Decoding the Panji of Mithila · Volume II · Chapter 37
विद्वान, गुरु-शिष्य, गोत्र-प्रवर, and बीजी पुरुष Records A. Abbreviation block from the Khand 1 index सँ - मूलक परिचायक
Chapter 37. विद्वान, गुरु-शिष्य, गोत्र-प्रवर, and बीजी पुरुष
Records
A. Abbreviation block from the Khand 1 index
सँ - मूलक परिचायक
दौहित्र दौ (द्दौ.) माइक (मायक) नाना मातृ मातामह
सदु.- सदुपाध्याय
म.म.उ.- महामहोपाध्याय
वैया.- वैयाकरण
वै .- वैदिक
ज्यो.- ज्योतिष शास्त्रक ज्ञाता
बीजी- अर्थात् कोनो मूलक प्रारम्भिक ज्ञात पुरुष
This block confirms that abbreviations such as सदु., म.म.उ., वैया., वै .,
ज्यो., and बीजी must remain in the index. They are decoded in
Chapters 10, 19, 31, and Appendices B and E.
B. यंत्री विद्वानक नामावली गुरु-शिष्यक क्रमानुसार
यंत्री विद्वानक नामावली गुरू शिष्यक क्रमानुसार
१. महामहोपाध्याय गोढि़ शर्म्मा; २. महामहोपाध्याय माधव शर्म्मा; ३. महामहोपाध्याय
अड़िया माधव शर्म्मा; ४. महामहोपाध्याय शंकर शर्म्मा; ५. महामहोपाध्याय यज्ञपति
शर्म्मा; ६. महामहोपाध्याय परशुराम शर्म्मा; ७. महामहोपाध्याय वामदेव शर्म्मा; ८.
महामहोपाध्याय पीताम्बर शर्म्मा विद्यानिधि; ९. महामहोपाध्याय गोखूलनाथ शर्म्मा
फनन्दह; १०. महामहोपाध्याय जगन्नाथ शर्म्मा फनन्दह; ११. महामहोपाध्याय वंशधर
शर्म्मा राजनपुरा दरिहरा; १२. महामहोपाध्याय रघुनाथ शर्म्मा फनन्दह विनिर्जित कर्ण ; १३.
महोपाध्याय दत्त प्र. विष्णु दत्त शर्मा परमानन्द पुरी
Decoding rule: this is an intellectual lineage list. It should be
linked to the Title and Occupation Index and should not be
reduced to ordinary genealogy.
Decoding the Panji of Mithila - Volume II
C. गोत्र-प्रवर युक्त मैथिल
गोत्र प्रवर युक्त मैथिल (त्रिप्रवर/पंचप्रवर)
पञ्जी प्रबन्ध पूर्व मध्य कालमे ब्राह्मण, कायस्थ आ क्षत्रिय वर्गक जाति शुद्धताक हेतु
निर्मित कएल गेल । कोनो ब्राह्मणक जाति शुद्धताक हेतु उतेढ़ जानब आवश्यक छल।उतेढ़
छल सात पुरुषक परिचय, जाहि हेतु एहि बत्तीस कु लक परिचय आवश्यक छल- पिता एवं
माताक पितामह एवं पितामही आ मातामह एवं मातामही के र पितामह एवं पितामही आ
माता एवं मातामही के र पिता। आ एहि बत्तीस पूर्वजसँ विवाहयोग्य व्यक्ति सातम पड़बाक
चाही।एहि क्रममे श्रोत्रिय,योग्य आ पञ्जीबद्ध श्रेणीक विभाजन गेल। जे पञ्जीबद्ध नहि
