति झूठी निश्चितता दे सकैत अछि। डिजिटल छवि मूल वस्तुक कागज, स्याही, क्रम आ हाशिया पूर्ण नहि पकड़ैत। महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष लेल मूल वा उच्च-गुणवत्ता प्रमाण जाँचल जाए। डेटाबेसक चयन स्वयं अभिलेख-राजनीति। कोन संग्रह डिजिटीकृत, कोन खोजयोग्य, आ ककर अधिकार ई इतिहासलेखनक नूतन प्रश्‍न। 70.17 पूर्वपक्षः क्षेत्रीय इतिहास संकीर्ण अस्मिता बनबैत अछि क्षेत्रीय गौरव चयनात्मक कथा, बाहरीक अवमानना आ मिथकीय प्राचीनता उत्पन्न करि सकैत अछि। ई खतरा वास्तविक। मुदा केवल राष्ट्रीय केन्द्रक इतिहास सेहो संकीर्ण, कारण क्षेत्रीय योगदान आ हानि अदृश्य करैत अछि। समाधान क्षेत्रीय अध्ययन छोड़ब नहि, समान स्रोत-कसौटी आ अन्तरक्षेत्रीय सम्बन्ध जोड़ब। समानान्तर इतिहासक गौरव सत्य-सम्मत उपलब्धिमे हो, कल्पित श्रेष्ठतामे नहि। सीमा, ऋण, संघर्ष आ बहुलता स्वीकारब परिपक्व अस्मिता अछि। 70.9 स्रोतक असमान संरक्षण राजा, न्यायालय आ सम्पत्तिधारी समूह लिखित अभिलेख अधिक छोड़ैत; श्रमिक, स्त्री आ मौखिक समुदाय कम। बचल दस्तावेजक मात्रा ऐतिहासिक महत्त्वक निष्पक्ष माप नहि। इतिहासकार संरक्षणक संरचना लिखय। कम स्रोतवला समूहपर दाबी अधिक सावधान हो, मुदा मौन कारण अध्ययन रोकल नहि जाए। भौतिक संस्कृति, गीत आ स्थानीय अभिलेख जोड़ल जाए। 70.10 प्रतिहंऽ079क प्रमाण-दायित्व आधिकारिक इतिहासक आलोचना जरुरी, मुदा वैकल्पिक कथा केवल विरोधी होयबा कारण सत्य नहि। हाशियाक दाबी सेहो स्रोत, संगति आ प्रतिवादक कसौटी सहत। समान कसौटीक अर्थ समान स्रोत-मात्रा नहि। उपलब्धताक असमानता ध्यानमे राखि प्रमाणक प्रकार बदलि सकैत, ईमानदारी नहि। अनिश्चितता स्पष्ट लिखल जाए। 70.11 पैमाना बदलि देखब राष्ट्रक इतिहासमे जे घटना छोट, गाम वा परिवारक इतिहासमे निर्णायक भऽ सकैत। पैमाना बदलला सँ कारण आ अभिकर्ता बदलि देखाइत छथि। सूक्ष्म इतिहास व्यापक संरचना नकारैत नहि; विशिष्ट जीवनमे संरचना कोना काम करैत से देखबैत अछि। स्थानीय उदाहरणसँ सार्वभौम निष्कर्ष निकालैत समय तुलना चाही। 70.12 कालक्रम आ स्मृतिक समय अभिलेख तिथि क्रम दैत, स्मृति महत्त्व अनुसार समय सजबैत अछि। समुदाय किछु घटना बारम्बार वर्तमानमे आनेत, किछु विसरैत अछि। दुनू समय-बोध अलग प्रश्‍नक उत्तर दैत अछि। इतिहास कालक्रम सत्यापित करय, स्मृति घटना किएक जीवित अछि से बुझय। स्मृतिक तीव्रता तिथि वा विवरणक शुद्धताक प्रमाण नहि, सामाजिक अर्थक प्रमाण हो सकैत अछि। 70.13 समानान्तर आख्यानक विन्यास समानान्तर इतिहास एक मुख्य कथा संग सजावटी “हाशिया” पेटी नहि। केन्द्रक निर्णय आ स्थानीय परिणाम एकहि कारण-श्रृंखलामे जोडल जाए। अलग आवाज उद्धरण मात्र नहि, विश्लेषणक संरचना बदलय। अन्तिम आख्यान बहुकारणीय, स्रोत-स्तर स्पष्ट आ आत्मसमीक्षी हो। जे तथ्य असंगत अछि ओकरा छिपाओल नहि जाए। इतिहासक न्याय मनचाहा गौरव नहि, प्रमाणसहित जटिलता स्वीकारब अछि। अध्याय-निष्कर्ष समानान्तर इतिहास-दृष्टिक सूत्र अछि-_केन्द्र पढ़, हाशिया पढ़, मौन पढ़; मुदा सभ पर समान प्रमाण-कसौटी लागू करू। समानान्तरता कल्पना करबाक छूट नहि; अनदेखल प्रमाण खोजबाक जिम्मेवारी अछि। अध्याय-ग्रन्थसूचौ E. H. Carr — What Is History? Marc Bloch — The Historian’s Craft.