गजेन्द्र ठाकुर / छह स्रोत-संस्करण
बिज्जी : गोहि सभक बीच
गजेन्द्र ठाकुर · अपराध-कथा / उपन्यास · 510 PDF पृष्ठ
पोथी आ ओकर विषय
उपशीर्षक न्याय-दर्शनकेँ आधुनिक अपराध-गाथाक संग राखैत अछि। लेखकक टिप्पणी पात्र आ अपराध-घटनाकेँ काल्पनिक कहैत सामाजिक भय, आर्थिक जाल, डिजिटल ठगी आ अपराधक मानवीय परिणामक चर्चा करैत अछि। आरम्भमे भीजल माटि, थरथराइत दीप, हल्लुक निन्नवाली दादी आ बच्चाक लग सुतल माय घरेलू असुरक्षाकेँ मूर्त करैत छथि।
पढ़ल एक संवादमे लेनदेनक जानकारी आ वित्तीय जिम्मेदारीक प्रश्न उठैत अछि। अन्त नदीक किनार, जनावर आ मिझाइत घरेलू दीपक दृश्य दिस घुरैत अछि; शान्तिक बीच पहरा समाप्त नहि होइत अछि। ई अंश जिम्मेदारी आ निरन्तर सजगताक पाठ सुझबैत अछि। एकर आधारपर सम्पूर्ण कथानक वा वास्तविक व्यक्तिक सम्बन्धमे निष्कर्ष नहि निकालल गेल अछि।
स्रोत-संस्करण आ पाठक आधार
देल PDF: Bijji_Gohi_Sabhak_Beech_6x9_Hardback_Interior.pdf. संगमे देल Word फाइल सेहो देखल गेल: Bijji_Gohi_Sabhak_Beech_6x9_Hardback_Interior.docx.
सन्दर्भ: गजेन्द्र ठाकुर, बिज्जी : गोहि सभक बीच, विदेह, 2026 कॉपीराइट दर्ज देल संस्करण। एकर अर्थ प्रथम प्रकाशन नहि।
पाठक आधार: शीर्षक, कॉपीराइट, उपलब्ध विषय-सूची तथा बीच आ अन्तक चुनल अंश। Word पाठक जाँचयोग्य स्थान (दस्तावेजक क्रममे गैर-खाली अनुच्छेद, तालिकाक पाठ सहित): 1–18; 5553–5557; 11098–11105. निष्कर्षित अनुच्छेद: 11105.
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