छलाह से जएबार भेलाह। उतेढ़मे श्रोत्रिय मातृपक्षमे पाँच पीढ़ी आ पितृपक्षमे सात पीढ़ी
त्यागि विवाह करै त छलाह।पञ्जीबद्ध लोकनि जिनका वंशज सेहो कहल जाइत अछि,मातृ
पक्षमे पाँच आ पितृ-पक्षमे छः पीढ़ी त्यागि कय विवाह करै त छलाह। सम्प्रति धर्मशास्त्रसँ
श्रोत्रिय-योग्य-पञ्जीबद्ध आ तथाकथित जएवार सभहिक हेतु एकहि व्यवस्था अछि, भिन्न
किछु नहि।२० प्रकारक गोत्र १६७ प्रकारक मूल आ अनेक प्रकारक मूलग्राममे ई सभ
विभक्त छल। पुनः कर्मकाण्डक आधार पर सामवेदी आ शुक्ल यजुर्वेदी ब्राह्मणक दू गोट
उर्ध्वाधर विभाजन क्रमशः छन्दोग्य आ वाजसनेय ब्राह्मणक रूपमे बनले रहल।२० गोट गोत्र
आ १६७ मूल ग्राममे मुख्य मूल ३४ टा निर्धारित कएल गेल। एहि १६७ मूलसँ सेहो ई सभ
विभिन्न क्षेत्र आ ग्राममे पसरलाह। परवर्ती कालमे फनन्दह मूलक खनाम शाखा ३५म
मूलक रूपमे तथाकथित उच्च वंशक मध्य परिगणित भेल।
२० गोट गोत्र निम्न प्रकारे अछि: १. शाण्डिल्य २. वत्स ३. सावर्ण ४. काश्यप ५. पराशर ६.
भारद्वाज ७. कात्यायन ८. गर्ग ९. कौशिक १०. अलाम्बुकाक्ष ११. कृ ष्णात्रेय १२. गौतम १३.
मौदगल्य १४. वशिष्ठ १५. कौण्डिन्य १६. उपमन्यु १७. कपिल १८. विष्णुवृद्धि १९. तण्डी आ
जातुकर्ण।
मुख्य ३५ (३४+ फनन्दह मूलक खनाम शाखा) मूल सेहो तीन श्रेणीमे विभक्त अछि।
अयान्त श्रेष्ठ- प्रथम श्रेणीमे १. खड़ौरय, २. खौआड़य, ३. बुधबाड़य, ४. मड़रय, ५. दरिहरय,
६. घुसौतय, ७. तिसौतय, ८. करमहय, ९. नरौनय, १०. वभनियामय, ११. हरिअम्मय, १२.
सरिसवय, १३. सोदरपुरिये।
द्वितीय श्रेणीमे १. गंगोलिवार, २. पवौलिवार, ३. कु जौलिवार, ४. अलेवार, ५. वहिड़वार, ६.
सकड़िवार, ७. पलिवार, ८. विसेवार, ९. फनेवार, १०. उचितवार, ११. पंडुलवार, १२.
कटैवार, १३. तिलैवार।
Decoding the Panji of Mithila - Volume II
मध्यम मूल- १. दिघवे , २. बेलौंचै , ३. एकहरे , ४. पंचोभे , ५. वलियासे , ६. जजिवाल, ७.
टकवाल, ८. पण्डुए।
प्रवर:मैथिल ब्राह्मणक मध्य २ वर्गक प्रवर परिवार होइत अछि- त्रिप्रवर आ पाँच प्रवर।
जाहि गोत्रक तीन गोट पूर्वज ऋगवेदक सूक्तिक रचना कएल से त्रिप्रवर आ जाहि गोत्रक
पाँच गोट पूर्वज लोकनि ऋगवेदक सूक्तक रचना कएल से पाँच प्रवर कहबैत छथि।
एहि प्रकारेँ गोत्रानुसारे प्रवर निम्न प्रकार भेल:-
त्रिप्रवर- १.शाण्डिल्य, २.काश्यप,३. पराशर, ४. भारद्वाज, ५. कात्यायन, ६. कौशिक, ७.
अलाम्बुकाक्ष, ८. कृ ष्णात्रेय, ९. गौतम, १०. मौदगल्य, ११. वशिष्ठ, १२. कौण्डिन्य, १३.
