समालोचना-अध्याय · G22
मैथिली बाल-कविताक धारा
Professor Premshankar Singh
विस्तृत विवरण
प्रो. प्रेमशंकर सिंह बाल-कविताकेँ जिज्ञासा, पारिवारिक स्नेह, विद्यालय, छुट्टी, खेल आ बचपनक असमान परिस्थितिक माध्यमसँ देखैत छथि। हुनक उदाहरण आनन्दक संग भूख आ बाल-श्रमकेँ सेहो रखैत अछि। ओ एहन लचीला शब्दावलीकेँ पसिन्न करैत छथि जे रोजमर्रा अन्तरराष्ट्रीय शब्द स्वीकार करैत हुए ग्रामीण मैथिली अभिव्यक्तिकेँ नहि हरबैत। बाल-मनोविज्ञानक हुनक कथन चुनल कवितापर साहित्यिक व्याख्या अछि, बच्चासभपर कएल अनुभवजन्य अध्ययन नहि।
ई पोथीक गजेन्द्र ठाकुर, विदेह आ व्यापक साहित्यिक-डिजिटल परियोजना धाराक हस्ताक्षरित योगदान अछि। एहि पृष्ठपर योगदानकर्ताक श्रेय, सामान्यीकृत अध्याय-पहिचान, अंग्रेजी संस्करणक पृष्ठ-संकेत आ मैथिली/अंग्रेजी दुनू रिपॉजिटरी संस्करण सुरक्षित अछि, जाहिसँ आलोचनात्मक तर्ककेँ अलग उद्धरण नहि, पोथीक प्रसंगमे पढ़ल जा सकय।
स्रोत-टिप्पणी. अन्तक श्रेय अनुसार ई विदेह अंक 70, 15 नवम्बर 2010 सँ पुनर्मुद्रित अछि।
स्रोत-संस्करण आ प्रमाण
रिपॉजिटरी स्रोत: PREETI_KARAN_SETU_BANHAL.pdf ↗
मैथिली PDF क पृष्ठ-संख्या एतय अनुमानसँ नहि देल गेल अछि। अध्याय-पहिचान युग्मित अंग्रेजी संस्करणक सत्यापित लेख-अभिलेखसँ मिलाओल अछि; अंग्रेजी संस्करणमे एहि लेखक locator pp. 412–418 अछि।
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युग्मित अंग्रेजी संस्करण: ENGLISH_PREETI_KARAN_SETU_BANHAL.pdf ↗