समालोचना-अध्याय · G23
सामाजिक असमानताक तह धरि पहुँचैत कथा
Abha Jha
विस्तृत विवरण
आभा झा ‘पर्वत ऊपर भमरा जे सूतल’केँ सम्पत्ति, विधवापन, जाति, प्रवास, दिव्यांगता आ संस्थागत अन्यायक दृष्टिसँ पढ़ैत छथि। प्रेमचन्दसँ तुलना आ अलग कथाक चर्चा सामाजिक सम्बन्ध उजागर करबाक भिन्न रूप चिन्हित करैत अछि। बौद्धिक विस्तारक प्रशंसाक संग हुनक आपत्ति सेहो अछि: घन तर्क आ शास्त्रीय सन्दर्भ कखनो कथात्मक रुचि आ प्रवाह बाधित करैत अछि। लेखकक अंग्रेजी स्व-अनुवादकेँ ओ मैथिली पाठकसँ बाहर पहुँचेबाक प्रयास मानैत छथि, मुदा एहि पहुँचकेँ रचनाक एकमात्र कसौटी नहि बनबैत।
ई पोथीक गजेन्द्र ठाकुर, विदेह आ व्यापक साहित्यिक-डिजिटल परियोजना धाराक हस्ताक्षरित योगदान अछि। एहि पृष्ठपर योगदानकर्ताक श्रेय, सामान्यीकृत अध्याय-पहिचान, अंग्रेजी संस्करणक पृष्ठ-संकेत आ मैथिली/अंग्रेजी दुनू रिपॉजिटरी संस्करण सुरक्षित अछि, जाहिसँ आलोचनात्मक तर्ककेँ अलग उद्धरण नहि, पोथीक प्रसंगमे पढ़ल जा सकय।
स्रोत-संस्करण आ प्रमाण
रिपॉजिटरी स्रोत: PREETI_KARAN_SETU_BANHAL.pdf ↗
मैथिली PDF क पृष्ठ-संख्या एतय अनुमानसँ नहि देल गेल अछि। अध्याय-पहिचान युग्मित अंग्रेजी संस्करणक सत्यापित लेख-अभिलेखसँ मिलाओल अछि; अंग्रेजी संस्करणमे एहि लेखक locator pp. 418–430 अछि।
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युग्मित अंग्रेजी संस्करण: ENGLISH_PREETI_KARAN_SETU_BANHAL.pdf ↗