उपमन्यु, १४. कपिल, १५. विष्णुवृद्धि, १६. तण्डी।
पंचप्रवर- १. वत्स, २. सावर्ण, ३. गर्ग।
प्रवरक विस्तृत विवरण निम्न प्रकारेँ अछि-
१. शाण्डिल्य- शाण्डिल्य, असित आ देवल। २. वत्स-ओर्व, च्यवन,भार्गव,जामदगन्य आ
आप्लवान। ३. सावर्ण- ओर्व, च्यवन, भार्गव, जामदगन्य आ आप्लवान। ४. काश्यप-
काश्यप, अवत्सार आ नैघ्रूव। ५. पराशर-शक्ति, वशिष्ठ आ पराशर। ६. भारद्वाज-भारद्वाज,
आंगिरस आ बार्हस्पत्य। ७. कात्यायन-कात्यायन, विष्णु आ आंगिरस। ८. गर्ग-गार्ग्य, घृत,
वैशम्पायन, कौशिक आ माण्डव्याथर्वन। ९. कौशिक- कौशिक, अत्रि आ जमदग्नि. १०.
अलाम्बुकाक्ष-गर्ग, गौतम आ वशिष्ठ. ११. कृ ष्णात्रेय-कृ ष्णात्रेय, आप्ल्वान आ सारस्वत.
१२. गौतम-अंगिरा, वशिष्ठ आ बार्हस्पत. १३. मौदगल्य-मौदगल्य, आंगिरस आ बार्हस्पत्य.
१४. वशिष्ठ-वशिष्ठ,अत्रि आ सांकृ ति. १५. कौण्डिन्य-आस्तिक,कौशिक आ कौण्डिन्य. १६.
उपमन्यु-उपमन्यु, आंगिरस आ बार्हस्पत्य। १७. कपिल-शातातप, कौण्डिल्य आ कपिल.
१८. विष्णुवृद्धि-विष्णुवृद्धि, कौरपुच्छ आ त्रसदस्य १९. तण्डी-तण्डी, सांख्य आ अंगीरस
२०. जातुकर्ण- जातुकर्ण, आंगीरस आ भारद्वाज।
शाण्डिल्य-शाण्डिल्यासित देवालस्रय:३; वत्स-और्व्वच्यवन भार्गवजामदग्न्यआप्लवाना:५
सावर्ण-५
काश्यप-काश्या वत्सारनैकध्रुवा-३; पराशर-शक्ति वशिष्ठ पराशरा-३; कात्यायन-कात्यायन
विष्णु आङ् गिरस-३; भारद्वाज-भारद्वाजाआङ् गिरस वार्हस्यत्या-३; गौतम-वशिष्ठाङ् गिरो
वार्हस्पत्या-३; कौशिक-कौशिकात्रि जमदग्निय:-३; गार्ग-गार्ग घृत कौशिक माण्डव्यार्थव
वैशम्पायना-५; कृ ष्णात्रय-कृ ष्णामया प्लवान सारस्वता-३; विष्णु वृद्धि-विष्णु वृद्धि कौर
पुञ्ध्च त्रिसदस्या-३; वशिष्ठ-वशिष्ठात्रि सांकृ त्य-३; कौण्डिल्य-आस्तिक कौशिक
Decoding the Panji of Mithila - Volume II
कौण्डिल्या-३; जातुकर्ण-जातुकर्ण आङ् गिरस भारद्वाजा-३; मौद्गल्य-मोदगलाङ् गिरस
वार्हस्पत्या-३
गोत्र आ मूल:-
१. शाण्डिल्य- दिर्धोष(दिघवे ), सरिसब, महुआ, पर्वपल्ली (पवौली), खण्डबला, गंगोली,
यमुशाम, करिअन, मोहरी, सझुआल, मड़ार, पण्डोली, जजिवाल, दहिभत, तिलय, माहब,
