समालोचना-अध्याय · P02
गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा
Prof. Veena Thakur
विस्तृत विवरण
प्रो. वीणा ठाकुर शब्द, रेखा आ रंगक परस्पर काजकेँ मिथिलाक लोक-संस्कृति संचारित करबाक माध्यम मानैत छथि। संग्रहक नायक आ परम्परासभक चर्चा करैत ओ तर्क दैत छथि जे चित्र-आख्यान मिथिला-चित्रकलाकेँ परिचित संस्कार-केंद्रित विषयसँ आगाँ लऽ जाइत अछि। हुनक विवेचन कलात्मक परिवर्तनकेँ सांस्कृतिक निरन्तरतासँ जोड़ैत आ लोककलाक संरक्षण तथा नवीकरणमे स्त्रीक भूमिकापर बल दैत अछि।
ई पोथीक प्रीति ठाकुर आ हुनक सर्जनात्मक/अभिलेखीय काज धाराक हस्ताक्षरित योगदान अछि। एहि पृष्ठपर योगदानकर्ताक श्रेय, सामान्यीकृत अध्याय-पहिचान, अंग्रेजी संस्करणक पृष्ठ-संकेत आ मैथिली/अंग्रेजी दुनू रिपॉजिटरी संस्करण सुरक्षित अछि, जाहिसँ आलोचनात्मक तर्ककेँ अलग उद्धरण नहि, पोथीक प्रसंगमे पढ़ल जा सकय।
स्रोत-संस्करण आ प्रमाण
रिपॉजिटरी स्रोत: PREETI_KARAN_SETU_BANHAL.pdf ↗
मैथिली PDF क पृष्ठ-संख्या एतय अनुमानसँ नहि देल गेल अछि। अध्याय-पहिचान युग्मित अंग्रेजी संस्करणक सत्यापित लेख-अभिलेखसँ मिलाओल अछि; अंग्रेजी संस्करणमे एहि लेखक locator pp. 83–89 अछि।
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युग्मित अंग्रेजी संस्करण: ENGLISH_PREETI_KARAN_SETU_BANHAL.pdf ↗