सिम्मुआल, सिंहाश्रम, सोदरपुर, कड़रिया, अल्लारि, होइयार, तल्हनपुर, परिसरा, परसड़ा,
वीरनाम, उत्तमपुर, कोदरिया, छतिमन, वरे वा, मछे आल, गंगौर, भटोर, बुधौरा, ब्रह्मपुरा,
कोइआर, के रहिवार, गंगुआल, घोषियाम, छतौनी, भिगुआल, ननौती, तपनपुर।
२. वत्स- पल्ली(पाली), हरिअम्ब, तिसुरी, राउढ़, टकवाल, घुसौत, जजिवाल, पहद्दी,
जल्लकी(जालय), भन्दवाल, कोइयार, के रहिवार, ननौर, डढ़ार, करमहा, बुधवाल, मड़ार,
लाही, सौनी, सकौना, फनन्दह, मोहरी, वंठवाल, तिसउँ त, बरुआली, पण्डौली, बहेराढ़ी,
बरै वा, अलय, भण्डारिसमय, बभनियाम, उचति, तपनपुर, विठु आल, नरवाल, चित्रपल्ली,
जरहटिया,रतवाल, ब्रह्मपुरा, सरौनी।
३. काश्यप- ओइनि, खौआल, संकराढ़ी, जगति, दरिहरा, माण्डर, वलियास, पचाउट,
कटाइ, सतलखा, पण्डुआ, मालिछ, मेरन्दी, भदुआल, पकलिया, बुधवाल, पिभूया, मौरी,
भूतहरी, छादन, विस्फी, थरिया, दोस्ती, भरे हा, कु सुम्बाल, नरवाल, लगुरदह।
४. सावर्ण- सोन्दपुर, पनिचोभ, बरे बा, नन्दोर, मेरन्दी।
५. पराशर- नरौन, सुरगन, सकु री, सुइरी, सम्मूआल, पिहवाल, नदाम, महेशारि, सकरहोन,
सोइनि, तिलय, बरे बा।
६. भारद्वाज- एकहरा, विल्वपञ्चक (बेलोँच), देयाम, कलिगाम, भूतहरी, गोढ़ार, गोधूलि।
७. कात्यायन- कु जौली, ननौती, जल्लकी, वतिगाम।
८. अलाम्बुकाक्ष- बसाम,कटाइ, ब्रह्मपुरा।
९. गर्ग- बसहा, बसाम, ब्रह्मपुरा, सुरौर, वुधौर, उरौर।
१०. कौशिक- निखूति
११. कृ ष्नात्रेय- लोहना, बुसवन, पोदौनी।
१२. मौद्गल्य- रतवाल, मालिछ, दिर्घौष, कपिञ्जल, जल्लकी।
१३. गौतम- ब्रह्मपुरा, उं तिमपुर, कोइयार।
१४. वशिष्ठ- कोथुआ।
१५. कौंडिल्य- एकहरा, परौन।
Decoding the Panji of Mithila - Volume II
१६. जातुकर्ण- देवहार।
१७. तण्डि- कटाई।
१८. विष्णुवृद्धि- वुसवन।
१९. उपमन्यु।
Decoding rule: this theoretical block explains why Panji genealogy
mattered for marriage. It gives उतढ़, पितृ-पक्ष, मातृ-पक्ष, २० गोत्र, १६७ मूल,
the ३४/३५ मुख्य मूल, and त्रिप्रवर/पंचप्रवर classification. It must be cross-
linked to Chapters 12, 13, 14, 21, 22, Appendix C, and Appendix G.
D. बीजी पुरुषक नाम ओ पत्रांक
पाँ देवानन्द प्रसिद्ध छोटी झा पँञ्जी सँ मूल क्रमे
बीजी पुरूषक नाम ओ पत्रांक
बीजी पुरुष (विभिन्न मूलक)
गंगौलीसँ वीजी गंगाधर ०१/०३
खण्डबला ग्रामोपार्जक साँई प्र. संकर्षण ०१/०४
एकमा वलियास वीजी धरणीधर ०१//०२
वरुआल मराढ़सँ वीजी दिवाकर ०१//०४
मंगरौनी माण्डरसँ वीजी त्रिनयनभट्ट ०१//०७
वाढ़ अलयसँ वीजी पंडित गंगाधर ०२/०७
मताओन दरिहरा सँ वीजी श्रीकर ०२//०१
सोनकरिआम करमहासँ वीजी वंशधर ०२//०५
पताउना खुआलसँ वीजी प्रजापति ०२//०९
महथौर अलयसँ वीजी वादन ०३/०७
शक्तिपालपुर नरउनसँ वीजी मनोधर ०३/०८
करुआरि सकराढ़ीसँ वीजी हरदत्त ०३/०९
सरिसवसँ वीजी रत्नपाणि ०३//०३
टकवालसँ वीजी हरिपाणि ०३//०७
अथ डोभेकरणीग्रामाय कामदेव बीजी (एकहरा वेलउँ च) ०४/०३
विल्वपंचक (वेलउँ च वीजी) राम ०४/०४
Decoding the Panji of Mithila - Volume II
तेरहोत सकराढ़ीसँ वीजी गंगादित्य ०४/०८
कु जौलीसँ वीजी दान्तिय ०४//०१
रे कोरा सकराढ़ीसँ वीजी कपिलानन्द ०४//०७
पालीसँ वीजी कपिलदेव ०४//०९
अवहिवा मण्डारमसँ वीजी कु सुमादित्य ०५/०८
कु सुमादित्य सुत गंगाधर फनन्दहवासी ०५//०१
सुपरानी गंगोली वीजी म.म.सुपट ०५//०७
उचति भण्डारिसम सँ वीजी महिपाणि ०६/०१
वभनियाम सँ वीजी हरिशर्म्म ०६/०४
मेहवाल सँ वीजी माधव ०६/०७
गढ़ विस्फीसँ वीजी विष्णुशर्म्मा ०६//०२
पवौलीसँ वीजी वाचस्पति ०७/०२
जलक्योपट्टराज वासर वीजी दामोदर (जालय) ०७/०४
मन्दवाल वीजी माधव ०७/०४
गढ़निखूतिसँ वीजी त्रिपाठीरूद्र ०७/०८; तल्हनपुरसँ वीजी विष्णु शर्म्मा ०७/०८
राढ यमुगाम सँ वीजी श्रीकर ०७//०३
दरिहरा सँ वीजी कमलपाणि ०७/०४; गंगोर सँ वीजी शाश्वत ०७//०६;
नरउनसँ वीजी महिधर ०७//०९; जजिवालसँ वीजी पण्डपाणि ०८/०२; मेरन्दी सँ
वीजी जनार्दन ०८/०५; तिसउँ त सँ वीजी विश्वम्भर ०८/०९; करहिया पनिचोभ सँ
वीजी चण्डे श्वर ०८//०४; पनिचोभसँ वीजी मधुमन ०८//०७; तलिस्मा पनिचोभ
घूर्जटि ०८//०८; मानिछसँ वीजी वरसेश्वर ९९/०२; टकबालसँ वीजी हरिकं ठ
०९/०४; जगतिसँ वीजी जयकर ०९/०९; के उँ टी राउढ़ सँ वीजी मसवास वासू
०९//०१; म्चान्दो वलियाससँ वीजी पुरूषोत्तम १०/०६; बुधवालसँ वीजी वासुदेव
१०//०९; त्रिलाढ़ी घुसौत सँ वीजी नरसिंह ११/०४; रामानन्द टकवाली वीजी पाँखू
११//०१; पद्मपुर पकलिया वीजी वासुदेव १२/०५
जेजिवाल सँ वीजी अखुरी-थकमाने १२/०५; हरिअम्वसँ वीजी झाऊँ
१२/०९
सुइरीसॅ वीजी शेखर १२//०१; जल्लधी जालयसँ वीज वान्धव १२//०८
Decoding the Panji of Mithila - Volume II
गाउल करमहा सँ वीजी मुरारी १३//०३; सिंहाश्रमसँ वीजी म.म.उ. हलायुध
१५/०७; चोरवालसँ कराढ़ी वीजी सिद्धे श्वर १६/०२; घुसौतसॅ वीजी वासुदेव
१९//१०; दिनाही सरिसवसं वीजी जनार्दन १७/०३; कोइयार सँ वीजी शूलपाणि
१७/०८; चउँ टी टकवालसँ वीजी रत्नेश्वर १७//०१
Decoding rule: बीजी means the earliest known person of a मूल. Each
बीजी row must be entered as a person occurrence, linked to a मूल,
village form, source number, and confidence label. The full block
continues in the source and is covered by the coverage checklist
below.Source structure and verification apparatus
Editorial source apparatus. This apparatus is descriptive, not interpretive. It records the source-controlled structure used to verify that this page corresponds to formal Chapter 37 of Decoding the Panji of Mithila — Volume II. The chapter text above is preserved from PDF pp. 489-495; formal Chapter 37 in the commit-pinned authoritative source. It is not merged with a neighboring chapter, appendix, annexure, or independent front/back-matter unit. The internal headings below come from the repository’s source-heading inventory and are retained as navigational and audit evidence; showing them here does not turn those headings into separate publications or add claims that are absent from the source.
Internal source headings
- A. Abbreviation block from the Khand 1 index
- B. यंत्री विद्वानक नामावली गुरु-शिष्यक क्रमानुसार
- C. गोत्र-प्रवर युक्त मैथिल
- D. बीजी पुरुषक नाम ओ पत्रांक
Source-text concordance
Records · Abbreviation · block · Khand · index · confirms · abbreviations · must · remain · decoded · Chapters · Appendices · Decoding · rule · intellectual · lineage · list · linked · Title · Occupation · reduced · ordinary · genealogy · य-पञ · पसरल · परवर · उपमन · मड़रय · करमहय · एकहर · रवरक · स-ओर · मदगन · शर-शक · यन-क · जमदग · ष-गर · तम-अ · ठ-वश · य-आस · रसदस · स-और · यप-क · रस-३ · तम-वश · रय-क · परसड़ · तपनप · करमह · जरहट · सतलख · सकरह · theoretical · explains · mattered · marriage · gives · classification · cross · Appendix · नयनभट · अलयस · नरउनस · हरदत · कमलप · जयकर · means · earliest · known · person · entered · occurrence · village · form · number · confidence · label · full · continues · covered
Boundary verification. In the formal sequence this chapter follows Volume II Chapter 36, “लौकित, चौगोला, श्रेणी, and पत्रांक Records” and precedes Volume II Chapter 38, “Khand 1 Gramaarambh Coverage Checklist”. The chapter extractor begins at the verified formal Chapter 37 marker and stops at the next verified formal chapter marker; for a final chapter it stops before recognized book-level back matter. The concordance above is generated only from distinct terms already present in this chapter’s preserved source text. It is provided for discovery, comparison, and audit, not as an automated judgment about persons, lineages, status, kinship, marriage eligibility, or historical truth.
Illustrated research apparatus
Mithila · Vajji · Anga
Chapter-specific source notes
- Primary chapter witness. Gajendra Thakur, Decoding the Panji of Mithila — Volume II, formal Chapter 37, PDF pp. 489-495; formal Chapter 37. The HTML transcription is generated from the commit-pinned source PDF and retains the chapter boundary recorded in this edition.
- Internal structure. The repository source-heading inventory records 4 subordinate headings for this chapter: “A. Abbreviation block from the Khand 1 index”; “B. यंत्री विद्वानक नामावली गुरु-शिष्यक क्रमानुसार”; “C. गोत्र-प्रवर युक्त मैथिल”; “D. बीजी पुरुषक नाम ओ पत्रांक”.
- Digital editorial method. The page keeps the preserved source text distinct from generated navigational, concordance, visual, and provenance apparatus. The synthetic reconstruction is explanatory only and is not evidence for an individual lineage or a determination of social or marital status.